घर के पास के आंटी की चूत चुदाई

दोस्तों यह बात आज से एक साल पहले की हे. जब में कोलेज में था. कोलेज घर से दूर होने की वजह से मुझे कोलेज के पास एक कमरा किराये पर लेना पड़ा. मेरी बिल्डिंग में ५ घर और थे. मुझे कुछ आयडिया नही था के कोन से घर कोन रहता हे. एक दिन शाम को में अपनी बिल्डिंग से बहार निकला तो मुझे एक आंटी दिखी. अपने से दो घर छोड़ के खड़ी हुई कपडे सुखा रही थी. पहली नजर में तो वो मुझे ज्यादा खास नही लगी. लेकिन मुझे क्या पता था की अन्दर से वो इतनी गरम निकलेगी.

खेर उस दिन तो मेने कुछ सोचा नही की में कभी इनकी चूत में अपना लंड भी डालूंगा.

कुछ दिन बाद की बात हे. बहोत तेज बारिश हो रही थी. तो में कुछ देर के लिए जाकर अपने रूम के पास बहार बरांडे में खड़ा हो गया. मुझे अचानक पीछे से आवाज आई. सुनो बेटा मैने पीछे देखा ओर वो आंटी मुझे अपने पास बुला रही थी.

में उनके पास गया. ओर उनसे पूछा क्या हुआ आंटी तो वो बोली की उसने कहा की उनके घर की चावी खो गई हे कही मार्केट में, ओर उनके पास सामान भी काफी था. दिन का टाइम था. सब घर में सो रहे थे. इसलिए में दिखा तो उन्होंने मुझे ही बुला लिया. उन्होंने मुझसे अपना सामान थोड़ी देर के लिए घर पर रखने को बोला. और कहा की वो इतने में चावी वाले को बुलाकर लाती हे. और वो चावी बना देगा. फिर उनका घर खुल जायेगा.

मेने आंटी से कहा की वो मेरे रूम में बेठ सकती हे. और बारिस रुकते ही चावी वाले को लेकर में आ जाऊंगा. क्योकि बारिश में वैसे भी कोई नही मिलता.

आंटी थोडा हिचकिचाई पर थोडा इंसिस्ट करने पर वो मान गई. थोड़ी देर बाद बारिश रुकी, तो में पास ही में एक चावी वाला था. उसको बुला कर लेकर आया. और आंटी के घर का ताला खुल गया. और आंटी ने मुझे थेंक यु बोला. और चाय पिने के लिए आने को कहा. पर में थोडा शर्मिला हु. तो इसलिए मेने मना कर दिया. आंटी ने थोडा और इंसिस्ट किया. पर मेने फिर भी मना किया. तो वो बोली की ठीक हे. लेकिन इस सन्डे में खाना उनके ही घर पर खाऊंगा ये भी कहा.

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फिर हमारी अच्छी बातचीत होना सुरु हो गई. और अनु और में काफी घुल मिल गये. वो मुझे कभी कोई काम होता तो बेजिजक बता देती थी. उनके पति इंजीनियर थे. और काम के सिलसिले से बहार ही रहते थे. और मुस्किल से २-३ बार घर आते थे. आंटी के २ बेटे थे. और वो हॉस्टेल में थे. तो वो अकेली ही रहती थी घर पर. उम्र उनकी थी ३९ साल. रंग थोडा सावला और थोडा गोल शरीर. ऐसे ही एक शाम को अनु ने मुझे चाय पिने के लिए बुलाया. अब हमारी अच्छी बात होती थी. तो में चला गया. हम दोनो दोस्त जेसे थे.

में उनके घर गया. और सोफे पर जा कर बेठ गया. और टीवी देखने लगा. और वो किचन में चाय बनाने चली गई. थोड़ी देर बाद कुछ गिरने की आवाज आई. और आंटी के चीखने की. में तुरंत किचन में गया. तो देखा की आंटी से चाय का तपेला गिर गया था. और गरम गरम चाय उनके पैर पर गिर गई थी. जिससे उनको जलन होने लगी. में तुरंत निचे जुका और अपने रुमाल से चाय साफ करी. उनको दर्द हो रहा था. थोडा सहारा लेकर अपने रूम में गई. और मेने उनको बिस्तर पर बिठा दिया. उनको काफी जलन हो रही थी. तो मेने कहा में पास ही केमिस्ट से बरनोल लेकर आता हु. आप थोड़ी देर रुको और में फट से बरनोल लेकर आ गया.

मेने आंटी से बोला की आंटी में बरनोल लगा देता हु. तो वो मना करने लगी. लेकिन में नही माना. और अपने हाथ पर क्रीम निकालकर रखली. मेने उनके पैर को हलकासा छुआ. तो वो गुदगुदी के मारे उनको पीछे कर रही थी.

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मेने हलके हाथो से क्रीम उनके पैर पर लगाई. लेकिन उनकी सलवार में लग रही थी तो मेने आंटी को कहा की आपकी सलवार गन्दी हो रही हे. तो उन्हों ने थोडासा ऊपर उठाया. और मेने बाकि जगह क्रीम लगा दी. जब मेने क्रीम लगा दी और आंटी तरफ देखा तो उनकी आँखे बंद थी. में समज गया की आंटी मुड में आ रही हे. मेने अनु से पूछा क्या हुआ. तो उन्होंने कहा कुछ नही.

फिर मेने आंटी से कहा की आज वो मेरे यहां खाना खाए. में हम दोनो का बना दूंगा. और वो मान गई. शाम हो चुकी थी. मेने भी घर जाकर आपना रूम साफ किया. और टेबल लगाया. शाम को ८:३० अनु ने मेरे घर की घंटी बजाई.

वो नाईटी में थी. रेड कलर की नाईटी ओर मलमली कपडा देखकर में हेरान रह गया. मुझे समज नही आया और में उनको ऊपर से लेकर निचे तक देख रहा था. में उनसे पूछ ना ही भूल गया अंदर आने को, और उन्होंने मुझसे फिर कहा कहा घूरते रहोगे या अन्दर भी बुलावोगे.

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