दादी गलती से ओर मम्मी की जबरदस्ती चुदाई

दोस्तो मैं समीर और मैं बिहार के शिवहर गाँव का रहने वाला हूँ !जहाँ हमारा छोटा सा दो कमरे वाला घर है एक मे मैं, मम्मी (सरला) जो कि 35 ,पापा (सुनील)39, और मेरी दादी(नीलम)48 साल की रहती है ओर दूसरे कमरे में खाना बनाते है। मेरी मम्मी साँवली ओर दादी एक दम गोरी है। ये कहानी तब की है जब गाँव मे पैसे की कमी की वजह से पापा दिल्ली काम करने चले गये तो घर मे मैं ही अकेला मर्द रह गया था उस समय मैं 21साल का था पैसे ना होने की वजह से मेरा पढ़ाई भी छूट गया और गाँव के लड़कों के साथ काम पर जाने लगा था। मम्मी भी काम पर जाती थी और दादी घर पर ही रहकर खाना बनाती थी।

गाँव के लड़कों के साथ रह रह के मैं बिगड़ गया था दोस्त मुझे रोज ब्लू फ़िल्म दिखाते थे ओर रोज मैं रात में घर के पीछे जाके मूठ मारने लगा था जिस वजह से मेरा लंड 9इंच लम्बा ओर4 इंच मोटा काला हो गया ।घर मे मेरी मम्मी जो गदरायी बदन की रानी थी इनके स्तन ओर गांड बहुत बड़ी बड़ी है और पेट थोड़ा बाहर निकला हुआ है जिस कारण मम्मी साड़ी हमेशा नाभि से निचे बांधती है और दादी के स्तन लटके हुए ओर गांड बहुत फैली हुई है । एक दिन दोस्तों ने बोला कि चल यार आज तालाब में औरतों को नहाते हुए देखेंगे बहुत मज़ा आएगा मैं भी हाँ बोल दिया और काम छोड़कर तालाब के किनारे छुप कर बैठ गए। कुछ समय बाद 4 औरतें आयी जिसे देखकर सभी के मन मे लड्डू फूटने लगे उन्होंने अपनी साड़ी उतारी ओर पेटिकोट ब्लाउज में पानी मे जाकर बैठ के रगड़ रगड़ कर नहाने लगे ये मेरे लिए पहली बार था कि किसी औरत को ऐसे हाल मे देखा मुझे बहुत मज़ा आया।

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अब ये मेरा रोज का काम हो गया काम की जगह तालाब के किनारे जाके बैठ जाता था।एक दिन ठेकेदार मेरे घर आया और मेरे मम्मी को बता दिया कि आपका लड़का काम पर नही आता है। मम्मी ने रात में दारू पीने के बाद खूब सुनाया – तेरा बाप वहाँ दिल्ली जाकर पैसे कमा रहा है ओर तू यहाँ खाली घूम रहा है कल से तू मेरे साथ काम पर चलेगा । सुबह मम्मी मुझे अपने साथ काम पर ले गयी जहाँ पर ईंट उठाना था।अब बहुत दिनों तक कोई आधा नंगा बदन देखने को नही मिला जिस वजह से मेरा हाल खराब होने लगा था ।एक दिन मम्मी मुझे ईंट ला ला कर दे रही थी ओर मै उपर रखते जा रहा था अब हाथ ऊपर करने में दर्द हो रहा था तो मम्मी बोली तू दे मैं रखती हूँ ।मैं ईंटा देने लगा तब मम्मी ने जैसे ही ईंट लेने के लिए झुकी उनका पल्लू गिर गया ओर उनका साँवला ओर गहरी नाभि वाला पसीने से लबालब नंगा उभरा पेट मेरे सामने आ गया मम्मी के बड़े बड़ भीगे हुएे स्तन देखकर तो मेरा लण्ड लहर मारने लगा।मेरी आँखें बड़ी हो गई मैंने पहली बार ऐसा नजारा इतने पास से देखा था।मन तो किया वही ऊपर चढ़ के चूची निचोड़ कर पेट चाट लू पर डर की वजह से बस देख कर ही काम चलाने लगा अब रोज मैं मम्मी को ऐसे देखता।

मेरी मम्मी शाम को काम खत्म होने के बाद मुझे रोज़ अकेले भेज देती थी कहती थी तू घर जा मैं दारू लेने जाउंगी। घर मे दादी और मम्मी दोनो रोज़ाना दारू पीती थी।एक दिन मैंने मम्मी को बोला मैं भी आपके साथ चलता हूँ तो मम्मी ने मुझे साफ साफ मना कर दिया।पर अब मुझे भी दारू चाहिए था साला दिन भर काम करके थक जाता था तो मैं मम्मी को जाने बोल दिया और फिर मम्मी का पीछा करने लगा। मम्मी खेत खेत से होते हुए एक छोटे से घर मे घुस गई बाहर अंधेरा हो गया था ओर अंदर एक बल्ब जल रहा था तो मैने सोचा कि ओह्ह यहाँ मिलता है दारू ओर उस घर की ओर चल दिया मैं जब गेट पर पहुँचा तो देखा गेट तो बन्द है और मम्मी अंदर क्या कर रही है। इतने में एक बाइक आया जिसमे दो आदमी थे । मैं तुरन्त घर के पीछे वाली खिड़की पर पहुँच गया जहाँ से अंदर का पूरा साफ दिख रहा था मम्मी मेरे तरफ पीठ करके बैठी हुई दरवाजे को देख रही थी। इतने में किसी ने दरवाजा खटखटाया। खट खट ,,सरला बेबी तो मम्मी ने झट से दरवाजा खोल दिया ,वो दोनो आदमी अंदर आ गए ओर उन्हें देख के मैं हैरान हो गया वो हमारे ठेकेदार थे एक धर्मेंदर ओर दूसरे का नाम रविंदर था। साला एक तो मोटे मोटे ऊपर से भैंस भी इन दोनों से गोरा लगता इतने काले थे ये।इन्होंने अपने हाथों में तीन देशी शराब के बोतल पकड़ रखे थे।अंदर आते ही रविंदर ने मम्मी को एक किस दिया जिसे देख के मेरे होश उड़ गए तब मुझे समझ आ गया कि क्यू मम्मी रोज़ देर से आती है।

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