अपनी क्लासमेट कुंवारी लड़की को चोदा

मैं अपनी क्लासमेट को पसंद करता था. एक दिन मैंने उससे अपने प्यार का इजहार किया तो उसने बड़े प्यार से मुझे निहारा. मजा लें कि मैंने कैसे कुंवारी लड़की को चोदा.

दोस्तो, मेरा नाम सरफराज है. मैं उत्तर प्रदेश के वाराणसी का रहने वाला हूँ. यह कहानी मेरे साथ पढ़ने वाली लड़की हूर के साथ की है.

यह घटना आज से 4 महीने पहले की है. हम लोग साथ में पढ़ते थे. हूर दिखने में बहुत आकर्षक थी. उसकी फिगर 32-28-36 की थी. हम लोग एक दूसरे से 3 महीने से प्यार करते थे, लेकिन अपना प्यार जताने की हिम्मत हम दोनों में किसी में नहीं थी.

फिर एक दिन हूर किसी काम से स्कूल नहीं आई, तो पूरा दिन मुझे अच्छा ही नहीं लगा.
जब अगले दिन हूर आई, तो कयामत लग रही थी. मेरा मन कर रहा था कि जाकर प्यार का इजहार कर दूं, पर हिम्मत नहीं हुई.

छुट्टी के बाद हूर मेरे पास आई और उसने मुझसे मैथ की कापी मांगी, जिसमें मुझे एक मौका दिखा. मैंने अपने प्यार का इजहार, पर्ची पर लिखा और पर्ची को उस कापी में रख कर उसे दे दी. उसके अगले दिन जब हूर स्कूल आई, तो मैं उससे नज़र नहीं मिला पा रहा था.

जब वह मेरे पास कापी देने आई, तो उसने पूछा- ये सब क्या है?
पहले तो मैं चुप रहा और मेरा सर झुका रहा.
उसने मुझसे फिर से कहा कि इस पर्ची का क्या मतलब था?
मैंने उससे प्यार का इजहार कर दिया.

एक मिनट तक हम दोनों के बीच खामोशी छाई रही. मैं सर झुकाए यूं आंखें नीचे करके खड़ा रहा.

फिर वो मुझे हिलाते हुए बोली- पागल … मैं तो न जाने कब से इस पल का इन्तजार कर रही थी और तुम अब बोल रहे हो.

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उसके मुँह से ये सब सुनते ही मानो मुझमें फिर से जान आ गई थी. हम दोनों के चेहरे खिल उठे थे. मन से एक बड़ा डर सा खत्म हो गया था. अब हम दोनों दो प्रेमी के जैसे एक दूसरे को आंखों ही आंखों में देख रहे थे.

मैंने उसकी तरफ प्यार से देखा, तो उसने भी आंखों से मुझे प्यार से निहारा. मेरी अब भी उसको अपनी बांहों में लेने की हिम्मत नहीं हो रही थी. एक तो हम दोनों इस वक्त खुले में थे और दूसरा मुझे ये भी लग रहा था कि कहीं हूर मेरी नीयत को प्यार की जगह वासना न समझे.

हालांकि उसने मेरे हाथ को पकड़ा और दबा दिया, तो मैंने भी उसके हाथ को उठा कर चूम लिया. उसने जल्दी से इधर उधर देख कर अपना हाथ छुड़ा लिया.

हम दोनों एक दूसरे से बात करने लगे और इस वक्त हम दोनों खुल कर बात न करने की जगह हिचक हिचक कर बात कर रहे थे. हमारी बातों में लाज का पुट समाया हुआ था.

अब हमारे बीच प्यार भरी बातें होने लगी थीं. कॉलेज के बाद हम दोनों फोन पर घंटों लगे रहते थे … देर रात तक बात करते रहते थे. हम दोनों में अकेले में मिलने की चाहत जवान होने लगी थी.

फिर दो महीने बात करने के बाद एक दिन मिलने के लिए क्लास बंक करके रविदास पार्क में मिलने गए. ऐसे तो इस बीच हम दोनों ने एक दूसरे को गले लग कर कई बार एक दूसरे की दिल की धड़कन को महसूस किया था. लेकिन तब भी अकेले में मिलने की चाहत हद से ज्यादा बढ़ चुकी थी.

रविदास पार्क में जाकर हम दोनों झाड़ियों के पीछे बैठकर बात करने लगे. बात करते करते हम लोग काफी रोमांटिक मूड में आ गए थे और काफी उत्तेजित हो गए थे. हमें मालूम ही नहीं चला कि कब हम दोनों एक दूसरे के करीब आ गए और हमारी सांस मिलने लगीं. अचानक से हम लोग एक दूसरे को चूमने लगे. वह कसमसाते हुए मेरा साथ देने लगी.

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हम लोग 10 मिनट तक एक दूसरे को चूमते रहे. ये चुम्बन इतना प्रगाड़ और लम्बा चला था कि अलग होने पर हम लोग हांफने लगे थे. हमारी आंखों में वासना के लाल डोरे तैरने लगे थे. लेकिन हूर ने लाज के मारे अपनी नजरें झुका ली थीं और वो मुझसे दूर हो गई.

कुछ देर यूं ही बैठे रहने के बाद हूर ने जाने का कहा. मैंने उसे रोकना चाहा, पर वह घर जाने के लिए तैयार होने लगी.

मैंने उसको हाथ पकड़ कर अपने ऊपर खींच लिया और वह मेरी गोद में आकर बैठ गई. उसके बाद हम लोग फिर एक दूसरे को किस करते रहे. वह सिसकारियां लेती रही. वो गर्म साँसें छोड़ते हुए ‘आह … अहा..’ करती रही.

मैंने उसकी कुर्ती के ऊपर से उसके मम्मों को खूब दबाया. वह मचलने लगी. मैंने उसकी कुर्ती के अन्दर हाथ डालकर उसके मम्मों को खूब मसला, दबाया. उसके बहुत मुलायम बूब्स थे.
वह मुझे मना करती रही लेकिन मैं अपने काम में लगा रहा. वो भी मना तो कर रही थी, पर मेरा साथ देती जा रही थी. उसे खुद भी मेरे साथ अच्छा लग रहा था.

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