क्लास की हॉट लड़की की चुदाई

यह उन दिनों की बात है जब मैं पढ़ता था.. मैं अपनी क्लास का मॉनिटर भी था। हम लोग क्लास में सिर्फ़ 15 स्टूडेंट्स थे.. जिसमें 6 लड़के और 9 लड़कियाँ थीं। हमारी क्लासेस ज़्यादातर प्रयोगशाला में ही लगती थीं। हम लोग सुबह फिज़िक्स की कोचिंग भी पढ़ने जाते थे। जिस कारण हम कोचिंग से सीधा स्कूल चले जाते और स्कूल सबसे जल्दी पहुँच जाते थे। मेरी ही क्लास में एक लड़की थी जिसका नाम डॉली था.. वो पढ़ाई में ज़रा कमजोर थी.. लेकिन उसका जिस्म तो जैसे आग का शोला था.. 36-26-34 के कटाव देख कर लौड़े की हालत खराब हो जाती थी.. जब वो मटक-मटक कर चलती थी.. तो लगता था कि जैसे उसके चूतड़ टपकने वाले हों। जब भी वो मेरे सामने आती.. तो मैं परेशान हो जाता था.. उसके मम्मों देख कर ऐसा जी करता था कि बहन की लौड़ी के इन मम्मों में से सारा रस निचोड़ कर पी ही जाऊँ..

खैर.. मैं सीधी बात पर आता हूँ कि वो बहुत पटाखा आइटम थी। एक दिन उसने मुझसे अपनी पढ़ाई में मदद माँगी.. भला मैं इनकार क्यों करता। मैंने कहा- ठीक है.. आ जा.. तो उसने कहा- स्कूल टाइम तो कोई भी पीरियड फ्री नहीं होता और शोर भी बहुत होता है.. तो ऐसा करते हैं कि कल सुबह की कोचिंग के बाद मैं सीधा तुम्हारे साथ इधर ही आऊँगी। हमें पढ़ने के लिए स्कूल टाइम से पहले 1 घंटा मिल जाएगा। मैंने कहा- ठीक है.. आ जाना। मैंने उसी वक्त उसके साथ चुदाई करने का मन बना लिया। उस दिन मेरा पढ़ाई में मन कतई न लगा और मैं सारा वक़्त उसी के बारे में सोचता रहा। शाम तक मैंने प्लानिंग कर ली थी कि क्या करना है।

अगले दिन जब हमारी फिज़िक्स की कोचिंग खत्म हुई.. तो मैं सीधा उसके पास गया और हम दोनों मेरी बाइक पर स्कूल की तरफ़ चल पड़े। मुझे तो जैसे यकीन ही नहीं आ रहा था कि मेरी स्वपन सुंदरी मेरे पीछे बैठी है। जब हम स्कूल पहुँच गए.. तो सीधा क्लास में गए.. अभी सिर्फ़ चपरासी ही आया था। हमने उससे लैब की चाभी ले ली और लैब में आ गए। उसने अपने बैग से बुक्स निकाल लीं और मेरी तरफ़ आई। वो यूनिफ़ॉर्म की स्कर्ट में काफ़ी हॉट लग रही थी।

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मैंने उससे किताबें लीं और अपने पास बैठने को कहा। वो बैठ गई.. मैं उसे पढ़ाई के बारे में समझाने लगा। कुछ देर बाद हम लोग इधर-उधर की बातें करने लगे। जब उसने एकदम से मुझसे पूछा- वर्जिन किसे कहते हैं? तो मैं हैरान रह गया, मैंने अपने दिल में सोचा कि आज तो कमाल ही हो गया.. मछली अपने-आप ही जाल में आ गई है। पहले तो मैंने जानबूझ कर आनाकानी की.. लेकिन बाद में मैंने उसे मतलब बता ही दिया कि जिस लड़के या लड़की ने कभी भी किसी और के साथ फिज़िकल रिलेशन ना बनाए हों.. उसे वर्जिन कहते हैं। वो थोड़ा सा शर्मा गई.. मैंने देखा कि लोहा गर्म है और हथौड़ा मारने का सही वक्त है.. तो मैंने पूछा- क्या तुम वर्जिन हो? वो शरमाते हुए बोली- हाँ.. बस मुझे और क्या चाहिए था,
मैंने उससे पूछा- क्या तुम फिंगरिंग नहीं करती? तो उसने कहा- नहीं.. मेरी फ्रेंड्स बताती हैं कि यह बुरी बात है और इससे ब्लीडिंग होती है। मैं समझ गया कि यह अभी कच्ची कली है, मैंने कहा- तुम्हारी फ्रेंडस ग़लत कहती हैं.. हम लड़के लोग मुठ मारते हैं.. तो वो बोली- यह क्या होता है? मैंने उसे इशारे से लंड पर हाथ-आगे पीछे करके समझाया.. पर उसे समझ ना आया।
मैंने उससे कहा- कि तुम ऐसे नहीं समझोगी.. तो उसने कहा- तो जैसे समझाना हो समझा दो.. मैंने कहा- ठीक है तुम अपना मुँह उधर करो। वो थोड़ा समझ गई.. मैंने अपना 7″ लंबा लंड निकाला.. जो पहले से ही तना हुआ था.. मैं अपने लंड को उसके चेहरे के पास ले गया और उससे अपना मुँह घुमाने के लिए कहा। जब उसने अपना मुँह मेरी तरफ़ घुमाया.. तो वो डर गई। वो चिल्ला उठी और भागने लगी। तभी मैंने उसे शांत किया और आहिस्ता-आहिस्ता अपने लंड को भी सहलाने लगा। मैंने उससे कहा- अब तो तुमने मेरे अन्दर के हवस के शैतान को जगा दिया है.. अब तुम्हें इससे शांत करना पड़ेगा। वो लगातार मेरे लंड की तरफ़ देखे जा रही थी।

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मैंने उसे हिलाया और कहा- अपना हाथ आगे करो। उसने मना कर दिया.. मैंने उससे विश्वास दिलाया- कुछ नहीं होगा.. अपना हाथ आगे तो करो.. तब कहीं जाकर उसने अपना हाथ मुझे दिया.. जैसे ही उसके मुलायम हाथों ने मेरे लंड को छुआ.. तो मेरे पूरे शरीर में करंट आ गया। मैंने उससे अपना लौड़े के ऊपर हाथ आगे-पीछे करने को कहा। वो ऐसा ही करने लगी, मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। फिर मैंने सोचा कि साली के हाथ में इतना आनन्द है तो ब्रा में तो क़यामत ही छुपी होगी।
मैंने उससे कहा- मजा आ रहा है?
‘हाँ..’
‘तो चलो कुछ और करते हैं..’
उसने कहा- क्या?
तो मैंने कहा- तुमने कभी नमकीन लॉलीपॉप खाया है?
उसने कहा- नहीं.. मैंने तो हमेशा मीठा लॉलीपॉप ही खाया है.. यह नमकीन कैसा होता है?
मैंने कहा- उसे खाने से पहले तुम्हें अपनी आँखें बंद करनी पड़ेगीं, मुँह खोलना पड़ेगा। उसने अपनी आँखें बंद कर लीं और अपना मुँह खोल दिया। मैंने जल्दी से अपना लंड उसके मुँह में भर दिया.. वो फिर डर गई और उसे बाहर को निकालने लगी.. तो मैंने उसे डराया- अब देर हो चुकी है.. अगर चिल्लाई.. तो क्लास में बात फैला दूँगा। उसके पास और कोई चारा नहीं था.. उसने लंड चूसना जारी रखा। मैं तो जैसे आसमान में उड़ रहा था, जब मेरा पानी आने लगा तो मैंने उससे रोक दिया। अब लगता था कि वो भी थोड़ा मस्त हो गई थी..]

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