झूठ छुपाने के बदले में नौकरानी की चुदाई की कहानी

ही फ्रेंड्स मेरा नाम वेद है, और मैं देल्ही से हू. मैं 20 साल का हॅंडसम लड़का हू, और कॉलेज में पढ़ता हू. मेरी हाइट 5’9″ है, और बॉडी अची बनी हुई है. लंड मेरा 7 इंच का है. इतना सब कुछ होने के बाद भी मुझे चुदाई करने को नही मिलती.

इसका रीज़न ये है की मेरे पापा कंजूस है, और बड़ी कम पॉकेट मनी देते है. उतने पैसों से तो मेरा खुद का खर्चा मुश्किल से निकलता है, तो मैं लड़कियों को कैसे खिलौ-पिलौँगा? लेकिन फिर मुझे इसका सल्यूशन मिल गया. चलिए बताता हू की क्या हुआ और कैसे हुआ.

मेरे घर में एक कांवली है, जिसको उमर 25 साल है. वो पिछले 5 सालों से हमारे घर में काम कर रही है. उसका नाम मनीषा है. पहले-पहले मेरे मॅन में उसके लिए कोई ऐसे ख़याल नही थे, लेकिन जवानी चढ़ते हुए मैं उसके जिस्म के बारे में सोच कर मूठ मारने लगा.

मनीषा 5’5″ हाइट वाली एक ठीक-ताक गोरी लड़की है. उसके चूचे 36″ के है, कमर 30″ की, और गांद भी 36″ की है. उसको पोछा लगते देख कर, खाना बनाते देख कर, पसीने से लता-पाठ हुए देख कर मेरे मॅन में उसके लिए हवस पैदा हो गयी.

लेकिन मुझे ये नही पता था, की मैं अपने अंदर भारी हुई इस हवस को उस पर कैसे निकाली. फिर कुछ ऐसा हुआ, की मनीषा को खुद बा खुद मेरे साथ सेक्स करना पड़ा.

एक दिन सुबा मैं कॉलेज जाने से पहले नाश्ता कर रहा था. तभी मैने मनीषा को मम्मी से कुछ बात करते देखा.

मनीषा: दीदी आज मुझे छुट्टी चाहिए.

मम्मी: क्यूँ क्या हो गया.

मनीषा: मेरी मा बीमार है, तो उनको डॉक्टर के पास लेके जाना है.

मम्मी: ओहो, ज़्यादा बीमार तो नही है?

मनीषा: नही बस तोड़ा बुखार है.

मम्मी: चलो कोई बात नही, तुम जाओ.

मम्मी ने उसको जाने दिया, और जाने से पहले उसको 2000 रुपय भी दिए, ताकि वो अपनी मा का इलाज ठीक से करवा सके. मनीषा पैसे देख कर खुश हो गयी, और चली गयी. फिर मैं भी कॉलेज चला गया.

कॉलेज में कुछ ख़ास नही था, तो मैं और मेरा फ्रेंड जल्दी ही निकल आए. फिर मेरे फ्रेंड ने मुझे मोविए देखने जाने के लिए कहा. मैने घर पर मम्मी को फोन किया, और बोला की हम मोविए देखने जेया रहे थे. मम्मी ने भी मुझे अलो कर दिया.

फिर मैं अपने फ्रेंड के साथ मोविए देखने चले गये. हम दोनो ने टिकेट ली, और अपनी सीट्स पर जाके बैठे. मोविए स्टार्ट हुई. तभी मेरा ध्यान अगली रो में एक सीट पर गया. वाहा मनीषा बैठी हुई थी. पहले मुझे लगा मुझे देखने में ग़लती लगी थी, लेकिन जब उसने मूह मेरी साइड किया, तो वो मनीषा ही थी.

मनीषा ने टाइट जीन्स और त-शर्ट पहनी हुई थी, और उसके साथ एक लड़का भी था. अब मैं मोविए छ्चोढ़ कर उन दोनो को देखने लग गया. वो दोनो चुम्मा-छाती कर रहे थे. वो लड़का उसके बूब्स भी दबा रहा था, और मनीषा इस सब का पूरा मज़ा ले रही थी.

मेरा उसको देख कर लंड खड़ा हो रहा था, और अब मैं उसको छोड़ने का तरीका समझ गया था. फिर इंटर्वल हुआ, और वो दोनो उठ कर बाहर चले गये. टाइट जीन्स में मनीषा की गांद मस्त मटक रही थी. बाहर जाके वो कॅंटीन में खड़े ही हुए थे की मैने मनीषा को आवाज़ डेडी.

मैं: मोविए अची है ना मनीषा?

मनीषा ने मुझे देखा, और मुझे देख कर उसका रंग उडद गया. उसके बाय्फ्रेंड का ध्यान दूसरी तरफ था, तो उसने मुझे कहा-

मनीषा: भैया घर पर मत बताना प्लीज़, मेडम का मुझ पर से विश्वास टूट जाएगा.

मैं: घर पर आके बात करेंगे. अभी तुम अपने बाय्फ्रेंड के साथ एंजाय करो.

फिर इंटर्वल के बाद वो दोनो वापस वही बैठ गये. मनीषा इधर-उधर चेक करने लगी की मैं कहा बैठा था. तभी उसने मुझे देख लिया. फिर उसका बाय्फ्रेंड ही उसको किस कर रहा था, और मुझे उसके चेहरे पर घबराहट दिखाई दे रही थी.

अगले दिन मनीषा जब मेरे कमरे में झाड़ू मारने आई, तो मैं सोया हुआ था. उसने मुझे आवाज़ लगाई, और मुझसे माफी माँगने लगी.

मैं: देखो मम्मी को तो बताना ही पड़ेगा.

मनीषा: भैया प्लीज़, ऐसा मत करो. आप जो कहोगे मैं करूँगी, लेकिन दीदी को मत बताओ.

मैने उसी वक़्त अपना लंड पाजामे से बाहर निकाला, और उसको चूसने को बोला.

वो बोली: नही भैया, मैं ये नही कर सकती. मैं एक शरीफ लकड़ी हू.

मैं: देख अपने बाय्फ्रेंड के साथ भी तो ये सब करेगी ही. मेरे साथ पहले से प्राक्टिज़ कर ले. नही करना तो तेरी मर्ज़ी. मैं मम्मी को बता देता हू सब कुछ.

मैं जैसे ही उठने लगा, उसने मेरा लंड पकड़ कर मूह में डाल लिया, और चूसना शुरू कर दिया. आहह, क्या गरम एहसास था. मैने उसके सर पे हाथ रखा, और उसके मूह में धक्के देने लग गया. उसकी साँस रुक रही थी, लेकिन मुझे मज़ा आ रहा था.

कुछ देर लंड चुसवाने के बाद मैने उसको अपनी बाहों में लिया, और खड़े-खड़े उसके होंठ चूसने लगा. उसने पाजामी सूट पहना था. मैने उसके शर्ट की ज़िप पीछे से खोली, और उसको नीचे किया. इससे उसके शोल्डर्स बाहर आ गये, और उसका शर्ट बूब्स पे जाके फ़ासस गया.

फिर मैं उसके शोल्डर्स पे किस करने लग गया, और उसकी क्लीवेज चाटने लगा. मनीषा गरम हो रही थी. फिर मैने उसका शर्ट निकाल दिया, और उसको बेड पर धक्का दिया. मैने बाहर जाके चेक किया, तो सब सो रहे थे.

फिर मैने अंदर आके मनीषा की ब्रा उतरी, और उसके बूब्स चूसने लगा. कुछ देर वो माना करती रही, लेकिन फिर उसको मज़ा आने लगा. वो मेरे सर को अपनी ब्रेस्ट में दबाने लग गयी. मैं किस करते हुए उसकी नाभि तक आया, और उसकी पाजामी और पनटी उतार दी.

उसकी छूट पर काफ़ी बाल थे, इसलिए मैने छूट को छाता नही, बल्कि हाथ से सहलाने लगा. उसकी छूट पानी-पानी हो रही थी. फिर मैने अपने कपड़े उतारे. मेरा लंड इतना सख़्त था जैसे अंडरवेर फाड़ कर बाहर आ जाएगा. मैने अपना अंडरवेर उतरा, और मेरा लंड देख कर वो घबरा गयी.

फिर मैने उसकी छूट पर लंड सेट किया, और पुश करने लगा. वो कुवारि तो नही थी, लेकिन एक-दो बार ही चूड़ी थी, जिससे उसकी छूट काफ़ी टाइट थी. जल्दी ही लंड उसकी गीली छूट में पूरा समा गया, और मैने धक्के देने शुरू कर दिए.

बहुत मज़ा आ रहा था, और मनीषा की कामुकता भारी आहें माहौल को और गरम कर रही थी. कुछ देर में मैने अपने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी, और उसकी आवाज़ अपने होंठो से उसका मूह बंद करके बंद कर दी. उसको दर्द होने लगा था, और वो अपने नाखूनओ से मेरी पीठ नोच रही थी.

मैने भी उसके बूब्स और होंठ लाल कर दिए थे. 15 मिनिट की घमासान चुदाई के बाद मैने उसके पेट पर अपना माल निकाल दिया. उस दिन के बाद से मैं जब जी चाहे उसको छोड़ता हू, और वो भी माना नही करती.

थे एंड.

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