दादा जी का घर और सामूहिक चुदाई

हम सब अब दादा जी के घर पहुँच चुके थे. वो घर नही, हवेली थी. उस हवेली के टीन पार्ट्स थे. एक मैं पार्ट जहाँ फॅमिली वाले रहते थे. दूसरा सर्वेंट’स क्वॉर्टर, और तीसरा गेस्ट क्वॉर्टर्स. अब दूसरा आर्क स्टार्ट करते है. तीस आर्क इस गोयिंग तो बे डाइयेबॉलिकल. इस आर्क में पता चलेगा कैसे सेक्षुयल आड्वेंचर्स आंड इन्सेस्ट सोसाइटी (सफ़र नयी ज़ंदगी का बाइ मे आंड डेसिमनीषा) बनी और मेरी एक ग़लती जिसका भुगतान मैं अभी तक कर रहा हू. तो बिना किसी देरी के, लेट’स स्टार्ट थे आर्क. लड़के लोग लंड पकड़ ले और लड़कियाँ अपनी छूट और बूब्स पर हाथ रख दें.

हम उन हवेली के बाहर खड़े थे तब मैं बिल्डिंग से कुछ सर्वेंट्स आए और बोले-

सर्वेंट 1 (माले): “जो भी मैं फॅमिली वेल है, वो मेरे साथ आइए. बाकी अभी गेस्ट क्वॉर्टर्स में जाके आराम कर ले.”

सर्वेंट 2 (फीमेल): “मैं आप लोगों को गेस्ट क्वॉर्टर्स तक पहुँचा दूँगी. आप लोग मेरे साथ आइए.”

बाकी सर्वेंट्स ने हमारा तोड़ा-बहुत समान लेकर चलने लगे. मैने देखा सोनिया मेरे साथ मैं बिल्डिंग में आ रही थी. दूसरे तरफ मम्मी सुमन आंटी के साथ गेस्ट क्वॉर्टर्स जेया रही थी.

मैं: “सोनिया, तू मैं फॅमिली का हिस्सा कब से बनी?”

सोनिया: “तेरी पत्नी हू. मतलब होने वाली पत्नी हू. तेरे साथ नही तो किसके साथ जौंगी? दीदी देखो, तंग कर रहा है.”

प्रिया (उन्होने सुमन आंटी की सारी पहनी थी, तो थोड़ी अनकंफर्टबल थी): “रोहन, बेचारी को तंग क्यूँ कर रहा है?”

मैं: “दीदी, मैने तंग कब किया?”

इतना बोलते हुए हम मैं बिल्डिंग में चले गये. मम्मी अभी उनसे मिलने के मूड में नही थी, तो वो सुमन आंटी के साथ गयी थी.

मैने सोसाइटी के निकालने से पहला सब को वहाँ दादा जी की हवेली में चौकन्ना रहने को बोला था. हमारा ये काम इन लोगों को पता नही चलना चाहिए. फिर हम अंदर पहुँचे. सब हमारा बेसब्री से वेट कर रहे थे.

दादा जी से मिलन:-

जैसे ही हम अंदर पहुँचे, हुमको सब दिखाई दिए. बस बंटी अंकल और पापा नही दिखाई दे रहे थे. इन सब चेहरों में टीन जाने-पहचाने चेहरे दिखाई दे रहे थे. वो थे आराव, लिषा और रूपेश. लिषा मेरी सबसे अची फ्रेंड थी. अगर मैं सोनिया के साथ ना होता, तो लिषा को डटे कर रहा होता. पर अब पता चला की लिषा भी बुआ की बेटी थी. लेकिन लिषा और सोनिया का रिश्ता एक-दूसरे से ज़्यादा अक्चा था नही.

लिषा को देख सोनिया का मूड तोड़ा खराब हो गया था. दूसरी तरफ आराव, एक नंबर का बेहन का लॉडा. मतलब बतौ तो अगर तुम आराव का कंपॅरिज़न करो तो तुमको रवि एक देव मानुस लगेगा. इस कदर का बेहन का लॉडा था. आराव और लिषा पोलर ऑपोसिट. आराव की नज़र सोनिया पर थी. पर सोनिया ने कभी घास तक ना डाली.

हम सब को देख जेया रहे थे तभी हमारी नज़र दोनो दादा जी पर गयी. उनकी आँखों में आँसू आ गये. तभी मेरे दादा जी मेरे पास आए और मेरे गले लग गये. वो तोड़ा भावुक हो गये थे. मुझे कुछ समझ नही आ रहा था. तभी हम अलग हुए.

मानी लाल: “देखो, भैया, पहली बार हम अपने पोते-पोती से मिल रहे है. इन्होने तो हुमको मा-बौजी की याद दिला दी.”

मैं छ्होटे दादा जी की लास्ट बात सुन के तोड़ा कन्फ्यूज़्ड हो गया था. अभी मेरे दादा जी ने अपनी जेब से एक पुरानी ब्लॅक आंड वाइट कलर की पिक निकली. वो देख के मेरी गांद फॅट गयी. वो पिक मेरे और दीदी जैसी थी.

हाली लाल: “ये देख बेटा, ये हमारे मा-बौजी की तस्वीर है. तुम एक दूं हू-बा-हू कॉपी हो.”

मैं: “दादा जी, मेरा नाम रोहन और ये मेरी दीदी प्रिया.”

तभी उनकी नज़र सोनिया पर गयी.

मैं: “दादा जी, वो मेरी दोस्त सोनिया है.”

हाली लाल: “अर्रे, ये ड्र. मिश्रा की बेटी है ना?”

मैं (शॉक में): “आपको कैसे पता?”

हाली लाल: “दरअसल वो हमारी फॅमिली डॉक्टर है ना, तब.”

ये न्यू इन्फर्मेशन थी हमारे लिए. फिर दादा जी ने हमारा इंट्रोडक्षन सबसे करवाया. तभी निधि बुआ बोली, “बेटा, तुम्हारी मम्मी नज़र नही आ रही?”

मैं: “अर्रे, वो सुमन आंटी के साथ है.”

सौंदर्या (हल्की आवाज़ में): “अभी तक वो सुमन के साथ रहती है.”

निधि बुआ: “ठीक है, चलो जाओ. तुम रूम में जाके आराम कर लो.”

हम रूम में जाने लगे. तभी सोनिया बोली-

सोनिया: “प्रिया दीदी, लिषा से बच के रहना. एक नंबर की चुड़ैल है ये.”

मैं: “ऐसा क्यूँ बोल रही है? अची तो है.”

सोनिया: “तुम चुप रहो. और दीदी, इस्पे भी नज़र रखना.” (सोनिया ने प्रिया दीदी को इशारे से कुछ बोला)

प्रिया दीदी: “ठीक है, मैं समझ गयी.”

मैं: “वो सब तो ठीक है. लेकिन जो हम घर में करते आ रहे थे वो हम यहाँ नही कर सकते.”

प्रिया दीदी: “ठीक है.”

रात का राज़:-

फिर हम अपने-अपने रूम में चले गये. रूम ऑर्डर कुछ इस प्रकार है: पहला मेरा, दूसरा प्रिया दीदी का, तीसरा मम्मी-पापा का और चौथा सोनिया का. होने को चौथा रूम सोनिया का था, पर वो मेरे रूम में थी.

मैं अपने रूम में आराम कर रहा था तभी लिषा मेरे रूम में आ जाती है. वो आते ही मुझे हग कर देती है, टाइट वाला. ये देख के सोनिया जल-भुन जाती है. पर सोनिया कुछ कर नही सकती थी, वो मेरे से शर्त हारी थी (पार्ट 17).

लिषा: “तुम मेरे भाई निकलोगे, मुझे पता नही था. मैं आज बहुत खुश हू.”

सोनिया: “हा, तू तोड़ा डोर से खुश हो ले.”

लिषा: “रोहन, ये डायन यहाँ क्या कर रही है?”

मैं: “अर्रे, लाडो मत.”

लिषा: “रोहन, ई मीन भैया, मैं चलती हू. बाद में मिलेंगे.”

देखो, मैने कार में जो सेक्स किया था, उसकी वजह से मेरा सिर घूम रहा था तो मैं आराम करने लग गया. पता नही मुझे नींद कब आ गयी. मेरी आँख खुली तब देखा रात के 11 बाज गये थे. मैं अपने रूम से बाहर आया तो देखा एक रूम से आवाज़ आ रही थी. मैने जाके देखा तो वहाँ दोनो दादा जी (हाली लाल, मानी लाल), तीनो दादी (काँटा, शांति और सौंदर्या), तीनो बुआ (निधि, रीता, रूपा) और मेरे चाचा किशोरे नंगे होके सामूहिक चुदाई कर रहे थे.

इट वाज़ लीके बा****ड्स ऑफ हवेली.
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