छोटी दीवाली में छोटी मामी की चूत चोदकर दीवाली मनाई

Diwali Sex Story : हेल्लो दोस्तों मैं आप सभी का बहुत बहुत स्वागत करता हूँ। मैं पिछले कई सालों से इसका नियमित पाठक रहा हूँ और ऐसी कोई रात नही जाती जब मैं इसकी रसीली चुदाई कहानियाँ नही पढ़ता हूँ। आज मैं आपको अपनी स्टोरी सूना रहा हूँ। मैं उम्मीद करता हूँ कि यह कहानी सभी लोगों को जरुर पसंद आएगी। ये मेरी जिन्दगी की सच्ची घटना है।
मेरा नाम अथर्व मिश्रा है। मै लखनऊ में रहता हूँ। मेरी उम्र 22 साल की हैं। मै बहुत ही स्मार्ट पर्सनालिटी वाला बन्दा हूँ। मुझसे चुदवाने के लिए लड़कियों की लाइन लगी होती है। मै भी अपनी स्मार्टनेस का फायदा उठाता हूँ। मेरा 12 इंच का लंड जब भी किसी की चूत में घुसता हैं तो उसकी चीख निकल जाती है। लड़कियों की चूंचियो को पीना मुझे बहुत अच्छा लगता है। उनकी खूबसूरत रस भरी चूत को पीकर उनके खूब गर्म करता हूँ। वो भी मेरा लंड चूसकर लंबा करती हैं। मैंने अब तक कई सारी लड़कियों की चूत फाड़कर उनका भरपूर मजा लिया है। लड़कियो की टाइट चूत चोदने में बहुत मजा आता है। दोस्तों मै आपका समय बर्बाद न कर के अपनी कहानी पर आता हूँ।

दोस्तों अपने घर का मै अकेला वारिश हूँ। मेरे पापा एक डॉक्टर हैं। मम्मी भी वही पर रहती हैं। मेरे चाचा के घर कोई भी लड़का लड़की नहीं है। मै बचपन से ही चुदाई का खेल खेलता आ रहा हूँ। मुझे सेक्स में बहुत मजा आता है। खूबसूरत लड़कियों को देखते ही पकड़ कर चोद देने को मन करता है। लेकिन ये सब इतना आसान कहाँ है। लड़कियों को पटा कर उनकी मर्जी से चोदने का मजा ही कुछ और होता है। मैंने अपनी गर्लफ्रेंड के साथ कई बार ये सेक्सी खेल खेला है और सुख दिया है। मुझे उसे चोदने में कुछ ज्यादा ही मजा आता हैं। पहली बार जब मैं उसके घर मे घुसा था तो मैं काँप रहा था।
धीरे धीरे चुदाई करते करते मेरा ये डर दूर हो गया। मुझे भी अब वो बहुत प्यार करती हैं। जब भी मन करता है उसको चोदकर अपने लंड की प्यास बुझा लेता हूँ। उसको मै ज्यादातर घर पर ही पेलता हूँ। उसकी चूंचियो को दबा दबा कर मैंने खूब मजा लेता हूँ। उसके बाप ने घर में कैमरा लगवा दिया। कभी कभी रूम मिल जाता है तो बाहर ही चुदाई हो पाती हैं। फिर भी नए चूत की तलाश जारी थी। उसके जैसी चूत का मिलना बहुत ही मुश्किल है। मुझे कोई सेक्सी और खूबसूरत लड़की मिलती ही नही।

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मेरी ग्रैजुएसन की पढाई ख़त्म होने वाली थी। मैंने M. Sc के लिए बनारस यूनिवर्सिटी में अप्लाई किया हुआ था। किस्मत अच्छी थी की मेरा नाम भी आ गया। मै पढ़ने के लिए आ गया। बनारस में मेरे मामा का घर भी है। मैं वही पर रहने लगा। एक साल बीत गया। मेरे छोटे वाले मामा की शादी भी होने वाली थी। उनकी शादी मार्च के महीने में थी। खूब मजा आया शादी में। वहाँ पर भी आई कई लड़कियों से अपना सम्पर्क मैंने बनाया। जब जयमाल की बारी आई तो मैंने जो देखा, ऐसा नजारा मैंने पहली बार देखा था। छोटी वाली मामी जन्नत से उतरी कोई परी लग रही थी।
सभी लोग उनकी खूबसूरती को ताड़ रहे थे। मै भी उनमें से एक था। सब लोग क्या सोच रहे थे उसका तो पता नहीं लेकिन मै तो बस उनको चोदने के बारे में ही सोच रही थी। मामी का घर में प्रवेश करने से मेरी किस्मत खुल गईं। मैंने घर पर आते ही खूब मुठ मारी। उसके बाद मैं मामी से मिलने उनके रूम में गया। काश मामा के जगह आज मुझे सुहागरात मनाने को मिल जाती तो मजा आ जाता। रात में मामा जी आये। मै उनके रूम से बाहर चला आया। मामी की चूत की चुदाई का कार्यक्रम होने वाला था। मामा जी रूम में प्रवेश कर चुके थे। मामी के साथ क्या हुआ। मेरे बाहर निकलते ही मामा ने दरवाजा बंद कर लिया। दुसरे दिन खूब देर से दोनों लोग उठे। बाहर निकलते ही मामा मुझसे मिले तो हँसने लगे। मै भी कोई छोटा बच्चा थोड़ी ना था। मैं भी सब समझ रहा था।

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मैं भी एक हल्की सी स्माइल देकर चला गया। मामी तो शर्मा रही थीं। दोस्तों मै आपको बताना ही भूल गया छोटे मामा मिलिट्री में है। वो बार्डर के एक जवान है। ज्यादा दिनों तक उनकी छुट्टी चल भी नही सकती थी। मामी अभी अभी शादी करके आई ही तो थीं। मामा को किसी कारणवश अपने रेजीमेंट से कोई चिट्ठी आई। उनको जाना पड़ गया। मामा के जाते ही मुझे बहुत ही अच्छा लगने लगा। मुझे मामा को मामी के साथ देखने में बहुत जलन होने लगती थी। मामा को इस बात का पता नहीं था। मामा ने जाते जाते मुझसे कहा- “अपनी मामी का ख्याल रखना”
मैंने भी कह दिया- “मामा आप परेशान न हो। मामी का मै बहुत अच्छे से ख्याल रखूंगा”
मामा के जाने के बाद मामी बहुत ही दुखी रहती थी। मै मामी को हमेशा खुश देखना चाहता था। मामी भी जब तक मेरे साथ रहती थी तो हँसती रहती थी। बाद में फिर वैसे ही हो जाती थीं। मुझसे मामी का ये दुःख देखा नहीं जा रहा था। मैं मामी को चोदने की तरकीब हर दिन बनाता रहा। हर बार असफलता ही मेरे हाथ लग रही थी। मै रोज उन्हें बाथरूम से देख देख कर मुठ मारता था। मामी की ब्रा पैंटी के साथ तो मै रोज रोज खेलने लगा। कभी कभी छिप कर उनको कपडे बदलते भी देख लेता था। थोड़ा बहुत अंग प्रदर्शन हो जाता था। मै उनके गोरे बदन का रस निचोड़ने के लिए व्याकुल हो रहा था। मेरे दिमाग में हर वक्त बस उनका चेहरा बलखाती नागिन जैसी कमर ही हमेशा घूमती रहती थीं।

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