दामाद के बच्चे की माँ बनने बाली हु

मैं राधिका वर्मा, Kamukta दिल्ली से, आज मैं आपको अपनी एक सच्ची कहानी बताने जा रही हु ताकि मैं अपने मन को हल्का कर पाऊं, मेरे प्यारे दोस्तों कभी कभी ज़िंदगी में कुछ ऐसा हो जाता है जिसको ना करते हुए भी करना पड़ता है, चाहे वो गलत ही क्यों ना हो, आप में से भी कई लोगो के सामने ऐसी स्थिति आई होगी जिसको नहीं चाहते हुए भी गलती कर बैठे, और कई बार तो ऐसे रिश्तों में हो जाता है जिसको भारतीय समाज में अलग दृष्टि से देखि जाती है, आज मैं आपको अपनी एक ऐसी ही कहानी कहने जा रही हु,

मैं 36 साल की हु, और विधवा हु, आप सोच रहे होंगे की 36 तो हां मेरी शादी 16 में ही हो गई थी, और और मैंने अपनी बेटी की शादी इसी साल ही की, मुझे और कोई संतान नहीं था सिर्फ बेटी के अलावा, मेरा दामाद गुडगाँव में एक कॉल सेंटर में मैनेजर है, मेरी बेटी एक पब्लिक स्कूल में नौकरी करती है, घर पे मैं होती हु, बेटी सुबह 7 बजे ही चली जाती है और 4 बजे शाम को आती है, मेरा दामाद दिन में ३ बजे जाता है और रात को २ बजे आता है.

जब मेरी बेटी 8 साल की थी तभी मेरे पति का देहांत हो गया, मैं बहुत ही खुले विचार की महिला हु, मैं ना तो अपनी बेटी को किसी चीज की कमी होने दी ना तो मैं कभी ऐसे रही की मैं एक विधवा हु, पर मैंने कभी किसी के साथ सेक्स नहीं किया था, पति इतना पैसा छोड़ के गए थे उससे अभी तक की ज़िंदगी काफी आराम से चल रही थी, पर जब से दामाद घर जमाई बना तब से काफी कुछ चेंज हो गया. कैसे मैं आगे बताती हु,

एक दिन मैं किचन में काम कर रही थी, बेटी मेरी जॉब पे गई थी, सुबह से आठ बज रहे थे मेरा दामाद अनिल उठा और किचन में आया और मुझे गले से लगा के हैप्पी बर्थडे मम्मी जी कहा, मेरे आँख से आंसू छलक गए, क्यों की इसी तरह से मेरे पति भी मुझे बर्थडे विश करते थे, मैं थोड़ी नरवश हो गई और रोने लगी, मेरा दामाद मुझे गले से लगाए रखा, मुझे बहुत अछा लग रहा था पर मैंने महसूस की की मेरी छाती उसके छाती से चिपक रही थी और ब्लाउज से बाहर आने लगी मेरा आँचल भी निचे गिरा हुआ था, और अनिल ये सब देख रहा था, मैं शर्मा गई और अपने पल्लू को ठीक की, मैं अपने दामाद को थैंक्स कहा,

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उस दिन मैं दिन भर सोचते रही कैसे वो मुझे अपने सीने से चिपकाये हुए खड़ा था क्यों की काफी दिनों के बाद मुझे किसी मर्द ने स्पर्श किया था वो भी इस तरह से, सच पूछिये तो मेरा मन डोल गया और मेरे मन में कई सारे विचार आने लगे, ऐसा लगा की रेगिस्तान के पेड़ में किसी ने पानी डाल दिया और वो पौधा धीरे धीरे लहलहाने लगा, वही मेरे साथ भी होने लगा, उस दिन मेरे मन में अजीब सी कौतुहल थी, पर आगे सिर्फ मेरे तरफ ही सिर्फ नहीं थी उधर भी था, अनिल जब भी सुबह सुबह उठता अब वो गुड मॉर्निंग कहके, मुझे अपने गले से लगा लेता, क्यों की उस समय बेटी होती नहीं थी.

एक दिन अनिल ने गले लगाते हुए मुझसे कहा सासु माँ आप मुझे बहुत अच्छी लगती हो, जब मैं आपको गले से लगाता हु मेरे रोम रोम सिहर जाता है, मेरे दिल की धड़कन बढ़ जाती है, मैं आपसे सेक्स करना चाहता हु, मेरे तो होश हवास उड़ गए पर ये होश उड़ने का नाटक था, मैंने कहा अनिल ये गलत है मैं तुम्हारी सास हु, अगर ये सब ज्योति को पता चलेगा तो क्या कहेगी, अनिल ने कहा सासु माँ देखो मैं आपकी फीलिंग्स भी समझ रहा हु, पर अगर आप मेरे से सम्बन्ध बनाते हो तो हमारे तीनो के रिश्ते और भी प्रगाढ़ हो जायेगा, आप मना नहीं करो प्लीज मैं वादा करता हु आप दोनों को मैं बहुत खुश रखूँगा.

मैंने चुचाप खड़ी थी मेरी नजर झुकी हुई थी, और जब नजर उठाई तो वो हाथ फैलाये खड़ा था, और हम दोनों एक दूसरे को बाहों में सामा गए, मैं उसकी मजबूत बाहों में थी वो मेरी पीठ को टटोल रहा था और हाथ निचे करके मेरी चुतड के उभार को दबाते हुए अपने लण्ड के पास ले गया और मेरे होठ को चूसने लगा, मैं भी समा जाना चाहती थी, आज रेगिस्तान में वारिश हो रही थी, बारह साल के बाद मैं किसी की बाहों में झूल रही थी. हम दोनों एक दूसरे को होठ को इस तरह से चाट रहे थे जैसे किसी प्यासे को पानी मिल गया हो.

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उसके बाद मेरे दामाद मुझे उठा लिया और मुझे बेड रूम में लेके बेड पे लिटा दिया और आँचल को निचे कर के मेरे चूच को अपने हाथो से सहलाने लगा, मैं उससे देख के मुस्कुरा रही थी, और बोली ये बात सिर्फ मेरे और आपके बीच में ही रहनी चाहिए, अनिल ने मेरे सर पे हाथ रखा और कहा आप विस्वास करो मैं किसी को नहीं कहुगा चाहे जो भी सिचुएशन हो जाये, और मैंने फिर से उसके होठ को चूसने लगी, अनिल ने मेरे ब्लाउज के हुक को खोल दिया और मेरे चूच को ब्रा के ऊपर से ही दबाने लगा मेरा बड़ा बड़ा चूच ब्रा से निकलने के लिए बेताब थी मैंने खुद ही दोनों को अपने ब्रा से आज़ाद कर दिया, अनिल दोनों को बारी बारी से चूसने लगा और फिर हाथ निचे किया और साडी को ऊपर उठा के मेरे चूत को सहलाने लगा, मैं उस दिन पेंटी नहीं पहनी थी,

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