ममेरी बहन की चूत में लंड का पहला मजा

मेरा नाम वीर (बदला हुआ) है। मैं 22 साल का एक जवान लड़का हूं और उत्तर प्रदेश का रहने वाला हूँ। देखने में मैं एक सामान्य कद-काठी का मर्द हूं.

आज मैं आपको अपने जीवन में घटित एक सत्य घटना बताने जा रहा हूं. यह बात उस समय की है जब मैं 19 साल का था और बारहवी में पढ़ रहा था। उन दिनों मैं अपने मामा के घर पर रह रहा था. मुझे क्या पता था कि मामा के यहाँ मैं सिर्फ पढ़ने के लिए नहीं जा रहा बल्कि एक ऐसे रिश्ते से जुड़ने जा रहा हूँ जो मेरे जीवन में एक नया मोड़ ले आएगा।

मेरे मामा थोड़े गरीब हैं। उनके घर में केवल एक कमरा अपने बड़े बेटे और बहू के सोने के लिए और एक कमरा बाकी लड़कियों और मामा मामी के सोने के लिए है। उनकी 3 बेटियाँ हैं जिसमें से सबसे बड़ी का नाम पूनम था। वो मुझसे 4-5 साल बड़ी थी इसलिए मैं उनको दीदी कहता था। भगवान ने उनको बहुत सुंदर बनाया है।

मैंने हमेशा उनको दीदी ही तो माना था। आखिर मामा की लड़की भी तो बहन है। ऊपर से उम्र में 4-5 साल बड़ी मगर उनकी हंसने की अदा, उनके गोर चेहरे की मुस्कराहट, उनके गुलाबी होंठ, उनके तीखे नैन नक्श मुझे कम से कम उस समय तक तो नहीं भाये थे जब तक आस-पड़ोस के लडकों में उनको पाने की ललक न देखी थी।

अब एक साथ रहने के चलते हम सब भाई-बहनों का साथ-साथ उठाना बैठना, लूडो खेलना होता था। एक सादगी भरी हसीन अदा उनकी हर हरकत में दिखती थी।
पढ़ाई में लड़कियों से पाला बहुत पड़ा था लेकिन शायद उस समय तक एक लड़की के छूने पर जो अहसास अब हो पाया था वो पहले कभी नहीं हुआ था।

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मैं अक्सर उनको सताया करता था और वो भी मुझे छोटा भाई जानकर बहुत तंग किया करती थी और हम दोनों भाई-बहन ऐसे ही मस्ती करते रहते थे. हम दोनों के बीच में ऐसी ही हल्की-फुल्की शरारतें अक्सर चलती ही रहती थीं.

दीदी मेरा बहुत ख्याल भी रखती थी। लूडो खेलते समय जब एक दो बार उनका हाथ मेरे हाथ से छुआ तो पता चला कि इतना नर्म स्पर्श शायद कभी महसूस नहीं किया था मैंने। फिर मैं जान बूझकर खेल में चीटिंग करता था और पासा लेने के चक्कर में काफी देर तक उनके हाथों का स्पर्श महसूस करता था।

उनको मेरा शहरी पहनावा बहुत पसंद था। मेरी टाइट फिट टी-शर्ट्स और शर्ट्स उनको मेरी अच्छी फिटनेस दिखाती थी। मुझे भी उनका शहरी लड़कियों की तरह कुरता और लेग्गिंग का तालमेल गजब का लगता था।

धीरे-धीरे मेरा ध्यान उनके ऊपरी उभार पर जाने लगा। मेरी चोर नजरें अक्सर उनके उभारों को देखने की ताक में रहने लगी थीं। जब भी हम लोग लूडो खेलने बैठते तो मेरा ध्यान उनके उभारों और उनकी जांघों पर जाता था। जांघों का गदरायापन अक्सर मेरी उँगलियों को बुलाता था और मैं उनकी जाँघों पर अपनी उँगलियां चलाने के लिए मचल जाता था। मैं कई बार उनके हाथों का स्पर्श पाकर रोमांचित हो जाता था। उनके हर अंग से चिपका उनका कुर्ता और कसी लेग्गिंग मुझे आकर्षित करने लगी थी।

एक दिन मैं मामा के अन्दर वाले कमरे में सो रहा था। दीदी भी शायद मुझे सोता हुआ जानकर बेफिक्र सी होकर नहा रही थी। मामा की आर्थिक स्थिति सही न होने की वजह से नहावन बस एक बंद दरवाजे के पीछे बना था जिसमें से होकर अन्दर वाले कमरे का रास्ता था जहाँ मैं सो रहा था.

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गर्मियों के दिन थे इसलिए गर्मी की वजह से मेरी आँख खुली। मैं जैसे ही उठ कर बाहर निकला मेरी आँखें खुली रह गयीं। दीदी का पूरा यौवन मेरे सामने था। उनका पूरा गोरा नंगा जिस्म देख कर मेरे शरीर में करंट दौड़ने लगा।
दीदी के सिर से गिर रहा पानी उनके लबों को, गर्दन को, उनके मखमली बूब्स को, उनकी पतली कमर को भिगोता हुआ और उनकी जांघों से होता हुआ योनि के रास्ते अपना सफर तय कर रहा था।

कुछ समय के लिए मुझे पानी से जलन होने लगी। मैं भी पानी की तरह उनके नर्म गुलाबी लबों को, उनकी गर्दन को, उनके बूब्स को, उनकी कमर को, पेट पर बनी सुंदर सी नाभि को, उनकी मुलायम जाँघों को और उस योनि को छूना चाहता था।

मेरा मन दीदी को अपनी आगोश में भरने को कर रहा था। एक 23-24 साल की लड़की की भरपूर जवानी, वो हसीं जिस्म, पूरे दूध की तरह सफ़ेद जिस्म पर केवल दो कपडे़, उस समय दीदी को किसी फिल्मी मॉडल की तरह दिखा रहा था। शायद मेरे अन्दर की वासना मेरी पैंट में मेरे खड़े हो रहे लंड से पता चल सकती थी।

मैं उनकी जाँघों के बीच में अपना हाथ रखकर उस नर्म-मुलायम और मखमली अहसास को महसूस करना चाहता था। अचानक दीदी का नहाना पूरा हुआ और मैंने नजरें बचाते हुए दबे कदमों से खुद को वापस मोड़ा और धीरे से चल कर अपने कमरे में वापस आ गया.

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