चुदाई पे चली सगाई की तलवार

हेलो दोस्तों, आप सब कैसे हो? काफ़ी समय के बाद फिरसे नेक्स्ट पार्ट आ रहा है. आपने पिछले पार्ट में पढ़ा की कैसे मेरे चाचा का लड़का आयुष मेरी बेहन सुष्मिता को पहले गफ़ बनता है. फिर अपने दोस्तों से मिलता है, और कैसे कार के अंदर ही उसकी चुदाई करता है.

दोस्तों आज-कल की सकचाई है, आप भले माने या ना माने, लेकिन आज-कल किसी की भी बेहन, बेटी, मा, कोई भी हो, हम उनके उपर विश्वास नही कर सकते की उनका किसी के साथ कोई चक्कर नही होगा.

ये बातें भले ही आप लोगों को अजीब लगे. लेकिन सकचाई यही है की आज सभी किसी ना किसी बाहर वाले से चुदाई करवाती ही है. और सब का अपना अलग रूप होता ही है समझ से हॅट के. वही असली रूप जो दुनिया के सामने मेरी बेहन ने नही दिखाया है, वो मैं इस कहानी से आपको बता रहा हू.

अब आयेज बढ़ने से पहले अगर आपको मेरी कहानी पसंद आती है, तो आप अपना प्यार मुझे दे सकते है. मेरी ए-मैल ईद

श्रीस्टीसिंघ1559@गमाल.कॉम

पे आप मेसेज कर सकते है. इससे कहानी लिखने में मोटिवेशन मिलता है. अब कहानी पे चलते है.

आयुष दीदी को लगभग रोज़ ही कार के अंदर अपने दोस्तों के सामने छोड़ने लगा था. उसका वो लंबा लंड जो की मैने भी देखा है, मेरी प्यारी दीदी की छूट को रोज़ ही फाड़ रहा था. आयुष के दोस्त ये सब कुछ देख कर एंजाय भी करते थे, और साथ ही फोटो लेना और वीडियो भी बनाते थे.

ऐसे ही ये वाला सिलसिला लगातार चलता रहा. मेरी दीदी कोचैंग के बहाने घर से जाती, और आयुष से चुदाई करवा के घर चली आती थी. अब मेरी दीदी की शादी की बात चलने लगी थी. दीदी जवान हो गयी थी, तो पापा को दीदी की शादी की चिंता होने लगी थी. ये बात जब आयुष को पता चली तो वो उसको बोला-

आयुष: यार सुष्मिता, तू चली जाएगी तो कैसे मॅन लगेगा मेरा? फिर किसकी छूट रोज़ ख़ौँगा? किसका पानी पियुंगा? तुम्हारी छूट की आदत पद गयी है. चलो हम लोग भाग करके शादी कर लेते है.

सुष्मिता: देखो आयुष, तुम मेरे दोस्त हो, मेरे ब्फ हो, और मेरी जान भी हो. लेकिन तुम मेरे चाचा के लड़के हो. इसलिए हम घर के अंदर ही शादी नही कर सकते.

ये सुन कर के आयुष उदास रहने लगा. वो अभी भी दीदी को आचे से छोड़ता था, लेकिन शायद उसको अब दर्र लगने लगा था की सुष्मिता शायद जल्दी ही उसको छ्चोढ़ के जाने वाली थी. फिर एक दिन आयुष ने दीदी से बोला-

आयुष: एक चीज़ मांगू तो डोगी?

दीदी: क्या बोलो?

आयुष: तुम मेरे से शादी ऐसे सब के सामने नही कर सकती. लेकिन हम च्छूप के तो कर ही सकते है ना? बिना किसी को बताए?

मेरी दीदी इतना आयुष से प्यार करने लगी थी, की वो राज़ी हो गयी आयुष से शादी करने के लिए. अब आयुष ने प्लान बनाना चालू किया, और मौके का केवल इंतेज़ार था आयुष को. आयुष ने अपने दोस्तों से बात की और सारी बातें बताई, और कोई सल्यूशन माँगा की शादी का प्रबंध कैसे किया जाए.

तब तक पापा को एक अची फॅमिली का लड़का भी मिल गया, और उसकी गवर्नमेंट जॉब भी थी, तो दीदी हा भी कर दी थी शादी के लिए.

आयुष ये सुन कर के काफ़ी उदास रहने लगा था. पिछले काई दिन से दीदी को छोड़ा भी नही था. एक तरह का कोई पेशेंट कोमा में चला जाता है, और उसको समझ में नही आता है क्या करना है, क्या नही. वैसा ही हाल हो गया था आयुष का.

उसको समझ में नही आ रहा था की सुष्मिता की शादी फिक्स हो गयी थी, तो क्या किया जाए. उसको खूब छोड़-छोड़ करके जब तक शादी नही होती तब तक मज़ा लिया जाए. या अभी से ही सुष्मिता से दूरी बना ली जाए, ताकि उसके जाने के बाद ज़्यादा तकलीफ़ ना हो.

ऐसे ही वो कभी-कभी मिल लेता था. दीदी का कोचैंग भी ख़तम हो गयी थी, तो दीदी को अब रोज़-रोज़ बाहर जाने का मौका भी नही मिलता था. वो घर पे ही रहती थी. अब दीदी की शादी सेट होने के बाद मेरी दीदी को लड़के वाले देखने आए. उनको वो पसंद आ गयी, क्यूंकी है ही इतनी खूबसूरत मेरी दीदी.

फिर एंगेज्मेंट का दिन रखा गया, और लगभग 13 दिन के बाद ही एंगेज्मेंट का दिन था. इसलिए टाइम नही था. शॉपिंग भी करना था, और दीदी के लिए सारी चीज़ें मार्केट से ख़रीदनी भी थी.

पापा ने मुझे बोल दिया की अपनी दीदी को शॉपिंग करवा देना. मैं फिर 2 दिन ले गया मार्केट, जहा बहुत सारी खरीदारी हुई, और अभी कुछ बाकी भी थी.

फिर मेरी दीदी बोली: भाई अब जो शॉपिंग है, वो मैं अकेले भी कर लूँगी. तुम परेशन मत हो.

मुझे कुछ डाउट लगा की दीदी ऐसा क्यूँ बोल रही थी. तब तक मुझे भी आयुष के बारे में बहुत कुछ पता चल गया था, की दीदी और आयुष का चक्कर था, और दोनो बहुत कुछ किए भी थे.

तब मैं समझ गया की कही ये दोनो का प्लान तो नही था, इसलिए मैने एक वाय्स रेकॉर्डर डिवाइस खरीद के दीदी के पर्स में डाल दिया. क्यूंकी दीदी कही भी जाती थी, तो पर्स ले करके ही जाती थी, और उससे मुझे काफ़ी सहूलियत होती, ये जानने में की दीदी कहा गयी थी और क्या-क्या की थी.

फिर अगले दिन सुबह में ही दीदी रेडी होने लगी मार्केट जाने के लिए. क्यूंकी दीदी ने मुझे बोल दिया था की तुम क्या करने जाओगे मैने अब छ्होटा-छ्होटा समान खरीदना है, तो मैं खुद ही खरीद लूँगी. तो मैने आज वो वाय्स रेकॉर्डर चार्ज करके दीदी के पर्स में डाल दिया.

दीदी को कुछ भी पता नही था इसके बारे में. वो सुबह में 9 बजे घर से निकल गयी, और जो भी शॉपिंग करनी थी, वो करके शाम में 5 बजे वापस घर को लौटी. दीदी के आते ही जैसे ही वो आने के बाद वॉशरूम में गयी, मैं फटाफट से दीदी के रूम में गया. फिर वाहा पर्स से रेकोदर निकाल के ले आया और देखा तो रेकॉर्डर अभी भी चालू ही था. यानी उसका ड्यूरेशन काफ़ी अछा था.

अब मैं एग्ज़ाइटेड था की आज दीदी ने क्या-क्या किया था. ये सब जानने के लिए मैं बहुत ही एग्ज़ाइटेड हुए जेया रहा था. मुझे पता है की आपको भी बहुत ही एग्ज़ाइट्मेंट है की आयेज क्या हुआ. सुष्मिता ने आज क्या गुल खिलाए होंगे. लेकिन इससे आयेज का अब अगले एपिसोड में.

अगर कहानी अची लगी हो, या आपके साथ का कोई वाक़या हुआ हो, जो मुझसे शेर करना चाहते हो, तो मुझे एमाइल ज़रूर करे.

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