दीदी को जीजा जी से छीना

Behen ki chudai – Didi ko jija se cheena मेरा नाम रोकी है और मैं अपनी बेहन का प्रेमी हूँ. ये मेरी कहानी आप पसंद करेंगे अगर आप इन्सेस्ट में दिलचस्पी रखते हैं. मेरी बेहन आज मेरी पत्नी बन के रह रही है. मेरी कहानी आपको कैसी लगी इस बेहन के यार को ज़रूर लिखना.

मैं हूँ रोकी, एक बेहन का यार. मैने अपनी राधा दीदी को अपना लेने की तब से ठान ली थी जब से मैने दीदी को जीजा जी के साथ सुहागरात मनाते हुए देखा था. मैं उस वक्त 18 साल का था और दीदी 22 साल की. जीजा जी एक बहुत अमीर आदमी थे और हमारे शाहर से 30 किलोमेटेर पर एक कामयाब बिज़्नेस के मालिक थे. उनका नाम विनोद था और वो बहुत हॅंडसम थे. मा भी जीजा जी से बहुत इंप्रेस्ड थी. लेकिन मुझे दाल में कुच्छ काला लगता था. राधा दीदी की शादी की पहली रात विनोद ने दीदी को प्यार से नहीं ज़बरदस्ती से चोदा था. मैं जानता था किओं कि मेरा रूम उनके बिल्कुल साथ वाला था, दोनो रूम्स में कामन बाथरूम था. मैं राधा दीदी का आशिक बचपन से रहा हूँ और ये कैसे हो सकता था कि मेरी प्यारी राधा दीदी की सुहागरात हो और उनका प्यारा भाई देखे ना! मेरा लंड तो तन जाता है जब भी दीदी की याद आए!!

मेरा नाम रॉकी है (राकेश). मैं राधा दीदी को जब से नहाते हुए देख चुका हूँ, मेरी ज़िंदगी ही बदल गयी. राधा दीदी उस वक्त साबुन मल के नहाने में लगी हुई थी जब मैने देखा की बाथरूम का डोर लॉक नहीं किया हुआ. दीदी अपनी चूत को मल रही थी और बार बार उसकी कामुकता भरी सिसकी निकल जाती थी. मेरी दीदी का दूधिया जिस्म पानी की बूँदों से चमक रहा था और उनकी चुचि मुझे दीवाना बना रही थी. दीदी की आँखें बंद थी किओं कि उन्हों ने चेहरे पर साबुन लगा रखा था. मैने देखा कि दीदी अब चूत में उंगली कर रही थी. मेरी दीदी मस्ती में आ कर मॅसर्बेशन कर रही थी. मैने सोचा कि ज़रूर किसी मर्द के बारे कल्पना कर रही होगी. काश वो मर्द मैं होता!!! दीदी की साँसें तेज़ी से चल रही थी. उसकी सिसकी मुझे सुनाई पड़ रही थी. तभी मेरा हाथ अपने आप मेरे लंड पर चला गया और मैं उसको अप्पर नीचे हिलाने लगा. दीदी अचानक मूडी और अब उसकी गांद मेरी तरफ आ गयी. गोल गोल गोरे चूतड़ मेरी नज़र के सामने थे और दीदी अब शवर के नीचे खड़ी थी और शवर की धारा सीधी दीदी की चूत पर गिर रही थी. मेरा हाल बुरा हो रहा था और मैने अपना लंड बाहर निकाल कर मूठ मारनी शुरू कर दी. “ओह……….आआआअररर्रघ” की आवाज़ राधा दीदी के होंठों से निकली. मैं समझ गया कि दीदी झाड़ गयी थी. मैं सीधा अपने रूम में गया और मूठ मारता रहा. जब मेरा लंड पिचकारी छ्चोड़ रहा था तो राधा दीदी का जिस्म मेरी आँखों के सामने था. इतना लावा मेरे लंड से आज तक ना निकला था.

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जब भी दीदी की शादी की बात चलती तो मैं उदास हो जाता. कई रिश्ते आए लेकिन विनोद जीजा जी का रिश्ता फाइनल कर लिया गया. मम्मी के कहने पर जीजा जी ने सुहागरात हमारे घर पर मनाई. मैने सोचा कि अगर अपनी बेहन के साथ सुहागरात नहीं मना सका तो क्या हुआ, कम से कम अपनी बेहन को सुहागरात मनाते हुए तो देख सकता हूँ. बाथरूम का दरवाज़ा थोड़ा खुला था जिसको जीजा जी बंद करना भूल गये. मेरी किस्मत अच्छी थी. रात के 10 बजे दीदी बेड पर जीजा जी की वेट कर रही थी. मेरी बहना रानी लाल जोड़े में सजी हुई किसी परी से कम नहीं लग रही थी. तभी जीजा जी ने परवेश किया. लगता था कि उन्हों ने पी हुई थी. वो सीधा अपना पाजामा खोलते हुए अपना लंड राधा दीदी के होंठों से लगाने लगे और बोले,”जानेमन, बहुत दिल कर रहा है लंड चुसवाने के लिए, जल्दी से चूस कर झाड़ दे इसको फिर चोदुन्गा तेरी चूत और गांद आज!!” दीदी ने नफ़रत से मूह दूसरी तरफ मोड़ लिया. “ये क्या बद-तमीज़ी है? कितनी गंदी बात कर रहे हैं आप? पेशाब वाला…छ्ह्ही..और ये क्या बोल रहे हैं आप?” लेकिन जीजा जी ने दीदी को बालों से खींचा और अपना सूपड़ा दीदी के कंठ तक धकेल दिया,”चल हरामजादि, नखरे करती है? साली शादी की है तेरे साथ. अच्छी तरह चूस और फिर मेरे लंड के मज़े लूटना अपनी चूत में” दीदी के मुख से गूऊव….गूऊव की आवाज़ आ रही थी और वो लंड को मुख से बाहर निकालने की कोशिस कर रही थी. लेकिन जीजा जी ज़बरदस्ती अपने लंड की चुस्वाई करवा रहे थे. जीजा जी अपनी कमर हिला हिला कर दीदी के मूह में लंड धकेल रहे थे. आख़िर दीदी के मूह में जीजा जी के लंड का फॉवरा छ्छूट पड़ा. दीदी के हलक से एक चीख निकली और जीजा जी के लंड रस की धारा दीदी के होंठों से उनके चेहरे पर फैल गयी. दीदी के मूह से लंड रस टपकने लगा और दीदी ने उल्टी करनी शुरू कर दी.

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