कॉलेज के प्रोफेस्सर्स ने किया मेरा गंगबांग

ही दोस्तो मेरा नाम सीमा है और मई इंडोरे की रहने वाली हू मेरा साइज़ 32 30 34 है और मई 21 साल की हू. मुझे सेक्स करना और उसके बारे मई लोगो को बताना बहुत पसंद है. मई एक इंजिनियरिंग कॉलेज मई पढ़ती हू.

बात कुछ महने पहले की है मई वैसे तो क्लास मई अपनी चुदाई के लिए फेमस हू. मेरे क्लास के लगभग सारे लड़को ने मेरी चुदाई की है और मैने भी खूब मज़े लिए है. मगर मई कभी किसी प्रोफेसर या टीचर से नही चुडवाया था.

मई हुमेशा से मेद्स मई वीक थी. मगर कॉलेज मई मेरे अग्गे वाला लड़का मुझे मेद्स के पेपर मई चीटिंग करवा देता था जिससे मई जैसे तैसे पास हो जाती थी.

मगर 6त सें के एग्ज़ॅम के टाइम उसका आक्सिडेंट हो गया जिसके कारण वो अलग रूम मई टीचर्स के सामने अपने भाई से पेपर लिखा रहा था.

मई बहुत दर्र गयी थी क्यू की अगर मई फैल हो जाती तो पापा मुझे पूरी तरह से रंडी बना देते. (इसके बारे मई मेरी पिछली स्टोरी पढ़िए). मैने चीटिंग पेपर ले जाने का सोचा मगर मैने कभी एग्ज़ॅम मई चीटिंग पेपर से चीटिंग नही की थी.

एग्ज़ॅम के दिन मेरे अग्गे पूरा खाली था. मगर मैने जैसे तैसे चीटिंग पेपर अपने ब्रा और पनटी मई छिपा लिए. क्यू की कोई भी प्रोफेसर वाहा तो चेक नही ही करता. मैने फॉर्मल वाइट शर्ट और पंत पहना हुआ था.

एग्ज़ॅम शुरू हुआ कुछ देर बाद मैने चीट पेपर निकल के चीटिंग करना चालू कर दिया. दो सवालो के जवाब मैने लिख भी दिए थे मगर तीसरे सवाल मई प्रोफेसर ने मुझे पकड़ लिया. उनका नाम अमनदीप था और वो एक पंजाबी थी. उन्होने ने मेरा पेपर चीन लिया और मुझे एग्ज़ॅम रूम ले गये.

एग्ज़ॅम रूम मई जाते ही मई एग्ज़ॅम हेड जिनका नाम सिधर्ट बानेर्जी था उनके सामने माफी माँगने लगी. पूरी गिरगिरने तक लगी.

प्रोफ सिधर्ट: तुम्हे ये एग्ज़ॅम देना अलोड नही करेंगे हम लोग.

प्रोफ अमनदीप: इसके फादर को बुलाते है इसके और भी सीकायत सुनने है मैने.

मई और दर्र गयी और मॅन ही मॅन सोचा की किसी भी हालत मई पापा को पता नही चलने देना है. मैने जान भुज कर शर्ट के उपेर के दो बटन खोल लिए और सिधर्ट सिर के पेर पकड़ के सॉरी बोलने लगी.

मई: आप जो बोलेगे मई करूँगी प्लीज़ मुझे इस एग्ज़ॅम मई फैल मत करो.

ढेरे ढेरे मई अपना हाथ उपेर उनकी जंगो तक ले गयी जिससे उनका लंड तोरा तोरा टाइट होने लगा. उनके नज़र जैसे ही मेरे शर्ट के अंदर के बूब्स पे पारी उनका लंड एकद्ूम से टाइट हो गया. मुझे उनका लंड उनके जाँघो तक आता फील होने लगा. उन्होने अमनदीप को देख कर बोला की क्या करना है इसका.

प्रोफ अमनदीप: करना क्या है ये पहले से ही रॅंड है. आए दिन क्लास के लड़को से चुड़वति रहती है. हम भी तोरा मज़ा ली ही लेते है.

मैने खुशी से सिधर्ट सिर का लंड उनके पंत के उपेर से सहलाना शुरू किया. पिछले से अमनदीप सिर ने मुझे खड़ा कर के मेरी कमर को अपनी तरफ खीचा और मेरी गंद को अपने लंड के उपेर सहलाने लगे.

फिर शीदरट सिर ने मेरी शर्ट खोल दी और मेरे बूब्स को ब्रा से बेर निकल कर उससे दबाने लगे. मेरी बूब्स से मानो वो बचो की तरह खेल रहे हो.

मैने भी उनकी पंत खोल के उनका लंड उनकी चड्डी से बाहर निकल कर हाथ से सहलाने लगी. पीछे से अमनदीप सिर मेरे गली को चूमने लगे मई पूरी तरह से गरम हो गयी.

फिर उन दोनो ने मिलकर मेरी पंत और पनटी उतार दी मैने भी अपनी ब्रा पूरी तरह से उतार दी एब्ब मई उनके सामने नंगी खरी थी. अमनदीप सिर ने भी अपनी पंत उतार दी वो दोनो भी आधे नंगे खरे थे.

अमनदीप सिर का लंड 8 इंच का लंबा सा था और सिधर्ट सिर ला 7 इंच का था मगर मोटा था. मई तो थोरी देर के लिए दर गयी मगर फैल होने से बचने के लिए मई कुछ भी कर सकती थी. अमनदीप सिर ने मेरे सिर को पुश कर के मुझे जुटनो पे बैठा दिया.

मैने एक एक कर के दोनो का लंड चूसने चालू कर दिया. एब्ब मई इतनी एक्सपर्ट तो चुदाई मई हो गयी हू की अकचे से ब्लोवजोब दे साकु.

अभी मई ब्लो जॉब दे ही रही थी की मेद्स के प्रोफेसर रवि वेर्मा और फिज़िक्स के प्रोफेसर मंजीत सिंग एग्ज़ॅम हॉल मई आ गये और मुझे और सिर को नंगा देख लिया. मई घबरा गई मगर उन दोनो ने बिना टाइम वेस्ट किया अपने अपने पंत खोल कर चोरो ने मुझे चारो तरफ से घेर लिया.

मई साँझ गयी की आज मेरी अकचे से चुदाई होगी. मगर एब्ब मई कर भी क्या सकती थी. मई बस चारो को घुरे जा रही थी. रवि और मंजीत सिर का लंड भी लगभग 8-8 इंच का होगा.

तभी रवि सिर बोले “देख क्या रही है अगर मार्क्स चाहिए तो आक्ची रॅंड के तरह लंड चूसना शुरू कर. जब पार्टी चल ही रही है तो हम भी मज़े ले लेते है”.

मैने पहले रवि सिर का ही लंड मु मई लिया और मजीत सिर और सिधर्ट सिर का लंड हाथो से बकर के हिलने लगी.

थोरी देर बाद मंजीत सिर का मु मई लेके बाकी दो का हिलना चालू किया. फिर भी एक वक़्त पे कोई ना कोई छूट ही जा रहा था. तंग आ कर जब मई मंजीत सिर का लंड चूस रही थी. तभी बनर्जी सिर ने भी अपना लंड मेरे मु मई फिट करने लगे और टाइट्ली फिट भी हो गया.

मुझे बहुत दर्द हो रहा था मानो मेरा मु फट जाएगा मगर अंडर ही अंडर मज़ा भी आ रहा था. ऐसे ही उन्होने मुझे लगभग 10 मीं तक अपना अपना लंड चूसाया मुझे भी इस्मै बहुत मज़ा आ रहा था मई पूरी तरह से गीली भी हो गयी थी.

फिर सिधर्ट सिर ने मुझे खरा किया मई साँझ गयी की एब्ब मेरी चुदाई होने वाली है. सिधर्ट सिर ने मुझे घुमा के झुका दिया और अपना लंड मेरी छूट पे रगड़ने लगे.

मई वैसे भी पहले से गीली थी और गीली हो गयी. फिर उन्होने अपना लंड मेरे छूट पे सेट किया और एक शॉर्ट मई पूरी तरह से अंदर गुस्सा दिया मेरी दर्द से चीख निकल गयी.

तो अमनदीप सिर ने मेरी मु को ज़ोर से बंद कर दिया जिससे मेरी चीख नही निकल पा रही थी. सिधर्ट सिर ने मेरी चुदाई जारी रखी.

फिर अमनदीप सिर ने लंड मेरे मु मई देके मेरा मु छोड़ने लगे. साथ ही साथ रवि सिर और मंजीत सिर ने अपना अपना लंड मेरी हाथो मई दे दिया मई भी उससे हिलने लगी.

थोरी देर बाद रवि सिर ने सिधर्ट सिर की जगह लेके मेरी चुदाई चालू की. मुझे ये सब मई बहुत मज़ा आ रहा था. मई तोरा तोरा मोन भी करने लगी और उनके हर बात को एक आक्ची रॅंड के तरह मानने लगी.

फिर मंजीत सिर मेरी चुदाई के लिए आए. वो मेरी गंद मई थूक लगा के मेरी गंद के झेद मई उंगली डालने लगे. मई साँझ गयी की ये गंद छोड़ने वेल है. मैने पहले भी गंद चुडवाया है पूर किसी का 8 इंच का मोटा लंड नही था. मई बहोट दर गयी.

थोरी देर के लिए मैने माना करने की कोशिश भी की मगर किसी ने नही सुनी. फिर मंजीत सिर ने अपने लंड को मेरी गंद के छेड़ मई सेट किया और धक्का लगाना चालू किया. मई दर्द से चीख भी नही सकती थी क्यू की मेरे मूह मई भी लंड था. ढेरे ढेरे उनका पूरा लंड मेरे गंद मई फिर होगा गया.

फिर उन्होने अंडर बाहर करना चालू किया थोरी देर दर्द बदता रहा मगर फिर मज़ा आने लगा. मंजीत सिर ने मेरे दोनो तंग उपेर उठा लिए और मेरी गंद छोड़ते रहे. सच काहु तो मुझे भी उस्मआ आनंद आने लगा था. जब कोई लड़का मुझे डोमिनट करता है तो मुझे अलग ही मज़ा आता है.

फिर मंजीत सिर मुझे लेके एग्ज़ॅम रूम के सोफा पे बैठ गये अभी भी उनका लंड मेरे गंद मई ही था. फिर रवि सिर आ कर मेरी छूट को अपना लंड से रगड़ने लगे.

मैने दर्र के मारे उनसे रिक्वेस्ट किया की.. “एक बार मे इतने मोटे मोटे लंड मई नही ले पौँगी. बारी बारी से सब मार लेना मेरी, मई कही नही जा रही.”

मगर वो मेरी कहा सुनने वेल थे. वो तो बस जनवरो की तरह मेरी चुदाई करना छाते थे. उन्होने हेस्ट हुए अपना लंड मेरी छूट मई डाल कर छोड़ने लाग्गे. मई दर्द से तिलमिला उठी. मगर चीख भी नही सकती थी कही कोई एर ना आ जाए.

ऐसे ही 15 मीं तक दोनो ने मेरी चुदाई की इश्स वक़्त मई बाकी के दोनो मई अपना लंड मेरे हाथ मई दे रखा था. मई तो दर्द से लगभग बेहोश होने वाली थी मगर फिर सिधर्ट सिर ने एक ज़ोर का टप्पड़ मारा जिससे मई होश मई आ गयी.

मई दर्द मई थी मगर मेरे अंदर की रंडी खूब मज़े ले रही थी. फिर कीच देर बाद रवि और मंजीत सिर के जगह सिधर्ट और मंदीप सिर ने ले ली और मेरी चुदाई जारी रही.

मुझे चूड़ते हुए लगभग 45 मीं हो गये थे और मेरी छूट और गंद दर्द से सुन पर गये थे. फिर उन्होने मुझे खरा किया और मेरे हाथ को टीए से बाँध और टेबल पे लिटा के टीए को टेबल से बाँध दिया. मई अंदर ही अंदर सोचने लगी की एब्ब की तरह से ये लोग मेरी चुदाई करेंगे.

तभी रवि सिर आए और मेरे दोनो टॅंगो को अपने कंधे पे रखा और मेरी छूट मारना स्टार्ट कर दिया. कुछ देर बाद उन्होने अपना पानी मेरे अंडर ही चोर दिया. फिर मंजीत सिर आए और मुझे वैसे बँधे हुए मई पलटा कर मेरी गंद मरने लगे और मेरी गंद के अंदर ही पानी गिरा कर चले गयी.

फिर सिधर्ट सिर आए और मेरे बूब्स के बीच मई लंड दे कर रगार्ने लगे और वो भी मेरी बूब्स पे अपना पानी गिरा दिया. फिर मंदीप सिर मुझे टेबल से लटका कर मेरे मूह को छोड़ने लगे और वो भी कुछ देर बाद मेरे मूह के अंदर ही झार गये मैने उनका सारा पानी पी लिया.

फिर उन्होने मेरे हाथ खोल दिए और सब कापरे पहेन्ने लगे. मेरे मॅन मे एक जुंग जीतने जैसी ख़ुसी थी क्यू की आज ट्के मैने 4 मर्दो से एक बार मई नही चूड़ी थी. मैने सारे जागह से सिर का माल इकाता कर के छत कर थी.

तभी छाई देने वाला रूम मई आ गया और मुझे नंगा देख कर चॉक गया. तभी मंदीप सिर ने उससे इशारा कर के मेरी लेने को कहा. उसकी आँखे चमक गयी. उसने मुझे उठाया एर टेबल प्र जुका कर मुझे छोड़ने लगा उसका लंड काफ़ी छोटा था. मुझे उतना महसूस भी नही हो रहा था.

मई मॅन ही मॅन मई सोच रही थी की एक पेपर के लिए मुझे कितनो से छुड़वाना परेगा. मगर यूयेसेस वक़्त मई ये सब करने को रेडी थी. छाई वाला थोरी ही देर मई झार गया उसने जल्दी से पंत पहना और सबको छाई बाँट के खुशी कुशी चला गया.

मैं भी अपने करे पहें कर सिधर्ट सिर के सामने सिर झुका कर खरी हो गयी. उन मई से किसी ने मेरी पनटी रख ली थी. मई बिना पनटी के ही कापरे पहें लिए.

फिर रवि सिर ने मुझे पासिंग मार्क्स लायक बता दिया मेरे लिए इतना ही काफ़ी था. मई खुशी मई थी मगर इसकी कीमत मेरी गंद और छूट को चुकानी पारी थी.

इसके बाद भी कई बार प्रोफेसर लोग मुझे अपनी प्राइवेट पार्टी मई बुलाया करते थे एक रंडी की तरह. और उनको जवान रंडी फ्री मे कहा मिलती.

मई वैसे भी पापा की रखैल थी ही तोरा मई वही काम अपने लिए भी कर लेती थी.

ढेरे ढेरे सारे प्रोफेस्सर्स को ये बात पता चल गयी और सब मुझे मार्क्स के बदले छुड़वाने का ऑफर देते थे. जिस सब्जेक्ट मे मई आक्ची भी थी उस सब्जेक्ट के सिर भी मुझे फैल कर देने की धमकी दे कर मेरी चुदाई कर दिया करते है.

तो दोस्तो कैसी लगी मेरी ये कहानी. ये इन्सिडेन्स मेरे साथ हाल ही मे हुआ था तो मैने सोचा आपको बता डू. कैसा लगा मुझे कॉमेंट मे ज़रूर बताईएएगा.

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