दारू पिए हुए बाप से चुदी बेटी

नमस्कार दोस्तों, मैं आपका थोर आपके लिए बाप-बेटी की चुदाई कहानी लेके आया हू. मेरी सेक्स स्टोरीस को आपका बहुत प्यार मिलता है. इसको भी उतना ही प्यार दीजिएगा. ये कहानी गीता और उसके पापा चंदन कुमार की है. तो चलिए कहानी शुरू करते है गीता की ज़ुबानी-

दोस्तों मेरा नाम गीता है. मैं थर्ड एअर की स्टूडेंट हू. मेरी हाइट 5’6″ है, और रंग गोरा है. फिगर मेरा 34-30-36 है. कॉलेज में लड़के मुझ पर लाइन मारते है, लेकिन मैं जल्दी किसी को भाव नही देती. वो अलग बात है की मेरी छूट बहुत प्यासी है, और हमेशा लंड मांगती रहती है.

इस कहानी में मैं आपको बतौँगी की किस तरह से मेरा दिल अपने बाप का लंड देख कर फिसल गया. और फिर मैने उनके लंड से अपनी छूट की आग शांत की. चलिए बताती हू सब कैसे हुआ.

पिछले साल की बात है. मेरी मम्मी अपने माइके गयी हुई थी कुछ दिन के लिए, क्यूंकी नानी की तबीयत थोड़ी खराब थी. उनके पीछे से मैं ही घर संभाल रही थी.

हमारे घर में टोटल 4 मेंबर्ज़ है, जिनमे मैं, मम्मी-पापा, और मेरा छ्होटा भाई है. छ्होटा भाई अभी 9त क्लास में है, और भोला-भाला है.

तो हुआ यू, की पापा के ऑफीस में एक पार्टी थी. मम्मी नही थी, तो पापा ने मुझे साथ चलने के लिए कहा. लेकिन भाई को अकेला छ्चोढ़ नही सकते थे, तो मैने घर पर ही रुकना सही समझा. फिर पापा अकेले ही चले गये.

उनके आने से पहले मैने खाना खा लिया, और भाई को भी खिला दिया. फिर अपना सारा काम करके मैं फ्री होके बैठ गयी. भाई भी अपने रूम में जाके सो गया.

तकरीबन 11 बजे घर की डोरबेल बाजी. मैं हॉल में काउच पर बैठी टीवी देख रही थी. माने ब्लॅक लेगैंग्स और पिंक त-शर्ट पहनी हुई थी.

फिर मैं उठी, और दरवाज़ा खोलने गयी. जब दरवाज़ा खोला, तो पापा लड़खड़ते हुए अंदर आए. जिस बात का दर्र था, वहीं हुआ. पापा ने फिर से हड्द से ज़्यादा दारू पी ली.

पहले भी एक बार ऐसा हुआ था. उसके बाद से मम्मी ने पापा को कभी पार्टी पर अकेले नही जाने दिया. वो हर बार उनके साथ जाती थी, ताकि वो दारू ज़्यादा ना पिए. लेकिन इस बार तो ये होना ही था.

फिर मैने पापा का हाथ अपने शोल्डर्स से घुमा कर उनको संभाला, और उनके रूम तक लेके जाने लगी. पापा का वज़न ज़्यादा था, तो मुझे थोड़ी मुश्किल हुई, लेकिन जैसे-तैसे हम रूम में पहुँच गये. फिर मैने वहाँ पापा को बिस्तर पर लिटा दिया.

तभी पापा नशे में बोले: आजा मेरी जान रीमा. आ तुझे मज़ा डू.

रीमा मेरी मा का नाम है. पापा ने शराब पी थी, तो ज़्यादा रोमॅंटिक हो रहे थे. पापा ने शर्ट और पंत पहने हुए थे, और वो अपना हाथ पंत के उपर से अपने लंड पर रख कर मेरी मा का नाम ले रहे थे.

उनका लंड खड़ा हो चुका था, और काफ़ी बड़ा लग रहा था. लंड देख कर मुझे कुछ-कुछ होने लगा. दोस्तों उन दीनो मैं बहुत हॉर्नी रहती थी, और दिन में दो-दो बार फिंगरिंग करती थी. बाय्फ्रेंड अभी तक बनाया नही था, क्यूंकी गर्ल्स’ कॉलेज में पढ़ती थी, और दर्र भी था घर वालो का.

फिर मैने सोचा की क्यूँ ना लंड को हाथ लगा कर देखा जाए. पापा वैसे भी नशे में थे, तो उनको पता तो कुछ लगना नही था. ये सोच कर मैं धीरे से पापा के करीब गयी, और लंड पर हाथ लगाने लगी.

जैसे ही मैने लंड पर हाथ लगाया, पापा बोले: आह, करो ना जान.

पापा की आँखें बंद थी, और वो मुझे मम्मी समझ रहे थे. फिर मैने भी सोचा की क्यूँ ना मैं सच में थोड़ी देर के लिए उनके लिए मम्मी बन जौ.

ये सोच कर मैने उनका लंड पकड़ा, और पंत के उपर से दबाने लगी. मुझे मज़ा आने लगा. फिर पापा ने आँखें बंद रहते हुए ही अपनी ज़िप खोल कर पंत और अंडरवेर नीचे किए, और लंड बाहर निकाल लिया.

उनका लंड देख कर मैं हैरान थी. पूरा अजगर लग रहा था. उसके बाद पापा ने मेरा हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रख दिया, और मैं उसको हिलने लगी. उनका लंड फंफना रहा था. फिर वो बोले-

पापा: चूस ना रानी इसको.

मैने भी उनकी बात मानी, और नीचे होके लंड को मूह में डाल लिया. अब जैसे मैने पॉर्न वीडियोस में देखा था, वैसे लंड चूसने लगी. पापा आहह आ करते हुए मेरे सर को लंड पर दबाने लगे. मेरे मूह से बहुत सारा थूक निकल कर लंड को गीला कर रहा था. मेरी छूट में खुजली मच रही थी.

फिर पापा ने मेरा सर छ्चोढा और बोले: चल आजा चढ़ जेया अब.

मैं जल्दी से नंगी हुई, और पापा के भी पंत और अंडरवेर उतार दिए. मेरी छूट गीली हो चुकी थी, और मैं छूट को लंड पर रख कर बैठ गयी. तभी पापा अपने दोनो हाथ मेरे छूतदों पर लाए, और मुझे आयेज-पीछे करने लगे. इससे मेरी छूट उनके लंड पर रग़ाद खाने लगी, और मुझे बहुत मज़ा आने लगा.

फिर उन्होने मुझे अपने पास खींचा, और मेरे होंठो में होंठ डाल कर चूसने लगे. उनकी आँखें अभी भी बंद थी. होंठ चूस्टे हुए उन्होने एक हाथ से अपना लंड नीचे मेरी छूट पर सेट किया, और ज़ोर का धक्का मारा.

मैने फिंगरिंग तो बहुत की थी, लेकिन छूट अभी तक चुडवाई नही थी. जब पापा ने धक्का मारा, तो मुझे बहुत दर्द हुआ. लेकिन मैं चीख भी नही सकती थी, की कहीं पापा को पता ना चल जाए की मैं उनकी बेटी थी, बीवी नही.

मैं दर्द सहती रही, और पापा मेरी छूट में लंड अंदर-बाहर करके मुझे छोड़ते रहे. कुछ देर बाद मुझे मज़ा आने लगा, और अब मैं गांद उठा-उठा कर उनका लंड अपनी छूट में लेने लगी.

कुछ देर ऐसे ही छोड़ने के बाद पापा ने मुझे बाहों में कस्स लिया, और पोज़िशन चेंज की. वो मुझे अपने नीचे ले आए, और खुद उपर आ गये. अब हम मिशनरी पोज़िशन में थे. उन्होने अपना लंड मेरी छूट में डाला, और छोड़ने लगे. मैं आ आ करके चुदाई का मज़ा लेने लगी.

थोड़ी देर ऐसे ही उन्होने मेरी ताबड़तोड़ चुदाई की. फिर मुझे अपनी छूट भारती हुई महसूस होने लगी. ये पापा का माल था, जो मेरी छूट में भर रहा था. जैसे ही उनके लंड का माल निकला, उसको मेरी छूट में भर कर वो मेरे पर से साइड हो गये.

फिर वो दूसरी तरफ मूह करके सो गये, और मैं नंगी लेती रही हाँफती रही. फिर मैं उठी, और बातरूम में जाके मूटा, ताकि बच्चा ना ठहर जाए. उसके बाद मैं अपने रूम में जाके सो गयी.

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