हवासी लड़की को ट्रेन के बातरूम में चोदा

मेरा नाम विकी है. मैं 24 साल का हू, और इंडोरे में जॉब करता हू. मेरी बॉडी ठीक-ताक है. मेरे लंड का साइज़ 8.5″ लंबा और 3″ मोटा है. अक्सर टाइट जीन्स या पंत के अंदर वो खड़ा हो जाए तो बाहर से सॉफ दिखाई देता है. इसी कारण कॉलेज के वक़्त से मेरे फ्रेंड्स मुझे चिढ़ते भी थे.

कॉलेज के वक़्त मेरी एक गर्लफ्रेंड थी, और फाइनल एअर के लास्ट सेमेस्टर में मैने उसे बहुत ज़्यादा छोड़ा था. मैं तोड़ा हॉर्नी और तारक से भरा हुआ रहता हू. जब भी कोई मौका मिलता है, मैं उसको झपट लेता हू. अब हमारा ब्रेक-उप हो चुका है, और तभी से मैं टिनडर, ग्राइंडर पर मिली लड़कियों की चुदाई करता हू.

इस डिसेंबर ऑफीस में ज़्यादा काम नही था और काफ़ी लोग छुट्टी पर थे. तो मैने भी एक सोलो ट्रिप प्लान की थी. मैं ट्रेन से गोआ जाने वाला था. वाहा एक हफ़्ता रुक कर फिर वापस आने वाला था. मैने ट्रेन पकड़ी, और चल पड़ा. कुछ देर बाद मेरे कॉमपार्टमेंट में एक फॅमिली आई जिसमे काफ़ी सारे बच्चे थे, और सिर्फ़ एक नौ-जवान लड़की थी.

मैं लोवर सीट पर लेता था, और बाकी सब बच्चे बाकी सीट्स पर सो गये. मेरे बगल वाली सीट पर वो लड़की लेट कर मोबाइल चला रही थी. रात हो गयी, और करीब एक-डेढ़ बाज गया. मेरे अंदर की हवस बढ़ने लगी थी.

फिर मैने चादर के अंदर मोबाइल पर पॉर्न देखना शुरू किया, और हल्के हाथो से लंड को हिलने लगा. कुछ देर बाद मैने चादर हटाई तो देखा की वो लड़की मुझे ही देख रही थी. पहले मुझे शरम आई, तो मैने सोने का नाटक किया. पर कुछ देर बाद मैने जब उसकी और वापस देखा, तो उसने भी अपना हाथ अपनी सलवार के अंदर डाल कर रखा था.

एक हाथ से वो अपने बूब्स और दूसरे हाथ से छूट सहला रही थी. मुझे उसे देख कर मज़ा आने लगा था. मैने भी अपना लंड पकड़ा, और हिलने लगा. हम दोनो की नज़रे मिली. मैं मुस्कुराया तो वो भी मुस्कुराइ.

फिर हम दोनो ही एक-दूसरे को देख कर मास्टरबेशन करने लगे. पूरी बोगी में सब लाइट बंद करके सो गये थे, और हमारे कॉमपार्टमेंट में तो सब बच्चे थे, जो कब के सो चुके थे. मेरी तो जान निकली जेया रही थी.

मैने अपना लंड हिलना बंद किया, और मैने उस लड़की को इशारा किया की वो मेरी सीट पर आ जाए. मुझे दर्र लग रहा था की वो लड़की कैसे रिक्ट करेगी. पर सब ठीक था. उसने कुछ वक़्त तक सोचा, फिर इधर-उधर सब को देखा की सब सोए थे की नही.

फिर वो मेरी सीट पर आके बैठ गयी. मैने उसका हाथ पकड़ा, और उसको मेरे उपर खींच के लिटा लिया. उसके बूब्स मेरी छ्चाटी को चिपक गये थे. मेरी गर्लफ्रेंड से बड़े बूब्स थे उसके. मैने उसके बाल पकड़े, और उसके होंठो पर अपने होंठ रख दिए.

उसने माना नही किया, और मैं उसके होंठो का रस्स पीने लगा. मैने कस्स कर चूमा तो उसने भी मेरा साथ दिया किस्सिंग में. पता ही नही चला की कब हमारी नॉर्मल चुम्मि फ्रेंच किस में बदल गयी. मुझसे अब रहा नही जेया रहा था. तो मैने उसे दीवार की और तोड़ा झुकाया, और एक हाथ से उसके बूब्स कपड़ों के उपर से ही दबाना लगा.

कुछ देर बाद उसने मेरा साथ दिया. अब वो दीवार की तरफ एक साइड लेट गयी, और मैं उसी सीट में अड्जस्ट होके उसके बाजू में लेता हुआ था. ट्रेन की सीट बहुत छ्होटी महसूस हो रही थी. इसलिए मैने उसे अपने से चिपका लिया. मैने फिर उसकी सलवार के अंदर हाथ डाला, और धीरे-धीरे उसके पेट को सहलाते हुआ उपर उसके ब्रा तक पहुँचा.

अब और रहा नही जेया रहा था. तोड़ा ज़ोर लगाया और ब्रा को अंदर ही फाड़ दिया और उसके नंगे बूब्स को हाथो में लेके दबाने लगा. आए हाए! क्या मस्त सॉफ्ट-सॉफ्ट बूब्स थे. दबाने का मज़ा ही आ रहा था. उसने भी मुझे उसके बूब्स दबाने दिए.

फिर मैने उसे दीवार की तरफ मूह करने को कहा. वो पलट गयी. मैने उसकी सलवार का नाडा खोला, और अंदर हाथ डालने लगा.

वो बोली: कोई आ जाएगा.

मैं बोला: बस थोड़ी देर, बस टच तो करने दो.

वो मान गयी. मैने वक़्त ना गावते हुए उसकी सलवार के अंदर चड्डी के अंदर सीधा हाथ डाल दिया. हल्की झाँते महसूस कर पा रहा था मैं. पर झांतो से होते हुए मैने उसकी छूट पर हाथ रखा, और सहलाने लगा. उसकी छूट पहले से ही गीली हो चुकी थी. उसकी गीली छूट अपने आप में ही किसी लूब्रिकॅंट का काम कर रही थी.

मैं पहले एक दो उंगलियों से उसकी छूट में अंदर-बाहर करने लगा, और वो भी एक पैर उठा कर मुझसे हस्तमैथुन करवा रही थी. कुछ वक़्त तक मैने ऐसे ही किया. मेरा मॅन तो उसकी छूट मारने का कर रहा था. उसने उसके बाद मेरे लंड को पंत के उपर से पकड़ा. मैने झट से अपनी पंत का बटन और ज़िप खोली, और उसका हाथ पकड़ कर खुद ही अपनी पंत में डाल दिया.

उसने मेरा पहले एक हाथ से पकड़ने की कोशिश की, और हिलना चाहा. पर मेरा लंड उसके नाज़ुक हाथो से बड़ा था, तो उसने दोनो हाथो से मेरा लंड पकड़ा और हिलने लगी. उसकी इस हरकत से मेरी हवस और बढ़ गयी. मैने उसे कहा की अब रहा नही जेया रहा चलो बातरूम चलते है और अपनी आग बुझते है.

फिर मैं उसे लेकर बातरूम की और गया. पहले वो अंदर चली गयी. सब सो रहे थे, तो पीछे से मैं भी अंदर चला गया. जगह ना के बराबर थी, तो मैने उसे सीट पर बिताया, और उसका सलवार और पनटी उतारी. फिर बिना वक़्त गवाए मैने अपनी पंत और चड्डी नीचे की. मेरा लंड इतना बड़ा था, की उसको देख कर वो दर्र गयी, और उसने करने से माना कर दिया.

मैने उसे जैसे-तैसे मनाया और अपना लंड उसकी छूट पर सेट किया. धीरे-धीरे धक्के दे कर मैं लंड अंदर डालने लगा. थोड़ी दिक्कत हुई, पर बाद में आधा, और फिर पूरा लंड अंदर गया. पर दर्द के मारे चिल्लाने की आवाज़ उसके मूह से निकल गयी. मैने उसे कस्स कर किस किया, ताकि उसकी आवाज़ ना निकले.

फिर मैने ऐसे ही उसे छोड़ना शुरू किया. रात में ट्रेन की स्पीड बढ़ी और ट्रेन के झटको से मेरी चुदाई की स्पीड भी अपने आप बाद गयी. ना चाहते हुए भी मैं उसकी छूट ज़ोर-ज़ोर से मारने लगा. 15-20 मिनिट की चुदाई के बाद मैने वही पर अपना कम निकाला.

पर मॅन अभी भी नही भरा था. मैने उसकी सलवार और बाकी सब उतार कर उसको नंगा किया और मैं भी नंगा हो गया. उसे नंगा देख कर मैं जानवर की तरह उसके शरीर पर झपटा. कभी उसके लिप्स, शोल्डर, और पेट पर चूमता, तो कभी उसके बूब्स दबाता और मूह में लेता. तो कभी उसकी जांघों पर टच और उसकी छूट सहलाता. और कभी ज़ोर से उसकी गांद पर थप्पड़ मारता.

वो भी कुछ कम नही थी. वो भी मेरे छ्चाटी, निपल्स, लिप्स और फेस पर चूमती और मेरे लंड को हिलती. मेरी बॉल्स के साथ खेल रही थी वो. कभी वो मेरी गांद को दबाती. हमने करीब एक-डेढ़ गणता बातरूम में नंगे बिताया, और फिर अपनी सीट्स पर वापस आ गये.

मेरी गोआ की शुरुवत ही इतने ज़ोरदार एक्सपीरियेन्स के साथ हुई थी. तो मैने अब तान लिया था की पुर ट्रिप में जाम कर चुदाई करूँगा. सुबा मैं गोआ पहुँचा.

अगर आपको ये कहानी अची लगी तो [email protected] पर ज़रूर अपनी प्रतिक्रिया भेजे. आइडेंटिटी सेफ रहेगी आपकी तो संकोच ना करे. और इसका अगला पार्ट मैं जल्द लौंगा.

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