कज़िन की चुदाई शादी के बाद

हेलो मित्रो, मै नीलेश वर्मा [31] सूरत का रहने वाला हूँ, आपके लिए अपनी हिन्दी सेक्स स्टोरी लेकर आया हूँ, टेक्सटाइल इंडस्ट्रीस एक छोटा सा मेरा बिसनेस है, मेरी बीवी रीमा और एक बेटा है. मै दिखने मे वेसे स्मार्ट हूँ पर लड़कियों को इंप्रेस करने के चक्कर मै अट्रॅक्टिव दिखने की कोशिश करता हूँ.
बीवी के साथ मेरी सेक्षुयल लाइफ ओक है. ई आक्सेप्ट रीमा भी मुझे बिस्तर पे पूरा मज़ा देती है, पर क्या करूँ कोई भी खूबसूरत लौंडी को देख कर अपना लौंडा सलामी देने लगता है. जो आदत से मजबूर है, और इसी वजह से बीवी के अलावा बाहर भी मुँह मरता फिरता हूँ.

सेक्स तो मेने शादी से पहले ही सिख लिया था और शादी तक तो एक्सपर्ट बन गया था. मेने अपना पहला सेक्स मेरी चचेरी बहेन ऋतु से किया था. ऋतु और मेरी उमर सेम सेम ही है, हम संयुक्त परिवार मे रहते थे. ऋतु और मै साथ मे ही पाले बड़े है.
साथ मे पढ़ाई की, खेले , घूमते. जवानी के आने तक हम एकदुसरे को अच्छे से समझने लगे थे. ऋतु और मुझे प्यार तो नही तो पर जवानी के शुरुआती वक़्त पे जो सेक्स की तलब जागती है ना तो उसको समझने लगे थे और एकदुसरे से पूरी की. यानी उस वक़्त अपनी जवानी की बेसिक नीड्स को हम ने अच्छे से पूरी की थी.

ऋतु शादी के बाद अपने पति के साथ देहरादून चली गयी. क्यूंकी उसका पति राजीव वहाँ काम करता था. और बाद मे मेरी भी शादी हो गयी. शादी के बाद भी ऋतु कई बार आई है, पर उसके बाद हम ने कोई सीमाए नही लँघी.
ये सब सोचते सोचते मेरी विचारधारा टूटी, मै देहरादून आया था एक काम से तो सोचा ऋतु को मिलता हुआ चालू. काफ़ी संपन्न परिवार है ऋतु का दो बच्चे है. और राजीव भी खुश रखता है.

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हाला की की मै सिर्फ़ मिल कर जाने वाला था पर ऋतु ने फोर्स किया की आए है तो दो तीन दिन घूम कर ही जाओ.. तो मै ठहेर गया. कमरे का दरवाजा खुला और ऋतु कमरे मे आई, वक़्त के साथ साथ उसके फिगर मे भी काफ़ी बदलाव आ गया था, पहले पतला सा फिगर था, अब भरौदर हो गया है.
“जाग गये तुम..”, ऋतु ने चाय का कप मेरे हाथ मे थमाया और बेड पे साइट पे बैठ गयी. मेने अंगड़ाई लेते उठा. “हां.. यार.. अछा लग रहा है यहाँ, शांति है काफ़ी, राजीव कहाँ है..”, “वो तो ऑफीस गये..”, मेने चाय की चुस्की लेते हुए कहा,”एक बात बोलू ऋतु, बुरा तो नही मनोगी.”, “मै तुम्हारी किसी बात का बुरा नही मानूँगी.कहो”.

मेने धीमे लहज़े मे कहा, “आज सुबह सुबह मेरे ज़हेन मे अपने पुराने दिन ताज़ा हो गये, शादी से पहले हम ने कितने मज़े किए थे, एक बात कहूँ अपने दिल की, अगर हमारे खानदान मे हमारा रिश्ता अलाउड होता तो हम शादी कर सकते थे.पर खैर जो हुआ वो हुआ, अब बताओ तुम केसी हो, राजीव खुश तो रखता है ना तुम्हे”
ऋतु मेरे थोडा करीब आई और बोली, “तुम्हारे साथ शादी करने की मेरी भी ख्वाहिश तो थी, पर किस्मत को कुछ और ही मंज़ूर था, क्या कर सकते है, राजीव बहोत अच्छे है, मुझे कोई प्राब्लम नही है उनके साथ. अछा वेवहिक जीवन चल रहा है हमारा.”

मेने कहा,”गौर किया है मेने तुम्हारे फिगर पे वक़्त के साथ साथ काफ़ी बदल गयी हो, पहले कितनी हल्की फुल्की थी, अब तो हहेही..” मेरे मज़ाक करने पर तकिये से वो मुझे मरने लगी. “मज़ाक करने की तुम्हारी आदत अभी भी नही गयी..”
“पर कसम से, अब तुम बिल्कुल पटाखा लगती हो.. तुम्हारे उरोज़े पहले से काफ़ी बड़े लग रहे है, और बड़ा मटक मटक के चलने लगी हो..”, “तुम भी पहले की तरह दिलफेंक थे और आज भी हो.. पर सच कहूँ तो अब भी बड़े हॅंडसम दिखते हो..”.

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मेने उसका हाथ पकड़ के कहा,”क्या सच मे, अगर तुम्हे मै हॅंडसम लगता हूँ तो सो फिसदे मै लगता होऊँगा, तुमसे बेहतर मूज़े और कोई नही समझ सकता.”
ऋतु एक मिनिट. बोलकर गयी, मै साँझ नही पाया और मै बाथरूम मे फ्रेश होने गया बाहर आया तो देख के मेरे होश उड़ गये, ऋतु सिर्फ़ ब्लाउस और पेंटी मे पलंग पे लेटी थी मेरी और देख के कातिल अदओ से मुस्कुरा रही थी. मेने स्वलिय नज़रों से पूछा तो, उसने अपनी गोरी थाइस पे हाथ फेरते कहा, “बच्चों को स्कूल भेज दिया है, और ये भी ओफिसे गये है, आओ हम पुराने दिन फिर से जी ले.”

ऋतु का जवाब सुन के मेरी खुशी का कोई ठिकाना नही रहा, मेने सीधे बेड पे छलन्ग लगाई और ऋतु का चेहरा अपने करीब लेक उसके रसीले होंटो को अपने तपते होंटो से जोड़ दिया.
वेसी ही मिठास आज भी थी उसके होंटो की, मेरे हाथ खुद बा खुद उसके बूब्स को नापने लगे, मम्मो का कदकपन ब्रा के उपर से ही महसूस हो रहा था, मेने स्मूच जारी रखते हुए ब्रा के हूक़ खोल दिए और मादक उरुज़ों को कपड़ों की क़ैद से आज़ाद कर दिया..
“आअहह.. ऋतु जान, तेरे बूब्स एक संतरे से बढ़ के पाटे जेसे हो गये है..” मेने ऋतु के बूब्स को अपने मुँह मई जाकड़ के कहा, “ससस्स उई मा आराम से आअहह प्रज्ञेंसी के बाद बोहोत सेन्सिटिव हो गये है मेरे बूब्स आऐईइ..”

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