दारू पीने के बाद आंटी की चुदाई की

ही ऑल ड्के रीडर्स. मेरा नाम रवि है, और मैं देसीकाहानी का रेग्युलर रीडर हू. बहुत टाइम से कहानियाँ पढ़ने के बाद मुझे भी लगा की अपनी पहली चुदाई की स्टोरी पोस्ट करू.

ये कहानी मेरी और आंटी के बीच हुई सॅकी स्टोरी है. अभी मैं 30 यियर्ज़ का हू, बुत ये कहानी तब की है जब मैं 20 का था, और ग्रॅजुयेशन के लिए अंकल के यहाँ देल्ही में रहता था. अंकल की फॅमिली में अंकल (42 यियर्ज़), आंटी (38 यियर्ज़) और उनकी बेटी (16 यियर्ज़) ही थे. अंकल तौर आंड ट्रॅवेल में थे, तो अक्सर बाहर ही रहते थे.

आपको आंटी के फिगर के बारे में बता डू. उनका फिगर 36-32-38 का था. हाइट 5’2” थी. एक-दूं मस्त पटाखा थी. अपनी कहानी के बारे में बतौ तो एक टाइम अंकल 21 डेज़ के ट्रिप पे गये हुए थे, और सम्मर वाकेशन की वजह से उनकी बेटी मेरे गाओं गयी हुई थी. चुकी मेरे पेपर्स चल रहे थे, तो आंटी मेरे साथ ही रुक गयी थी.

8 डेज़ के बाद मेरे पेपर ख़तम हुए तो आंटी की पर्मिशन से मैं पार्टी करने चला गया था, और रात करीब 12 बजे आया. मैने डोरबेल बजाई तो आंटी ने दरवाज़ा खोला. पता नही क्या हुआ, बुत जैसे ही मैने आंटी को देखा उस टाइम तो देखता ही रह गया. उन्होने आज आसमानी रंग की निघट्य पहनी थी, जो की डीप नेक थी, और थोड़ी ट्रॅन्स्परेंट भी. मुझे उनको ऐसे देखते हुए आंटी ने नोटीस कर लिया और कहा-

आंटी: लगता है आज ज़्यादा ड्रिंक करके आए हो.

मैं: आंटी वो एग्ज़ॅम का स्ट्रेस सब को ज़्यादा हो गया था, तो थोड़ी ज़्यादा हो गयी.

(आंटी मेरी अची दोस्त थी और फ्रॅंक भी. तो उन्हे पता था की मैं कभी-कभी ड्रिंक करता हू. इसीलिए उनसे पर्मिशन लिया था)

आंटी: ठीक है, अंदर आ जाओ.

मैं जैसे ही अंदर आया और देखा तो आंटी की निघट्य उनकी गांद में गाड़ी थी, जिससे उनके उभर सॉफ दिख रहे थे. ये देख कर मेरी पंत में तंबू बन गया. दरवाज़ा बंद करके आंटी जैसे ही पीछे मूडी, तो हम दोनो का आइ कॉंटॅक्ट हुआ. फिर आंटी ने एक स्माइल पास करते हुए पूछा-

आंटी: खाना लगा डू?

मैं: नही, आज बाहर ही ज़्यादा हो गया है. तो मैं सोने चलता हू.

आंटी: ओक, गुड नाइट.

अब हम दोनो अपने-अपने रूम में चले गये. बुत मुझे नींद नही आ रही थी, और आंटी मेरे दिमाग़ पे हावी हो रही थी. उपर से नशा भी था. मैं अपना लंड सहला रहा था, तभी 15-20 मिनिट बाद मेरे डोर पे नॉक हुई, और मैने खोला तो आंटी थी.

मैं: क्या हुआ?

आंटी: वो मेरे रूम का एसी काम नही कर रहा था, तो सोचा आज तुम्हारे रूम में ही सो जौ.

मैं: अगर आपको कोई प्राब्लम नही तो अंदर आ जाइए.

हम दोनो बेड पर लेट गये, और रूम में एक लाइट लॅंप जल रही थी. हम दोनो बातें करने लगे इधर-उधर की. तभी आंटी ने पूछा-

आंटी: तुम्हारी कोई गफ़ बनी या नही अभी तक?

मैं: आंटी आप तो मेरी सबसे अची दोस्त हो, और आपको तो पता ही है की अगर कोई होती तो मैं आपको बता देता.

आंटी: अछा लेकिन ये बताओ, तुम्हे कैसी लड़की पसंद है?

मैं: क्यूँ, मेरे लिए ढूँधोगे क्या?

आंटी: अब तू जवान हो रहा है, तो ढूँढनी तो पड़ेगी ना.

मैं: हा लेकिन मुश्किल है.

आंटी: वो क्यूँ?

मैं: रहने दो, आप बुरा मान जाओगे.

आंटी: दोस्त भी बोलता है, और सोचता है बुरा मान जौंगी. अर्रे बता ना.

मैं: मुझे आप जैसी लड़की पसंद है.

आंटी थोड़ी देर चुप रही. फिर बोली: मेरे जैसी मतलब?

मैं (नशा तोड़ा ज़्यादा चढ़ रहा था, तो हिम्मत करके बोला): जिसकी आँखें और लिप्स आपके जैसे हो.

आंटी (शरमाते हुए): बदमाश कहीं का! (मुझे कोहनी मारते हुए) और क्या पसंद है?

मेरी थोड़ी हिम्मत और बढ़ी और बोला: जिसके बूब्स और गांद आपके जैसे हो.

आंटी चुप रही कुछ देर. फिर मेरी तरफ मूड कर मेरी आँखों में देख कर पूछी: तुझे मेरी बूब्स और गांद पसंद है?

मैने बोला: हा बहुत, और एक हाथ उनकी हिप्स पे रख दिया, और सहलाने लगा.

आंटी थोड़ी देर कुछ नही बोली. फिर हम दोनो एक-दूसरे को देखे जेया रहे थे. तभी आंटी ने चुप्पी को तोड़ते हुए बोला-

आंटी: फिर मुझे ही अपनी गफ़ बना ले.

मैं (गांद को अब तोड़ा दबाते हुए): आपको क्या कमी है, जो मेरी गफ़ बनॉगे? आपके पास तो अंकल है ही.

आंटी तोड़ा उदास हो कर: हा है तो सही, पर क्या फ़ायदा. बाहर ही रहते है वो, और जब आते है तो थके रहते है.

इतना सुन कर मैने आंटी को ज़ोर से अपनी तरफ खींच लिया, और सीधा उनके लिप्स को सक करने लगा. दोस्तों क्या बतौ, जब उनको किस कर रहा था, तब उनकी बॉडी की खुश्बू मुझे और मदहोश कर रही थी. 10-15 मिनिट के किस के बाद मैने सीधा पूच लिया-

मैं: क्या आप मेरी गफ़ बनोगी?

आंटी: नही बनना होता तो किस क्यूँ करती?

इतना सुनते ही मुझे तो जैसे पता नही क्या हुआ, और आंटी को सीधा करके उनके उपर चढ़ गया. फिर दोनो हंतो से उनके बूब्स को दबाते हुए उनके कान को चूसने लगा. आंटी के मूह से धीमी लेकिन मादक सिसकारियाँ निकालने लगी. मैं उनकी गर्दन को चूमते हुए बूब्स को और ज़ोर से दबाने लगा.

आंटी: आआहह बेटा, तोड़ा धीरे करो. मैं कहीं नही जेया रही. अब तो तुम्हारी गर्लफ्रेंड हू. तोड़ा आराम से.

मैने फिर से उनको किस करना शुरू किया, और इस बार एक हाथ निघट्य के नीचे से अंदर डाल कर उनकी छूट पे ले गया. उन्होने पनटी नही पहनी थी, जो की मेरा अंदाज़ा सही निकला. अब मैं उनकी छूट सहलाने लगा, और दूसरा हाथ से उनके लेफ्ट बूब्स को दबाते हुए उनके पुर फेस को चूमने लगा.

5-10 मिनिट ऐसा करने के बाद आंटी पूरी गरम हो गयी, और बोलने लगी: बहुत दिन से प्यासी है, अब इसकी प्यास बुझा दे.

तब मैने उनको बिता कर उनकी निघट्य निकाल दी और बोला: आज कुछ न्यू करते है.

आंटी: अब तेरी गफ़ हू, जो करना है कर ले. बुत मुझे शांत कर दे.

निघट्य निकालने के बाद आंटी किसी अप्सरा जैसी लग रही थी, क्यूंकी वो पूरी नंगी थी. मैने निघट्य को उनके आइज़ को कवर करते हुए उनके हेड के पीछे से बाँध दिया.

आंटी ने पूछा: क्या कर रहे हो?

मैने बोला: ये ब्लाइंडफोल्ड है, बस आप मज़े लो.

मैने उनको धक्का देकर गिरा दिया, और उनके दोनो हाथो को उपर करके उनके आर्म्पाइट्स को लीक करने लगा. आंटी अपने होंठ चबाने लगी. थोड़ी देर बाद मैं बारी-बारी से उनके बूब्स और निपल चूसने और काटने लगा. आंटी मस्त सिसकियाँ ले रही थी, जिससे मेरा जोश बढ़ने लगा.

मैं तो उनके बूब्स चूसने में इतना खो गया की पता ही नही चला की कितने देर से चूस रहा था. जब आंटी ने कहा की आज पूरी रात सिर्फ़ चूस्टे ही रहोगे क्या, तो मुझे होश आया और नीचे आ कर उनकी नाभि चूसने लगा.

फिर थोड़ी देर में नीचे जेया कर उनकी छूट चूसने लगा. जैसे ही मैने अपनी जीभ उनकी छूट पे लगाई, उन्होने फटत से अपने दोनो पैरों से मेरा सिर जाकड़ लिया. फिर ज़ोर से मेरे मूह पे अपना पानी छ्चोढ़ दिया. इतनी देर में उनकी छूट पूरी गीली हो गयी थी.

थोड़ी देर बाद उन्होने अपनी पकड़ ढीली की, तब मैं अपने कपड़े उतार कर अपना लंड उनके हाथो में दे दिया जो की एक-दूं कड़क था. खड़ा हो कर मेरा लंड 6.5″ का हो गया था और 2″ मोटा. आंटी ज़ोर-ज़ोर से मेरा लंड सहलाने लगी, और मैं उनकी छूट में 2 उंगली डाल कर अंदर-बाहर करने लगा. मैं बीच-बीच में उनकी छूट को चूसने लगा.

आंटी बोली: आज तो जन्नत दिखा दी तूने. अब तो ये आँखों से पट्टी हटा.

मैने बोला: नही जानेमन, आज तुझे इस जन्नत की पूरी सैर करौंगा.

5-10 मिनिट उनके लंड को उपर नीचे करने के कारण मेरा पानी उनके हाथो में निकल गया. मेरे उंगली अंदर-बाहर करने के कारण उनका भी पानी छ्छूट गया. अब आंटी से बर्दाश्त नही हुआ, और वो डाँटने लगी.

आंटी: कितना तडपाएगा रे तू अब? मेरी छूट का भोंसड़ा बना दे.

मैं तुरंत उनको तुर्न करके, अपने लंड को उनकी गांद के उपर रख कर, उनकी नेक और बॅक को चूमने लगा. फिर पीछे से बूब्स दबाने लगा और बोला-

मैं: तू मेरी गफ़ है रंडी नही. इसलिए प्यार से छोड़ रहा हू.

आंटी फिर से सिसकारियाँ लेने लगी, और अब मैं उनकी गांद चाटने लगा, और छूट फिर से चूसने लगा.

आंटी फिर से मस्त हो गयी, और बोलने लगी: प्लीज़ अब छोड़ भी दे ना. अपना लंड अंदर डाल दे.

इस बार मैने उनको फिर से पलटा, और उनके दोनो पैरों को अपने कंधो पर रख कर अपना लंड उनकी छूट पे रगड़ने लगा. आंटी अपने लिप्स दबाते हुए मस्त सिसकियाँ लेने लगी. तभी मैने लंड को छूट पे सेट करके अचानक से एक ज़ोर का धक्का मारा, और पूरा लंड अंदर पेल कर रुक गया. आंटी के मूह से एक-दूं से ज़ोर की चीख निकल गयी-

आंटी: आआअहहाहह.

मैं ऐसे ही फिर उनके निपल को चूसने लगा और बूब्स को दबाने लगा. तभी कुछ देर बाद आंटी ने खुद ही नीचे से झटके देने शुरू किए. फिर मैं भी धीरे-धीरे उनको छोड़ने लगा, और दोनो बूब्स को दबाते हुए उनके लिप्स को चूसने लगा.

आहिस्ता-आहिस्ता स्पीड बढ़ने लगी. रूम में आंटी के पायल की आवाज़ के साथ घाप-घाप की आवाज़ आने लगी. आंटी भी सिसकियाँ लेने लगी. 5-6 मिनिट्स की चुदाई के बाद आंटी का पानी निकल गया, और मैं भी झड़ने वाला था. तो तुरंत ही मैने अपना लंड निकाल लिया.

थोड़ी देर बाद मैने आंटी को घोड़ी बनाया और उनकी गांद पे प्यार से थप्पड़ मारने लगा और छूट में उंगली करने लगा. जब उनकी गांद पूरी लाल हो गयी, तब उसी पोज़िशन में मैने अपना लंड दोबारा पूरा पेल दिया, और ज़ोर-ज़ोर से छोड़ने लगा.

मेरी ऐसी चुदाई से आंटी भी ज़ोर-ज़ोर से आवाज़े निकालने लगी. अब मैं उनके बालों को पकड़ कर, उनको खींचते हुए ऐसे छोड़ने लगा, जैसे घोड़ी की सवारी करते है. मेरे तेज़ झटकों से आंटी के बूब्स हवा में एक-दूं हिलने लगे. इससे मेरा जोश और बढ़ गया, और मैं और तेज़ी से उनको छोड़ने लगा.

ऐसी चुदाई से आंटी खुद को रोक नही पाई और बहुत सारा अपना पानी छ्चोढने लग गयी. मैं और अंदर तक उनको पेलने लगा, और मैं भी चरम पे था तो पूछा कहाँ निकालु.

आंटी बोली: पहली बार है, आज अंदर ही निकाल दे.

तो मैं उनकी गर्दन को दबोच कर उनके फेस को बेड से ज़ोर से दबा दिया, और एक-दूं तेज़ी से छोड़ने लगा. 2 मिनिट बाद मेरा लावा फूटा, तो मैने एक-दूं ज़ोर से लास्ट धक्का मारा, और लंड पूरा अंदर उतार दिया. फिर कुछ देर ऐसे ही रुका.

सारा माल छूट के अंदर खाली करके जब छूट से लंड बाहर निकाला, तो टप्प की आवाज़ आई. फिर हम दोनो तक के बिस्तर पर गिर गये. आंटी ने मुझे हग किया और जब उनका हाँफना ख़तम हुआ, तो बोली-

आंटी: थॅंक योउ.

मैने पूछा: किसलिए?

तो बोली उनकी चुदाई आज तक ऐसी नही हुई थी, और पहली बार इतनी तृप्त हुई थी वो. मैने उनके माथे पे किस किया और बोला-

मैं: अब आप मेरी गफ़ है, तो अब आप कभी उदास मत रहना.

ऐसे थी थोड़ी देर में हम दोनो सो गये. कहानी में अभी आयेज कैसे मैने उनकी गांद मारी, बाकी है. अगर आप लोग कॉमेंट और मैल करेंगे, तो मैं इसे आयेज भी कंटिन्यू करूँगा.

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