कस्टमर से ले कर चुदाई तक-1

हेलो फ्रेंड्स, मेरा नाम कामरन है (नामे चेंज्ड). ये मेरी किसी भी साइट पेर फर्स्ट सेक्स स्टोरी है और ये स्टोरी बिल्कुल रियल है. मेरा तालूक़ जहलूँ, पाकिस्तान से है. मैं इस्लामाबाद मे जॉब करता हूँ. हमारा काम इंटीरियर से रिलेटेड है.

हमारी कंपनी घ्र ऑफिसस, हॉस्पिटल्स सब बिल्डिंग्स के इंटीरियर का काम क्रती है. ये आज से 2 साल पहले की बात है. उस टाइम मई किसी दोसरि कंपनी मैं काम करता था और मई इंटीरियर डिज़ाइनर था. अभी भी मेरा काम तो वोही है पेर कंपनी चेंज हो गयी है.

मेरी आगे इस वक्त 30 है और मैं मॅरीड हूँ, मेरी शादी को 6 मंत्स हुए है. मेरी हाइट 5’-9” है और बॉडी टाइप स्मार्ट है. देखने मे यून समझ लाइन जैसे इंडियन आक्टेर दिलजीत डोसांझ से मिलता जुलता हूँ.

मेरा शुरू से ही सेक्स की तरफ बहुत ध्यान रहता था. गर्ल्स और औतिएस मुझे बहुत पसंद थी. और मई आते जाते रास्ते मे या किसी भी जगह जहाँ भी मोका मिलता मई ज़रूर गर्ल्स की गांद को टच करता था. बल्कि अभी भी करता हूँ.

50 % ल्राकयँ कुछ नही ख्ती थी . जो ल्राकी आगी से ना बोले वो समझो सील है उसकेआ फिर पीछा ना चोरो.

और जो ल्राकी एक बार पीछे मूरह कर डैखी उसी दोबारा ज़रूर चेक क्रो क्यू के वो एक बार ईये लिए डैखी गी के शाएेद घलती हुई हो, बुत जब आप दोबारा टच क्राण जाइ तो उसको यकीन हो जाएगा के कोई हरामी पीछे पड़ा है और वो बर्दाश कर लेगी.

पर जिस ने गुस्सा करना होता है वो पहली बार ही आपको सुना देती है. सो म्ज़ी लेने के लिए रिस्क तो लाना प्रता है.

खैर यह तो हो गयी कुछ एक्सपीरियेन्स की बात. ये बताईं बताना ज़रूरी था क्यू के आगी स्टोरी के अंदर भी इन बातो से वास्ता है.

सो ये एक्सपीरियेन्स की बताईं जान कर आपको अंदाज़ा हो गया होगा. मई लड़की/आंटी की चाल छल्लां से ही अंदाज़ा लगा लैयता हूँ के ये कैसे औरत है.

अब आते है स्टोरी की तरफ.. आज से 2 साल पहले की बात है जब मैं एक छोटी कंपनी मे काम करता था इन इस्लामाबाद. (नामे नही बताऊं गा किसी कंपनी का भी) .

उस टाइम मेरी आगे 28 थी और मेरी जॉब इंटीरियर डिज़ाइनर थी. जैसा के आपको बताया है के कंपनी छोटी थी. वेल्लसेतटलेड नही थी इस लिए उनके पास ज़्यादा स्टाफ तो था नही. मेरी जॉब इंटीरियर डिज़ाइनर कीट ही बुत साथ मे मुझे सेल्स का काम भी करना परता था.

कोई भी शोरुम मे आए तो उसको डील भी करना परता था. वैसे तो मई जहाँ काम करता था वहाँ लॅडीस का ही ज़्यादातर आना जाना होता था. बुत मैने कभी अपनी क्लाइंट्स पर तवजो नही दी और उनको ग़लत नज़र से नही देखा.

तरह तरह की आंटीस और गर्ल्स आती थी बुत कभी किसी को घोर से नही देख ऑफीस के डॉरॅन. रमज़ान की बात है, हम लोग 5 भजे शोरुम क्लोज़ करते थे रमज़ान मे.

हमारे ओनर पहले ही चले जाते थे और मेरे साथ एक लड़का था (अहसान) जो के ऑफीस बॉय था वो भी 5 भजे के क़रीब साथ ही किसी घर मे चला जाता था, वो उसके रिलेटिव्स थे.

उनके घ्र काम भी क्रवाता था और आफ्तरी के बाद वापिस आ जाता था. हमारी रेसिडेन्स शोरुम के अंदर ही थी एक रूम बना था जिस के आंड वॉशरूम था.

खैर अहसान 5 भजे हस्ब ए मामूल चला गया और मई अंदर ही था (शोरुम के अंदर). और शोरुम का एक शटर ओपन होता था तो जो ब्ंड़ा अंदर हो उसके लिए आसानी हो.

जब अंदर कोई ना हो तो सब शटार्स ब्न्ड होती थे. उस दिन भी यून ही हुआ अहसान एक शटर को चोर के बाकी सब ब्न्ड कर के छल्ला गया. उसके जाने के थोरी देर बाद मई चेंज कर के रेलक्षे हो गया.

मई ने ट्राउज़र पहना (पाजामा टाइप कॉटन का) और अप्पर त शर्ट पहनी हुई थी. उससी डॉरॅन मुझे किसी की कॉल आ गयी मई बाहर निकला कॉल सुन,ने के लिए शोरुम का जो शटर खुल्ला था उस मे खरा हो कर कॉल सुन रहा था.

मेरा ध्यान फोन मे था एक शो रूम के सामने एक वाइट कलर की सुज़ुकी आल्टो आ कर रुकी. उसके अंदर आंटी थी. ब्राउन कलर के बाल, बलून को आगी से उपर किया और उन मे ग्लासएस्स फसाती हुए गार्री का डोर ओपन किया और बहिर निकली.

और अपना पर्स उतनी के बाद गारी का डोर क्लोज़ किया. पर्स को शहोल्दर पे रखा दोसरा हाथ ग्लासस पे था जो उसने असर मे फसाए हुए थे चलती मेरी जानिब आ गयी.

फिर मुझे कॉल पे देख के रुक गयी मैने फॉरन ही अल्लाह हाफ़िज़ कहा और कॉल बंद करदी. और आंटी ने मुझे बोला के क्या मई शो रूम से कुछ चीज़ाइन देख स्क्ति हूँ.

मैने डिल मे सोचा के आंटी बहुत सेक्सी है और इसको नज़र भी आ रहा है के शोरुम क्लोज़ है और अंदर अंधैरा भी है फ्र भी चीज़ाइन डैखहनी का कह र्ही है . मामला कोई गरह ब्रह लग रहा था.

मैने ये सोचती हुए उनको को बोला ग आप आ जाएँ और शटर पूरा उपर उठाया और उनको आंड लाइ गया.

शोरुम के अंदर जाते ही रिसेप्षन के उपर कुछ चिज़ुं के सॅंपल और केटलॉग्स पड़ी तीन. आंटी उन के पास खरी हो गईं और पहले केटलॉग्स ड़खनी लग गईं उसके बाद ग्रनाइट आंड कोरियाँ के सॅंपल डैखहनी लग गयी.

और मई जो के उन के पीछे हाथ बाँध के खर्रा था मेरा पूरा ध्यान आंटी की बूँद (हिप्स) पे था. और आंटी की ड्रेसिंग देख के मुझे अंदाज़ा हो रहा था के इस का डिल कुछ और है .

उसकी ड्रेसिंग ऐसी थी के वाइट कॉटन की लोंग शर्ट, जो के बिल्कुल बारीक थी और अंदर से ब्लॅक ब्राज़ेर सामने नज़र आ र्ही थी और नीची ब्लॅक टाइट और वो भी भत बारीक था उसके अंदर से आंटी की लेग्स और हिप्स की वाइटनेस भी झलक रही थी.

मैं पीछे खरा उनकी आगे और फिगर का अंदाज़ा लगा रहा था. और उनकी जसमंत देख के ऐसी लग रहा था के आंटी ज़्यादा उसे नही हुई. (मतलब् ज़्यादा चूड़ी नई). और उनी अग्र 37 और फिगर 36-30-36 था. (जो के मुझे बाद मे पता चला).

मेरा पीची खरे बुरा हाल हो रहा था और अप्पर से रोज़ा था मेरा. मेरा उस टाइम कुछ करने का इरादा नही था. पेर मैने सोचा आंटी आ चली गयी फिर कभी नही आए गी और आज काम आज़ काम उसको चेक तो कृण .

ये सोचती हुए मैने मोबाइल निकाला और मोबाइल के बहानी आंटी के पीछे से गुज़रती हुए उन के हिप्स पे पूरा हाथ फ़ायर दिया.

मेरा ध्यान मोबाइल मे ही था आंटी अचानक मेरी तरफ देखनी लग गयी और उन्होने अपना पर्स शोल्डर से हटा के रिसेप्षन टेबल पे रख दिया जेसे वो रेडी हो रही हो.

बुत मेरा इस से ज़्यादा कुछ करने का इरादा नही था रोज़े की वजह से. जब हिप्स पे हाथ फैरनी की वजह से मुझे लगा के आंटी सील है बिल्कुल मैने आंटी से पूछा आपको ग्रनाइट छाईए? वो बोली की मैने किचन बनवा लिया है बस अब उसका वोरकस टॉप रह गया है.

मैने बोला ठीक है कोई बात नही आप मुझे अपना अड्रेस और कॉंटॅक्ट नंबर दे दे, मई कॉंटॅक्ट करके आ जौंगा और साइज़ ले कर कोटेशन दे दूँगा.

उन्होने सर हिलती हुए बोला हन ठीक है और मैने अपनी डाइयरी और पेन स्माइल करते हुए आंटी की तरफ बरहया और आंटी ने उसपे अपना अड्रेस और नंबर लिखा जो के बहरिया फेज़ 7 रॅवॉल्पींडी का अड्रेस था.

हमारी रुटीन होती थी हम ऐसे ही क्लाइंट्स से नंबर लिया करते थे. नंबर आंड अड्रेस ले लिया और आंटी चली गयी. मई बहिर आया शटर नीचे किया लॉक लगाया और मार्केट की तरफ चल पड़ा आफ्तरी का समान लेने.

फ्रूट्स के कटिंग की और रोज़ा आफ्टर किया. इतने मे अहसान भी आ गया और फिर शटर क्लोज़ कर के बाहर निकल गये वॉक के लिए.

आयेज की कहानी अगले पार्ट मे.

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