ग्वालन की मसालेदार फुददी

हैल्लो दोस्तों मेरा नाम दीपक है और में राँची (झारखंड) का रहने वाला हूँ। यह मेरी पहली कहानी है.. लेकिन मैंने इस साईट पर बहुत सी सेक्सी कहनियाँ पढ़ी है जो कि मुझे बहुत अच्छी लगी और में इस साईट पर बहुत लम्बे समय से हूँ। दोस्तों अगर मुझसे इसमें कोई ग़लती हो जाए तो प्लीज मुझे माफ कर दीजिएगा। में अब अपनी स्टोरी पर आता हूँ.. दोस्तों यह बात आज से एक साल पहले की है.. उस समय मेरी उम्र 20 साल थी। में अपने घर पर पापा मम्मी के साथ रहता हूँ और हमारे पास तीन गाय है और उन गायों की देखभाल के लिए हमारे यहाँ पर एक ग्वाला आया करता था। जो उन तीनो गायों का दूध निकाल कर बैचने जाया करता था और उससे जो पैसा आता था.. उसमे से कुछ हिस्सा वो हम लोग को देता था और उसकी बीबी भी कभी कभी हमारे घर पर आकर उन गायों के गोबर को उठाकर अपने घर ले जाया करती थी और उस गोबर को अपने काम में लेती थी।

एक दिन ग्वाला हमारे घर पर आया और पापा से कहने लगा कि वो दो हफ्ते के लिए बाहर किसी रिश्तेदार के यहाँ पर शादी में जा रहा है। तो हम उन गायों की देखभाल के लिए दूसरे कोई ग्वाले को ढूंड लें.. लेकिन पापा ने दूसरे ग्वाला के लिए मना कर दिया और कहा कि जब तुम वापस आ जाओगे तो फिर से तुम ही दूध बैचना शुरू कर देना। फिर उसी शाम को पापा के पास एक कॉल आया.. जो कि दिल्ली से मेरे मौसाजी का था। तो मौसाजी कहने लगे कि मौसीजी की तबियत कुछ ज़्यादा ही खराब हो रही है। फिर पापा और मम्मी अगले ही दिन फ्लाईट से दिल्ली चले गये। तो अब घर में बस में अकेला उन तीन गायों के साथ रह गया था। फिर पापा ने दिल्ली पहुंचने के बाद मुझे कॉल किया और कहा कि वो लोग एक सप्ताह बाद वापस आ जाएँगे और पापा, मम्मी को गये हुए तीन दिन बीत गये थे और उन तीनो गायों के गोबर से पूरे घर का माहोल महकने लगा था।

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तो मैंने सोचा कि क्यों ना में गौशाला जाकर कोई ग्वालन को बुलाकर साफ करवा दूँ और में गौशाला की और जाने लगा। फिर जब में गौशाला पहुंचा तो वहाँ पर देखा कि एक ग्वालन गोबर उठा रही थी और मैंने उसके पास जाकर अपनी कार रोक दी और फिर में कार से उतरा और उसके पास गया। तो देखा कि वो लगभग 35 साल की थी.. उसका नाम उमा देवी था और उसका फिगर लगभग 40-38-42 का होगा.. उसका बदन गठीला था और बूब्स बड़े बड़े थे। साड़ी का पल्लू दो चूचीयों के बीच से निकला हुआ था और उसे वो कमर में फसाए हुए थी और उसका आधा बूब्स तो ब्लाउज से बाहर था। उसने ब्रा भी नहीं पहना हुआ था और जब मेरी बूब्स से नज़र हटी तो नाभि पर गई और उसका पेट बिल्कुल साफ दिखाई दे रहा था और उसके उस टाईम काम में व्यस्त होते हुए वो अपनी साड़ी और पेटिकोट अपनी जाँघ तक उठाकर कमर में फंसाए हुए थी.. जिसके कारण उसकी साड़ी नाभि से लगभग तीन इंच सरक गई थी और यह सब देखकर मेरा लंड खड़ा होने लगा था।

फिर मैंने उसको बताया कि मेरे घर में तीन गाय है और उनका गोबर उसको साफ करना। तो वो कहने लगी कि वो गोबर साफ करने का पैसा लेगी और फिर वो 500 रुपय में मान गई और मेरे साथ मेरे घर आ गई। फिर मैंने उसको वो जगह दिखाई और दो बोरियां दे दी और मैंने उससे कहा कि में ड्रेस चेंज करके आता हूँ। फिर में अपनी ड्रेस चेंज करने चला गया और मैंने अपनी जीन्स और टी-शर्ट उतार कर सिर्फ़ लुंगी बांधकर चला आया। तो उसने मुझे देखा और पूछा कि तुम्हारी टी-शर्ट कहाँ है? मैंने कहा कि आपकी मदद करते वक़्त गोबर लग जाता इसलिए मैंने उसे उतार दिया। फिर मैंने अपनी लुंगी को घुटनो तक उठाकर कमर में बांध लिया था और उसने भी अपनी साड़ी कमर में बाँध ली थी। में बोरी पकड़कर खड़ा था और वो गोबर बोरी में डालती जाती और जब तक वो काम कर रही थी तब तक में उसके बड़े बड़े बूब्स और गहरी नाभि को देखता और दो बोरी भरने तक मेरा लंड खड़ा हो चुका था और में अब इस ग्वालन को चोदना चाहता था। फिर उसने भी मेरी लुंगी में बने टेंट को देख लिया था.. लेकिन वो कुछ नहीं बोली और सारा काम खत्म हो जाने के बाद मैंने उसे घर के अंदर बुलाकर हाथ पैर धोने को कहा। जब वो हाथ पैर धोकर बाहर आई तो मैंने उसे टावल दिया और उसने अपने हाथ पैर साफ किए।

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फिर वो अपनी साड़ी को ठीक करने लगी तो मैंने उससे कहा कि अंदर शीशा लगा हुआ है.. आप वहाँ पर जाकर ठीक कर लो.. लेकिन उसे पता नहीं था कि कौन से रूम में जाना है। तो में उसे रूम तक ले गया और मैंने सोच लिया था कि आज इसको चोदकर ही छोडूंगा। फिर मेरा लंड लुंगी के अंदर तना हुआ था और बाहर आने को बैताब था और जब वो शीशे के पास खड़ी होकर अपनी साड़ी ठीक करने लगी तो मुझे उसकी गोल गांड को देखकर रहा नहीं गया और फिर मैंने पीछे से जाकर अपना लंड उसकी गांड में सटा दिया और उसके पेट को कसकर पकड़ लिया ताकि वो भाग ना पाए। फिर वो मेरी इस हरकत से चौंक गई और अपने आपको मुझसे छुडवाने की कोशिश करने लगी.. लेकिन मेरी पकड़ इतनी मजबूत थी कि वो छुड़ा ना पाई और कोशिश करते करते थक गई और वो सुस्त होने लगी थी। तभी में उसकी गर्दन को चूमने लगा और चूमते चूमते मैंने उसको कहा कि ज़ोर लगाने से कोई फायदा नहीं है और यहाँ पर आपको कोई सुनने वाला भी नहीं है क्योंकि मेरा घर बहुत सुनसान जगह पर है और फिर मैंने कहा कि आज आपको चोदे बिना में जाने नहीं दूँगा और आपकी भलाई इसी में है कि आप अपने सहयोग से चुदवा लो.. किसी को कुछ भी हमारे बारे में नहीं पता चलने वाला है।

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