जेठ ने दिया भाभी को चुदाई का चरमसुख

मेरी चुदाई की कहानी अब आयेज-

मेरी छूट पूरी तरह खुल गयी थी, और उनका गरम, मोटा लंड मेरी हर नस को छ्छूता हुआ गहराई तक पहुँच गया. दर्द के साथ एक अजीब सा नशा मेरे अंदर फैलने लगा. वो कुछ पल रुके, शायद मुझे इस नये भारण का आदि बनाने के लिए.

उनका लंड मेरी छूट की गहराइयों में बिल्कुल फिट हो गया था. उसकी गर्मी अंदर तक जलाने लगी. उन्होने मेरी आँखों में देखते हुए होंठो से फुसफुसाया, “आ सपना… कितनी टाइट छूट है तुम्हारी… मज़ा आ गया.”

मैं बस उनकी आँखों में देखती रही, दर्द के साथ खुशी के आँसू मिल गये थे. धीरे-धीरे उन्होने कमर हिलना शुरू किया. पहले हल्के, लंबे धक्के… हर बार मेरी छूट की दीवारों को नयी तरह से खोलते हुए. मीठा दर्द धीरे-धीरे शूध सुकून में बदलने लगा.

मैं सिसकारी भरते हुए उनकी पीठ पर नाख़ून गाड़ने लगी, “आ… जेठ जी… धीरे… बहुत दर्द… पर… और गहरा…”

मेरी आवाज़ सुन कर वो और जोश में आ गये. उनके धक्के अब तेज़ और गहरे हो गये. हर बार का धक्का मुझे बेड पर हिला देता. मेरा जिस्म उनके लंड से मिलने को बेचैन हो गया था. पूरा कमरा हमारी सिसकारियों, धक्को की आवाज़ो और बदन के टकराने की धाप-धाप से गूँज रहा था.

जेठ जी मेरी गर्दन पर लगातार गरम किस्सस छ्चोड़ते हुए बोले, “मज़ा आ रहा है ना, सपना? तुम्हारी ये छूट… कमाल की है… मेरी मस्तानी.”

उनका मुझे “मस्तानी” कहना मेरी हवस को और भड़का गया. मैने अपनी टाँगें उनकी कमर के गिर्द लपेट ली, उन्हे और करीब खींच लिया. अब वो पूरी शिद्दत से, तेज़ और ताकतवर धक्के लगा रहे थे. मेरी छूट अब पूरी तरह से भीग चुकी थी, दर्द का नाम-ओ-निशान मिटा, सिर्फ़ सुकून और मज़ा रह गया था.

मैं पुर जिस्म के साथ काँप रही थी, “जेठ जी… मैं… मैं जाने वाली हू… और तेज़…”

वो मेरी आँखों में देख कर फुसफुसाए, “निकल जाओ मेरी जान… सारा रस्स निकाल दो… और देखना, मैं तुम्हे अपने से भर दूँगा.”

उनकी बातों ने मुझे बेपनाह बहाल कर दिया. कुछ और गहरे धक्को के बाद, एक तेज़ सिसकारी के साथ मैं झाड़ गयी. मेरी छूट उनके लंड पर कस्स गयी, और उसी वक़्त उनका गरम रस्स मेरे अंदर उतार गया.

मैं बिल्कुल ढीली पद गयी, वो कुछ देर तक मुझे अपने नीचे संभाले रखे, दोनो की साँसें तेज़ थी. जब उन्होने अपना लंड बाहर निकाला, मेरी छूट से उनका गरम रस्स धीरे-धीरे टपकने लगा.

वो मुस्कुराते हुए बोले, “देखा सपना… तुम्हारी छूट ने मेरा सारा रस्स पी लिया… और ये तो बस शुरुआत है.”

मैं शर्मा कर मुस्कुराइ, “आप… आप तो मुझे पागल कर दिया.”

वो मेरे गाल पर किस करके हंस पड़े, “पागल तो तुमने ही बनाया है… अभी तो रात लंबी है… और बहुत नये तरीके बाकी है.”

उन्होने मुझे अपनी बाहों में उठाया और बिस्तर पर घुमा कर डॉगी स्टाइल में घुटनो और हाथो के बाल खड़ा कर दिया. मेरी गांद उनके सामने बिल्कुल उछली हुई थी, चमक रही थी, और पीछे से उनकी आँखों में भारी हुई हवस चमक रही थी. मुझे थोड़ी सी शरम आई. लेकिन उनका मोटा लंड फिर से पूरा तंन चुका था. उसकी गर्मी मेरी गांद के बिल्कुल पास से महसूस हो रही थी.

जेठ जी ने मेरी गोल गांद को दोनो हाथो से पकड़ के ज़ोर से मसला. “वाह सपना… इस पोज़िशन में तेरी गांद और भी ज़्यादा सेक्सी लग रही है. आज तुझे असली मज़ा मिलेगा मेरे लंड का. ये गांद सिर्फ़ मेरे लिए बनी है.”

उन्होने अपना लंड धीरे से मेरी गांद के च्छेद पर रगड़ा, और फिर एक-दूं से तेज़ धक्का मारा. मेरा मूह खुल गया, एक तेज़ आ निकल गयी. लंड पुर ज़ोर से अंदर फिसल गया.

मैं सिसक उठी, मेरी आवाज़ में दर्द के साथ सुकून भी था, “आ… जेठ जी… कितना बड़ा है… मेरी तो गांद फटत जाएगी… धीरे…”

लेकिन उन्होने एक हाथ से मेरी कमर पकड़ के और तेज़ धक्के मारने शुरू कर दिए. उनकी आवाज़ में पूरा जोश था, “फटने दो सपना… मैं हू ना… आज तेरा ये च्छेद पूरा खोल दूँगा. ये सिर्फ़ मेरा है.”

हर पुश के साथ उनका लंड मेरी गांद की गहराइयों तक घुस रहा था. मैं अपने आप को पीछे की तरफ झटक रही थी, उनके रिदम का पूरा साथ दे रही थी. पुर कमरे में ठप-ठप की आवाज़ गूँज रही थी. ये पोज़िशन बिल्कुल वैसी थी जैसे मैं कभी-कभी पॉर्न वीडियोस में देखती थी. लेकिन आज मैं खुद उस मोमेंट में थी. मेरे हज़्बेंड ने मुझे कभी इस तरह नही छोड़ा था.

कुछ देर बाद उन्होने मुझे पलट कर सीधा लिटा दिया. मेरे पैर उन्होने अपने कंधो पर रख लिए. मेरी छूट अब पूरी तरह उनके लिए खुली थी, और उनका लंड और भी गहराई तक जेया रहा था.

उन्होने मेरे होंठो पर गरम किस रखी, साँसें तेज़ थी. “कैसा लग रहा है सपना? छ्होटे से ज़्यादा मज़ा आ रहा है ना? सच बता.”

मैने आँखें बंद करके सिसकते हुए कहा, “हा… जेठ जी… बहुत ज़्यादा… आ… आप मेरे राजा हो… मेरे मलिक…”

अब हर धक्का और तेज़ हो चुका था. कभी वो लंड को पुर अंदर तक भर देते, कभी धीरे से बाहर खींच लेते जैसे मुझे तडपा रहे हो. मेरी छूट उनके लंड के लिए बिल्कुल प्यासी हो चुकी थी. मैं उनकी कमर को खींच के और अंदर कर रही थी. पुर कमरे में सिर्फ़ मेरी सिसकियाँ, चुप-चुप की गीली आवाज़े, और बेड के ज़ोर से हिलने की धाप-धाप गूँज रही थी.

जेठ जी ने मुझे फिर से अपनी बाहों में उठाया और कमर पर बिता लिया. अब मैं उनके उपर थी, और उनका मोटा लंड मेरी छूट के अंदर तक घुस चुका था. मैं अपनी कमर को तेज़-तेज़ हिलाते हुए उनके लंड पर उच्छलने लगी. ये पोज़िशन सबसे ज़्यादा हॉट लग रही थी, क्यूंकी मैं उनकी आँखों में देख पा रही थी, और उनके हाथो का हर स्पर्श अपने बूब्स पर महसूस कर रही थी.

हर च्छुअन से मेरे जिस्म में एक आनंद की लेहायर दौड़ रही थी. मैं उनके चेहरे के पास झुक कर, अपने बाल उनके गले पर फैलाते हुए जोश में बोली, “आ जेठ जी… और तेज़… मुझे और ज़ोर से छोड़ो… मुझे पागल कर दो.”

जेठ जी ने मेरे बूब्स को ज़ोर-ज़ोर से मसलना शुरू कर दिया. उनकी गरम साँसे मेरे होंठो को छ्छू रही थी, और आवाज़ में जुनून था, “बस मेरी रानी… आज तुम्हारी हर प्यास बूझौँगा… तुम्हे इतना छोड़ूँगा की ज़िंदगी भर याद रहे. तू सिर्फ़ मेरी है.”

हम दोनो पूरी तरह एक-दूसरे में खो गये थे. हर धक्के के साथ एक नयी गहराई, एक नया आनंद मिल रहा था. उनके तेज़, गरम थ्रस्ट्स मेरी छूट को पूरा भर रहे थे, और मैं उनकी कमर पर बेचैनी से उच्छल रही थी, जैसे मेरी प्यास हर पल के साथ बढ़ रही हो.

कभी वो मेरे बूब्स को कस्स के मसालते, कभी मेरे होंठो को गहरे किस देते. समय का कोई एहसास नही था, बस हमारे जिस्म का रंग चढ़ रहा था. उस दिन उन्होने मुझे कई अलग-अलग पोज़िशन्स में लिया. कुछ ऐसी जो मैने सिर्फ़ पॉर्न में देखी थी और जो मेरे हज़्बेंड ने कभी ट्राइ नही की थी.

हर पोज़िशन में उनका लंड मेरी छूट की नयी गहराई तक पहुँचता, और मैं हर बार काँप उठती. मैं काई बार झाड़ चुकी थी, और जब भी मेरी साँसें तेज़ हो जाती और मैं बेचैन सी हो जाती, वो मेरा सारा रस्स पी जाते, मेरी प्यास को फिर से जागते हुए.

एक पल आया जब उन्होने मेरी गोल गांद पर तेज़ थप्पड़ मारा, मुस्कुरा कर बोले, “अया सपना… तुम्हारी छूट ने तो मेरी जान निकाल दी… मैं तो तुम्हारा ग्युलम बन गया हू.”

मैं तक कर उनकी छ्चाटी पर सिर रखते हुए, हल्की मुस्कान के साथ बोली, “आप भी कम नही हो जेठ जी… आपने मेरे जिस्म को आग लगा दी. अब मैं आपके बिना रह नही सकती.”

शाम होने तक उन्होने मुझे नंगा ही रखा और बार-बार लिया. मेरा जिस्म पूरा तक चुका था, पर दिल और छूट अभी भी उनके लंड के लिए प्यासी थी. इतनी बार उन्होने मुझे भरा था की अब दर्द के साथ एक अजीब सा सुकून मिल रहा था. जब घर पर सब के आने का वक़्त हुआ, तो उन्होने मुझे अपनी बाहों में खींच कर एक आखरी पॅशनेट किस दिया. उनकी आँखों में एक गहरा वादा था.

मेरे होंठो पर किस रखते हुए उन्होने धीरे से कहा, “सपना, अब से कभी अपने आप को अकेला मत समझना… मैं हू तेरे साथ.”

उस दिन के बाद हमारे बीच चुदाई का सिलसिला शुरू हो गया. जब भी हमे मौका मिलता, या तो घर पर कोई नही होता, या सब गहरी नींद में होते, हम एक-दूसरे के करीब आ जाते. जब मेरा बेटा हॉस्टिल से छुट्टियों पर आता, तो जेठ जी और मैं चुपके से मिलते, और हमारा राज़ और गहरा हो जाता.

हर बार जब हम मिलते, मैं खुद से सवाल करती. मैं एक अची मा, एक अची बहू, एक अची पत्नी बनने की कोशिश कर रही हू… तो ये सब क्यूँ? पर जेठ जी की बाहों में आते ही, मेरे हर सवाल का जवाब उनकी च्चती की गर्मी, उनकी चाहत, और उनकी जुनून भारी नज़र दे देती थी.

वो मेरी हर ख्वाहिश को पूरा करते. पर जब वो चले जाते, तो मैं अकेली सी हो जाती… और मेरे सामने टेबल पर रखी मेरे पति की तस्वीर मुझे चुभने लगती. उस तस्वीर की मासूम मुस्कान मुझे बार-बार मेरे गुनाहों का एहसास दिलाती. मैं अपने दिल से पूछती — क्या ये सब सही है? क्या मैं एक अची औरत बनने की कोशिश कर रही हू… या हवस की घुलाम बन चुकी हू?

वो अब भी मेरे जेठ थे, मैं उनके छ्होटे भाई की बीवी थी… पर हमारे बीच का रिश्ता अब सिर्फ़ नाम का नही रहा था. हमारी चाहत और लस्ट ने हर हड्द पार कर दी थी. जेठ जी अब मेरे लिए सिर्फ़ एक रिश्तेदार नही, बल्कि वो प्रेमी बन चुके थे जो मेरी हर सेक्षुयल फॅंटेसी को पूरा करते.

उनका मोटा, लंबा लंड… उनका पॅशनेट स्टाइल… उनकी नॉटी बातें… ये सब मेरे हज़्बेंड से कहीं ज़्यादा सॅटिस्फॅक्षन देते. वो मेरी छूट की हर प्यास बुझते, मेरी बॉडी को नये तरीके से एक्सप्लोर करते, और हर मिलन में मुझे एक नया आनंद देते.

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