दूकान पर आई खूबसूरत लड़की को चोदा

हेल्लो दोस्तों, Kamukta मैं  का बहुत बड़ा प्रशंशक हूँ। मेरा नाम अर्जीत सिंह है। कुछ सालों पहले मेरे एक दोस्त ने मुझे इस वेबसाइट के बारे में बताया था, तब से मैं रोज यहाँ की मस्त मस्त कहानियां पढता हूँ और मजे लेता हूँ। मैं अपने दूसरे दोस्तों को भी इसे पढने को कहता हूँ। पर दोस्तों, आज मैं पढ़ने नही, स्टोरी सुनाने हाजिर हुआ हूँ। आशा करता हूँ की यह कहानी सभी पाठकों को जरुर पसंद आएगी। ये मेरी सच्ची कहानी है।

मैं बुलंदशहर का रहने वाला हूँ। मेरी किराना की एक दूकान थी जिसमे मैं टाफी, बिस्कुट से लेकर गेंहू चावल सब कुछ बेचा करता था। कभी कभी दुकान पर बोरियत भी होती थी जब कोई कस्टमर नही आता था। मैं खाली वक़्त में सेक्सी स्टोरीज की किताब पढ़ता था वक़्त काटने के लिए और अपने फोन में चुदाई वाली ब्लू फिल्म देख लिया करता था। दोस्तों मैं अभी २४ साल का था और मेरी शादी नही हुई थी। फिलहाल तो मैं मुठ मारके ही काम चला लेता था। एक दिन मेरी दूकान में एक बड़ी खूबसूरत लड़की सामान लेने आई थी। उसका नाम सुमित्रा था। वो लड़की बड़ी मस्त माल थी। उसे देखते ही मेरा उसे चोदने का मन करने लगा। वो बहुत सुंदर लड़की थी। क्या जक्कास माल थी। ५ फुट का मस्त उपर से नीचे तक भरा हुआ कद रहा होगा। उसे पहली बार देखते ही मेरा मन उसे चोदने का कर रहा था। उसका जिस्म भरा हुआ था। रंग साफ़ था और उसकी आँखें बड़ी चंचल थी। मुझे पहली नजर में वो भा गयी थी। मैं उससे बात करना चाहता था। वो मुझे मस्त माल लग रही थी।

“आपको कभी मैंने देखा नही है!!” मैंने उससे कहा

“हाँ मैं पहले गाँव में रहती थी। मैं अपने मामा के यहाँ पर रहने आई हूँ। अब मैं बुलंदशहर में ही रहूंगी और ssc की तैयारी करूंगी। मेरा घर पराग देरी के पास है” सुमीत्रा बोली। मैंने उसका नाम भी पूछ लिया था। उसने मैगी, बिस्किट के कुछ पैकेट, ब्रेड और एक किलो मैदा लिया। वो हंस हंसकर बात कर रही थी। मैं भी हंसने लगा। फिर सामान खरीदकर वो चली गयी। उसकी खूबसूरती और मन मोहनी छवि मेरे दिल में बस गयी थी। उसके जाने के बाद मैंने दुकान के गोदाम में जाकर मुठ मार ली थी। मैं रोज उसकी राह देखने लगा। काश सुमित्रा आ जाए..काश वो आ जाए। मैं यही दुआ करता। कुछ दिन बाद मुझे सुमित्रा के दर्शन फिर से हो गये।

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“अरे सुमित्रा बड़े दिनों बाद तुम दिखाई दी???” मैंने हंसकर पूछा

“हाँ मेरा एक एक्साम था। वही देने मैंने नोयडा चली गयी थी” सुमित्रा बोली

हम हँसकर बात करने लगे। जो जो सामान उसने माँगा मैंने एक पन्नी में बांध दिया। साथ ही मैंने अपना मोबाइल नं एक कागज में लिखकर पन्नी में रख दिया। शाम को सुमित्रा ने मुझे काल किया। शायद वो भी मुझे पसंद करने लगी थी। धीरे धीरे हम दोनों की फोन पर बात होने लगी। वो लड़की मुझसे पट गयी थी। सुमित्रा हमेशा हंस हंसकर बात करती थी। अब हमारी बाते होते होते १ महिना हो गया था। मेरा उसे चोदने का बहुत मन था। रात को मैंने उसे काल किया।

“हाय सुमित्रा कैसी हो???” मैंने प्यार भरे अंदाज में पूछा

“अच्छी हूँ, तुम कैसे हो??” उसने पूछा

“मैं भी ठीक हूँ। मेरा तो चुदाई करने का बड़ा मन कर रहा है। क्या तुमने कभी चुदाई की है” मैंने पूछा

सुमित्रा झेंप गयी।

“नही मैंने कभी चुदाई नही की है” वो बोली

“करोगी जान!!” मैंने पूछा

कुछ सेकेंड था वो खामोश रही और कुछ नही बोली।

“बोलो तुम्हारे घर की छत पर आ जाऊं” मैंने पूछा

वो कुछ नही बोली। मैंने इसे उसकी हाँ समझ ली।

“ठीक है आज मैं तुम्हारे घर की छत पर आ जाऊंगा। तुम आ जाना” मैंने कहा और फोन कर दिया। दोस्तों शाम को मैंने ८ बजे दुकान बंद कर दी। सुमित्रा का घर पराग डेरी के ठीक बगल में था। मैं पराग डेरी में चला गया और उसकी छत पर चढ़ गया, फिर मैं वहीँ से सुमित्रा के घर की छत पर चढ़ गया। कुछ देर इंतजार करने पर मेरी चिड़िया आ गयी। सुमित्रा के आते ही मैंने उसे बाहों में कस लिया और किस करने लगा। वो भी चुदने के मूड में थी तभी तो टाइम पर आ गयी थी। उसने सलवार कुरता पहन रखा था। वो जादातर भारतीय कपड़े ही पहनती थी। उसका फिगर तो बहुत मस्त था। उसके भरे पुरे जिस्म को देखकर ही तो मुझे उससे प्यार हुआ था।

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मैंने अपने होठ उसके होठो पर रख दिए और किस करने लगा। वो भी मेरा गर्मा गर्म चुम्बन लेने लगी। कुछ ही देर में हम दोनों गरमा गए थे। मैंने जी भरकर उसके रसीले होठ चूसे। इस समय रात के ९ बजे थे और आज पूर्णमासी थी इसलिये चाँद चमक रहा था। दोस्तों श्वेत चांदनी चारो और फैली हुई थी जो बहुत रोमांटिक मौसम बना रही थी। साथ ही ठंडी हवा भी चल रही थी। मेरा लंड तो वैसे ही खड़ा हो गया था। मैं सुमित्रा को चोदने के लिए बिलकुल मरा जा रहा था। हम दोनों खड़े होकर बड़ी देर तक एक दूसरे के होठ चूसते रहे। बहुत मजा आया। फिर मैंने उसके दुपट्टे को लेकर छत पर बिछा दिया। और सुमित्रा के सलवार कमीज को मैंने निकाल दिया। अपनी टी शर्ट जींस भी मैंने निकाल दी। फिर मैंने उसकी ब्रा और पेंटी भी खोल दी। अब मेरी मस्त चुदक्कड माल सुमित्रा ठीक मेरे सामने थी। उसकी आँखें बड़ी बड़ी बहुत चंचल थी। मैंने कुछ देर तक उसकी आँखों पर किस किया। दोस्तों चांदनी रात में नंगी और बिना कपड़ों में सुमित्रा बिलकुल कैटरीना कैफ लग रही थी। मैंने उसे बाहों में भर लिया और उसकी खूबसूरती को मैं अपनी आँखों से पी रहा था। एक बार मैंने से मैं नंगा होकर उसपर चढ़ गया और उसके होठ चूसने लगा। वो भी मेरे होठ चूस रही थी। आजतक ना ही उसने और ना ही मैंने चुदाई की थी। हम दोनों का ये फर्स्ट टाइम था। सुमित्रा का फिगर 36 34 30 का था। वो बहुत भरे हुए जिस्म वालिया लौंडिया थी। उसके अंग अंग में सिर्फ गोश ही गोश था।

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