ड्राइवर को नंगा देख मालकिन की चूत गीली

ही फ्रेंड्स, मेरा नाम कल्पना केपर है. मैं 32 साल की हू, और पुणे में रहती हू. पेशे से मैं एक क्रिमिनल लॉयर हू. मेरी हाइट 5’6″ है, और रंग ठीक-ठीक गोरा है. फिगर मेरा 36-30-38 है. सीधी भाषा में बतौ, तो मैं बहुत सेक्सी हू.

3 साल पहले मेरी शादी हुई थी. लेकिन मेरी और मेरे पति की ज़्यादा जमी नही, तो हम दोनो ने म्यूचुयल अग्रीमेंट से डाइवोर्स ले लिया. उसके बाद मैने सिर्फ़ अपने करियर पर ध्यान दिया. मैं केसस जीतती गयी, और मेरी रेप्युटेशन और बॅंक बॅलेन्स दोनो बढ़ते गये. लेकिन एक चीज़ जो मुझे नही मिल पा रही थी, वो थी सेक्षुयल सॅटिस्फॅक्षन.

डाइवोर्स के बाद मेरे घर वालो ने सीधे-सीधे बोल दिया था की मेरे उनके घर में रहने से उनको दिक्कत थी. तो मैने घर छ्चोढ़ दिया, और रेंट पर एक फ्लॅट ले लिया. फिर पैसे आए, तो मैने वही फ्लॅट खरीद लिया. आज मेरे पास फ्लॅट और गाड़ी दोनो है.

मैने एक ड्राइवर भी रखा हुआ, है. मेरे ड्राइवर का नाम पंकज है. वो एक शादी-शुदा आदमी है, और 40 साल का है. पंकज 5’11” हाइट वाला, और सावले रंग का बंदा है. वो मेरी किसी भी बात को कभी ना नही बोलता.

मैं उसको जब भी बुला लू, वो बिना कुछ कहे टाइम पर पहुँच जाता है. मेरी ये कहानी मेरे और पंकज के बीच हुए सेक्स की है. तो चलिए मैं आपको बताती हू की क्या हुआ.

मुझे एक केस के सिलसिले में राजस्थान जाना था. प्लैइन की टिकेट अवेलबल नही थी, तो मैने पंकज से पूछा की उसको ड्राइव करने में कोई प्राब्लम तो नही. पंकज ने हमेशा की तरह मुझे जाने के लिए हा बोला, और हम दोनो निकल पड़े.

मैने रेड टॉप और ब्लू जीन्स पहनी हुई थी, और मैं पीछे की सीट पर बैठी म्यूज़िक सुन रही थी. 2 घंटे लगातार म्यूज़िक सुनने के बाद मैं बोर होने लगी. फिर मैने सोचा पंकज से कुछ बात की जाए. मैने उसकी पूछा-

मैं: और पंकज कैसा चल रहा सब?

पंकज: ठीक मेडम.

मैं: बच्चे ठीक है (उसके 2 बेटे है).

पंकज: जी मेडम.

मैं: कों सी क्लासस में पढ़ते है?

पंकज: मेडम बड़ा वाला 9त में है, और छ्होटा वाला 5त में है.

मैं: बढ़िया है. ठीक पढ़ते है दोनो?

पंकज: बड़ा वाला सिन्सियर है मेडम, और अपनी क्लास का टॉपर है. छ्होटा वाला भी अछा पढ़ता है, लेकिन वो शरारती बहुत है.

मैं: अब बच्चा है तो शरारती तो होगा ही. कोई ना, टाइम के साथ वो भी सयाना हो जाएगा. अभी तो खेलने कूदने के दिन है.

पंकज: जी मेडम.

अब मेरे पास कुछ और पूछने को था नही, तो मैं छूट हो गयी. मुझे अछा लगा पंकज से बात करके. बड़े शरीफ टाइप का था पंकज. मैने कभी भी उसको मुझे वैसी नज़रों से देखते हुए नही देखा. मैने तो कभी रियर व्यू मिरर में से भी उसको मुझे देखते नही देखा. काफ़ी कंफर्टबल थी मैं उसके साथ.

फिर मुझे नींद आने लगी, और मैं सो गयी. तकरीबन एक घंटे बाद एक ज़ोरदार आवाज़े से मेरी नींद खुली. मैने आँखें खोली, तो मैं एक-दूं से दर्र गयी. बाहर अंधेरा हो रखा था, और तेज़ बारिश हो रही थी. बिजली ज़ोर-ज़ोर से कड़क रही थी.

गाड़ी बड़ी स्लो स्पीड में चल रही थी, क्यूंकी जाम लगा हुआ था. तभी मैने पंकज से पूछा-

मैं: ये इतना जाम क्यूँ लगा है?

पंकज: पता नही मेडम.

मैं: वो सामने पोलीस वाले खड़े है, उनसे पूछो तो ज़रा.

फिर पंकज ने गाड़ी पोलीस वालो के सामने रोकी, और उनसे पूछने लगा.

पोलीस वाला बोला: आयेज एक आक्सिडेंट हो गया है ट्रक का. सड़क पूरी तरह से ब्लॉक्ड है. सुबा तक जाम नही खुलने वाला, क्यूंकी क्रॅन सुबा ही आएगी. अगर आपको गाड़ी में नही सोना तो पीछे एक होटेल है, वाहा रात गुज़ार लीजिए.

तभी मैने सोचा की रात गाड़ी में निकालनी तो मुश्किल हो जाएगी. तो होटेल जाना ही सही रहेगा. ये सोच कर मैं पंकज को बोली-

मैं: पंकज आप गाड़ी घुमा ही लो. हम होटेल में रुक जाते है.

फिर हम होटेल की तरफ चल पड़े. होटेल में भी जाम के कारण काफ़ी भीड़ थी, और गाड़ियों की लंबी लाइन लगी हुई थी. पार्किंग में बड़ी मुश्किल से गाड़ी पार्क करके हमे भाग कर होटेल के गाते तक जाना पड़ा. वाहा पहुँचते हुए हम दोनो भीग गये.

फिर वाहा जाके मैने रिसेप्षन पर 2 रूम्स के लिए बोला. लेकिन भीड़ होने की वजह से रूम कम थे, और एक ही रूम मिल रहा था. अब मजबूरी थी, तो एक रूम से ही गुज़ारा करना पड़ा. फिर हम दोनो रूम की तरफ चल पड़े. रूम में जाके हमने हीटर चलाया. हम पुर भीगे हुए थे, और हमे ठंड लग रही थी. फिर मैने पंकज से कहा-

मैं: पंकज आप रूम में कपड़े बदल लीजिए, और मैं बातरूम में चली जाती हू.

ये बोल कर मैं बातरूम की तरफ बढ़ने लगी, और पंकज अपना बाग खोल कर कपड़े निकालने लगा. फिर अंदर जाके मैने अपने कपड़े दरवाज़े पर लगे हॅंगर पर टांगे, और अपना टॉप उतारने लगी.

जब मैं टॉप उतार रही थी, तो अचानक से मेरे दिमाग़ में पंकज का ख़याल आया. मैं सोचने लगी की वो भी कपड़े बदल रहा होगा. मेरा मॅन उसको देखने का करने लगा. पता नही क्यूँ, लेकिन ऐसी ज़बरदस्त इक्चा जागी थी, की मैं अपने आप को कंट्रोल नही कर पाई.

फिर मैने धीरे से बातरूम का दरवाज़ा खोला, और बाहर देखने लगी. पंकज अपनी शर्ट के बटन खोल रहा था. उसकी शर्ट भीग कर उसके बदन से चिपकी हुई थी. फिर उसने अपनी बनियान उतरी. अब वो उपर से नंगा था.

उसकी बॉडी तो नही बनी हुई थी, लेकिन वो फिट था. और किसी भी औरत को रिझाने के लिए उसकी बॉडी मस्त थी. यहा किसी भी औरत का मतलब मुझसे है. उसकी चेस्ट पर थोड़े बाल थे, जो बहुत सेक्सी लग रहे थे.

फिर उसने टवल उठाया, और खुद को पोंछने लगा. उसके बाद उसने अपनी बेल्ट खोली, और पंत उतार दी. उसके अंडरवेर में से उसके लंड का उभार सॉफ दिख रहा था. फिर उसने अपना अंडरवेर उतरा, और उसका काला नाग अब मेरी आँखों के सामने थे.

फिर उसने अपनी जांघों को टवल से पोंछना शुरू किया. उसका लंड देख कर मेरे बदन में सनसनी सी होने लगी. मेरा दिल कर रहा था, की मैं जौ, और उसके लंड को अपने मूह में डाल लू. तभी पंकज ने अपना हाथ अपने लंड पर रखा.

इसके आयेज क्या हुआ, वो आपको अगले पार्ट में पता चलेगा. आयेज जाके कहानी और भी मज़ेदार होने वाली है. अगर यहा तक की कहानी आपको पसंद आई हो, तो इसको शेर ज़रूर करे.

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