दोस्त के बाप ने तोड़ी मेरी गांद की सील

ही दोस्तों, मेरा नाम सौरव है, और मैं अमृतसर से हू. मेरी उमर 25 साल की है, मगर ये कहानी तब की है जब मैं सिर्फ़ 18 का था. पहले मैं अपने बारे में बता डू.

मैं एक सॉफ्टवेर इंजिनियर हू. मेरा फिगर स्लिम और रंग गोरा है. मेरी दाढ़ी नही आती. वैसे तो मैं वर्स हू, मगर मोस्ट्ली बॉटम ही प्रिफर करता हू. मेरे शरीर का पोस्चर बिल्कुल लड़कियों वाला है.

तो अब कहानी पे आते है. मेरे दोस्त का नाम अमनदीप है, और उसके पापा का नाम सिमरनजीत है. वो पंजाबी है. तो लॉहड़ी में मैं उनके घर गया हुआ था. मैं तब न्यू चीज़े काफ़ी एक्सपीरियेन्स कर रहा था.

खुद को एक्सप्लोर कर रहा था मैं. वही पहली बार मैं अमनदीप के पापा से मिला. उनकी उमर 50 के आस-पास होगी. मगर वो बिल्कुल हटते-काटते लगभग 7 फुट के होंगे. उनकी लंबी दाढ़ी और चेहरे की शोभा बढ़हती मूचे थी.

उन्हे देख कर ही मेरे अंदर कुछ-कुछ होने लगा था. उनके हहतो की ग्रिप भी काफ़ी मज़बूत थी. जब लॉहड़ी का फंक्षन चल ही रहा था, तो मैने नोटीस किया की अमनदीप के मम्मी-पापा किसी बात पर झगड़ रहे थे.

फिर दोनो आ कर पूजा मैं शामिल हो गये. अमनदीप के पापा की नज़र मुझ पर ही थी. मैं भी बार-बार उनको देखे जेया रहा था.

पूजा के बाद मैने देखा की अंकल अकेले-अकेले शराब पी रहे थे. मैं उनके पास गया, और उनके कंधे पर हाथ रखा.

मे: क्या हुआ अंकल, कुछ उदास लग रहे हो?

अंकल: अर्रे कुछ नही बेटा जी, बस ऐसे ही.

उसके बाद हम दोनो ने कुछ देर बात-चीत की. अंकल अभी भी कुछ परेशन से लग रहे थे, बुत अभी तक उनको थोड़ी चढ़ चुकी थी.

मे: अंकल आपको चढ़ गयी है. लाइए मैं ये बॉटल ले लेता हू.

अंकल: ओये, तू मुझे अंकल ना बोला कर. मुझे तू नाम से ही बुलाया कर.

मे: मगर ऐसा क्यूँ?

अंकल: क्यूंकी पसंद है तू मुझे. मैं तुझे अपना बनाना चाहता हू.

मे: मगर मैं तो लड़का हू. और मैने कभी ऐसा कुछ ट्राइ नही किया.

अंकल ने तभी मुझे उठा कर जाम के किस किया. लगभग 5 मिनिट तक हम किस करते रहे. मैं भी उन्ही में मगन हो गया. ये सब मेरे लिए नया था, मगर ग़लत नही लग रहा था.

अंकल: क्या अभी भी तुम्हे ये सब ग़लत लगता है?

मैने बिना कुछ सोचे समझे उन्हे दोबारा कस्स के पकड़ा, और किस करने लगा. उनके बदन की खुसबु मुझमे जोश जगा रही थी. हम दोनो लगभग 10 मिनिट किस करते रहे. उनकी दाढ़ी मुझे थोड़ी परेशन कर रही थी, मगर मैं उस वक़्त सब कुछ नज़र-अंदाज़ कर रहा था.

फिर वो मेरी जीन्स में हाथ डाल कर मेरी गांद दबाने लगे. फिर उन्होने मेरी गांद के छेड़ के पास अपना हाथ फेरना शुरू किया, और मेरी गांद में अपनी एक उंगली डाल थी. मेरी गांद भी उस वक़्त गीली हो चुकी थी.

मैं भी साथ ही साथ उनका लंड उनके उपर पाजामे की उपर से सहला रहा था. उनका लंड काफ़ी मोटा था. मेरी मुट्ठी में तक नही आ रहा था उनका लंड.

मैं समझ चुका था, की कों टॉप होगा, और कों बॉटम. हम दोनो लोगों से नज़रे चुराते हुए उनकी गाड़ी में बैठ गये, और डोर लोंग ड्राइव पर चले गये.

रास्ते में ही उनका लंड पोइरी तरह से खड़ा हो चुका था. मैने उनके पाजामे का नाडा खोला, और उनका लंड बाहर निकाला. शायद अंकल ने काई सालो से झाँत के बाल भी नही शेव किए थे. उनकी झाँत के बाल बहुत बड़े थे.

लगभग मेरे बालों जीतने थे उनकी झाँत के बाल. उनका लंड तो 9 इंच लंबा और 4 इंच मोटा था. मैं उनका लंड देखते ही दर्र गया. फिर भी धीरे-धीरे मैने उनके लंड को चूसना शुरू किया.

पहले तो मैने उनके लंड को साइड से चूसना शुरू किया. थोड़ी देर ऐसे ही चूसने के बाद मैने उनके गोते चूसना शुरू किया. तभी मैं उनको बोला-

मे: अगली बार प्लीज़ गोते कम से कम शेव कर लेना.

अंकल: आहह…. तेरे लिए कुछ भी कर लूँगा.

अभी मैं लंड चूस ही रहा था की अंकल ने गाड़ी खेतो के बीचो-बीच पार्क कर दी, और मुझे उठा कर किस करने लगे. मेरे मूह में अभी भी उनकी झाँत के बाल थे.

फिर हम दोनो ने कपड़े उतार दिए. अंकल के पुर शरीर पर बाल थे. मैं पूरा चिकना था. फिर हम दोनो कार की पीछे वाली सीट पर चले गये. मैं उनका लंड चूस रहा था, और वो मेरा. अंकल की मुट्ठी भी बड़ी थी, और मेरा पूरा लंड उनके एक हाथ में समा जेया रहा था. उनका लंड मेरे मूह में मुश्किल से जेया रहा था.

फिर अंकल ने मुझे पलताया, और मेरी गांद चाटने लगे. मेरी गांद मचल रही थी. फिर अंकल अपना लंड धीरे-धीरे मेरी गांद में डालने लगे. पहले तो उनका लंड मेरी गांद में जेया तक नही रहा था, तो दोबारा अंकल मेरी गांद को चाटने लगे.

फिर उन्होने अपनी दो उंगलिया डाल कर मेरी गांद के छेड़ तो तोड़ा ढीला किया. दोबारा ट्राइ करने पर अंकल का लंड अंदर चला गया. मुझे काफ़ी दर्द हो रहा था. अंकल के लंड पर तोड़ा खून भी लग गया था. खून देख कर वो बोले-

अंकल: रुक जौ?

मे: नही आप कंटिन्यू रखिए. मैं से लूँगा. कुछ सीरीयस तो नही?

अंकल: नही, ऐसा कुछ नही है. पहली बार तेरी गांद का छेड़ खुला है. उसी की निशानी है ये.

धीरे-धीरे अंकल का पूरा लंड मेरी गांद में चला गया. फिर उसी हालत में अंकल ने मुझे घोड़ा बनाया, और मेरी गांद मारने लगे.

मेरी मोनिंग के साथ चीख भी निकल रही थी, मगर मज़ा बहुत आ रहा था. फिर मैने खुद अंकल से तोड़ा स्पीड बढ़ने को कहा. तो अंकल ने मेरे बालो को पकड़ा, और स्पीड बढ़ा दी.

अंकल: मज़ा आ रहा है ना?

मे: आह… ह… आह… हा अंकल, दर्द के साथ मज़ा भी आ रहा है.

फिर अंकल ने लंड मेरी गांद से बाहर निकाला, और मुझे पलताया. और फिर वो अपना और मेरा दोनो का लंड पकड़ के हिलने लगे. मैं सुकून के सातवे आसमान पे था. फिर अंकल मेरा लंड चूसने लगे. लगभग 5 मिनिट बाद अंकल ने दोबारा लंड मेरी गांद में डाल दिया, और मेरी गांद छोड़ने लगे. लगभग 20 मिनिट और छोड़ने के बाद अंकल ने मुझसे पूछा-

अंकल: माल कहा गीरौ?

मे: मेरे मूह में. मैं आपका पूरा माल अपने चेहरे पे चाहता हू.

फिर अंकल ने अपना लंड मेरे मूह के पास किया, और सारा माल मेरे मूह पर गिरा दिया. अंकल का माल एक-दूं गाढ़ा था. मेरा मूह उनके माल से कवर हो चुका था. मैने अंकल का माल उंगलियों पे इकट्ठा किया, और चाट गया.

मैं अभी भी नही झाड़ा था. अंकल ने मुझसे पूछा-

अंकल: मुझे छोड़ेगा, या चूस के निकाल डू.

मैने अंकल को चूसने को कहा, और अंकल भी मेरा लंड चूसने लगे. फिर थोड़ी ही देर बाद मैं भी अंकल के मूह में ही झाड़ गया. अंकल भी मेरा माल निगल गये. ये मेरी लाइफ का एक-दूं यूनीक एक्सपीरियेन्स था.

मैने बिल्कुल नही सोचा था, की मुझे गांद मरवाने में इतना मज़ा आएगा. फिर अंकल ने मुझे घर ड्रॉप किया. हमने दोबारा मिलने का वादा किया, और मिले भी. उस दिन के बाद काई और बार हमने अलग-अलग जगह, नये-नये तरीके से चुदाई मचाई. वो सब जानने के लिए मेरी अगली कहानियो का वेट करे.

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