दोस्तों मैं वीरपाल कौर अपनी चुदाई कहानी में फिर से आपका स्वागत करती हूँ. जिन बहिन के लोदों ने पिछले पार्ट अभी तक नहीं पढ़ा है, वो उसको ज़रूर पढ़ ले.
पिछले पार्ट में मैंने आपको बताया कि मैं अपने हस्बैंड के लुंड से खुश नहीं थी. क्यूंकि वो मुझे उतनी सटिस्फैक्शन नहीं देता था, जितना कि मेरा ेक्स-बॉयफ्रेंड देता था. फिर मेरा देवर कनाडा से आया, और एक सुबह मैंने उसको मेरा नाम लेके लुंड हिलते देखा. अब आगे-
मैं रूम के बाहर खड़ी थी, और मोंटी मेरा नाम लेके अंदर लुंड हिला रहा था. उसके लुंड से मैं इम्प्रेस हो चुकी थी. मैंने सोच लिया था कि यही वो लुंड था जो मेरी चूत की प्यास को बुझायेगा. फिर मैंने विंडो पर ही खड़े हुए उसको आवाज़ लगायी-
मैं: मोंटी!
मेरी आवाज़ सुन कर वो डर गया, और उसने विंडो की तरफ देखा. वहां मुझे कड़ी देख कर वो लुंड छुपने लगा. फिर मैं जल्दी से दरवाज़े पर गयी, और दरवाज़ा खोल कर अन्दर चली गयी. तब तक मोंटी ने लुंड अपने शॉर्ट्स के अंदर कर लिया था.
फिर मैं बोली: ये क्या कर रहा था मोंटी? और वो भी मेरा णाल लेके! शर्म नहीं आई तुझे?
मोंटी: ी ऍम सॉरी भाभी. मुझसे गलती हो गयी.
मैं: अपनी भाभी के बारे में सोच कर मस्टुर्बते करना गलती होती है? ये गन्दी नीयत होती है. तू तो पता नहीं कब से मुझ पर आँख राख कर बैठा होगा.
मोंटी: नहीं भाभी, कुछ गन्दा नहीं सोचा मैंने आपके बारे में. आप इतनी खूबसूरत हो, की मैं खुद पर काबू नहीं कर पाया.
तभी मैं जोर से हसने लगी, और मोंटी मुझे हैरानी से देखने लगा. फिर मैं बोली-
मैं: अरे कोई बात नहीं देवर जी. ये कोई गलती नहीं है. आईटी’स ा बेसिक नीड. सब लड़के करते है शादी से पहले. मैं तो बस तुम्हारी टांग खींच रही थी.
मोंटी (रिलैक्स होते हुए): भाभी आपने तो मुझे दर्रा ही दिया था. मुझे लगा आप माँ-डैड तो बता दोगे, और वो मेरी बैंड बजा देंगे. भाई तो वैसे ही बहुत गुस्से वाला है.
मैं: वैसे मैं तुझे इतनी अच्छी लगती हो?
मोंटी: भाभी आप बहुत हॉट हो. कोई भी आपको देखेगा तो यही करेगा जो मैं कर रहा था.
मैं: और अगर मैं हां कर दू, तो मेरे साथ भी करेगा?
मोंटी: जी?
मैं उसके पास गयी, और उसके लुंड पर शॉर्ट्स के ऊपर से हाथ रख के बोलि: और अगर मैं हां कर दू, तो मुझे भी छोड़ेगा?
मोंटी: भाभी! किसी को पता चल जायेगा.
मैं: सब सोए हुए है. किसी को कुछ पता नहीं चलेगा.
मोंटी: लेकिन क्यूँ भाभी. भैया आपसे प्यार नहीं करते?
मैं: वो करते है. लेकिन मुझे खुश नहीं कर पाते. तुम करोगे मुझे खुश?
मोंटी: भाभी आप जो कहोगी मैं करूँगा.
ये बोल कर मोंटी ने मेरी कमर में हाथ डाल कर मुझे खुद से चिपका लिया. अब हम दोनों के चेहरे बिलकुल करीब थे. दोनों की सांसें टकरा रही थी.
फिर उसने अपने होंठो को मेरे होंठो से चिपका दिया और मेरे होंठो का रस पीने लगा. मैं भी उसका पूरा साथ देने लगी. देखते ही देखते हमारी किश पैशनेट हो गयी. हम दोनों एक-दुसरे के होंठ खींच-खींच कर चूस रहे थे. एक-दुसरे के मुँह में जीभ दाल-दाल कर घुमा रहे थे.
मैंने टाइट लेग्गिंग्स और टी-शर्ट पहन रखी थी. मोंटी मुझे किस करते हुए मेरी पीठ पर हाथ फेरता हुआ मेरी गांड पर चला गया. फिर उसने मेरी गांड को इतनी ज़ोर से दबाया कि मेरी अहह निकल गयी. उसके गांड दबाने से मुझे पता चल गया की मेरा देवर मेरे साथ वाइल्ड सेक्स करने वाला था.
तकरीबन ५ मिनट हमारी किसिंग चलती रही. इस दौरान उसने मेरे बूब्स और गांड को ज़ोर-ज़ोर से दबाया और मसला. साथ ही उसने मेरी टी-शर्ट भी उतार दी थी. मैं बहुत मज़े में थी. मेरी चूत पंतय के अंदर गीली हो चुकी थी. क्यूंकि पहले वो एक्सरसाइज कर रहा था, तो उसकी बॉडी से पसीने की स्मेल आ रही थी. वो स्मेल मुझे और उत्तेजित कर रही थी.
फिर उसने मेरी ब्रा उतारी, और मेरे बूब्स को चूसने लगा. वो पागलों की तरह बूब्स चूस रहा था, जैसे कोई भूखा बच्चा चूसता है. बूब्स चुसवाने के बाद मैं उसके सामने घुटनों पर बैठ गयी, और उसको देखने लगी. वो समझ गया मुझे क्या चाहिए था.
फिर उसने शॉर्ट्स और अंडरवियर एक साथ उतार दिए, और लुंड आज़ाद कर दिया. मैंने देखते ही उसके लुंड को पकड़ कर चाटना शुरू कर दिया. फिर उसको मुँह में लिया और चूसने लगी. वो मेरे बाल पकड़ कर मेरे मुँह में धक्के मार रहा था, जिसमे मुझे बहुत मज़ा आ रहा था.
कुछ देर लुंड चुसवाने के बाद उसने मुझे बालों से पकड़ कर किसी रन्डी की तरफ खड़ा किया. फिर उसने मुझे घुमा कर सामने की दीवार के साथ लगा दिया. उसके बाद मेरी नंगी पीठ पर किस करने लगा.
किस्स करते हुए वो नीचे जाने लगा, और मेरी लेग्गिंग्स और पंतय उतार दी. अब मैं पूरी नंगी हो चुकी थी. वो मेरे चूतडों को पकड़ कर चाटने लगा. मैं थोड़ा झुक गयी, ताकि उसको छूट भी दिखे.
मेरे झुकते ही वो मेरी चूत को जीभ से चाटने लगा. मैं पागल होने लगी, और उसको छोड़ने के लिए बोलने लगी. फिर वो खड़ा हुआ, उसने अपना लंड सेट किया, और ज़ोर का धक्का मारा. उसके धक्के से मुझे बहुत दर्द हुआ, और ये भी समझ आ गया की आज पूरी संतुष्टि मिलने वाली थी.
२-३ धक्के मार कर उसने अपना पूरा लंड मेरी चूत में घुसा दिया. उसका लंड मेरी बच्चे-ढाणी तक जा रहा था. फिर उसने धक्के मारने शुरू किये, और मैं मज़े वाली सिसकियाँ लेने लगी.
वो धक्के मारता गया और मैं सिसकियाँ भरती गयी. रूम में ठप-थप की आवाज़ गूँज रही थी. मेरी चूत पानी छोड़े जा रही थी, और उसका लंड मेरी चूत छोड़े जा रहा था. परम-संतुष्टि मिल रही थी मुझे.
मैं इतनी मज़े में थी की मदहोश हो चुकी थी. वो धक्के मार रहा था, पीठ खरोंच रहा था, बूब्स दबा रहा था, चूतड़ों पर थप्पड़ मार रहा था. उसकी हर हरकत मुझे मज़ा दे रही थी.
फिर फाइनली उसने लुंड निकाला, और मुझे घुमाया. मैं जल्दी से नीचे बैठ गयी, और उसने मुझे अपने माल से नहला दिया. अब मेरी चूत को संतुष्ट करने वाला लुंड मुझे घर में ही मिल चूका था. और मैं इस बात से बहुत खुश थी.
थे एन्ड. फीडबैक गुलाटी.ग़लती५५५@जीमेल.कॉम पर दे.