दुकान के नौकर और कस्टमर के साथ थ्रीसम स्टोरी

ही फ्रेंड्स, मैं रीता फिरसे आपके सामने हाज़िर हू. मैं अपनी पिछली कहानी का अगला पार्ट लेके आई हू. जिन लोगों ने भी मेरी स्टोरी पढ़ी है, उनको मेरा धन्यवाद. और जिन लोगों ने अभी तक स्टोरी नही पढ़ी, वो प्लीज़ जाके पिछला पार्ट पढ़े.

पिछले पार्ट में आपने पढ़ा की मैं कुछ पूछने अपने नौकर के पास गयी, तो वो मूठ मार रहा था. फिर मैं उसके लंड को देख कर अपने आप को रोक नही पाई, और उसके लंड पर उछाल-उछाल के चुड गयी. जब चुदाई ख़तम करके मैं नीचे वापस जाने लगी, तो मेरी गांद फटत गयी. अब आयेज बढ़ते है.

जब मैं उठ कर कमरे से बाहर जाने लगी, तो सामने नीचे वाला कस्टमर खड़ा था. वो मुझे ढूँढते हुए उपर आ गया था. उसने हमारी चुदाई देख ली थी, और वो मुस्कुरा रहा था. उसका लंड उसकी पंत में खड़ा था. मेरे दिल की धड़कने तेज़ थी, की अब आयेज क्या होने वाला था.

पहले मैं आपको उस कस्टमर के बारे में बता डू. उसको मैने काई बार दुकान पर देखा था. वो 40-45 साल की उमर का बंदा था, और दुकान के पास ही रहता था. उसकी हाइट 5’9″ थी, और मेरे पति को भी जानता था. मेरे पति उसको भाटिया कह के बुलाते थे. अब स्टोरी पर आते है.

मुझे ऐसी हालत में देख कर वो बोला: भाभी आपको ऐसा कुछ करने से पहले दरवाज़ा बंद कर लेना चाहिए. अगर किसी ने आपके पति को इसके बारे में बता दिया, तो आपने सोचा है क्या हो सकता है.

मैं: हा, बहुत गड़बड़ हो जाएगी. लेकिन आप तो समझदार लगते है, और मेरे पति को कुछ नही बताएँगे. ऐसा ही है ना?

भाटिया: देखिए मैं इसकी कोई गॅरेंटी नही ले सकता. वैसे तो अगर मैं आपके पति को कुछ ना बतौ, तो इसमे मेरा कोई नुकसान नही है. लेकिन कोई फ़ायदा भी नही है.

मैं: आपको क्या चाहिए?

भाटिया मेरे पास आया, और बोला: जब आप जैसी रूप से लदी हुई भाभी सामने खड़ी हो, तो मैं और क्या माँग सकता हू.

मैं: मतलब?

भाटिया: मतलब आपने इस अमित को आपको प्यार करने का मौका दिया. एक मौका हमे भी दो. हम भी आपको ऐसा मज़ा देंगे, की आप बार-बार हमे बुलाएँगी.

मैं सोच रही थी, की मैं उसको माना नही कर सकती थी. क्यूंकी उसने वो देख लिया था, जो उसको नही देखना चाहिए था. फिर मैं बोली-

मैं: चलिए ठीक है. मैं आपको अपने जिस्म का मज़ा दूँगी. लेकिन आप ये बात भूल जाओगे की आपने कुछ देखा है.

भाटिया: कों सी बात?

और हम दोनो हस्स दिए. अमित ये सब देख रहा था. वो बोला-

अमित: मैं ज़रा शटर बंद कर देता हू.

वो नीचे गया, और भाटिया ने मुझे अपनी बाहों में भर लिया, और मेरे होंठो के साथ अपने होंठ जोड़ दिए. अब हम दोनो एक-दूसरे के लिप्स चूस रहे थे. काफ़ी मज़ेदार किस कर रहा था वो. साथ में मेरी गांद भी दबा रहा था.

फिर उसने मेरा पल्लू हटाया, और मेरा ब्लाउस खोल दिया. उसके बाद ब्रा में काससे मेरे बूब्स में अपना मूह डाल के चाटने लगा. मैं उसके सर को अपने बूब्स में दबा रही थी. मेरी खुश्बू उसको मदहोश कर रही थी, और वो मेरी गर्दन पर काट रहा था.

फिर उसने मेरी सारी निकाल दी, और पेटिकोट भी नीचे गिरा दिया. अब वो मेरे पीछे आ गया, और पीठ पर किस करते हुए मेरी ब्रा खोल कर गिरा दी. फिर उसने अपने कपड़े उतारे और अंडरवेर में आ गया. उसने मुझे पीछे से बाहों में भर लिया, और मेरे साथ चिपक गया.

अब हम दोनो के गरम बदन एक-दूसरे के साथ चिपके हुए थे. उसके हाथ मेरे बूब्स पर थे, और वो बूब्स मसल रहा था. उसका लंड मुझे मेरी गांद पर महसूस हो रहा था. फिर उसने मेरी पनटी में हाथ डाल लिया, और मेरी गर्दन को चूमते हुए मेरी छूट सहलाने लगा.

उतनी देर में अमित वापस आ गया. हम दोनो को ये सब करते देख अमित का लंड खड़ा हो गया. वो भी जल्दी से नंगा हो गया, और घुटनो के बाल मेरे सामने बैठ गया. फिर उसने मेरी पनटी पकड़ी, और उसको खींच कर निकाल दिया.

अब जिस छूट को भाटिया मसल रहा था, अमित ने उसमे अपनी जीभ डाल ली. भाटिया ने अपने दोनो हाथ मेरे बूब्स पर रख लिया. अब अमित नीचे मेरी छूट चाट रहा था, और भाटिया मेरे बूब्स मसल रहा था, और मेरी गर्दन और शोल्डर्स पे किस कर रहा था.

मेरा तो बुरा हाल हो गया था. मेरी आ आ की सिसकारियाँ निकल रही थी. फिर भाटिया ने अमित को नीचे लेटने को कहा. अमित नीचे ज़मीन पर लेट गया. उसके बाद उसने मुझे अमित के उपर लंड छूट में लेके बैठने को कहा.

मैं अमित के उपर बैठी, और उसके लंड को अपनी छूट में ले लिया. फिर उसने मुझे अमित के उपर लिटा दिया. असल में वो मेरी गांद मारना चाहता था. उसने मेरे पीछे आके मेरे चूतड़ खोले, और मेरी गांद का च्छेद चाटने लगा. इससे मुझे मज़ा आने लगा.

नीचे से अमित धीरे-धीरे अपना लंड मेरी छूट में अंदर-बाहर कर रहा था. फिर भाटिया ने अपने लंड को हाथ में लिया, जो 7 इंच का था, और आयिल से पूरा भिगो लिया. जब मैने उसको ऐसा करते देखा, तो मैं समझ गयी की वो गांद मारने की तैयारी में था.

मैने उसको माना किया, क्यूंकी मेरी गांद वर्जिन थी. लेकिन अब वो साला कहा मानने वाला था. उसने अमित को बोल दिया की मुझे पकड़ कर रखे. फिर जब तक मैं कुछ कर पाती, उसने मेरी गांद के च्छेद पर लंड रख कर ज़ोर का धक्का मारा. आयिल की वजह से लंड गांद को चीरता हुआ आधा अंदर चला गया. मेरे चीख मारने से पहले अमित ने अपने मूह से मेरा मूह बंद कर दिया.

भाटिया ने तबाद-तोड़ धक्के पूरा लंड गांद में डाल दिया. मुझे बहुत दर्द हो रहा था. लेकिन अमित मुझे किस करके, और मेरे बूब्स चूस कर मुझे गरम करता जेया रहा था. 5 मिनिट भाटिया मुझे झटके मारता रहा, और छूट में तो लंड था ही.

फिर मुझे मज़ा आने लगा, और मैं खुद भी गांद हिला-हिला कर दोनो लंड का मज़ा लेने लगी. अब हम तीनो में रिदम पूरा बन गया था, और दोनो तेज़ी से मेरी छूट और गांद छोड़ने लगे. मुझे इतना मज़ा आने लगा की मेरा मूट भी बीच में ही निकल गया.

दोनो की चुदाई से मैं 3 बार झड़ी, और फिर उन्होने अपने माल से मेरे दोनो च्छेद भर दिए. उसके बाद भाटिया चला गया, और मैं और अमित वही नंगे लेते रहे.

दोस्तों अगर आपको कहानी का मज़ा आया हो, तो इसको लीके और कॉमेंट ज़रूर करे..

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