डॉक्टर ने चोद कर चरमसुख दिया

मेरी चुदाई की कहानी अब आयेज-

जब मेरी छूट उसके साइज़ की आदि होने लगी, तो उन्होने तेज़ और गहरे धक्के लगाने शुरू कर दिए. अब वो मेरी छूट की गहराइयों तक जेया रहे थे, और हर बार मुझे जन्नत का एहसास करा रहे थे. मेरी छूट उनके लंड को कस्स कर जाकड़ रही थी, और हर धक्के के साथ मैं स्वर्ग की उँचाइयों को छ्छू रही थी.

मैं (मदहोशी में): ऑश… डॉक्टर… और तेज़… हन… हन… ऐसे ही… मेरी छूट को फाड़ दो, डॉक्टर, इसकी प्यास बुझा दो.

कमरे में सिर्फ़ मेरी सिसकारियाँ, उनके धक्को की आवाज़, और शरीर के टकराने की आवाज़े गूँज रही थी. डॉक्टर अमित ने मेरे बालों को पकड़ा और मेरे होंठो पर फिर से एक वाइल्ड किस दिया, जैसे वो मेरे सारे रस्स चूस लेना चाहते हो.

डॉक्टर अमित (हानफते हुए): तुम्हारी छूट बहुत कस्स कर जकड़ती है. साली, क्या छूट पाई है तूने. मुझे तो बहुत मज़ा आ रहा है. तेरी ये छूट तो मेरे लंड को निगल रही है. तुम तो एक-दूं गरम हो रही हो, मेरी रंडी. पूरा निचोढ़ दूँगा आज तुम्हे, इस प्यासी छूट को शांत कर दूँगा.

मैं (मैं भी हानफते हुए): हन… निचोढ़ दो… मुझे… ऐसे ही छोड़ोगे तो मैं आपकी रंडी बनने को तैयार हू. मेरी प्यास बुझा दो. भर दो मेरी छूट को अपने रस्स से.

मैं (और ज़्यादा जोश में): तुम्हारा लंड… आ… मेरी छूट का पूरा इलाज कर रहा है. इससे पहले ऐसा मज़ा कभी नही मिला. कोई नही कर पाया मेरी छूट का वो हाल जो तुम कर रहे हो.

डॉक्टर अमित (मेरे होंठो पर एक विकेड स्माइल के साथ, हानफते हुए): श! तो कितने लोगों से छुड़वा चुकी हो, मेरी अनुभावशाली रंडी?

मैं (लंड को अपनी छूट में महसूस करते हुए): बहुत सारे लोगों से छुड़वा चुकी हू. कभी गिनती नही किया, डॉक्टर. पर आज तक कोई इतना मज़ा नही दे पाया.

डॉक्टर अमित (एक तेज़ धक्का देते हुए): मुझे तो तुम्हे देख कर ही समझ गया था की तुम चुड़क्कड़ रॅंड हो. तुम्हारी आँखों में ये प्यास सॉफ दिखती थी.

मैं (अपनी कमर को उनके धक्को के साथ चलते हुए): पर आज तक किसी की रंडी नही बनी थी, डॉक्टर अमित. लेकिन आपने मुझे बना दिया. आपने अपनी असली मर्दानगी दिखाई.

डॉक्टर अमित (मेरी कमर को और ज़ोर से पकड़ते हुए): जानता हू मेरी जान. मैने बहुत रंडियन छोड़ी है, पर तेरे जैसा माल, जो अपनी प्यास में पागल हो जाए, आज तक नही मिला. तू तो बस मेरे लंड के लिए ही बनी है.

कुछ देर बाद, डॉक्टर अमित ने मुझे घोड़ी बनने का इशारा किया. मैं तुरंत घुटनो और हाथो के बाल पर आ गयी. मेरी गांद उपर उठी हुई थी, उनके लंड के लिए तैयार. मेरी सारी अब कमर पर ठीक थी, पर मेरा ब्लाउस तो था नही, तो मेरे बूब्स झूल रहे थे और उनके सामने थे. उन्होने उनको भी पकड़ लिया ज़ोर से मसालते हुए.

डॉक्टर अमित (मेरे पीछे से मेरी गांद पर थप्पड़ मारते हुए): मेरी रंडी, अब तेरी गांद देख कर मेरा लंड और पागल हो गया है. ले, अब इस पोज़िशन में भी मेरा लंड खा.

उन्होने पीछे से अपना लंड मेरी छूट में डाला और तेज़ धक्के लगाना शुरू किया. ये पोज़िशन मुझे और भी गहरी और तीवरा लग रही थी, जैसे उनका लंड मेरी आँत तक घुस रहा हो. उनकी हर धक्के पर मेरी गांद हिल रही थी, और मैं आनंद से चीख रही थी.

मैं (घोड़ी बने हुए): आहह… और अंदर… और अंदर डालो… डॉक्टर… फाड़ दो मेरी छूट. पूरा घुसा दो अपना लंड.

डॉक्टर अमित (पीछे से धक्के मारते हुए): मज़ा आ रहा है ना, मेरी रानी? तेरी इस प्यासी छूट को मेरे लंड की ज़रूरत थी ना? तो और लो… ये लो…

और उन्होने और ज़ोर से धक्के मारे. मेरी गांद पर थप्पड़ भी मारे, जो मेरे जिस्म में एक अलग ही करेंट दौड़ा रहे थे.

डॉक्टर अमित: देख रीता, कैसे तेरी छूट मेरे लंड को निगल रही है. तू तो सच में मेरी चुड़क्कड़ रंडी है.

फिर उन्होने मुझे पलटने का इशारा किया. मैं सीधी लेट गयी और उन्होने मेरी टाँगें अपने कंधो पर रख ली. अब वो डॉगी स्टाइल में थे, पर मेरी टाँगें उपर थी. मेरी छूट उनके लंड के लिए पूरी तरह खुली हुई थी. ये पोज़िशन उनके लंड को मेरी छूट में और भी गहरा जाने दे रही थी. हर धक्के पर मेरा पूरा शरीर उछाल रहा था, बेंच भी हिल रहा था.

मैं (मेरी आँखें बंद थी और मैं पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी): उम्मह… हन… हन… डॉक्टर… बस ऐसे ही… और ज़ोर से… अंदर तक घुसा दो.

मैं पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी, उनके हर धक्के को अंदर तक महसूस कर रही थी. उनका लंड मेरी ग-स्पॉट पर लग रहा था, और मुझे अलग ही करेंट लग रहा था, जैसे मेरे जिस्म में लावा उबाल रहा हो.

डॉक्टर अमित (हानफते हुए): तुम तो बिल्कुल गरम तवे जैसी हो गयी हो, रीता. मेरी प्यास बुझा रही हो, साली. लगता है आज तेरी छूट का पानी पूरा निचोढ़ ही लूँगा.

मैं: और तुम… तुम मेरी हर ख्वाहिश पूरी कर रहे हो… मेरी जान. मुझे छोड़-छोड़ कर पागल कर दो.

वो लगातार तेज़ धक्के मारते रहे, और हम दोनो एक-दूसरे में पूरी तरह से खो गये, सारी दुनिया भूल कर. पसीना तेज़ी से बह रहा था, और कमरे का माहौल कामवासना से भर गया था, जिसमे हमारी सिसकारियाँ और हुआन-हुआन की आवाज़े घुल-मिल गयी थी. हर धक्के पर मेरी छूट चीख रही थी, और मैं उस बड़े लंड को पूरी तरह से अंदर तक ले रही थी.

कुछ देर की ताबड़तोड़, बेकाबू चुदाई के बाद, डॉक्टर अमित ने एक गहरी आहह भारी और कॉंडम के अंदर ही झाड़ गये. उनका लंड कॉंडम के अंदर गरमा-गरम वियर से भरा हुआ मेरी छूट में कुछ पल तक दबा रहा. उसकी गर्मी को मैं अंदर तक महसूस कर पा रही थी. उस वहाँ से निकली हुई गर्मी से मुझे और भी जोश सा आया. मैं भी उनके साथ ही झाड़ गयी. मेरा शरीर ढीला पद गया, पर परम खुशी और संतुष्टि से भरा हुआ था.

हम दोनो कुछ देर तक उसी अवस्था में लेते रहे, एक-दूसरे की सांसो को महसूस करते हुए और एक-दूसरे को टाइट्ली पकड़े हुए. ये मेरे लिए एक अविस्मरनिया अनुभव था, जिसने मेरी दबी हुई इच्छाओं को आज़ादी दी थी और मुझे एक नया रूप दिखाया था – एक ऐसी औरत का जिसे अब खुद के अंदर की रंडी से कोई शरम नही थी.

जब हमारी साँसें थोड़ी नॉर्मल हुई, तब डॉक्टर अमित ने धीरे से अपना लंड मेरी छूट से बाहर निकाला. कॉंडम में उनका गरमा-गरम वियर भरा हुआ था, जो उन्होने केर्फुली उतार कर डस्टबिन में फेंका. हम दोनो एक-दूसरे को देख कर मुस्कुराए, वो मुस्कान सॅटिस्फॅक्षन और शरारत से भारी थी.

डॉक्टर अमित (मेरे चेहरे को सहलाते हुए): कैसा लगा मेरी जान? अब मिला ना असली मज़ा? तुम्हारी छूट को तो आज जन्नत मिल गयी.

मैं: आ… डॉक्टर… क्या पूछते हो… ऐसा मज़ा तो मैने कभी सोचा भी नही था.

मेरी आवाज़ अब भी थोड़ी लड़खड़ा रही थी.

मैं: तुम्हारा लंड… उसने तो मेरी छूट को ज़िंदा कर दिया… उसकी हर प्यास बुझा दी.

वो हँसे, उनकी आँखों में शैतानी चमक थी. उन्होने मेरे माथे पर एक हल्का किस किया, और फिर मेरे होंठो पर भी एक चूमती हुए हँसी के साथ बोले: अब तुम्हारा असली ट्रीटमेंट शुरू हुआ है, रीता जी. अब दर्द नही, सिर्फ़ मज़ा मिलेगा.

हम दोनो धीरे से उठे. मेरा शरीर अब भी कमज़ोर और तोड़ा काँप रहा था, पर अंदर से एक अजीब सी एनर्जी और नशा भरा हुआ था. मैने अपनी सारी दोबारा पहनी, पर मेरी नज़र बार-बार उनके तंन बदन पर जेया रही थी. उन्होने भी जल्दी से अपने कपड़े पहन कर खुद को रेडी किया. उनके चेहरे पर अब एक शांत और सॅटिस्फाइड लुक था, जैसे उन्होने कोई बड़ी जुंग जीती हो.

जब मैं अपने बाल ठीक कर रही थी, उन्होने मेरे करीब आ कर मेरे कान में फुसफुसाया, उनकी गरम साँसें मेरे कान पर पद रही थी: जल्दी मिलेंगे फिर से, मेरी रंडी रीता जी. अब तो तुम्हारे बिना रहना मुश्किल होगा. तुम्हारी छूट की आदत हो गयी है मुझे.

मैं उनकी बात सुन कर शरम से लाल हो गयी, पर मेरे अंदर एक अजीब सी बेचैनी और उत्सुकता भी थी. मेरा दिल तेज़ी से धड़कने लगा था, अगली मुलाक़ात के ख़याल से ही.

जब मैं कॅबिन से बाहर आई, तो मेरा बेटा, जो अब तक फोन पर बिज़ी था, उसने तुरंत पूछा: मम्मी, इतना टाइम क्यूँ लग गया आज? सब ठीक है ना?

मैने एक गहरी साँस ली, और चेहरे पर एक मासूमियत भारी मुस्कान ला कर कहा: हन बेटा, सब ठीक है. वो क्या है ना, डॉक्टर अमित ने आज दो नये जे-राय निकाले, और दूसरा जे-राय निकालने में तोड़ा टाइम लग गया.

मैने अपनी बात को और पक्का करने के लिए आयेज जोड़ा, मेरी आवाज़ में प्यारी सी बनावट थी: डॉक्टर बोल रहे है की अब सब ठीक है, ज़्यादा फिकर की बात नही है.

मेरे बेटे ने मेरी बात पर यकीन कर लिया, और मुझे एक अजीब सी संतुष्टि मिली. ये झूठ बोलने की नही थी, बल्कि उस च्छूपे हुए राज़ को संभालने की थी, उस नयी ज़िंदगी को जीने की, जहाँ मैं संस्कारी औरत से चुड़क्कड़ रॅंड बन चुकी थी, और किसी को कानो-कान खबर नही थी.

और उस दिन के बाद, हमारी 5-6 बार और चुदाई हुई. वो पहली मुलाक़ात तो बस ट्रेलर थी. असली फिल्म तो अब शुरू हुई थी. हर बार जब मैं डॉक्टर अमित के हॉस्पिटल जाती, मेरे अंदर एक अलग ही जोश होता, मेरी चूचियाँ खड़ी हो जाती. मैं अब और भी ज़्यादा ध्यान रखती थी की क्या पहन रही हू, कैसे लग रही हू. क्यूंकी मैं जानती थी की ये सिर्फ़ ट्रीटमेंट नही, बल्कि मेरी छूट की ख्वाशें पूरी करने का टाइम था, डॉक्टर अमित के लंड से.

अगर कभी कॅबिन में बाकी का स्टाफ होता, तो डॉक्टर अमित बहुत चालाकी से काम लेते थे. वो मुझे चेक-उप के बहाने पर्दे के पीछे ले जाते. वहाँ हल्की सी प्राइवसी मिलते ही, वो मेरे करीब आते.

डॉक्टर अमित: रीता जी, आपकी बॅक देखनी पड़ेगी, तोड़ा सा चेक कर लू (वो प्रोफेशनल टोने में कहते. पर उनकी आँखों में शरारत और हवस सॉफ दिखती.)

और फिर, पर्दे के पीछे, उनका हाथ मेरे कमर से नीचे सरकता. उन्होने मेरे बूब्स को मसल दिया, जैसे वो मेरे निपल्स को अपनी उंगलियों में पूरी तरह से दबोच लेना चाहते हो. कभी मेरे निपल्स को हल्के से चुटकी भरते, तो कभी मेरे पेट पर उंगलियाँ फेरते हुए मेरी कमर के नीचे तक जाते.

मैं अपनी साँसें रोक लेती, कहीं कोई कामुक आवाज़ ना निकल जाए. वहाँ वो मुझे जल्दी-जल्दी किस करते. मेरे होंठो को चूसने लगते. मेरे गाल या नेक पर उनकी ज़ुबान हल्की सी छ्छू जाती. मैं चुप-छाप सब सहती, या कह लो, एंजाय करती, मेरी छूट गीली हो जाती.

कभी-कभी तो मेरा हाथ पकड़ कर अपनी पंत पर रख देते, ताकि मैं उनके खड़े लंड को महसूस कर साकु, उसकी सख्ती और गर्मी को. ये चोरी-चोरी के पल और भी ज़्यादा उत्तेजित करते थे, जैसे हम कोई सीक्रेट ग़मे खेल रहे हो. जहाँ हर चोरी का टच करेंट की तरह लगता था. हर मुलाक़ात, हर टच, हर नज़र में एक नयी गहराई थी, एक नया नशा, जो मुझे और उन्हे एक-दूसरे में खोता जेया रहा था.

और हन, कभी-कभी वो जे-राय या स्ट्रीट स्कॅन के बहाने मुझे लब में छ्चोढ़ देते थे. वो जानते थे की लब में कॅमरा नही होगा, और वहाँ स्टाफ भी हर वक़्त नही होता. लब में अक्सर एक छ्होटा सा रूम होता था, जहाँ मशीन्स रखी होती थी.

डॉक्टर अमित: यहाँ कोई नही आएगा, रीता जी. (वो मुस्कुराते हुए कहते, उनकी आँखों में चुराने का मज़ा सॉफ दिख रहा था.): अब आपका असली चेक-उप होगा मेरी प्यासी रंडी.

और फिर वहीं शुरू हो जाता. कभी-कभी तो वो मुझे लास्ट अपायंटमेंट देते थे, जब पूरा हॉस्पिटल खाली हो जाता था, और सिर्फ़ हम दोनो ही होते थे. तब उनके अंदर का शैतान बाहर आता था, और वो मुझे पूरी तरह से निचोढ़ देते थे, जैसे किसी प्यासी ज़मीन को बारिश. उन दीनो वो मेरी छूट को हर तरह से छोड़ते थे, बिना किसी दर या रोक-टोक के.

और हन, ये सब तब भी होता था जब मेरा बेटा मेरे साथ होता था. पर वो मेरे मोबाइल में ग़मे खेलने में इतना बिज़ी रहता की उसको समझ ही नही आता था की अंदर उसकी मम्मी क्या खेल रचा रही होती थी. बेटा साथ लेकर आती थी तो घर वालो को कभी शक भी नही हुआ की इलाज के नाम पर मैं छुड़वाने जेया रही होती थी.

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