एहसान के बदले में चरम-सुख देने की कहानी

एक दिन की बात है, जब प्रीतम जी आए हुए थे और मैं साज-सॉवॅर कर दुल्हन की तरह रेड सारी पहन कर गयी हुई थी गेस्ट हाउस में. तभी मुझे प्रीतम जी ने अपने बेडरूम में बुलाया.

प्रीतम जी: ओह मी डियर फ्रेंड अंजलि, आओ अंदर आओ, बैठो. वैसे आज तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो इस रेड कलर की सारी में. वाउ, काफ़ी सुंदर हो तुम.

अंजलि: प्रीतम जी आप मुझे शर्मिंदा कर रहे हो. आज मैं जो भी हू, सिर्फ़ आपके कारण हू. आप मेरी हेल्प नही करते तो मैं आज यहा तक ना पहुँच पाती.

प्रीतम जी: अंजलि मैने ऐसा कुछ नही किया है. तुम इसके काबिल थी, इसलिए यहा तक पहुँची हो.

अंजलि: जी प्रीतम जी, पर मैं जो भी हू बस आपकी वजह से हू.

प्रीतम जी: अछा ठीक है, तुम जीती में हारा. जैसे तुम कहती हो की मैने तुम्हारे लिए सब कुछ किया है, वैसे तुम मेरे लिए क्या कर सकती हो?

अंजलि: प्रीतम जी आप जो बोलो मैं आपके लिए वो कर सकती हू. कुछ भी कर सकती हू.

प्रीतम जी: तो क्या तुम अभी इसी वक़्त मुझे एक पत्नी का सुख दे सकती हो?

प्रीतम जी के मूह से ये बात सुन कर मैं एक सेकेंड के लिए तो शॉक तो हो गयी. पर मैने उन्हे हा बोल दिया बिना कुछ सोचे समझे, क्यूंकी उन्होने मेरे लिए बहुत कुछ किया था, और मैं उनके लिए इतना तो कर ही सकती थी ( वो सिर्फ़ पत्नी सुख ही तो माँग रहे थे).

और फिर मैने उनसे कहा: प्रीतम जी आप बताओ मैं किस तरह आपको पत्नी का सुख डू?

प्रीतम जी: अंजलि तुम बस अपने आप को मेरे हवाले कर दो. बाकी सारा काम मेरा है.

अंजलि: ठीक है प्रीतम जी. मैने अपने आपको आपके हवाले किया.

और फिर प्रीतम जी मेरी और बढ़े, और मुझे अपनी बाहों में भर लिया. फिर वो मेरी गर्दन, मेरे गाल, मेरा माता सब जगह पर मुझे चूमने लगे. उसके बाद आहिस्ते-आहिस्ते वो मुझे लीप-किस करने लगे.

मैने अपनी आँखें बंद कर ली थी. मुझे कुछ मालूम नही था, की क्या हो रहा था. और फिर प्रीतम जी ने मेरी सारी उतार दी. अब मैं उनके सामने ब्लाउस और पेटिकोट में खड़ी थी.

अब वो मेरे ब्लाउस के उपर से मेरे बूब्स को अपने हाथो में पकड़ कर दबाने लगे. फिर उन्होने मेरे ब्लाउस के बटन खोल दिए, और मेरा ब्लाउस निकाल दिया.

मुझे शरम आ रही थी, और फिर प्रीतम जी ने मेरी ब्रा के हुक खोल दिए पीछे से, और मेरी ब्रा भी निकाल दी. अब वो मेरे नंगे बूब्स को गौर से देखने लगे, और मेरे निपल अपने मूह में लेकर चूसने लगे एक बच्चे की तरह.

मुझे बहुत अछा लग रहा था. वो साथ में अपने दोनो हाथो से मेरे दोनो बूब्स को ज़ोर-ज़ोर से दबा रहे थे, और मूह से काट भी रहे थे चूस्टे हुए मेरे निपल्स को. मुझे बहुत मज़ा आने लगा था, अपने बूब्स उसने चुस्वा कर.

फिर प्रीतम जी ने मेरे पेटिकोट का नाडा खोल दिया, तो मेरा पेटिकोट नीचे गिर गया. उसके बाद प्रीतम जी ने अपने दोनो हाथो से मेरी पनटी भी उतार दी. अब मैं पूरी नंगी हो चुकी थी प्रीतम जी के सामने.

फिर वो अपने घुटनो के बाल नीचे बैठ गये, और मेरी टांगे फैला दी, और मेरी छूट को अपनी जीभ से चाटने लगे. मेरे मूह से ह ह ह ह की सिसकियाँ निकालने लगी. करीब 2 से 4 मिनिट में मेरी छूट गीली हो गयी, और अपना पानी छ्चोढने लगी.

मेरी छूट का सारा पानी प्रीतम जी अपनी जीभ से चाट गये. फिर प्रीतम जी उठे, और मुझे अपनी गोद में उठा कर बेड पर लिटा दिया. अब वो खुद अपने कपड़े उतार कर नंगे हो गये.

मैने पहली बार किसी मर्द को नंगा देखा था. उनका वो लंड बहुत बड़ा था. मेरी आँखें फटी की फटी रह गयी थी उनके लंड को देख कर. मुझे नही मालूम था, की लंड इतना बड़ा होता है. और फिर प्रीतम जी मेरी और बढ़े.

वो मेरे पावं को चूमने-चाटने लगे अपनी जीभ से. मुझे उनका स्पर्श बहुत अछा लग रहा था, और मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. फिर वो आहिस्ते-आहिस्ते मेरी जांघों तक पहुच गये चूमते-चूमते.

उसके बाद वो मेरी छूट पर आए, फिर नाभि पर, फिर मेरे बूब्स पर, और लास्ट में मेरे होंठो तक आ गये. उनका लंड सीधा मेरी छूट को टच हो रहा था, जैसे अभी मेरी छूट में घुस जाएगा.

थोड़ी देर उन्होने मेरे पुर जिस्म को चूमा-छाता और फिर उठे और घुटनो के बाल आ कर मुझसे बोले-

प्रीतम जी: अंजलि अब तुम तैयार हो जाओ, मैं अपना मोटा लंबा लंड तुम्हारी छूट में घुसने वाला हू.

अंजलि: प्रीतम जी जल्दी करो, मैं भी आपके लंड के लिए तड़प रही हू. अब मुझे मेरी छूट में आपका लंड चाहिए, प्लीज़ जल्दी से मेरी छूट में अपना लंड डालो, और मुझे छोड़ो.

मुझे कुछ मालूम नही था मैं ये क्यूँ बोल रही थी, पता नही क्यूँ, मुझे शायद ये सब अछा लग रहा था इसलिए मेरे मूह से ऐसी बातें निकल रही थी.

और वैसे ही प्रीतम जी ने मेरी छूट में अपना लंड सेट किया. पहले धक्के में तो लंड फिसल गया मेरी छूट से, लेकिन फिर उन्होने एक ज़ोरदार धक्का मारा, तो उनका लंड आधा मेरी छूट के अंदर घुस गया.

और फिर वो धक्के पे धक्के मारते गये. अब उनका पूरा का पूरा लंड मेरी छूट के अंदर घुस गया था, और वो घपा-घाप मुझे छोड़ने लगे. मेरे मूह से ह ह आह ऑश की आवाज़े निकल रही थी, और प्रीतम जी तो मेरी छूट के अंदर धक्के पे धक्का मारते जेया रहे थे.

उनको बहुत मज़ा आ रहा था. मुझे भी मज़ा आ रहा था, इसलिए वो घपा-घाप मुझे छोड़ रहे थे, और मैं घपा-घाप अपनी छूट की चुदाई करवा रही थी. वो धक्को के साथ में मेरे बूब्स भी दबा रहे थे, और साथ मेरे निपल को अपने मूह में लेकर चूस रहे थे.

फिर उन्होने अपने दोनो हाथो से मेरे हाथ कस्स के पकड़ लिए, और अपना मूह मेरे मूह से लगा दिया. अब वो ज़ोर से धक्के मारने लगे. मतलब चुदाई की स्पीड बढ़ा दी उन्होने. उनका लंड फुल स्पीड से मेरी छूट की अंदर-बाहर हो रहा था, और फू फा फू फा की आवाज़ भी निकल रही थी छूट के अंदर से.

मुझे मालूम नही था, की चुदाई में इतना मज़ा आता है, नही तो मैं पहले दिन से ही प्रीतम जी से चुदाई करवाने लगती. करीब 5 मिनिट चुदाई के बाद प्रीतम जी उठ गये, और मुझसे कहा-

प्रीतम जी: अब तुम मेरे लंड को अपने मूह में लेकर चूसो.

फिर मैने वैसे ही किया. मैं प्रीतम जी का लंड अपने मूह में लेकर चूसने लगी. मुझे लंड चूसना आता तो नही था, लेकिन मैं कुलफी की तरह चूसने लगी, क्यूंकी कुलफी में चूस कर ही खाते थे.

उनका लंड बहुत गरम था, जो मुझे मेरे होंठो पर महसूस हो रहा था, और साथ में गीला भी था. उनके लंड का टोपा मुझे बहुत अछा लग रहा था चूसने में.

मैने उनसे कहा: प्रीतम जी, मैं आचे से चूस रही हू ना आपका लंड?

प्रीतम जी: अंजलि तुम बहुत आचे तरीके से लंड चूस रही हो. पहली बार में भी तुम इतने आचे से चूस रही हो. मुझे बहुत मज़ा आ रहा है, क्यूंकी इतने आचे से कभी किसी लड़की ने मेरा लंड नही चूसा. तुम बहुत अछा कर रही हो. हा ऐसे ही चूस्टी रहो मेरे लंड को अपने मूह में लेकर.

मैने उनका लंड 2 मिनिट तक ऐसे ही चूसा, और फिर वो बेड पर सीधे लेट गये, और मैं उनके उपर बैठ गयी अपनी छूट में उनका लंड लेकर. और फिर मैं उप-डाउन उप-डाउन उछालने लगी (कॉवगिरल सेक्स पोज़िशन ).

इस पोज़िशन में तो मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा था, क्यूंकी प्रीतम जी का लंड सीधा मेरी छूट की गहराई तक अंदर जेया रहा था. बहुत मज़ा आ रहा था, कसम से मैं बता नही पा रही हू. फिर इसी पोज़िशन में प्रीतम जी ने मुझे अपनी और खींच लिया, और मुझे किस्सिंग करने लगे.

बहुत मज़ा आ रहा था, क्यूंकी अब प्रीतम जी भी उपर की तरफ धक्के दे रहे थे मेरी छूट के अंदर. फिर करीब 10 मिनिट के बाद मेरी छूट के अंदर कुछ गरम-गरम पिचकारी जैसा महसूस हुआ. वो प्रीतम जी के लंड का माल (कम) था.

मुझे ये पहले मालूम नही था, की लंड के अंदर से कुछ निकलता है. वो पहली बार मेरी छूट में निकला था, तो तब मुझे मालूम हुआ. और फिर हम दोनो शांत हो गये, और एक-दूसरे को कस्स कर पकड़ कर उसी बेड पर लेट गये. मुझे पता नही कब हमे नींद आ गयी.

उसके बाद अक्सर जब प्रीतम जी हमारे गाओं उस गेस्ट हाउस में आते थे, तो मैं उनके साथ वाहा चुदाई करती थी. ये सिलसिला करीब 5 साल तक चला. वो जब भी आते थे, मेरी चुदाई करते थे, और मैं भी बड़े मज़े से उनके साथ चुदाई करती थी.

फिर एक दिन प्रीतम जी मुझे अपने साथ अपने घर ले गये, जहा उनके सारे घर वाले रहते थे. वो वाहा मुझे एक नौकरानी बना कर ले गये थे, और मुझे कहा था की कुछ दीनो के बाद वो मुझसे वाहा शादी कर लेंगे सारे घर वालो को समझा कर.

पर ऐसा कुछ नही हुआ. वो हुआ यू, की उनके बेटे कुमार को मैं पसंद आ गयी, और मैने कुमार के साथ शादी कर ली.

हम जैसे ही प्रीतम जी के फॅमिली वाले घर में पहुँचे, तो सबसे पहले मैने राकेश को देखा. राकेश ने भी मुझे देखा, और हम एक-दूसरे को पहली नज़र में ही पसंद आ गये, मतलब लोवे अट फर्स्ट साइट. फिर राकेश ने प्रीतम जी से पूछा-

राकेश: डॅडी आपके साथ ये कों है?

प्रीतम जी: वो हमारे घर में काम-काज तोड़ा ज़्यादा होता है ना, और बहू अकेले पूरा काम नही कर पाती. इसके लिए मैं इसको ले आया हू, ताकि बहू का काम-काज में हाथ बता देगी.

राकेश: आपने ये अछा काम किया है डॅडी. मैं बहुत खुश हू इनके आने से. वैसे आपका नाम क्या है?

अंजलि: मेरा नाम अंजलि है साहब.

राकेश: मेरा नाम साहब नही है राकेश है. तुम मुझे राकेश बोल सकती हो, ठीक है?

अंजलि: ओके ठीक है राकेश.

मैने दिल में सोचा: ये क्या? ये तो पहले दिन से ही मुझसे फ्री हो रहा है.

और फिर मैं अंदर आई और सबसे मिली. दादी मा, और उनकी बहू सुमन जो काफ़ी नकचड़ी लग रही थी मुझे. और उनका बड़ा बेटा कुमार मुझे दिखने में हवासी लग रहा था. पर मुझे क्या था, मुझे तो अपने काम से काम रखना था.

रात को किचन में सुमन भाभी और मैं खाना बना रहे थे. तब सुमन भाभी मुझसे फ्री होने लगी.

सुमन: तुम तो बहुत अची हो. मुझे माफ़ कर दो, मैने तुम्हारे बारे में ग़लत सोचा था. मैं समझी थी तुम एक आवारा बेहूदा लड़की हो, जो ससुर जी घर ले आए है. मुझे माफ़ कर दो प्लीज़. ई आम सॉरी.

अंजलि: सुमन भाभी कोई बात नही है. आपकी इसमे कोई ग़लती नही है. बस आपने मुझसे बात करने से पहले सोच लिया था, बस और कुछ नही है.

सुमन: ठीक है अंजलि. वैसे तुमने देखा था की कुमार तुम्हे ऐसे देख रहा था, जैसे अभी तुम्हारे खड़े-खड़े कपड़े उतार कर तुम्हे छोड़ने लगेंगे?

अंजलि: आप ये क्या बोल रही हो सुमन भाभी, अपने देवर कुमार के बारे में?

सुमन: अंजलि तुम्हे मालूम नही है. वो हरामी है. वो मेरे साथ भी 2 बार ट्राइ कर चुके है, और मैने भी चिल्ला के जान बचाई है अपनी. बड़े ही हवासी है वो.

अंजलि: मुझे भी पहली बार उन्हे देख कर ऐसा लगा था, की वो हवासी है. पर मुझे क्या? मैं अपने काम से काम रखूँगी.

सुमन: तो उसके पास ज़्यादा मत जाना, ठीक है? और ज़्यादातर मेरे पास या दादी मा के पास रहना, ठीक है?

अंजलि: ओके सुमन भाभी, जैसे आप बोलॉगी वैसे ही मैं करूँगी.

सुमन भाभी की ये बातें सुन कर मुझे दर्र लग रहा था, की पता नही कब कैसे कुमार मुझ पर हमला कर दे. कुछ देर तो ये सोच-सोच कर मैं शॉक हो गयी थी, फिर ध्यान आया की प्रीतम जी थे ना, तो मुझे किस बात का दर्र था.

फिर मैं सुमन के साथ किचन के काम-काज में लग गयी रात के डिन्नर के लिए. रात के डिन्नर के बाद ठीक 12 बजे मैं प्रीतम जी के बेडरूम में चली गयी सब के सो जाने के बाद. दादी मा सबसे प्यारी थी. वो मेरा बहुत ख़याल रखती थी.

मैं जैसे ही प्रीतम जी के बेडरूम के अंदर पहुँची और दरवाज़े की अंदर से कुण्डी लगाई, तो पीछे से प्रीतम जी ने मुझे पकड़ लिया, और गोद में उठा कर सीधे बेड पर ले गये. फिर वो मेरे साथ चुम्मा-छाती सब करने लगे.

प्रीतम जी ने मेरे कपड़े उतार दिए, मुझे नंगी कर दिया, और खुद भी नंगे हो गये. वो मुझे चूमने लगे सर से पावं तक. फिर प्रीतम जी मेरे आयेज आ गये घुटनो के बाल, और मेरी टांगे खोल दी.

मैने उनसे पूछा: तुम मेरे साथ क्या करने वाले हो?

प्रीतम जी: अंजलि तुम तैयार हो जाओ, अब मैं अपना लंड तुम्हारी छूट में डाल कर तुम्हे छोड़ने वाला हू.

अंजलि: प्रीतम जी तुम बहुत शरारती हो. देखो तुम्हारे ये बोलने से मेरी छूट अभी से गीली हो गयी है. तो क्या तुम मेरी छूट को अपनी जीभ से चाटना नही चाहोगे, इसको छोड़ने से पहले, बोलो?

प्रीतम जी: अंजलि मुझे छूट चाटना बहुत पसंद है, और मैं तुम्हारी पहले छूट ही चाटूंगा. लेकिन ये मेरा लंड तुम्हारी छूट देख कर खड़ा हो जाता है, और मचलने लगता है, की अभी तुम्हारी छूट के अंदर जाना है. इसलिए मैं खुद को रोक नही पता हू. चलो अब तुम घोड़ी बन जाओ, मैं तुम्हारे पीछे से तुम्हारी छूट में अपना लंड डालूँगा, और तुम्हे बहुत सारा मज़ा दूँगा.

अंजलि: ठीक है प्रीतम जी, आपकी मर्ज़ी अगर आपको पहले मेरी छोड़ छोड़नी है, तो लो, छोड़ो मेरी छूट को. मैं तैयार हू.

और फिर मैं वैसे ही घोड़ी बन गयी, और प्रीतम जी मेरे पीछे आ गये, और एक ही झटके में अपना लंड पूरा मेरी छूट के अंदर घुसा दिया. वो वैसे ही घपा-घाप अंदर-बाहर लंड करने लगे, मतलब मुझे छोड़ने लगे.

मेरे मूह से हल्की-हल्की आहह ह ह आ की सिसकियाँ निकालने लगी. मुझे बहुत मज़ा आ रहा था, और मैं भी पीछे की तरफ धक्के दे रही थी. मतलब प्रीतम जी के लंड को अपनी छूट में लेकर पीछे दबा रही थी. और वो भी मेरी छूट के अंदर अपने लंड से धक्के मार रहे थे.

करीब 10 मिनिट प्रीतम जी ने मुझे ऐसे ही छोड़ा, और फिर मेरी छूट के अंदर झाड़ गये. और मेरी छूट ने भी अपना पानी छ्चोढ़ दिया. फिर मैं अपने कपड़े पहन कर वापस आयेज प्रीतम जी के बेडरूम से निकल कर दादी मा के रूम में आ गयी, और उनके साथ सो गयी.

इसके आयेज क्या हुआ, वो आपको अगले पार्ट में पता चलेगा.

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