होली पर हुई भाभी की सामूहिक चुदाई की कहानी

ये मेरी एक दोस्त की कहानी है, जो उसके साथ हुआ था उसने मुझे बताया था. तो मुझे लगा की आप लोग भी इसका मज़ा ज़रूर ले. उसकी स्टोरी उसी के मूह से सुनिए. मेरी दोस्त का नाम रश्मिता है, प्यार से रश्मि भाभी भी कहते है उसको.

ही ऑल, मैं रश्मि भाभी. ये इसी साल होली की बात है, जब मेरे पति किसी काम से बाहर थे, और घर नही आ पाए. वैसे मैं अपने बारे में बता डू, की मेरी आगे 28 की है, और फिगर 36-32-36 है, और रंग गोरा है.

मेरे घर में मेरी सासू मा रहती है, और मेरे पति ज़्यादातर बाहर ही रहते है. इस बार होली मैं भी वो आए नही थे. फिर गाओं के 3 लड़के होली लगाने हमारे घर आ गये मनोज, आर्यन, सौम्या नाम था उनका.

तीनो हॉट आंड हॅंडसम भी थे. मेरी सासू मा बाहर गयी थी होली खेलने अपने रिश्तेदार के घर, तो मैने उन सब को आने दिया, ताकि होली का मज़ा मैं भी ले साकु. फिर आगे-

मनोज: रश्मि भाभी, आए है तो रंग तो लगा के जाएँगे आपको.

तब मैं चुप रही, और मेरी खामोशी देख के तीनो ने मेरे पे मानो हमला ही कर दिया हो. मनोज मेरे गाल पे रंग लगा रहा था, और आर्यन मेरी बॅक पे, और सौम्या मेरे हाथो पे.

आर्यन: भाभी आज तो क़यामत लग रहे हो.

सौम्या: भाभी को पकड़ मैं कमर पे भी तो लगौ.

मनोज: घर में कोई है नही भाभी, आज मज़ा आएगा.

मैं बोली: जो करना है आराम से करो. मुझे दर्द हो रहा है.

इतने में मनोज मेरा पल्लू खींच के मेरे 36″ साइज़ के बूब्स को ब्लाउस के उपर से ही रंग लगाने लगा, और मसालने लगा.

फिर सौम्या मेरी कमर पे रंग लगते-लगते कब एक बूब को पकड़ के दबाने लगा, मुझे कुछ पता ही नही चला.

आर्यन ने फिर मेरी सारी खोलने की कोशिश. लेकिन मेरे माना करने पर वो तोड़ा झीजक गया. पर मनोज और सौम्या ने खींच के सारी उतार दी.

मनोज: भाभी मेरा दोस्त सच में लकी है, जो तुम्हारी जैसी गड्राई माल से शादी की उसने. तोड़ा सा मज़ा हम भी लेंगे आज तो.

सौम्या मनोज के इतना बोलते ही मेरे होंठो पे किस करने लगा, और आर्यन और मनोज दोनो मेरे बूब्स को दबा रहे थे.

आर्यन: भाभी साइज़ क्या है सच बोलना?

मे: 36″ के बूब्स है. धीरे दब्ाओ इससे दर्द कर रहा है.

तब तक मैं सिसकारियाँ भर रही थी. मुझे पूरी नंगी करने के बाद तीनो ने मेरे पे आचे से कलर लगाया, और मुझे होली की पिचकारियों से नहला भी दिया.

फिर मैं घुटनो में आ गयी, और सब की पॅंट्स उतार के बारी-बारी सब का मूह में लेके चूसने लगी. फिर इतने में-

मनोज: भाभी जी, ज़रा टाँग तो खोलो.

ये बोल के वो मेरी छूट रगड़ने लगा, और छूट चाटने भी लगा.

आर्यन अभी भी मेरे मूह में अपना 7 इंच का लंड फसाए हुए था, और चुस्वा रहा था. सौम्या मेरे बूब्स के साथ खेल रहा था और चूस भी रहा था.

फिर इतने में मनोज ने अपना लंड छूट के मूह में रखा, और एक ज़ोरदार झटके के साथ मेरी छूट में उसने लंड उतार दिया. इससे मेरी ज़ोरो से चीख निकल गयी-

मे: आहह मा, मॅर गयी.

उसका लंड बड़ा ज़्यादा नही था, और 6 इंच का ही था. लेकिन मोटा बहुत ज़्यादा था. उसके छोड़ते ही आर्यन अपना 7 इंच का लंड लेके मेरी गांद में तोड़ा सा थूक डाल के रेडी हुआ.
इससे मुझे पता चल गया, की उसका इरादा क्या था. फिर मैं माना करने लगी, और चिल्लाने लगी. इतने में सौम्या ने मेरे मूह अपना 7 इंच का लंड तूस दिया, और मैं कुछ बोल भी नही पाई.

आर्यन ने फिर एक बार में ही अपना लंड मेरी कुवारि गांद मैं उतार दिया. जिसके कारण बहुत ज़्यादा दर्द हो रहा था, और उपर से खून भी आ रहा था. वो बेरहमी से मुझे छोड़े जेया रहा था, और मनोज बिना रुके छूट की चुदाई करे जेया रहा था.

सौम्या ने फिर मनोज को इशारा किया, और आयेज आके छूट में अपना लंड तूस दिया. अब तक तो मैं सिसकारियाँ भर रही थी, और मज़े भी ले रही थी. और मनोज आके मेरे बूब दबा कर मेरा मूह छोड़ने लगा.

इतने में मनोज के लंड का पानी गिर गया, और वो मेरे मूह में ही झाड़ गया और मैं भी रंडी की तरह उसका सारा लंड का रस्स पी गयी. मैने उसका लंड सॉफ भी कर दिया.

आर्यन गांद छोड़ते-छोड़ते झड़ने वाला था और वो आके मेरे मूह के पास खड़ा हो गया. फिर सारा पानी पिचकारी जैसे मेरे मूह में डाल दिया, और लंड मेरे मूह में तूस दिया. उसके बाद वो बोला-

आर्यन: चल साली भाभी, रंडी बन और आचे से मेरे लंड को सॉफ कर.

और मैं वैसे ही चूड़ते-चूड़ते मुश्किल से उसके लंड को सॉफ कर पाई. चूड़ने की वजह से कभी-कभी उसका लंड मेरे गले तक उतार जाता, पर मैने सॉफ कर दिया था उसका लंड. सौम्या अभी भी छोड़ रहा था, जब की बाकी दोनो मेरे बूब्स दबा रहे थे, और बोल रहे थे-

मनोज: और भाभी जी, कैसा लगा हमारा लंड. तुम्हारे पति से बड़ा है या छ्होटा?

मे: बड़ा है.

आर्यन: हमने सॅटिस्फाइ किया या भैया करते है.

मे (बेशर्मी से): तुम लोगों ने.

सौम्या: तो ये ले साली कुटिया, रंडी, कमीनी, तेरी छूट में मेरी पिचकारी निकल रही है, ले.

ये बोल के उसने मेरी छूट में ही अपना सारा पानी छ्चोढ़ दिया, और मैं चिल्ला रही थी, और साथ में मैं भी झाड़ गयी. ये मुझे भी पता नही, की मैं कितनी बार झाड़ गयी थी. लगभग 3 या 4 बार शायद.

हर बार मेरे झड़ने के टाइम लंड मेरे मूह में होने की वजह से मैं खुल के साँस भी ले नही पा रही थी. करीब 1 अवर हो चुका था. वो सब मुझे ऐसे ही छोड़ रहे थे.

फिर सब का पानी निकालने के बाद वो लोग चले गये, और बोल कर गये की “कभी भी भाभी कुछ भी ज़रूरत हो तो याद करना हमे. हम आपकी सेवा में हाज़िर है, छूट से लेके घर के हर काम में हम मदद करेंगे”.

फिर उस दिन मैं चुदाई के वजह से बहुत तक चुकी थी, और मुझे कुछ समझ नही आ रहा था आक्चुयल में हुआ क्या. पर मैं तब तक छुड़वा चुकी थी गाओं के 3 लड़को से, और मेरे मॅन में एक अजीब सी खुशी थी.

तो कैसी लगी मेरी ये कहानी ज़रूर फीडबॅक देना. फिर मैं अपने साथ हुई सारी घटनाए आपको बतौँगी. इस साइट के मध्यम से आप मेरी लाइफ की स्टोरी ज़रूर पढ़िएगा और फीडबॅक दीजिएगा.

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