हॉट सीमा 2 Xxx की चूदाई कहानी 5

हॉट सीमा 2 Xxx की चूदाई कहानी 5
मेरी पिछली कहानी आई थी
हॉट सीमा 2 Xxx की चूदाई कहानी 4
अगले दिन मैं ऑफ़िस गयी पर बॉस के घर में कोई बीमार था तो वे नहीं आये थे इसलिये मैं अपना ऑफिस वर्क करके शाम को वापिस घर आ गयी।
अगले दिन भी बॉस नही आए।
इस तरह 2 दिन बीत गये।
मैं दिन में ही घर पर आ गई।
फिर मेरे यार अनुम ने मुझसे फ़ोन पर पूछा- कहीं घूमने चलोगी?
तो मैंने पूछा- कहाँ?
अनुम- शिमला!
मैं- पर मेरी छुट्टी नहीं है।
अनुम- ठीक है, मेरे दोस्त जा रहे हैं तो मैं उनके साथ जा रहा हूँ।
मैं- ठीक है, एन्जॉय करना और मेरे लिये गिफ्ट लाना मत भूलना।
अनुम ने बाय बोल कर फ़ोन रख दिया।
मन तो मेरा भी था जाने का पर ऑफ़िस के काम के चक्कर में नहीं जा पायी।
अब मैं अपने रूम में अकेली थी और कुछ काम तो था नहीं इसलिये दिमाग में खुराफात सूझने लगी। मैंने अपने सारे कपड़े निकाल दिये और चुदायी की वीडियो देखते हुये चुत में उंगली करने लगी।
मुझे एक vip सर्विस डेटिंग साइट मिली, मुझे उस के नियम पसंद आए मैंने वहां लाइक साइन अप कर लिया।
फिर से चूत में उंगली करने लगी,
पर मेरी चुत को मोटे और लम्बे लंड लेने की आदत पड़ गयी थी तो अब उंगली से काम नहीं चल रहा था।
फिर मुझे याद आया बॉस मेरे लिये शैम्पेन की बोतल लाये थे। मैं शैम्पेन की बोतल को जमीन पर रख कर उसको चुत में लेकर उस पर बैठ गयी।
जैसे जैसे बोतल चुत में घुस रही थी, मेरी चुत फ़ट रही थी। पर मुझे सेक्स का नशा ऐसा लगा था कि मुझे चुत का फटना भी अच्छा लग रहा था।
अब तक 4 इंच बोतल मेरी चुत में घुस गयी थी जिसे मैं ऊपर नीचे होते हुए खुद को चोदने लगी।
फिर मैंने बोतल को पकड़ लिया और खड़ी होकर सोफे पर चली गयी। अब मैंने अपनी टाँगें ऊपर उठा ली जिससे बोतल में बची हुई शैम्पेन मेरी चुत में जानी लगी। वो बहुत ठंडी थी तो मेरी चुत को बहुत ठण्डा सा लगा और मुझे पेशाब आने लगी।
मैंने सोचा शैम्पेन अब तो कोई पियेगा नहीं, तो मैंने जल्दी जल्दी बोतल को चुत में घुसेड़ना सुरु कर दिया और फिर मेरी चुत ने पेशाब की एक तेज धार मार दी जो सीधा बोतल के अन्दर गयी।
मैंने एक गिलास के बराबर शैम्पेन की बोतल में अपना शूशू भर दिया और झड़ कर सोफे पर ही लेट गयी।
फिर मेरी नीन्द 2 घन्टे बाद खुली जब माँ का फ़ोन आया।
उन्होंने बताया कि अजू जो मेरी मौसी का लड़का है, मुझसे 2 साल छोटा भाई, उसका कोई एग्ज़ाम है, वो तीन दिन के लिये दिल्ली आ रहा है। उससे बात कर लेना और अपने फ्लैट पर रोक लेना।
मुझे लगा कहीं अजू को मेरी सारी हरकतें पता चल गयी और वो माँ को बता देगा तो प्रोब्लम होगी इसलिये मैंने माँ को मना कर दिया अजू को अपने फ्लैट पर रोकने के लिये।
मां ने सोचा अकेली लड़की है कहीं कुछ गलत ना हो जाये, इसलिये वे मेरी बात मान गयीं।
मेरे मोबाइल पर एक नोटिफिकेशन आया मैंने उसे पूरा पड़ा मुझे वो पसंद आया, डेटिंग साइट का ऑफर था 30000 फुल नाइट की।
मैं तैयार हुई एक मस्क लगाया जिससे मुझे कोई पहचान ना पाए। गॉगल्स और टोपी लगाकर अपने फेस को फुल कवर किया।
मैंने आने जाने के लिए ओला बुक कर ली, क्योंकि मुझे दूसरे शहर जाना था। में डेढ़ घंटे बाद होटल पहुंची ,होटल रिसेप्शनिस्ट को अपना नाम जूली बताया तो उसने मुझे एक रूम की चावी पकड़ा दी,मैं रूम में पहुंच गई।
रूम में दो कॉलेज बॉय बैठे हुई थे उन ने अपने नाम सोम और वीर बताए, मैंने उन्हें अपना नाम जूली बताया फिर हम ने डिनर किया ।
कुछ देर बाद में बिस्तर पर जाकर बैठ गई। थोड़ी देर बाद वीर और सोम दोनों हूटे, मेरे दोनों तरफ बैठ गए। मैं वीर की तरफ घूम गई और फिर उसे किस करने लगी।
वीर ने भी मुझे पकड़ लिया और चूमने लगा और चूमते चूमते मुझे घुमा कर उसने सीधे बिठाया
सोम मेरे पास आया, मेरे हाथ पकड़े और फिर मुझे चूमने लगा। मैं भी सोम का साथ देने लगी और उसके गालों को पकड़ कर उसे चूमने लगी।
वीर बगल में बैठा देख रहा था। चूमते चूमते मैं सोम के हाथ ऊपर कर दिए और उसकी टी शर्ट नीचे से खींच कर ऊपर करने लगी, फिर सोम ने कुछ सेकण्ड के लिए हमारा चुम्बन रोका और अपनी टीशर्ट निकाल दी और फिर अपने होंठ मेरे होठों से सटा दिए और मुझे चूमने लगा।
थोड़ी देर बाद सोम ने मुझे बिस्तर पर लेटा दिया और फिर खेल शुरू हो गया। वीर भी अब हमारे साथ आ गया और वो मेरे बगल में लेट गया, मेरे चुच्चे दबाने लगा और सोम मेरी चुम्मियाँ लेता रहा।
थोड़ी देर बाद मैं वीर की तरफ घूमी और उसे चूमने लगी।
उधर दूसरी तरफ़ सोम ने मेरा गाउन उतार दिया और मेरी पीठ चूमने लगा। मैंने अपने हाथ वीर की टीशर्ट के अंदर डाले और उसके बदन को सहलाने लगी।
सोम कभी मेरी कमर तो कभी मेरी गर्दन और कभी मेरे पीठ को चूमते जा रहा था।
थोड़ी देर तक मैं और वीर चूमाचाटी करते रहे और यह सिलसिला चलता रहा, पर कुछ देर बाद दोनों उठे और सोम जहाँ अब फिर से मेरे होंठों को चूमने लगा था, वहीं वीर मेरी नाभि को चूमने लगा और मेरे बूब्स मसलने लगा।
वीर की क्रीड़ा मेरी सिसकारियाँ बढ़ा रही थी और उसकी जीभ मेरे बदन पर किसी सांप की तरह हर तरफ रेंग रही थी।
वीर ने मेरी ब्रा खोल दी और मेरे एक स्तन को अपने होंठों से चूसने लगा, वहीं हाथों से मेरे दूसरे उभार को दबाये जा रहा था।
फिर सोम ने भी मेरे होठों का साथ छोड़ा और वीर सा साथ देने पहुँच गया और अब दोनों मेरे एक एक बूब्स को अपने होंठों से तार तार कर रहे थे और छोटे बच्चे से तरह उसे चूसे जा रहे थे, मेरी सिसकारियाँ बढ़ते जा रही थी।
वीर का दूसरा हाथ अब मेरी चूत पर था, मैंने पेंटी पहन रखी थी पर वीर फिर भी उसके ऊपर से हाथ फेरे जा रहा था, मुझे अच्छा लग रहा था कि मैं कब तक दोनों को झेल पाऊँगी पर मैंने हार नहीं मानी, मैंने तो यही निर्णय लिया कि अभी बेहतर यही है, अभी इन खूबसूरत पलों का मजा लूटो और जब सहन नहीं होगा तब देखा जायेगा, क्या होगा!
वीर और सोम का मन अभी भी नहीं भरा था और दोनों मेरे गोरे मुलायम बूब्स को चूसने में लीन थे और वीर का दूसरा हाथ अब धीरे धीरे मेरी पेंटी के ऊपर से पेंटी के अंदर पहुँच गया था, धीरे धीरे वीर की ऊँगलियाँ मेरी चूत की पंखुड़ियों को उकसाने का काम कर रही थी,
कह रही थी कि ‘ऐ मासूम प्राणी, जाग जाओ और उठो देखो, तुम्हारे लिए आज हम एक नहीं दो दो लौड़े लाये हैं और तुम्हारी इस चूत का क्या हश्र करने वाले हैं, इसलिए उठो और खुद को लड़ाई के लिए तैयार कर लो क्योंकि हम ज्यादा देर धैर्य रखने वाले नहीं।’
वीर धीरे धीरे मेरी पेंटी नीचे खिसकाने लगा। क्योंकि दोनों काफी देर से मेरे बूब्स चूस रहे थे तो मुझे बहुत दर्द भी हो रहा था इसलिए मैं अपने हाथों से इन दोनों के सर को धकेलने लगी ताकि ये लोग मेरे बूब्स को बक्श दें और किसी और चीज की तलाश करें।
वीर मेरे टांगों की ओर बढ़ा और मेरी टाँगों के बीच में आ गया, मेरी पेंटी खींच कर निकाल दी। मेरी बगल में सोम था, मैंने उसकी पैंट और फिर अंडरवियर नीचे खींच दी और उसका लंड अपने हाथ में पकड़ कर सहलाने लगी।
अब आलम यह हुआ कि वीर ने अपने जीभ मेरी चूत में फ़ंसा दी और चूसने लगा। सोम मेरे बगल में बैठा था और मैं उसका लंड अपने हाथों से सहला रही थी।
थोड़ी देर बाद वीर भी मेरे पास आ गया। अब वीर और सोम मेरे दोनों तरफ थे दोनों अपने घुटनों के बल और मेरे चेहरे के पास खड़े हो गये, दोनों का लंड मेरी निगाहों के सामने, मेरे लबों के पास थे।
मैंने वीर का लंड एक हाथ से पकड़ा और उसके चूमा और फिर धीरे धीरे करके उसके लंड को अपने हाथ से पकड़ कर चूसने लगी और दूसरे हाथ से सोम का लंड पकड़कर सहलाने लगी।
कुछ ही पलों बाद मैं लेट गई, वीर फ़िर अपना लंड मेरे मुँह में घुसाने लगा और मैंने फिर से उसका लंड चूसना शुरू कर दिया, उसके लंड को अपने मुँह के अंदर-बाहर करने लगी।
मैं सोम का लंड अभी भी सहला रही थी, सोम अपने हाथ मेरे चूत के पास ले गया और मेरे चूत की पंखुड़ियों के साथ अपनी ऊँगलियों से खेलने लगा जैसे कि एक मधुमक्खी फ़ूलों के साथ खेलती है।
थोड़ी देर बाद मैंने वीर का लंड अपने मुंह से निकला और सोम का लंड अपने मुँह में लेकर चूसने लगी। थोड़ी देर बाद वीर वहाँ से उठ कर मेरी चूत के पास आ गया और अपना तना हुआ लंड मेरे चूत पर लाकर सटा दिया, वहीं बीच बीच में सोम मेरे बूब्स को भी मसल रहा था तो कभी खींच रहा था।
वीर ने लंड पर कॉन्डम लगाया और मेरी दोनों टाँगों को पकड़ कर थोड़ा सा फ़ैलाया और उसने कमर से एक धक्का नीचे को दिया और मैंने ऊपर की ओर, उसका मोटा लंड मेरी चूत के अन्दर घुस चुका था, मैं सोम के लंड को लॉलीपॉप की तरह चूस रही थी। वीर अपनी चुदाई की रफ्तार बढ़ाए जा रहा था।
धीरे धीरे वीर मुझे बड़े प्यार से चोदने लगा। मुझे मजा आने लगा और धीरे धीरे वीर ने मुझे चोदने की गति और तेज कर दी।
मुझे 10 मिनट मजे से चोदने के बाद वीर ने अपनी गति धीरे कर दी, मुझे एहसास हो गया था कि यह थक गया है पर मैं तो लंड चूसने में व्यस्त थी कुछ समय बाद मैंने सोम के लंड को होने मुँह से निकाला पर अपने होंठों पर रहने दिया और उसे अपने लबों पर इधर उधर फ़िराने लगी जैसे कि मानो वो मेरी चूत का छेद खोज रहा हो।
कुछ समय बाद वीर का जोश वापस आया और वो फिर से मुझे ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा और सोम अपना लंड मेरे मुँह के अंदर गले तक ठोक कर अब वो मेरे मुख की पूरी चुदाई कर रहा था। अब मैं ऊपर और नीचे दोनों तरफ से चुद रही थी।
वीर ने अपने दोनों हाथों से मेरी कमर को पकड़ लिया और चुदाई की गति तूफ़ानी कर दी। करीब पंद्रह मिनट में मुझे इस मुद्रा में चोदने के बाद दोनों ने अपनी जगह बदली और मेरी पोजीशन भी।
वीर अब मेरे होंठों से पास आ गया था और सोम मेरी चूत के। सोम ने मुझे एक तरफ घुमा दिया और मेरे दोनों टांगें नीचे कर दी।
अब मैं थोड़ा थोड़ा उसी मुद्रा में थी जैसे कि हम सोते हैं दोनों टाँगें जोड़ कर एक साथ पैरों के ऊपर पैर रख कर पर इसमें थोड़ा नयापन यह था कि मेरा चेहरा और पीछे की तरफ़ घूमा हुआ था और मेरे चेहरे के सामने वीर का लंड था।
वहीं सोम मेरी गांड के पास था और उसने लंड पर कॉन्डम चढ़ाया और उसने मेरी जांघों के ऊपर अपना हाथ रखा और अपना लंड मेरी चूत के पास ले गया और एक शॉट मारा और सोम मुझे चोदने का सुख ले रहा था, और वीर ने लंड से कॉन्डम हटा दिया ।
अब स्थिति यह थी कि मैं वीर का लंड चूस रही थी, दूसरी तरफ सोम मुझे, मेरी चुत को चोदने का आनन्द प्राप्त कर रहा था।
करीब दस मिनट तक हम तीनों ने इसी मुद्रा में एक साथ सेक्स का आनन्द लिया और फिर सोम ने मुझे सीधा लेटा दिया और फिर से मेरी दोनों टांगें फैलाकर मेरी चुदाई नए सिरे से शुरू कर दी। मैं कभी वीर का लोलीपोप चूसने का तो कभी सोम की चुदाई के मज़े ले रही थी।
थोड़ी देर बाद सोम थक गया और मेरे पास आकर लेट गया तो अब भला वीर यह मौका कैसे छोड़ता।
वीर ने मुझे उठाया और खुद लेट गया और फिर मुझे अपने लंड के ऊपर बिठा लिया और फिर से मेरी चूत की चुदाई करने लगा।
थोड़ी देर बाद मैं भी वीर का साथ देने लगी और अपने दोनों हाथ वीर के छाती पे रख कत अपने कूल्हे उठा उठा कर चलाने लगी और धीरे धीरे मैं इसकी गति कभी तेज तो कभी धीरे कर देती, थोड़ी देर बाद मैंने वीर के होंठों से अपने होंठों को मिला दिया और उसके ऊपर लेट गई और अपनी गांड उठा कर खूब मज़े से चुदवाने लगी, वीर ने मेरे चूतड़ों को अपने दोनों हाथों से पकड़ लिया और सहलाने लगा और मैं उछल उछल कर इस चुदाई का भरपूर मजा लेने के मूड में आ गई थी।
कुछ देर बाद मैंने अपनी उछलने की गति कम की और सोम के लंड खींच कर अपने होंठों से मिला कर एक बार फिर से चूसने लगी। अब जहाँ मेरे होंठ सोम के लौड़े की चुसाई में व्यस्त थे, वही मेरी चूत में वीर का लंड फंसा हुआ था।
थोड़ी देर तक इसी अवस्था में सेक्स करने के बाद मैं एक बार फिर लेट गई! थोड़ी देर आराम करने के बाद हमने फिर पोजीशन बदली और अब वीर ने मुझे घोड़ी बना ली और मेरी गांड की तरफ बढ़ा, मेरे मुँह में तो अब फ़िर सोम का लंड ही घुस चुका था।
वीर ने मेरे गांड के छेद में अंदर तक ऑयल लगाया और कॉन्डम चड़े लंड पर भी लगाया और वीर ने अपना लौड़ा बड़े प्यार से मेरी गांड के छेद में डाल दिया और फिर से धक्के मारने लगा।
वीर मेरी गांड फाड़ता रहा, मैं अलग अलग तरीके से सोम के लंड चूसने के मज़े ले रही थी, कभी उसको हाथों से सहलाने लगती तो कभी होंठों से चूमने तो कभी मुँह में लेकर चूसने लगती।
कुछ देर बाद वीर की जगह सोम ने ले ली और वीर सोम की जगह आकर लेट गया। मैं समझ गई थी इतनी देर तक मेरी गांड की चुदाई करने का बाद वीर का लंड थक गया होगा इसलिए मैं वीर के लंड को अपने हाथों से पकड़ कर सहलाने लगी, वहीं सोम ने अपनी जीभ मेरी गांड के छेद पर फ़िराने लगा।
अब मुझे रहा न गया और क्योंकि अब तो मेरे मुँह में कुछ था नहीं, इसलिए सिसकारियों ने अपना जलवा दिखाना शुरु किया- आह ऊऊओह्ह आईईए आअह ह्ह ह्ह!
बहुत देर तक मेरी गांड चाट कर जब सोम का मन भर गया तो उसने अपना लंड घुसाने में जरा भी देर नहीं की और मेरी गांड में अपना लंड घुसा कर मेरी गांड मारने में लग गया, मैं भी वीर के लंड चूसने लगी।
हम तीनों लोग बुरी तरह से थक गये और वहीं एक साथ लेट गये, वीर और सोम मेरे अगल-बगल थे, मैं बीच में! मैंने घड़ी की ओर देखा तो अभी रात 11 बजे थे ।
पिछले 1 घंटे से मेरी चूदाई चल रही थी, करीब 12 मिनिट तक हम यूँ ही लेटे रहे। मैं दो मर्दों के बीच में सैंडविच बनकर लेटी थी। और मुझे चुदाई में मजा भी आया था ।
सोम ने मेरे हाथ पकड़ कर मुझे उठाया और फिर वीर नीचे लेट गया।
सोम ने मुझे अपनी तरफ मुँह घुमा के बिठा कर कहा- तुम वीर के लंड को अपनी गांड में डाल कर उसके ऊपर बैठ जाओ फिर मैं तुम्हारी चूत की मालिश करूँगा।
मैंने वैसे ही किया जैसे सोम ने कहा। मैं अपनी गांड उठा कर वीर के लंड को पकड़ कर अपनी गांड में डालने लगी। मैंने वीर का लंड अपनी गांड में डाला और बैठ गई।
फिर सोम ने मुझे वैसे ही वीर के ऊपर लेटा दिया और वो भी मेरे ऊपर चढ़ गया। सोम ने अपना लंड पकड़ा और मेरी चूत के पास लेकर आ गया और एक ही झटके में फिर से मेरी चूत में डाल दिया ।
अब मेरी गांड और चूत दोनों में लंड भरे हुए थे। धीरे-धीरे वीर और सोम दोनों से अपना कमर उठा कर मुझे ऊपर और नीचे से चोदने लगे।
यह पहली बार था जब मैंने एक साथ दो लंड लिए थे मुझे दर्द भी हो रहा था और थोड़ा-थोड़ा मजा भी आ रहा था। मैं इन दोनों के बीच में सैंडविच बन गई थी,
धीरे-धीरे दोनों अपनी चोदने की स्पीड कभी कम तो कभी ज्यादा करने लगते। करीब आधे घंटे तक दोनों मुझे इसी तरह चोदते रहे और फिर दोनों के अपनी-अपनी जगह की अदला-बदली कर दी।
अब मेरी गांड में जहाँ सोम का लंड ठुंसा हुआ था वहीं मेरी चूत में अब वीर के लंड का बोल बाला था।
थोड़ी देर तक उसी पोजीशन में एक-दूसरे पर लेट कर आराम करने के बाद हमने फिर से चुदाई का अपना काम पूरे तेजी के साथ शुरू किया और दोनों मेरी चूत और गांड को फाड़ने में जुट गए थे।
करीब एक घंटे तक हमने इसी तरह एक-दूसरे के साथ चुदाई का मजा लिया और फिर वहीं बिस्तर पर लेट गए। थोड़ी देर तक हम वहीं एक-दूसरे के पास लेटे रहे। मेरी नज़र घड़ी के पास गई, तो देखा रात के 12.20 हो चुके थे।
मैं कुछ देर आराम से लेट गई। मुझे पता ही नहीं चला में कब सौ गई ।
वीर और सोम ने मुझे नींद से जगाया और बोले फिर से करते है।
घड़ी में टाइम दिखा तो रात के उन्हें 2:45 बज रहे थे।
मैं उठकर बाथरूम गई, पेशाब कर और मुंह धो कर वापिस आ गई।
मैं दोनों का लन्ड पकड़कर मसलने लगी। दोनों का लन्ड काफी कड़क हो गया था।
ऐसा लग रहा था मानो मैं दो गर्म रॉड को पकड़े हुए हूं।
मैं दोनों के लन्ड की मालिश करने लगी और दोनों मेरी एक एक चूची को मसल रहे थे।
तभी सोम अपने लन्ड को खींचते हुए बोला- तैयार हो जा मेरी जूली !
मुझे वहीं फिर से लिटा दिया और सोम ने मेरी टांगों को फैलाकर मेरी चूत पर ढेर सारी थूक लगा दी।
लन्ड को मेरी चूत पर उसने सेट किया.
उधर वीर का लन्ड अभी भी मैं मसल रही थी।
तभी सोम ने एक जोरदार झटका मारा और आधा लन्ड मेरी चूत में घुस गया।
तभी सोम ने फिर एक जोरदार प्रदर्शन करते हुए एक और झटका मारा और उसका पूरा लन्ड मेरी चूत में समा गया।
अब सोम ने मेरे होंठों को अपने होंठों से लॉक कर दिया और लन्ड आगे पीछे करने लगा।
फिर वीर बोला- अब मेरी बारी!
मैं बोली- अभी नहीं यार।
तभी वीर मेरी चूची पर चिकोटी काटते हुए बोला- मजा आयेगा मेरी जान!
फिर सोम ने मुझे लेकर पलटी मारी जिससे सोम नीचे चला गया और मैं उसके ऊपर और मेरी गांड के ऊपर वीर आने वाला था।
वीर मेरी गांड दबाते हुए बोला- कितनी मस्त गांड है यार!
उधर सोम नीचे से लन्ड उचका उचका कर मेरी चूत फाड़ रहा था और इधर वीर मेरी गांड चाटने लगा था।
मुझे एक अलग सी अनुभूति मिल रही थी।
वो करीब 5 मिनट तक मेरी गांड चाटता रहा और मैं भी अपनी चूत चुदाई और गांड चटाई का मजा ले रही थी।
अब वीर ने मेरी गांड पर ऑयल लगा दी और अपना लन्ड टिका दिया।
फिर उसने बिना देरी किये एक जोरदार झटका मारा।
अभी तो सिर्फ लन्ड का टोपा ही गया था.
उसने फिर एक झटका मारा और लन्ड आधे से ज्यादा मेरी गांड में घुस गया।
अब मैं दर्द से छटपटाने लगी।
उन दोनों पर मानो भूत सवार था। नीचे से सोम चूत फाड़ रहा था और ऊपर से वीर गांड फाड़ रहा था।
मेरे से बर्दाश्त कर पाना मुश्किल हो गया था। मैं पूरा जोर लगा रही थी कि मेरी गांड में से लन्ड निकल जाए।
फिर तीनों ने साथ मिलकर पलटी मारी। अब हमलोग सैंडविच की पोज़ में आ चुके थे। बीच में मैं थी और दोनों साइड से मुस्टंडे।
करीब 5 मिनट बाद दोनों धीरे धीरे लन्ड आगे पीछे करने लगे। डबल साइड हार्ड फक चल रहा था मेरे साथ.
मेरा भी दर्द अब कुछ कम हो गया था।
सोम मेरी चूत चोदने के साथ मुझ पर पप्पियों की बौछार किये हुए था।
उधर वीर मेरी गांड मार रहा था और दोनों हाथों से मेरी चूचियों को मसल रहा था। वो मेरी नंगी पीठ को चाट रहा था जिससे मैं सातवें आसमान का आनंद ले रही थी।
अब मैं उन दोनों के हर झटके का आनंद ले रही थी और कमर हिला हिला कर दोनों का जोश बढ़ा रही थी।
हम तीनों अब फुल जोश में आ चुके थे। तीनों एक दूसरे में बिल्कुल खो चुके थे। वो दोनों धक्के पर धक्का मारे जा रहे थे और मैं भी कामुक आवाज़ें निकाल रही थी।
ऐसे ही 10-15 मिनट तक चलता रहा.
दोनों ने पोजीशन बदली अब सोम का लंड मेरी गांड में और वीर का लंड मेरी चूत में, और फिर से सैंडविच चूदाई चालू हो गई।
कुछ देर करने के बाद दोनों रुके ।
वीर ने मेरी कमर उठाकर मुझे कुतिया बना दिया और लंड सैट करके मेरी गांड में लंड पेलने लगा.
वीर अपना पूरा लंड मेरी गांड में घुसा कर मुझे चोदने लगा. वो जोर-जोर से करीब दो-तीन मिनट तक मेरी गांड चोदता रहा. मैं भी अपनी कमर उठाने लगी
वीर के हटने के बाद अब सोम में भी मेरी गांड मारी।
फिर से वीर में मेरी चूदाई की पर इस बार गांड नही चुत मारी मेरी , और इस के बार सोम ने भी चुत मारी मेरी ।
फिर अचानक वीर ने अपनी स्पीड बढ़ा दी और बोला मज़ा आ गया तेरी चुदाई करके और पिचकारी छोड़ दी और हाँफते हुए ढेर हो गया।
अब सोम भी झड़ने वाला था, तभी वीर का लन्ड मेरी गांड से निकल गया था।
तभी सोम ने मुझे चित लिटाया और अपनी गति बढ़ा दी। इधर मैं भी कमर हिला हिलाकर पूरा साथ दे रही थी।
सोम बोला- जूली तू बहुत मस्त है कहकर झड़ गया।
मैंने टाइम देखा तो 4:30 बज चुके थे मैं फिर से सो गई।
6:00 बजे मेरे मोबाइल का अलार्म बजा, मैंने तो अपने कपड़े पहने और होटल रिसेप्शन पर आकर अपनी चाबी दे दी जब तक मेरी बुक की हुई ओला बाहर आ चुकी थी।
ओला में बैठने के कुछ देर बाद में सो गई मेरी आंख जब खुली तो मैं अपने फ्लैट पर पहुंच चुकी थी।क्योंकि आज संडे था तो मैंने पूरे दिन आराम किया।
आप मेरे साथ बने रहिए और इस हॉट सीमा 2 हार्ड सेक्स कहानी पर किसी भी प्रकार की राय देने के लिए आप मेल पर मुझसे संपर्क कर सकते हैं.

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