एक घर की चुदाई कहानी 2

गतान्क से आगे………………………………… एक घर की चुदाई कहानी – 1

मैने लंड मा को दिखाते हुए बोला, तो मा ने कहा “बेटा लंड खड़ा रहेगा तो खुजली होगी ही” तो मैं बोला “मा क्या तुम्हारे भी खुजली होती है हां होती है” मा बोली, “क्यो क्या तुम्हारे भी टांका टूट ता है” मैने पूछा तो मा हँसने लगी और बोली “नही हमारे टांका-वांका नही होता है बस छेद होता है मा अब काफ़ी खुल कर बातें करने लगी थी, तो मैने जानबूझ कर अंजान बनते हुए मा की जाँघो के उपर से नाइटी का बटन खोल कर हटा दिया जिससे उनकी कमर के
नीचे का हिस्सा नंगा हो गया, और उनकी बुर को हाथो से छूते हुए कहा “आरएे हान्ं तुम्हारे तो लंड है ही नही लेकिन छेद कहाँ है ये तो बस फूला-फूला दिखाई दे रहा है और इसमे से कुछ बाहर निकल कर लटका भी है”, तो मा तुरंत मेरा हाथ अपनी बुर से हटा कर उसे ढँकते हुए बोली छेद उसके अंदर होता है तो तुम खुजलाती कैसे हो”मैने कहा, तो वो बोली “उसे रगड़ कर और कैसे” तो मैं बोला लेकिन मैने तो तुम्हे कभी अपनी नंगी बुर खोल कर सहलाते हुए नही देखा है
मा खूब तेज हंसते हुए बोली “बुर बुर ये तूने कहाँ से सुना मेरे दोस्त कहते है उनमे से कई तो अपने घर मे नंगे ही रहते है और सब औरतो की बुर देख चुके है” ये सुन कर मा बोली “अच्छा तो ये बात है तभी मैं कहूँ कि तू आज कल क्यूँ ये हरकते कर रहा है मैने हंसते हुए कहा “कौन सी हरकत तो मा मेरे लंड को हाथों से पकड़ कर हल्के से हिलाते हुए बोली “रात वाली और कौन सी जिस के कारण ये हुआ है खुद तो जैसे तैसे कर के सो जाता है और मुझे हर तरफ
से गीला कर देता” तो मैं हँसने लगा और कहा “तुम भी तो मज़े ले रही थी तबतक शायद मा की बुर काफ़ी गीली हो चुकी थी और खुजलाने भी लगी थी क्योकि वो अपने एक हाथ से नाइटी का थोड़ा सा हिस्सा जो केवल उसकी बुर ही ढके हुए था, (क्यों कि बाकी हिस्सा तो मैं पहले ही नंगा कर चुका था), हल्का सा हटा कर बुर से निकले हुए चंदे के पत्तियो को मसल्ने लगी, मा धीमे धीमे हंस रही थी पर कुछ बोली नही मा कितना अच्छा लगता है ना रात वाली हरकत दिन मे भी करे.
देखो ना मेरा लंड कितना फूल गया है और तुम्हारी बुर भी खुज़ला रही है प्लीज़ मुझे दिन मे अपनी बुर देखने दो ना और वैसे भी मैं अभी तो लंड तुम्हारे छेद मे डाल नही पाउन्गा मैने एक हाथ से अपने लंड को सहलाते हुए कहा और दूसरे हाथ से उसकी नंगी जाँघ को सहलाते हुए उसकी बुर के होठों को उंगलियों से खोलने लगा मा भी शायद बहुत गरम हो गयी थी और चुदवाना चाहती थी क्योकि उसने मेरा हाथ इस बार नही हटाया, पर शायद शर्मा रही थी और अचानक बात को
पलट ते हुए बोली अरे कितनी देर हो गयी खाना बनाना है और वैसे ही नाइटी बिना बंद किए हुए उठ कर किचन मे चली गयी, मैं भी तुरंत मा के पीछे-पीछे किचन मे चला गया और मैने देखा कि नाइटी का सिर्फ़ एक दो बटन ही बंद था बाकी सारा खुला हुआ था जिस के कारण उसकी चुचियाँ बाहर निकली हुई थी और नाभि से नीचे का पूरा हिस्सा पैरों तक एकदम नंगा दिख रहा थी मैं उन्हे पीछे से पकड़ कर चिपक गया जिससे मेरा लंड मा के चूतरों के बीच मे घुस
गया और बोला “मा तुम बहुत अच्छी हो” मेरे दोनो हाथ मा के नंगे पेट पर थे, मा बोली “अच्छ मुझे मस्का लगा रहा है” तो मैं हँसने लगा और धीरे धीरे अपना हाथ मा के पेट को सहलाते हुए निचले हिस्से की ओर ले जाने लगा, मा की साँसे तेज़ चल रही थी पर बोली नही, तो मेरी हिम्मत और बढ़ी और मैं ने अपना हाथ मा की बुर के उपर हल्के से रख दिया और उंगलियो से उनकी बुर हल्के हल्के दबाने लगा, पर मा फिर भी कुछ नही बोली,
मेरा लंड उत्तेजना की वज़ह से पूरा तना हुआ था, और मा की गांद मे घुसने की कोशिश कर रहा था, मा की बुर की चिकनाई मुझे महसूस होरही थी और चिकना पानी उसकी बुर से निकल कर जांघों पर बह रहा था, मैं उंगलियो को और नीचे की तरफ करता जा रहा था, तभी मेरी उंगलिया मा की बुर की पुट्तियों के टच करने लगा, मा बोली “तू बहुत बदमाशी कर रहा है” पर मैं बिना कुछ बोले लगा रहा और फिर एक हाथ से धीरे धीरे उसकी बुर के लटकते हुए चमड़े को सहलाने और
फैलाने लगा जब मैने देखा कि मा मना नही कर रही है तो मैं धीरे से दूसरे हाथ से मा की नाइटी को मा की कमर के पीछे कर दिया जिससे मा पेट के नीचे से एकदम नंगी हो गयी, मैं उत्तेजना के मारे पागल हो रहा था, मेरे लंड का सूपड़ा मा की नंगी चुतरो की फांकों मे धँस गया, फिर मैं की बुर से निकले लंबे चमड़े को फैला कर बुर के छेद मे उंगली डालने की कोशिस करने लगा, मा ने काम करना बंद कर दिया,
उनकी बुर से चिकने पानी की बूंदे टपकने लगी थी, मा भी अब मेरा साथ दे रही थी और नाइटी का बाकी बटन खोल दिया जिससे नाइटी नीचे गिर गई, अब मा और मैं पूरी तरह नंगे हो गये थे मैं पीछे से हट कर मा के सामने आ गया और मोढ़े पर बैठ कर मा की बुर को फैलाते हुए उनके बुर से बाहर लटकते हुए चमड़े को मूह मे भर लिया और चूसने लगा, मा ने मेरा सर पकड़ कर अपनी बुर से और सटा दिया उनके मूह से ओह्ह्ह आह की आवाज़े निकल रही थी,
मैने अपनी जीभ मा की बुर मे डाल दी और उन्हे तेज़ी से अंदर बाहर करने लगा, उनकी बुर का सारा नमकीन पानी मेरे मूह मे भर गया, मा ने भी मस्त हो कर अपनी जाँघो को और फैला दिया और कमर हिला-हिला कर बुर चटवाने लगी, कुछ ही देर मे मा मेरे मूह को जाँघो से दबाते हुए झर गयी पर मेरा लंड और ज़यादा तन गया था तभी मा मुझे खड़ा करते हुए खुद मोढ़े पर बैठ गयी और नीचे गिरी हुई नाइटी से मेरे सूपदे को पोछ कर मेरा सूपड़ा अपने मूह मे
भर लिया और मेरे चूतरो को अपने दोनो हाथों से दबाते हुए चूसने लगा और एक उंगली मेरी गांद के छेद मे डालने लगी, मैं तो जैसे सपनो की दुनिया मे पहुँच गया था, मा ज़ोर ज़ोर से मेरा लंड चूस रही थी और मैं भी लंड को उसके मूह मे अंदर बाहर कर रहा था, तभी मैने अपना कंट्रोल खो दिया और ओह्ह करते हुए मा के मूह मे ही झरने लगा, मा मेरे सूपदे को तब तक अपने मूह मे लिए रही जब तक मेरा वीर्य निकलना बंद नही हो गया,
हम दोनो कुछ देर तक वैसे ही बैठे रहे, फिर मा मुझ से प्यार करते हुए बोली “तूने आख़िर अपनी मनमानी कर ही ली” तो मैं बोला तुम्हे अच्छा लगा ना तो मा हँसने लगी और चाइ बनाने लगी, चाइ पीकर मैं किचन से बाहर आ गया और मा नंगी ही खाना बनाने लगी, फिर उसके बाद कुछ नही हुआ, दोपहर मे खाना खाते समय मा मेरे लंड को देखते हुए बोली “अभी वीनू के आने का टाइम हो गया है, आब तू लूँगी लप्पेट ले वरना वीनू को अटपटा लगेगा, रात मे सोते वक़्त
बेड पर फिर से लूँगी उतार कर नंगे सो जाना” हम दोनो उस समय तक नंगे ही बैठे थे, मैने मा से कहा कि “मा कपड़े पहनने का मन नही कर रहा है, अब तो घर मे नंगा ही रहूँगा, अब तो दीदी को भी नंगे ही रहने के लिए कहो लेकिन कैसे” मा बोली, तो मैं बोला “मुझे नही पता पर अब मैं नंगा ही रहूँगा और तुम भी नंगी रहो” मा बोली “ठीक है पर अभी तो कुछ पहन लो
फिर मैं लूँगी लप्पेट कर टीवी देखने लगा और मा भी नाइटी पहन कर काम करने लगी, जब दोपहर मे वीनू आई तो मुझे लूँगी मे बैठे देख कर मा से धीमी आवाज़ मे बाते करने लगी, और मैं मन ही मन उन दोनो को एक ही बिस्तर पर चोद्ने का प्लान बना रहा था. रात को मैं पूरा प्लान बना कर लूँगी उतार कर मा का इंतजार करने लगा, , कुछ देर बाद मा कमरे मे आई और दरवाजा बंद कर दिया फिर काम ख़तम करने के बाद बिना लाइट ऑफ किए नंगी हो कर बेड पर
लेट गई और मेरी तरफ करवट कर के मुझ से पूछा अब कैसा है मैं तो पहले से ही तैयार था तुरंत बात को पकड़ते हुए पूछा क्या वही” मा बोली, मैने कहा वही क्या इसका कोई नाम नही है क्या” “अच्छा बड़ा चतुर हो गया है तुझे नही पता क्या” और हँसने लगी, मैं बोला मुझे तो दोस्तो ने बताया है पर तुम सही नाम बताओ ना अच्छा पहले सुनू तो तेरे दोस्तो ने क्या बताया है मैने कहा लंड” ये सुनते ही मा की ज़ोर से हँसी छूट गई,
मैने मा के जाँघो को फैलाते हुए उनकी बुर की पुट्तियों को सहलाने लगा और पूछा “अच्छा ये बताओ ये जो तुम्हारी बुर से बाहर चमड़ा निकला है इसका क्या कहते है” तो मा बोली “तेरे दोस्त क्या कहते है” तो मैने कहा “छोड़ो ना दोस्तो को तुम बताओ इसे क्या कहते है तो मा ने कहा कुछ भी कह ले पट्टी पंखुड़ी पुट्ती तुझे अच्छी लगती है तो मैने कहा “हां अच्छा ये बताओ जब मैं तुम्हारी गांद मे लंड डाल रहा था तो दर्द होते ही तुमने मुझे मना क्यो नही किया
तो मा ने कहा “मुझे भी गांद मरवाने का मन कर रहा था” मैने आश्चर्या से पूछा क्या तो मा ने कहा “हां मेरी गाओं मे मेरे पड़ोस की चाची और उनकी लड़की जो एक दूर के रिश्तेदारी मे मेरी चाची और चचेरी बहन लगती थी, उसने बताया कि शादी के बाद उन्हे चुदाई के बारे मे ज़्यादा नही मालूम था, और उसका पति उसकी गांद मे ही अपना लंड पेलता था, बाद मे मेरी चाची यानी उसकी मा जो खुद भी बहुत चुड़दकड़ थी, उसने अपनी बेटी और दामाद को चुदाई
के बारे मे बताया, अब अक्सर वो सब साथ मे चुदाई और गांद मरवाने का मज़ा लेते है, उसी ने मुझे गांद मे लंड लेने का तरीका और मज़े के बारे मे बताया था उसकी दो लड़कियाँ है, जब तू बड़ा होगा तो मैं तेरी शादी उसी की बड़ी लड़की से करवाउंगी फिर हम सब भी साथ मे मज़े लेंगे अच्छा अब ये बता कि वीनू को कैसे पटाया जाए अब तो मैं भी एक भी दिन बिना तेरे लंड के नही रह सकती हूँ अब तो जब तक मेरी गांद मे तेरा लंड ना जाए मज़ा नही आए गा एक बार वीनू
पट जाए तो फिर तो मैं दिन भर गांद मरवाती और चुद्वाती रहूंगी उसके बाद तू चाहे तो तो वीनू को भी चोद लें फिर उसे भी अपनी बुर हाथ से नही रगरनी पड़ेगी तो मैं बोला “मैं जैसा कहता हूँ वैसा ही करती रहना वो अपने आप खुल जाएगी वैसे भी वो तुमसे ओपन्ली बाते करती ही है ना चुद्ने भी लग जाएगी तो मा ने कहा कि “हां हम ओपन तो है पर कभी चुदाई की बाते नही की है” तो मैने कहा कि “अच्छा कितना ओपन हो” तो मा मेरे लंड को सहलाते हुए बोली “पहले तो सिर्फ़
MC के समय पैड लगाने तक पर अब तो हम दोनो एक दूसरे के सामने नंगे ही कपड़े बदल लेते है कभी कभी मैं उससे बाल सॉफ करने वाली क्रीम माँग लेती हूँ झांतो को सॉफ करने के लिए मैं बाथरूम मे बुर पर क्रीम नही लगा पाती हूँ और कमरे मे लगाती हूँ तो वो कई बार देख चुकी है हम दोनो का एक दूसरे की बुर देखना नॉर्मल है कई बार जब वो खेल कर आती है और थकि होती है तो मैं उसकी मालिश कर देती हूँ वो भी उसे नंगा करके उसके जाँघो और चूतरो पर
भी उस समय मेरे हाथ उसकी बुर और गंद के छेद को भी छूते और मसल्ते है और वो भी कभी कभी मेरी मालिश करती है नंगा करके हां कभी-कभी जब मालिश के समय मेरी बुर खुजलाती है तो उसी के सामने मैं बुर मे उंगली करती थी तो उस समय उसने मुझे देखा है और मुझे ये भी पता है कि वो भी अपनी बुर मे उंगली डाल कर झड़ती है ना तो उसने कभी मुझे झाड़ा है और ना ही मैने बस हम दोनो को ये जानते है कि हम दोनो बुर मे उंगली करते है पर
चाची और बहन की तरह बुर या गन्ड चटवाना या चुदाई की बाते नही की है तो मैने कहा “इतना काफ़ी है” और मैने अपना सारा प्लान मा को बता दिया, अगले दिन सुबह प्लान के मुताबिक मैं लूँगी पहन कर बाहर गया तो देखा मा और दीदी बाते कर रही थी, मुझे देख कर मा ने दीदी से कहा “जा भाई के लिए चाइ ले आ” तो दीदी किचन मे चली गई, मैं मा के सामने अपनी लूँगी थोड़ा फैला कर ऐसे बैठा कि दीदी को पता चल जाए कि मैं मा को अपना लंड दिखा रहा हूँ पर
दीदी को मेरा लंड ना दिखाई दे, जैसे ही दीदी आई तो मैने मा को इशारा करते हुए अपनी जाँघो को बंद कर लिया, दीदी कभी मुझे और कभी मा को देखती पर वो समझ गयी थी कि मा मेरा लंड देख रही थी चाइ पीने के बाद मैने जानबूझ कर अपना लंड हाथ से पकड़ कर जिससे दीदी की जिग्यसा बढ़ जाए मा से कहा “मैं फ्रेश होने जा रहा हूँ चलो तो मा दीदी की तरफ देख कर बोली “हां चल मुझे भी पेशाब लगी है और देख भी लूँगी फिर बाथरूम मे आने के बाद मैं
उसके बाद कुछ नही हुआ, इस तरह 2-3 दिन बीत गये और हम लोग इसी तरह दीदी को उत्तेजित करते रहे, एक दिन दोपहर मे खाना खाने के बाद प्लान के मुताबिक मैं कमरे मे आकर लूँगी से अपना लंड बाहर निकाल कर सोने का नाटक करने लगा, थोरी देर मे मा भी आ गई और अलमारी खोल कर वही ज़मीन पर बैठ गई, और कपड़े सही करने लगी थोरी देर मे दीदी कमरे मे आई और मा के पास ही बैठ गई और बाते करने लगी तभी दीदी की नज़र मेरे लंड पर पड़ी तो वो चौंक कर मा
से बोली कि “मा देखो भाई कैसे सो रहा है और उसके सूसू पे क्या हुआ है तो मा ने मेरी तरफ देखते हुए कहा कि “हां उसके सूसू मे रगड़ लगने की वजह से छिल गया है मैने ही क्रीम लगा कर खुला रखने को कहा है” तो दीदी बोली “वहाँ पे कैसे रगड़ लग गई जो इतना छिल गया”
तो मा हुंस्ते हुए बोली मुझे क्या पता तो दीदी भी हंसते हुए बोली “अच्छा तो इसने ज़रूर वो ही किया होगा” मा बोली अच्छा तुझे कैसे पता, तू भी करती है क्या तो दीदी हँसने लगी, क्रमशः………………………….

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गतान्क से आगे…………………………………

तभी प्लान के मुताबिक मा अपनी नाइटी को हल्का सा खींच कर अपनी बुर खुजलाने लगी और ऐसे बैठी कि दीदी को उनकी बुर दिखाई दे, मा की बुर पर नज़र पड़ते ही दीदी बोली “मा तुमने मेरी बाल साफ करने वाली क्रीम लगाई है क्या” तो मा बोली “तुझे कैसे पता तो दीदी ने कहा “तुम्हारी बुर दिखाई दे रही है” तो मा झुक कर अपनी बुर देखने का बहाना करते हुए बोली “हां, लगाई है, ज़रा सा तो था” तो दीदी मा की बुर की ओर इशारा करके हंसते हुए बोली “वो ज़रा सा था,

मेरी पूरी आधी क्रीम ख़तम कर दी, अपनी बुर का साइज़ तो देखो, इतनी बड़ी बुर है कि पूरी क्रीम ही ख़तम हो जाए, और उपर से शीशे मे देख कर फैला फैला कर लगाती हो” तो मा भी हंसते हुए बोली “ अच्छा तो सिर्फ़ मेरी ही बड़ी है, तेरी तो इसी उमर मे इतनी फैल गई है जितनी मेरी तेरे पैदा होने के बाद फैली थी, और तू तो डेली क्रीम लगाती है तो ख़तम नही होगी (और दीदी की चढ्ढि की ओर जो स्कर्ट से दिखाई पड़ रही थी , इशारा करते हुए बोली)” तो दीदी ने कहा “नही मैने नही लगाई है,

ढूँढ रही थी पर मिली नही” तो मा ने कहा “मैं मान ही नही सकती” तो दीदी भी मस्ती मे भर कर अपनी चढ्ढि को साइड से हल्का सा खींच कर अपनी बुर मा को दिखाते हुए बोली “नही ये देखो मेरी बुर तुम्हारे जितनी चिकनी नही है अभी, 10-12 दिन हो गये है बाल सॉफ किए हुए”

ये सारी बातें सुन कर मेरा लंड पूरा 6-7” का तन गया, और झटके लेने लगा, तभी मुझे दीदी की आवाज़ सुनाई पड़ी “वो देखो भाई का लंड कैसा हो गया है, लग रहा है कि सपने मे कुछ कर

रहा है” तो मा हँसने लगी और कपड़े लेकर बेड पर बैठ गई तो दीदी भी साथ मे बेड पर आ गई, मैने हाथ को अपने चेहरे पर इस तरह रखा था कि वो दोनो मुझे दिखाई दे रहे थे पर उन्हे मैं सोता हुआ लग रहा था, मैने देखा कि दीदी की निगाहे मेरे लंड पर टिकी हुई थी तो मैं अपने लंड को और झटके देने की कोशिश करने लगा, तभी मा दीदी से बोली “ज़रा टवल देना” और कहते हुए अपनी नाइटी को कमर तक उठाते हुए अपनी बुर खोल दी, (मा दीदी को पूरी तरह गरम

करना चाहती थी और यही हमारा प्लान था) मा खुद भी गरम हो गई थी और उसकी बुर से पानी निकलने लगा था, शायद यही हाल दीदी का भी था, टवल लेते ही मा दीदी को दिखाते हुए अपनी बुर की पुट्तियों को हाथों से फैला कर पोछने लगी उसकी साँसे तेज़ चल रही थी, तभी दीदी ने मा से कहा “मा मुझे भी देना” तो मा ने पूछा “क्यों तेरी भी बुर पानी छोड़ रही है क्या तो दीदी ने कहा “हां मेरी भी चढ्ढि गीली हो गई है तो मा अपनी बुर पोछने के बाद दीदी को टवल

देते हुए बोली “तूने तो फालतू मे ही चढ्ढि पहेन रखी है, क्यो नही उतार देती, देख पूरी गीली हो गई है, कोई बाहरी थोड़े ही है यहाँ पर और फिर तू तो मेरे सामने कई बार नंगी हो चुकी है” तो दीदी मेरी ओर इशारा करने लगी, तो मा बोली “ये बेचारा तो वैसे ही परेशान है, और ये भी तो नंगा ही है और तुझसे छोटा ही है, इससे कोन सी शरम, चल उतार दे, गीली चढ्ढि नही पहनते” ये कह कर मा अपनी नाइटी उतारने लगी, ये देख कर दीदी भी जो अब तक मेरी वजह से

शर्मा रही थी, मा का इशारा पा कर तुरंत अपनी टी-शर्ट, स्कर्ट और चढ्ढि उतार कर नंगी हो गई, दीदी की चुचियाँ मा जितनी बड़ी तो नही थी पर काफ़ी सुडौल थी उसकी बुर पे छोटे-छोटे बाल थे और बुर भी फूली हुई थी पर उसकी पुट्तियाँ मा जितनी बड़ी नही थी वहाँ पर हम तीनो ही नंगे थे, पूरे बेड पर बुर के पानी की खुश्बू फैल गई थी तभी मा ने मेरे लंड को हाथो मे लेते हुए कहा “ज़रा देखूं तो अभी रगड़ सुखी या नही”

और मेरे सूपदे को घुमा कर चारो तरफ से देखने लगी, दीदी भी मेरी तरफ खिसक आई थी और उसकी भी साँसे मा की तरह तेज़ चल रही थी, मा जानबूझ कर दीदी की तरफ अपनी कमर करके जाँघो को पूरा खोल दिया जिस से उनकी बुर पूरी तरह खुल गई और उसकी पुट्तियाँ बाहर निकल कर लटक गई, मा धीरे-धीरे मेरे सुपाडे को सहला रही थी, दीदी मेरे सुपाडे को बड़े ध्यान से देख रही थी और गरम हो गई थी और उसने मा के सामने ही अपनी बुर रगड़ने लगी ये देख कर मा दीदी को

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चुदाई के लिए तैयार करने के लिए हंसते हुए बोली “क्या हुआ लग रहा है लंड देख कर तेरी बुर ज़यादा पानी छोड़ रही है अभी तेरी बुर का छेद छोटा है इतना मोटा सूपड़ा उसमे फँस जाएगा और तेरी बुर फाट जाएगी कोई बात नही तू उंगली कर के पानी निकाल दे” ये सुन कर दीदी और गरम हो गई और एकदम खुल कर मा से बोली “अच्छा तो क्या सिर्फ़ तुम्हारी बुर का छेद ही इसके साइज़ का है लंड दिख गया तो तुम्हारी बुर फड़कने लगी नही तो हमेशा उंगली करती रहती थी और मेरी

छेद इतनी भी छोटी नही है ये देखो और ये कह कर अपनी बुर को हाथों से फैला कर मा को अपना लाल-लाल छेद दिखाने लगी, और वो दोनो हँसने लगे हम सब इतने उत्तेजित थे कि किसी को कुछ भी होश नही था सिर्फ़ लंड और बुर दिखाई दे रहा था, तभी मैं सही समय सोच कर उठने का नाटक करते हुए आँखे खोल दी और उठने का नाटक करते हुए बैठ गया, मेरे उठते ही मा ने पूछा कि उठ गया बेटा अब दर्द तो नही हो रहा है” मैने कहा “नही पर मुझे पेशाब लगी है”

और ये कह कर बिना दीदी की तरफ देखे बाथरूम जाने लगा, तो मा बोली मुझे भी पेशाब लगी है, रुक मैं भी चलती हूँ” और मेरे साथ आ गई, बाथरूम पहुँच कर हम दोनो साथ-साथ मूतने लगे, मा की बुर से तेज़ सीटियों की आवाज़ निकल रही थी, हम अभी शुरू ही हुए थे कि दीदी भी आ गई उसे देख कर मा ने पूछा “क्या हुआ तो दीदी ने कहा मुझे भी पेशाब लगी है तो मा ने हंसते हुए कहा अच्छा बैठ जा लगता है तेरी बुर ज़यादा खुजली मचा रही है लंड के लिए और

वो हम दोनो के सामने ही बैठ गई बैठने पर उसकी जंघे फैल गई जिससे उसकी बुर की फांके पूरा फैल गई और बुर के लाल-लाल छेद से निकल ते हुए पेशाब की धार को देख कर मेरा लंड और तन गया, दीदी भी मेरे लंड से पेशाब की धार निकलते हुए बड़े ध्यान से देख रही थी, तो मा ने मौका देख कर मुझ से पूछा “अब सुपाडे पर पेशाब लगने से कल की तरह जलन तो नही हो रही है”

तो मैं ने कहा नही, तब तक मा पेशाब कर चुकी थी और मैं भी और दीदी के मूतने का वेट करने लगे जब दीदी मूत कर खड़ी हुई तो हम सब बेडरूम मे आ गये, मेरा लंड अभी भी एकदम खड़ा था, मा बेड पे टेक लगा कर बैठ गई और मुझे अपने पास बैठा लिया दीदी भी हम दोनो के सामने बैठ गई फिर मा मेरे सूपदे को हाथ मे लेकर बोली ठीक है अब कुछ दिन तक रगड़ना- वागड़ना नही, लंड खड़ा होता है तो कोई बात नही थोड़ी देर लंड को सहलाए गा तो ठीक हो जाएगा लेकिन मा ज़यादा तनने के कारण मेरे लंड मे बहुत खुजली हो रही है मैने लंड मा

की तरफ बढ़ाते हुए कहा, तो मा बोली “ठीक है मैं इसका पानी झाड़ देती हूँ फिर ये थोड़ा नरम हो जाएगा नही तो चमड़ा खिंचने से और दर्द होगा तो मैने कहा “क्या अभी तो मा मेरे चूतर पर हाथ रख कर अपनी तरफ करते हुए लंड को दूसरे हाथ मे लेकर बोली तो क्या हुआ मेरे सामने कैसी शरम और अब तो दीदी के सामने भी शरमाने की कोई ज़रूरत नही है और उत्तेजित होकर मुझे दीदी की बुर दिखाते हुए कही ये देख वीनू की बुर का छेद तो खुद ही खुला हुआ है लंड

लेने के लिए फिर मैं बेड पर लेट गया, मा मेरे कमर के पास बैठी थी और मेरा सर दीदी की जांघों के पास था जिससे दीदी की हुई बुर की फैली हुई फांके आब मुझे एकदम नज़दीक से दिखाई दे रही थी मा दीदी से बोली “ज़रा गारी का तेल देना” और फिर तेल हाथ मे लगा कर मेरे सुपाडे पर लगाया और मेरा मूठ मारने लगी, और मैं अपने एक हाथ से मा की बुर के छेड़ मे धीरे-धीरे उंगली करने लगा, मा और दीदी बहुत ज़्यादा उत्तेजित थी जिससे उनकी बुर और गांद का छेद खुल और

बंद हो रहा था, तभी दीदी अपनी बुर मे अपनी उंगलियाँ डालते हुए मा से बोली “मा हाथ से ऐसे पकड़ कर करोगी तो लंड मे फिर घाव हो जाएगा तो मा भी सर हिलाते हुए बोली “हां तू सही कह रही है पर क्या करूँ झड़ना तो पड़ेगा ना तो दीदी जो एकदम गरम हो गई थी अपनी बुर दिखाते हुए मा को इशारा करके बोली “ऐसे करो ना तो मा अपनी बुर को फैलाते हुए बोली हां तू सही कह रही मैं इसके लंड पर बैठ कर इसका लंड अपनी बुर मे डाल लेती हूँ और उपर

नीचे करती हूँ, मेरी बुर मे लंड जाते ही झाड़ जाए गा पर चुदाई मे मेरी इन बड़ी-बड़ी पुट्तियों से रगड़ कर कही फिर से छिल ना जाय एक काम करती हूँ इसका सूपड़ा मूह मे लेकर हल्के हल्के चूस कर झार देती हूँ” और ये कह कर तुरंत अपनी चूतर दीदी की तरफ उठाते हुए मेरे लंड पर झुक गई और लंड चूसने लगी लेकिन मैने अपनी उंगली मा की बुर से नही निकाली और दूसरे हाथ से बुर की पुट्तियों को फैलाते हुए और तेज़ी से अंदर बाहर करने लगा,

तभी ये देख कर दीदी ने भी अपना कंट्रोल शायद खो दिया और झुक कर मा के चूतरो को अपने हाथो से फैला कर मा की चूतरो, गांद और बुर का छेद चाटने लगी, जैसे ही दीदी ने मा की 4” लंबी और 2” चौड़ी पुट्तियों को अपने मूह लिया मा ने भी अपनी जाँघो को और फैला दिया और उसके मूह पर अपने बुर को दबाते हुए मेरे लंड को चूसने लगी, मैं भी इसी इंतजार मे था और अपनी उंगलियाँ मा की बुर से निकाल कर दीदी की चूतर जो मेरी तरफ थी, अपने हाथ से फैला कर उसकी

गांद और बुर मे उंगली डाल कर चोद्ने लगा, दीदी भी अपनी चूतर उछाल उछाल कर अपनी बुर मे उंगली डलवा रही थी कि मेरे दिमाग़ मे एक आइडिया आया और मैने मा से कहा “मा एक काम करो तुम थोड़ा सा आगे बढ़ जाओ जिससे दीदी मेरे और तुम्हारे बीच मे आ जाए गी, फिर तुम मेरे लंड चूसना, दीदी तुम्हारी बुर चातेगी और मैं दीदी की बुर चाटूंगा, तो मा और दीदी तुरंत उसी तरह लेट गई और फिर हम तीनो एक दूसरे की बुर और गांद चाटने लगे मैने अपनी एक उंगली दीदी की गांद

मे थूक लगा कर डाल दी और उसकी बुर को मूह मे भर लिया कुछ ही देर मे मैं अपना लंड मा के मूह मे और अंदर घुसाते हुए दीदी की बुर को पूरा मूह भर कर चाटते हुए झार गया, मा दीदी को दिखाते हुए मेरे पूरे वीर्य को जीभ से चाट कर पीने लगी जब उसने मेरा लंड पूरा सूखा दिया तो सीधी हो कर आराम से लेट गई और दीदी से अपनी बुर चटवाने लगी और फिर झाड़ कर शांत हो गई इधर मैने भी दीदी की बुर चाट कर उसे झाड़ दिया था,

थोड़ी देर लेटे रहने के बाद हम तीनो उठ के बैठ गये, मेरा लंड उस समय सिकुदा हुआ था तो दीदी मा को मेरा लंड दिखाते हुए बोली “आरे वाहह मा तुम्हारा ये चूसने वाला तरीका तो ज़यादा बढ़िया था भाई को झाड़ भी दिया और लंड पे भी कुछ नही हुआ” तो मा बोली हां पर तूने तो आज कमाल कर दिया ओह क्या बुर चाट्ती है, तो दीदी बोली “हां मा मुझे भी अच्छा लगा तो मा बोली चल अच्छा है अब जब इसका लंड थोड़ा ठीक हो जाए तो तुझे इसे भी अपनी बुर मे लेने मे

मज़ा आएगा तब तक अपना छेद फैला ले ये कह कर मा ने मुझे आँख मारी तो हम तीनो हँसने लगे, और हम लोग इसी तरह थोड़ी देर तक आपस मे हँसी मज़ाक करते रहे और चाइ पी, पर दीदी की बुर देख-देख कर मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया और झटके लेने लगा, तो मैं अपना लंड हाथ मे लेकर दीदी और मा को दिखाते हुए धीमे-धीमे मूठ मारने लगा ये देख कर दीदी मा से बोली “मा देखो भाई का लंड फिर से फूल गया है लगता है फिर से झड़ने का मन कर रहा है” तो मा बोली

मैं तो अब थक गई हूँ तुम दोनो को जो करना है करो मैं सिर्फ़ लेट कर देखूँगी” और ये कह कर मा लेट गई, उसकी कमर मेरी तरफ थी और जंघे फैली हुई थी, जिससे उसकी मेरी दोनो हथेलियों जितनी बड़ी और चिकनी बुर एकदम खुल गई थी और उसकी लंबी और चौड़ी पुट्तियाँ बाहर निकल कर लटकी हुई थी, ये देख कर मैं अपने एक हाथ से उन्हे मसल्ने लगा, ये देख कर दीदी जो बड़ी ललचाई नज़रो से मेरे लंड को देख रही थी, झुक कर मेरे लंड को अपने मूह मे भर लिया, ओह क्या मस्त लग

रहा था दीदी गपा गुप मेरे लंड को मूह मे लेकर चूसे जा रही थी, और मैं भी अपनी उंगलियाँ मा की बुर मे तेज़ी से अंदर बाहर करने लगा, मा भी धीरे-धीरे अपनी कमर उपर उछाल कर चुद्वा रही थी और खूब ज़ोर से हिलते हुए झार गई, तभी मैं अपना लंड दीदी के मूह मे अंदर तक घुसाते हुए झार गया, दीदी भी मेरे लंड का पानी पूरा चाट गई, फिर हम सब थक के सो गये. अब ये हमारे घर का नियम बन गया था और हम तीनो जने हर काम साथ साथ करते,

बाथरूम साथ जाते, कोई लेट्रीन करता, कोई मंजन करता, कोई नहाता, कभी कभी हम सब एक दूसरे को अपने हाथो से ये काम करवाते, मंजन करते और नहलाते, और जब मौका मिलता अपना बुर और लंड एक दूसरे मे घुसाए रहते तो दोस्तो ये थी हमारे घर की सच्चाई.

समाप्त

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