इंडियन सेक्स स्टोरी अब आयेज-
मैने डोर खोला तो डोर में दीदी खड़ी थी. उन्होने नीचे पिजामा पहना था और उपर से वो सिर्फ़ ब्रा में थी. उनके मूह से बियर की बदबू आ रही थी. अब आयेज-
दीदी रूम के अंदर आ चुकी थी.
मैं: दीदी आप इस हालत में, और आपने ये क्या पहना है?
दीदी: क्यूँ, अछा नही लगा क्या? उतार डू मैं इसको?
और इतना बोलते ही वो ब्रा की हुक खोल देती है, जिससे उनका ब्रा ढीली हो जाती है. अब उनका 32-28-34 का फिगर सॉफ-सॉफ दिखाई दे रहा था. तभी वो मेरे पास आई और बोली-
दीदी: तू आज कॉलेज से घर आया मुझे बहुत खुशी हुई. इसी चक्कर में मैने थोड़ी पी ली.
मैं: पर आपने इतनी क्यूँ पी?
दीदी: मैने तुझे कुछ बताना है. (फिर वो मेरे कान के पास आई और सेक्सी वाय्स में बोली) ई लोवे योउ. आज तू मुझे अपना बना ले.
ये सुनते ही मैने दीदी को अपने से डोर किया और उनको देखने लगा. दीदी मॅन ही मॅन सोच रही थी की “देखा मैं सही थी, मेरा भाई ऐसा नही हो सकता. अब कल मैं ये बात रोहन को बतौँगी और वो सुनील को मेसेज नही करेगा”.
मैं दीदी को देख रहा था, इस बात से अंजान की दीदी ये सब चॅलेंज के लिए कर रही थी. दीदी की खुशी कुछ क्षण की थी, क्यूंकी ये बात सुन के मेरे दिल के अरमान भी जाग उठे थे.
मैने दीदी को अपनी तरफ लिया और उनके होंठो पर अपने होंठ रख कर उनको ज़ोर से किस किया. किस करते हुए मैं बोला-
मैं: दीदी मैं भी आपको यहीं बोलना चाहता था.
मैने ये बोलते हुए उनकी जो ब्रा ढीली हुई थी, वो उतार दी. अब दीदी उल्टा फ़ासस चुकी थी. अब बात दीदी के हाथ से डोर जेया चुकी थी. मैं अब दीदी को लीप किस कर रहा था. अब वो भी साथ देने लगी. अब मैने लीप किस करना छ्चोढा और उसकी नेक आंड फेस पर किस करने लगा. मैं साथ में दोनो हाथो से उसके बूब्स दबा रहा था.
अब दीदी को भी समझ नही आ रहा था की क्या करे और वो गरम भी हो रही थी. फिर मैने उनके दोनो बूब्स अपने मूह में ले लिए थे, और बारी-बारी उनके बूब्स चूस रहा था.
दीदी: अया आराम से चूस उफ़फ्फ़ उम्म.
फिर मैं नीचे बढ़ता गया. दीदी की कमर पकड़ी, और पेट पर किस करने लगा. वो अब ज़ोर-ज़ोर से साँस लेने लगी. मैने फिर एक झटके से पिजामा और पनटी निकाल दिए. मेरी दीदी की छूट अब मेरे सामने थी और मैने बिना देरी किए उसमे अपना मूह डाल दिया.
दीदी सोच में थी की उनका भाई उनकी छूट में सर डाले बैठा था, और उनको मज़े दे रहा था. वो ये सोच रही थी की रोहन के कहने पर उसने ये क्या कर दिया. 5 मिनिट्स तक छूट चाटने के बाद उनकी छूट से पानी निकल गया. अब मेरा लंड मेरे शॉर्ट्स के अंदर पूरा टाइट हो गया था.
दीदी मेरे सामने हाँफ रही थी. अब मैं भी अपने सारे कपड़े उतार देता हू. दीदी मुझे नंगा देख कर चौंक जाती है. जो ये सब चल रहा था, इस चक्कर में वो अब सही-ग़लत की परिभाषा भूल चुकी थी. अब उनको भी सेक्स करना था. काम वासना होती ही ऐसी चीज़ है, की आचे-आचे इसके सामने नही टिक पाते.
अब मैं बेड पर लेट जाता हू और मेरे उपर दीदी मेरे लंड पर आ कर बैठ जाती है. उनकी छूट बहुत टाइट थी. वो तोड़ा ज़ोर लगती है और आधा लंड उनकी छूट में चला जाता है. वो चिल्लाटी है, पर मैं उनको गले लगा कर उनका मूह बंद कर देता हू.
मैं पहले आहिस्ता-आहिस्ता से मूव कर रहा था. एक हफ्ते पहले तक मैं सोच भी नही सकता था की मैं अपनी ही बेहन को छोड़ूँगा. कुछ समय बाद वो भी कंफर्टबल हो गयी. मैने नीचे देखा तो मेरे लंड पर खून लगा हुआ था. वो वर्जिन थी और उनकी वर्जिनिटी मैने तोड़ी थी, मुझे ये जान कर अछा लगा.
दीदी: अया, और ज़ोर से छोड़ आ उफ़फ्फ़.
दीदी सोचा की अब इतना हो गया है तो आज मज़े ले ही लेती हू. बाकी की अब कल देखी जाएगी. फिर मैने उनको अपनी बाहों में लिया और ज़ोर से छोड़ने लगा. उनकी छूट टाइट होने के वजह से मैं भी अब झड़ने वाला था. तो मैने उनकी छूट से लंड निकाला और उनके मूह में डाल दिया.
अब वो मेरा लंड चूस रही थी. मैं झड़ने वाला था, तो मैने अपना लंड निकाला और सारा वीर्या उनके फेस पर डाल दिया. वो मेरे उपर लेती हुई थी और मैने उनके नीचे हम को ऐसे ही नींद आ गयी.
जब मैं सुबह उठा तो वो रूम में नही थी. मैं कल रात के बारे में सोच सोच कर खुश हो रहा था. फिर याद आया आज मेरे ऑफीस का पहला दिन था. मैं तैयार होता हू और ऑफीस के लिए निकल जाता हू. दीदी मुझे इग्नोर कर रही थी पता नही क्यूँ.
ऑफीस का पहला दिन बड़े आचे से बीट गया. ऑफीस में मेरी बॉस काव्या ( प्रोटॅगनिस्ट ऑफ लंड का खेल) थी और मेरे से थोड़ी सीनियर मनीषा (सफ़र नयी ज़िंदगी का). फिर मैं घर आया और मैने रोहन को सब चीज़ बता दी.
रोहन: भाई परसों ही मुझपे गुस्सा कर रहा था और कल ही अपनी बेहन के साथ कर दिया?
मैं: वो सब ठीक है, पर अब वो इग्नोर कर रही है.
रोहन: चिंता मत कर, कुछ समय करेगी. फिर नॉर्मल बिहेव करेगी देख लेना.
मैं: चल ठीक है तू बोलता है तो मैं पेशंट्ली वेट करता हू.
रोहन: भाभी के साथ सीन सही है?
मैं: वहाँ वर्क ओं प्रोग्रेस है.
रोहन: चल ठीक है.
यूँ ही दिन बीट-ते गये और फ्राइडे नाइट आ गयी. आज फिर 10 बजे दीदी मेरे रूम में आई. अब वो मेरे सामने बैठी थी मेरी आँखों में आँखें डालते हुए देखा और बोली-
दीदी: मुझे माफ़ कर दे, मैने तुझे इग्नोर किया. इन दीनो में तुझसे डोर रही तो मुझे तेरी कमी खाली.
मैं: अर्रे दीदी आप ये क्या बोल रही हो?
दीदी: उस रात जो हुआ मैं दर्र गयी थी. मैं नशे में थी और मुझे माफ़ कर दे (इतना बोलते हुए वो रोने लगी).
अगर आपको यहाँ तक कहानी पसंद आई, और अगर आपको अपनी कोई स्टोरी शेर करनी हो, या फीडबॅक देना हो, या मुझसे बात करनी हो तो [email protected] में मैल करे.
तो बे कंटिन्यूड…