चूत की आग में होश खोने की सेक्सी कहानी

नमस्कार दोस्तों! मेरा नाम सुनीता चौहान है, और मैं 27 साल की एक खूबसूरत शादी-शुदा औरत हू. आज मैं आप लोगों के साथ मेरे जीवन की एक सत्या कहानी शेर करने जेया रही हू. ये राइटिंग का मेरा पहला अनुभव है, और इसीलिए अगर कोई ग़लती हो तो मुझे बड़े दिल से माफ़ कर दीजिएगा.

कहानी शुरू करने से पहले मैं आपको अपने बारे में कुछ बताती हू. जैसा की आपने पढ़ा, मैं 27 साल की शादी-शुदा औरत हू. मेरा रंग गोरा, हाइट 5’5″ और फिगर 34-30-34 है. मैने म.आ. तक पढ़ाई की है, और सरकारी नौकरी कर रही हू. मेरे पति अजय 28 साल के है, और वो एक बॅंक में असिस्टेंट मॅनेजर है.

हमारी शादी को 5 साल हो चुके है, और अभी तक हमारे कोई बच्चे नही है. हमारी अरेंज मॅरेज थी, और हमारा वैवाहिक जीवन और सेक्स लाइफ काफ़ी खुशाल है. 5 साल के वैवाहिक जीवन में हम दोनो ने सेक्स को खूब एंजाय किया है.

हमने मिशनरी, डॉगी, लॉलिपोप, 69 और बहुत सारे और भी एक्सपेरिमेंट्स किए है, और जी भर के एंजाय किया है. हमने घर के हर कोने मे- बेडरूम, लिविंग रूम, बातरूम और किचन में भी सेक्स किया है.

यही नही हमने तो बस और ट्रेन में भी सेक्स का आनंद लिया है. कहने की ज़रूरत नही है, की इन 5 सालों में मेरे पातिदेव ने मेरी छूट और गांद के सारे धागे खोल दिए है.

तो अब मैं कहानी पर आती हू, जो की कुछ 3 साल पहले की घटना है. 2 साल के सुखी दंपत्या जीवन के बाद अचानक एक दिन हमारी ज़िंदगी में एक छ्होटा सा मुकाम आया. एक साल के लिए मेरा तबादला शहर से 150 केयेम डोर फूलपुर गाओं में हुआ था.

मैं अपने पति और उनके साथ अपनी खुशाल सेक्स लाइफ को छ्चोढ़ कर कही जाना नही चाहती थी, पर पातिदेव ने मुझे समझाया की साल भर की ही तो बात थी, और फिर वीकेंड्स में तो मैं शहर आ ही सकती थी उनके पास. और वो भी कभी-कभी गाओं आ जया करेंगे. एक साल के छ्होटे से समय के लिए सरकारी जॉब छ्चोढना उचित नही है.

मुझे भी उनकी बात सही लगी, और भरे मॅन के साथ मैने तबादले के लिए अनुमति दे दी. एक हफ्ते के बाद मैं फूलपुर के लिए चल पड़ी. मेरे साथ मेरे पति भी घर सेट्ल करवाने के लिए आए थे. 2 दिन रुक कर आचे से घर को सेट करने के बाद मेरे पति शहर वापस लौट गये.

कहने की बात नही है की उन दो दीनो में हमने काई बार सेक्स किया, क्यूंकी अब कम से कम एक हफ्ते तक वो मेरे पास नही थे, और मैं उनको पूरी तरह से भोग लेना चाहती थी.

पति के चले जाने के बाद मैने शाम को खाना बनाया और खाने के बाद बिस्तर में लेते हुए उनको याद करने लगी. मुझे आज उनके लंबे मोटे लंड की कमी खाल रही थी, और उसी को याद करते हुए ना-जाने कब मैने अपना पयज़ामा और पनटी उतार दी, और उंगली से अपनी छूट को मसालने लगी.

काफ़ी देर तक अपनी छूट को मसलने के बाद मुझे थोड़ी सी शांति महसूस हुई, और मैं नंगी ही सो गयी.

दूसरे दिन से मेरी जाय्निंग थी, तो मैं जल्दी तैयार हो कर पंचायत ऑफीस पहुँच गयी. वाहा पर मेरे जूनियर क्लर्क ओर पेवं ने मेरा स्वागत किया, और मैं जेया कर अपने कमरे में सेट्ल हो गयी. थोड़ी ही देर में वाहा एक स्कॉर्पियो गाड़ी आ कर रुकी.

मैने खिड़की से देखा तो एक बुज़ुर्ग और हटता-कटता सा नौजवान ऑफीस पर आए हुए थे. मेरे क्लर्क ने आ कर मुझसे कहा-

क्लर्क: सचिव मेडम, आपसे मिलने के लिए सरपंच साहब और उनके बेटे आए है.

मैने उनको कमरे में भेजने को बोला. सरपंच साहब काफ़ी सरल और सज्जन इंसान थे. आते ही उन्होने कहा-

सरपंच: आपका फूलपुर में स्वागत है, सचिव मेडम. ये मेरा बेटा आनंद है. आपको कभी भी कुछ चीज़ की आवश्यकता हो तो बेझीजक हमे कह दीजिएगा.

मैने आभरवाश कहा: ज़रूर सरपंच जी.

मैने देखा आनंद भी उसके पिता की तरह सरल और सज्जन व्यक्ति था. ऑफीस से लौटने के बाद उस रात फिर मैने अपने पति को याद करते हुए उंगली से छूट को मसाज दिया. फिर तो ये लगभग हर रोज का क्रम हो गया. वीकडेस में हर रात मैं छूट को मसाज करती, और वीकेंड में पति से मिल के खूब छुड़ा लेती.

पर उंगली में असली लंड वाला मज़ा कहा? इसलिए मेरे सेक्स की भूख अब वीकडेस में भी मुझे परेशन करने लगी. ना चाहते हुए भी मैं कभी-कभी गाओं के मर्दों पर नज़र मार लेती, और सोचती की शायद यहा मेरे शरीर की भूख को मिटाने वाला कोई मिल जाए.

इसी बीच एक दिन सवेरे आनंद मेरे ऑफीस पर आ पहुँचा. अपने साथ वो थर्मस में भर के गन्ने का जूस लाया था.

आते ही उसने बोला: लीजिए सचिव साहेबा, ये हमारे खेत के गन्ने का जूस है. आज पहली फसल कटी तो सोचा आपके लिए जूस ले चालू.

उसके इस प्यारे से जेस्चर से मैं काफ़ी खुश हुई, और हम सब ने गन्ने का मीठा जूस एंजाय किया.

मैने कहा: जूस काफ़ी अछा है, आनंद.

तो उसने कहा: मेडम, ये तो सवेरे निकाला हुआ जूस था, कभी खेत पर आईएगा, आपको फ्रेश जूस पिलौँगा.

मैने कहा: ठीक है, कल दोपहर ही आती हू. पर मैने आपका खेत देखा नही.

आनंद ने कहा: मैं खुद लेने आ जौंगा आपको कल दोपहर में.

दूसरे दिन करीब 2 बजे के आस-पास वो अपनी स्कॉर्पियो कार ले कर मुझे लेने आ गया, और हम दोनो उसके खेत के लिए निकल पड़े. उसका खेत बहुत बड़ा था और चारो तरफ गन्ने लगे हुए थे. गर्मियों का मौस्म था, तो खेत में दोपहर को कोई नही था. खेत के बीच में एक छ्होटा सा कमरा बना हुआ था और उसी के बाहर गन्ने के जूस की मशीन लगी हुई थी.

आनंद ने 3-4 बढ़िया वाले गन्ने निकाले, और मुझे लेकर उस कमरे के पास आ गया. उसने मशीन को अपने हाथो से चलते हुए गन्ने का जूस निकाला. जब वो मशीन चला रहा था, तो उसकी भारी और क़ास्सी हुई बाजू देखा कर में चकित हो गयी. जूस काफ़ी मीठा था.

जूस पीने के बाद वो बोला: मेडम, आपको अगर गर्मी लग रही है तो अंदर कमरे में पंखा चला डू?

मैने कहा: हा, ऐसा ही करते है.

हम दोनो कमरे के अंदर आए. कमरे में एक चारपाई थी, और एक छ्होटी सी और मशीन थी. उसने पंखा चला दिया, और मैं चारपाई पर जेया कर बैठी.

मैने पूछा: ये क्या मशीन है?

उस पर वो तोड़ा शरमाते हुए बोला: मेडम, ये देसी ताड़ी की मशीन है, गन्ने से बनती है. हम बेचते नही है, सिर्फ़ खुद के लिए बनाते है, और कभी-कभी पीते है.

उसको शरमाता देख कर मैं हस्स पड़ी. मेरी हस्सी देख कर वो तोड़ा रिलॅक्स हुआ, और मुझसे पूछा-

आनंद: आप तो अँग्रेज़ी ही पीटी होंगी. कभी ताड़ी ट्राइ करनी हो तो ज़रूर कहना.

मैने कहा: आज दोपहर का टाइम है, तो मौका अछा है. चलो अभी ट्राइ करती हू.

उसने तुरंत ही कमरे में रखे छ्होटे से फ्रिड्ज से एक बॉटल निकली, और उसमे से थोड़ी सी ताड़ी ग्लास में निकाल कर मुझे दी. उसका स्वाद तोड़ा सा ऑक्वर्ड था, पर गले से नीचे उतरने के बाद मेरे मॅन को अजीब सी शांति मिलने लगी, और थोड़ी सी आँखे भी भारी होने लगी. मैं थोड़ी सी सुस्टाई, और पता नही वो ताड़ी का असर था या और कुछ, पर मैने उससे कहा-

मैं: यहा आ कर मेरे पास बैठो.

वो तोड़ा हिचकिचाया, पर मेरी बात मान कर वो चारपाई के कोने पर आ बैठा. मैं थोड़ी सी और सुस्टाई और अचानक ही उसकी गोद में सर रख कर लेट गयी. ये उसके लिए कुछ शॉकिंग था, पर वो कैसे भी वही बैठा रहा.

मैने कहा: क्या तुम मेरे सर पर हाथ फेर सकते हो?

उसने मेरी बात मानते हुए मेरे सर पर हाथ फिरना शुरू किया, और मैने आँखें मूंद ली. ताड़ी असर करने लगी थी, और थोड़ी ही देर में मैने उसका हाथ पकड़ कर सर से कंधे पर रखवा दिया. अब वो मेरे कंधे सहला रहा था.

यहा से बात को वही आयेज ले गया और कुछ ही देर में उसके हाथ धीरे-धीरे मेरे कंधे से मेरे स्टान्नो पर जेया पहुचे. मेरी सारी के पल्लू को साइड करके वो ब्लाउस के उपर से ही मेरे स्टान्नो को सहलाने लगा.

इसके आयेज क्या हुआ, वो आपको अगले पार्ट में पता चलेगा. आपको मेरी ये कहानी कैसी लगी, ये मुझे एमाइल कर के ज़रूर बताना. मेरा एमाइल अड्रेस है

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