अमृतसर में जवान लड़किया से सेक्स का मज़ा

हैल्लो दोस्तों, में गौरव एक बार फिर से आप सभी चाहने वालों के लिए अपनी एक नई कहानी को लेकर आया हूँ. यह कहानी भी मेरी पिछली कहानियों की तरह बिल्कुल सच्ची है. दोस्तों मैंने अब तक बहुत सारी लड़कियों की चूत मारी है और में बहुत किस्मत वाला हूँ कि मुझे इतनी सारी चूत को चोदने का मौका मिला, क्योंकि यह ऐसा मौका हर किस को नहीं मिलता.

दोस्तों मैंने इतनी सारी लड़कियों को चोदा है कि में उन सभी की कहानी को एक साथ नहीं लिख सकता, लेकिन उनकी कहानियाँ में जरुर लिख देता हूँ जिनकी चूत मारने और चुदाई करने में मुझे बहुत ज्यादा मज़ा आता है और उनकी कहानियाँ में लिखकर आप सभी को यहाँ पर सुनाता हूँ. दोस्तों मुझे उम्मीद है कि मेरी पिछली कहानियों की तरह यह मेरी आज की कहानी भी सभी पढ़ने वालों को जरुर अच्छी लगेगी. दोस्तों में कंप्यूटर हार्डवेर का काम भी पूरी तरह से जानता हूँ और बहुत सी लड़कियों को में उनके घर पर जाकर उनका कंप्यूटर ठीक करने के बहाने से उनकी चुदाई कर चुका हूँ. अगर किसी अमृतसर की लड़की को मुझे अपने सेक्स से जुड़ी किसी भी समस्या को बताना हो तो वो मुझसे बात कर सकती है और अब दोस्तों आज की कहानी को पढ़कर उसके मज़े लीजिए.

दोस्तों यह बात आज से एक साल पहले की है जब हम अमृतसर में जिस मकान में रहते थे, उसके पास वाला मकान बहुत अरसे से खाली पड़ा हुआ था और हर वो हमेशा बंद ही रहता था. एक दिन मैंने देखा कि उस मकान का ताला खुला हुआ है और उसमे एक नये कराएदार आ गये थे, लेकिन वो एक दिन उस मकान की साफ सफाई करके करीब दूसरे या तीसरे दिन उसमे रहने आए.

हमारे नये पड़ोस वाले घर से एक बूढ़ी औरत पहली बार उस दिन हमारे घर आई और वो मेरी मम्मी के साथ बहुत देर तक बैठी रही उनसे बातें करती रही तो मेरी मम्मी ने मुझे बताया कि यह हमारे नये पड़ोसी है और उनकी चार बेटियाँ है और उनका लड़कियों के पापा पहले जलंधर की किसी प्राइवेट फर्म में काम करते थे और अब उसका तबादला अमृतसर में हो गया है, इसलिए वो यहाँ पर रहने आए है और वो सभी लोग बहुत शरीफ लोग है और वो बहुत पढ़े लिखे भी है और उन्होंने मेरी मम्मी को अपने घर पर आने के लिए कहा करीब चार पांच दिन के बाद मेरी मम्मी ने मुझसे कहा कि चलो हम अपने नये पड़ोसियों के घर चलते है.

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में भी उनके साथ हो लिया और मेरी मम्मी ने दरवाजे पर लगी घंटी को बजा दिया, तब मैंने देखा कि एक बहुत ही सुंदर लड़की ने आकर दरवाज़ा खोल दिया, जिसकी उम्र करीब 18- 20 साल होगी. फिर हम दोनों घर के अंदर चले गये और उन लड़कियों की माँ ने हम दोनों की बहुत अच्छी तरह से पूरी खातिरदारी की और हम दोनों उनके बैठक वाले कमरे में कुर्सी पर बैथे हुए थे. फिर एक लड़की कुछ देर बाद हमारे लिए कोल्डड्रिंक्स लेकर आई और अब में उसको देखता ही रहा क्योंकि वो इतनी सुंदर थी कि में किसी भी शब्दों में लिखकर बता नहीं सकता, उसका सांवला रंग, सुंदर बड़ी आकार की आखें, पतला सा जिस्म और लंबे बाल जिनको देखकर में बड़ा चकित था.

फिर उसके बाद एक और लड़की आ गई, लेकिन वो तो उस पहले वाली लड़की से भी ज्यादा सुंदर थी. में तो उसकी सुंदरता को देखकर एकदम चकित होकर चकरा गया. मेरा पूरा ध्यान उनकी बातों से हटता जा रहा था और में किसी बहाने से छुपकर उन दोनों को देखने लगा था. दोस्तों में सिर्फ़ उनकी सुंदरता के बारे में बस इतना सा कहता हूँ कि अगर उनको देखने पर दस हज़ार का टिकट भी होता तो में सबसे पहला खरीददार होता.

दोस्तों पता नहीं उन चारों बहनों को भगवान ने किस तरह अपना बहुत सारा समय निकालकर बहुत अच्छी तरह तराशकर बनाया था, लेकिन वो अपने चेहरे से बहुत शरीफ और शरम वाली लड़कियाँ लगती थी. में मन ही मन में सोचता था कि काश इससे मेरी शादी हो जाए और जब दूसरी वाली सामने आती तो में सोचता कि काश इससे मेरी शादी हो जाए. फिर पहली बार एक लड़की ने मुझे भैया कहकर पुकारा, तब मेरी मम्मी ने उनसे कहा कि यह गौरव है और यह बहुत शर्मीला लड़का है, मेरे बारे में बहुत कुछ कहा और कुछ देर बाद हम दोनों वापस अपने घर आ तो गये, लेकिन अब भी मुझे रह रहकर वो हसीन लम्हे याद आ रहे थे और मेरा मन बार बार चाह रहा था कि में अभी इसी समय उनके घर चला जाऊं और उनकी माँ से कहूँ कि आप मुझे अपने घर रख ले में आपके सभी काम कर दूंगा.

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फिर एक दिन में अपने घर पर बिल्कुल अकेला था और कुछ देर बाद हमारे पड़ोसी की एक लड़की ने दरवाजे पर एक दस्तक दी, मैंने दरवाजा खोलकर देखा तो में बहुत हैरान रह गया और कुछ देर बाद मैंने उससे पूछा कि क्या बात है? तब वो मुझसे कहने लगी कि मेरी मम्मी कह रही है कि कल आप हमारे घर आ जाना, अब मैंने उससे पूछा कि आपका नाम क्या है? तो वो कहने लगी कि आरती. अब मैंने उससे कहा कि तुम्हारा बहुत अच्छा नाम है.

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