दोस्त की सेक्सी मॉम के साथ सेक्स किया

दोस्तो, मेरे एक दोस्त की सेक्सी मॉम की यह कहानी तब की है जब मैं कॉलेज में पढ़ाई करता था.

मेरा नाम पार्थ है और मैं सूरत गुजरात से हूँ. मेरी उम्र 23 साल की है. मैंने ज्यादा लड़कियों के साथ तो सेक्स नहीं किया है, लेकिन जिनके साथ भी किया है, बहुत ही अच्छे से उन्हें चोदा है. मुझे आंटियों को चोदने का बड़ा शौक है. उनके बड़े बड़े मम्मों और बड़े बड़े चूतड़ मुझे अपनी तरफ खींचते हैं. इस वजह से मैं सिर्फ अब आंटियों की चूत लेने की ही फिराक में रहता हूं, लेकिन अभी तक मैंने किसी आंटी की चूत नहीं ली है. क्योंकि मुझे कभी ऐसा मौका नहीं मिल पाया.

अब जरा दूसरी तरफ की बात कर लेते हैं. मेरी मां बड़ी ही सीधी हैं, वह सिर्फ अपने काम से मतलब रखती हैं और कॉलोनी में ज्यादा इधर उधर नहीं जाती हैं. जबकि हमारी कॉलोनी की जितनी भी औरतें हैं, सब किटी पार्टी और कहीं इधर उधर जाती हैं, लेकिन मेरी मां को कहीं भी जाना पसंद नहीं है. वह सिर्फ घर में रहना ही पसंद करती हैं और वह काफी शांत स्वभाव की हैं. मेरे पिताजी भी इसी तरीके के हैं. वह भी अपने काम में बिजी रहते हैं और सिर्फ अपने काम से ही मतलब रखते हैं, बाकी उन्हें भी कहीं आने जाने का कुछ ज्यादा शौक नहीं है.

कॉलेज में मेरे बहुत सारे दोस्त थे लेकिन सिर्फ कॉलेज तक ही सीमित रहे, सब लोग अपने घर जाते हैं और ज्यादा किसी से मतलब नहीं रखते. ये सब बातें मुझे जरा अटपटी सी लगती थीं. मुझे खुल कर जिन्दगी जीने में मजा आता है.

खैर.. उस वक़्त हमारे कॉलेज में एक नया लड़का आया, उसका नाम हरीश था हरीश और मेरी पहले से बिल्कुल भी नहीं बनती थी क्योंकि वह कुछ ज्यादा ही एटीट्यूड में रहता था. मुझे लगता था कि बहुत ही ज्यादा घमंडी किस्म का लड़का है, इसलिए मैं उससे बिल्कुल बात नहीं करता था और ना ही वह मुझे पसंद था. लेकिन जैसे जैसे समय बीता तो मुझे लगा कि वह एक अच्छा लड़का है और काफी मदद भी करता है.

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धीरे धीरे मेरी उससे बहुत अच्छी दोस्ती हो गई. अब हम दोनों काफी अच्छे दोस्त बन चुके थे. मैं उसे अपने घर भी लेकर जाता था, हालांकि मैं कभी उसके घर नहीं गया था. मैंने उसे अपने माता-पिता से भी कई बार मिलाया था. मेरे माता-पिता भी उसकी बड़ी तारीफ़ करते थे. वह कहते थे कि हरीश एक अच्छा लड़का है. मेरे घरवाले उस पर बहुत ही भरोसा करने लगे थे.

एक दिन वह कहने लगा कि तुम मेरे घर चलना.
मैंने कहा- ठीक है, देखते हैं.

इत्तेफाकन उसकी मां का जन्मदिन था तो उसने मुझसे कहा कि आज मेरी मम्मी का जन्मदिन है. आज तुम मेरे घर शाम को आ जाना और अपने मम्मी पापा को भी लेकर आना.
मैंने कहा- ठीक है, मैं अपने मम्मी पापा को भी ले आऊंगा, अगर वह आते हैं. तुम तो जानते हो, उनको कहीं भी आना जाना पसंद नहीं है.

मैं ये बात समझ रहा था कि मेरे माता पिता जी जाने वाले नहीं हैं, लेकिन ना जाने उनको आज क्या हो गया और वे मान गए.
मैंने जब उनसे चलने के लिए कहा तो उन्होंने कहा- ठीक है.. हम तेरे साथ चलते हैं.

अब वह भी मेरे साथ हरीश के घर चल पड़े. हम लोग जैसे ही हरीश के घर पहुंचे तो हमने उसकी मम्मी को गिफ्ट दिया. हरीश ने अपनी मम्मी से हम सभी का इंट्रोडक्शन करवाया.

मैंने जैसे ही उसकी मम्मी को देखा तो पाया कि उनकी नजरें मेरी तरफ ही देख रही थीं. उनकी आंखें बहुत बड़ी बड़ी थीं, वह काफी सुंदर थीं. वह किसी भी एंगल से नहीं लग रही थीं कि हरीश की मां हैं. वे उम्र में काफी छोटी लग रही थीं. उन्होंने अपने आप को बहुत ही मेंटेन करके रखा हुआ था. उनके स्तन भी बिल्कुल मेंटेन थे और उनकी गांड भी हल्की सी बाहर निकली हुई थी जिससे कि मुझे उन्हें देखकर अन्दर से सेक्स की भावना जाग गई.

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मैंने भी हरीश की मम्मी से बातें करना शुरू कर दिया और उन्हें जन्मदिन की बधाइयां दीं. वह बहुत खुश हो गईं.
मेरी मां उनकी काफी तारीफ करने लगीं. हरीश के पिताजी का देहांत काफी समय पहले ही हो चुका था. उसकी मां अकेली ही घर पर रहती हैं. उसके पिताजी सरकारी कर्मचारी थे, तो उनकी पेंशन से ही उनका घर चलता है.

हम सभी काफी देर हरीश के घर रुके. खाना आदि भी हुआ. उसके बाद अब मैंने हरीश की मां से जाने की परमिशन ली और हम लोग वहां से अपने घर के लिए निकलने को हुए.
जैसे ही हम अपने घर के लिए निकल रहे थे तो आंटी ने मुझसे कहा कि बेटा तुम अपना नंबर दे दो. कई बार हरीश को कॉलेज से आने में देर हो जाती है, तो मैं तुम्हें ही फोन कर लिया करूँगी.
मैंने उन्हें अपना नंबर दे दिया.

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