चुदाई की कहानी जिसमे मा चुदी 3 मर्दों से

हेलो दोस्तों, मैं राहुल. आज मैं मेरी कहानी मम्मी की छूट और पड़ोसी का लंड का पार्ट 18 लेके आ गया हू, आप सभी की रिक्वेस्ट पर. जिन्होने मेरी स्टोरी के पिछले पार्ट्स नही पढ़े है, वो पिछले पार्ट्स पढ़ कर इसको पढ़े. ताकि आपको ठीक से मज़ा आए.

आपको तो पता ही है मेरी मा के बारे में. पर अब वो और भी ज़्यादा गड्राई हुई है. मा शीला की फिगर अब 40ड्ड-36-42 का हो गया है, इतने सारे लोड ले ले कर. इस फिगर साइज़ से आपको अंदाज़ा लग रहा होगा, की मा जब निकलती होगी, तब ना-जाने कितनो के लंड खड़े कर देती होगी.

आज मैं आपको बतौँगा की कैसे एक शादी में जाते समय बस में और फिर शादी में मा की चुदाई हुई. तो दोस्तों ज़्यादा समय ना लेते हुए मैं स्टोरी पे आता हू.

हमारे एक डोर के रिस्त्ेदार की लड़की की शादी थी. तो उसमे जाना था हमे. हमारे घर से करीब 100 केयेम की दूरी पर होगा उनका घर. तो पापा तो ऑफीस के कामो में बाहर गये हुए थे, इसलिए मा और मुझे ही जाना पड़ा.

मैं तैयार हो कर सब बाग वग़ैरा हॉल में ला कर सोफे पर बैठा था, और मा के आने का इंतेज़ार करने लगा.

मों नहा के तैयार होने अपने रूम में गयी थी. फिर जैसे ही मों बाहर आई रूम से, तो मैं मों को देख के एक-दूं हक्का-बक्का रह गया. क्या लग रही थी मों, एक-दूं मस्त छीनाल रांड़ की तरह.

मों ने एक पिंक कलर की सिल्क सारी पहनी थी. उसमे एक वाइट सिल्क ब्लाउस, जो की पीछे से बॅकलेस और स्लीव्ले था. और ब्लाउस के आयेज डीप कट था, जिसमे से मों के 38″ के चूचे थोड़े-थोड़े बाहर उभर के आ रहे थे.

सेमी ट्रॅन्स्परेंट सारी थी, इसलिए नेवेल भी आचे से दिख रही थी, और गांद का उभार भी मस्त लग रहा था.

मे: मा आज तो लग रहा है, की तुम बस में ही किसी से चुड जाओगी. और वाहा शादी में तो पक्का चूड़ोगी, मुझे तो पता है.

मा: चुप कर बदमाश. वैसे बस में कभी नही चूड़ी हू मैं. काश कोई तगड़ा मर्द मिल जाता आज तो मज़ा आ जाता.

फिर हम दोनो ऑटो में बस स्टॅंड पर आ जाते हैं. हमे जिस बस में जाना था, वो 10 मिनिट बाद आने वाली थी. बस स्टॅंड में काफ़ी सारे मर्द सिर्फ़ मों को घूरे जेया रहे थे. उसमे से एक मर्द था इकबाल, जो की पेशे से कसाई था.

वो भी बस स्टॅंड में था उस दिन बाग लिए. वो भी मों को घूर के अपना लूँगी में लोड्‍ा सेट करने लगा हुआ था. 10 मिनिट बाद बस आई तो देखा की बहुत ही ज़्यादा भीड़ थी. मों और मैं चढ़ने की कोशिश किए जैसे-तैसे और पीछे के दरवाज़े से बस के अंदर आ गये. पर बहुत भीड़ थी इसलिए मैं और मों थोड़ी डोर हो गये.

तभी मैने देखा की इकबाल मों के पीछे ही खड़ा था, और मैं मों के कुछ एक-दो आदमी छ्चोढ़ के आयेज खड़ा था. बहुत ज़्यादा भीड़ होने के कारण ज़्यादा जगह भी नही थी बस में. मैं इकबाल को मों के पीछे देख के समझ गया था, आज मों की बस में चुदाई होने वाली थी.

फिर मों को मैने फोन में मेसेज किया और बोला की “मों आपके पीछे एक कसाई खड़ा है. इकबाल नाम है उसका. आपकी बस में चूड़ने की इक्चा ये आज पूरी कर देगा.”

मों ने मेसेज पढ़ने के बाद मुझे देखा, और स्माइल करने लगी. मैं समझ गया था, की आज मेरी मा इकबाल के लंड की रंडी बन के रहेगी.

फिर मैने देखा की इकबाल मों की नंगी पीठ देख कर लोड्‍ा सहला रहा था, और अब धीरे-धीरे वो मा के बदन को सूंघने लगा, जिससे उसकी हवस भारी गरम साँसे मेरी मा की पीठ को चूम रही थी. और साथ ही साथ वो मा को भी गरम करने लगी थी.

इकबाल अब मा की बगल भी सूंघने लगा. मा ये सब से थोड़ी गरम होने लगी थी. अब इकबाल ने थोड़ी हिम्मत करके अपना लोड्‍ा मा की गांद से सत्ता के रगड़ना चालू किया. पर मा कुछ नही बोली. मा चुप-छाप मज़े लेने लगी, और उसके लोड को महसूस करने लगी.

इससे इकबाल की हिम्मत बढ़ गयी. वो अब पीठ चूमने और चाटने लगा, और लोड को रगड़ने लगा आचे से. अब भी मों कुछ नही बोली उसको.

फिर मों ने पीछे मूड के उसको देखा. इकबाल तोड़ा दर्रा हुआ लगता है, पर मों उसको देख के स्माइल कर देती है.

तो अब इकबाल समझ जाता है, की आज उसके हाथ एक मस्त रंडी लगी थी. अब वो बेखौफ़ हो कर मों के पेट पर हाथ रख के मसल देता है, और गांद में लोड्‍ा बाहर से ही रगड़ने लगता है. वो मों के कान में कहता है-

इकबाल: क्या मस्त माल है तू साली. पराए मर्द के लंड से रगड़वाने में तुझे बहुत मज़ा आ रहा है ना रंडी? नाम क्या ये तेरा?

मा: जी शीला नाम है, और आपका नाम क्या है जी?

इकबाल: इकबाल नाम है मेरा. साली क्या मस्त रंडी है तू. आज तो तेरे को मैं नही छ्चोधुंगा.

अब इकबाल मों के चूचे दबाते हुए नेक किस करता है. मों मदहोशी से आँखें बंद करने लगती है, क्यूंकी बस थी, तो चिल्ला नही सकती थी. ऐसे ही करने के बाद इकबाल मों को बोलता है-
इकबाल: साली पलट के मेरी तरफ मूह कर.

मा इकबाल का इशारा समझ जाती है, और उसकी तरफ घूम जाती है. इकबाल को मों की नेवेल और ओपन चूचे दिखाई पड़ते है, जिससे वो और भी हवासी हो जाता है. मों अब इकबाल के लोड को हाथ में पकड़ के पंत के उपर से ही सहलाने लगती है.

इकबाल: मदारचोड़ रंडी, देख रही है ना कितना बड़ा लंड है मेरा? साली तड़प रही है क्या इसको लेने को?

मा: हा बहुत बड़ा है तुम्हारा. इसको लेने के लिए ही तो पकड़ा है मैने.

इकबाल मा की बातें सुन के और गरम हो जाता है. पर बस में कोई देख ना ले, इसलिए वो कुछ नही करता है, और मों को फिरसे घुमा के उनकी गांद में लोड्‍ा रग़ाद रहा होता है.

ऐसे ही कुछ ढाई घंटे बाद बस एक-दूं खाली होने लगती है. सारे लोग उतार जाते है बस में से, सिर्फ़ मैं, मा और इकबाल ही रहते है, और बस का ड्राइवर आंड उसका हेलपर.

कुछ देर बाद बस एक जंगल के रास्ते में जाने लगती है. तभी मैं देखता हू, की इकबाल आके बस के ड्राइवर को कुछ बोलता है, और वो सब मुस्कराने लगते है. फिर पीछे मूड कर वो मा को देखते है. मा भी उन्हे स्माइल देती है. फिर इकबाल आ कर मों को बोलता है-

इकबाल: शीला मेरी जान, तेरी चुदाई का सारा इंतेज़ां कर लिया है मैने. अब ये बस जंगल में थोड़ी देर रुकेगी, वाहा होगी तेरी चुदाई. पर एक और चीज़, तुझे ये ड्राइवर और कोंडुक्तेर को भी देनी होगी. बोल संभाल लेगी ना साली हम तीनो को?

मा: ओक, कोई बात नही. मुझे तो तुमसे ज़्यादा मज़ा आएगा, और वैसे भी ये ड्राइवर और हेलपर का लंड छ्होटा ही होगा तुमसे.

इकबाल: हा मेरी जान, आज तो तेरी मस्त चुदाई होगी. एक बात बता, ये तेरा बेटा है यहा, कोई प्राब्लम तो नही होगी ना?

मा: अर्रे कुछ प्राब्लम नही होगी, चिंता मत करो. वैसे भी ये सोया हुआ है.

मैं सोने की आक्टिंग करने लगता हू तभी.

इकबाल: तो फिर कोई प्राब्लम नही, सही है.

फिर बस जंगल के अंदर एक सुनसान जगह पर रुक जाती है. ड्राइवर और हेलपर नीचे उतार जाते है, और अपने सारे कपड़े निकालने लगते है, और एक कार्पेट नीचे बिछा लेते है. फिर इकबाल और मों भी नीचे उतार आते है.

मों जैसे ही बस से नीचे उतरती है, वैसे ये तीनो मर्द मों को देख के कुत्टो की तरह लार टपकाने लगते है. इकबाल अब अपने कपड़े निकाल लेता है, और सभी मर्द नंगे हो जाते है.मों के आयेज अब तीनो मर्द अपने मोटे काले लंड लिए खड़े थे.

इकबाल जिसका लंड सबसे बड़ा और मोटा था करीब 10 इंच का, उसके बाद था हेलपर का 8 इंच का आंड ड्राइवर का था 7.5 इंच के करीब था. सभी अपने लोड सहलाने लगे.

ड्राइवर: सिर जी, क्या मस्त रॅंड हाथ लगी है. आज बहुत मस्त लगेगा इसको छोड़ कर.

हेलपर: हा, हमने ऐसी मस्त माल को कभी नही छोड़ा.

इकबाल: हा सालों, मज़े लो आचे से आज.

मा स्माइल करने लगी, और आके इकबाल के लोड को सहलाने लगी. इकबाल अब देर ना करते हुए मों की सारी निकाल फेंकता है, और ब्लाउस के उपर से ही चूचियों को मसालने लगता है. मों गरम हो कर उसके लोड को ज़ोर से हिलने लगती है.

ये सब देख ड्राइवर आंड हेलपर भी मों के पास आते है. ड्राइवर मा का पेटिकोट निकाल देता है, और हेलपर पनटी खोल देता है. इकबाल अब एक ही झटके में ब्रा और ब्लाउस निकाल देता है.

3 भूखे मर्दों के बीच मेरी रंडी मा अकेली थी. उसके गोरे बदन को उनके काले हाथो ने घेर लिया था, और सहला रहे थे. इकबाल मों को चूमने लगता है. मों भी उसका पूरा साथ देते हुए उसके साथ मस्त किस करने लगी.

फिर ड्राइवर आया पास, और मों की गांद पर थप्पड़ मारने लगा. फिर हेलपर भी आके ड्राइवर का साथ देने लगा.

मों: अनह हाए मेरी गांद सूजा दोगे लगता है तुम दोनो. रूको, पहले तुम्हारे मूह से थूक तो चूसने दो मुझे दरिंदो.

ड्राइवर कुछ बोल ही रहा होता है की मों उसको पकड़ के चूमने लगती है उंह करके. फिर मों हेलपर को किस करती है. अब तीनो एक सेमी सर्कल करके मों को घुटनो पर बिता देते है, और लोड्‍ा चुसवाने लगते है.

मों पहले इकबाल का लंड पकड़ती है, और उसको देखते हुए लोड को मूह में लेके मस्त चूसने लगती है. फिर वो ड्राइवर का, और फिर हेलपर का लंड चूस्टी है. ऐसे ही बारी-बारी करके मों सब का लंड चूस रही थी.

इकबाल: मदारचोड़ रॅंड शीला, आज तक मेरा लंड किसी ने ऐसे नही चूसा है. साली कहा थी तू इतने दीनो से? मुझे पहले क्यूँ नही मिली?

ड्राइवर: सही कहा सिर जी, हमने भी कभी ऐसी रंडी नही देखी, जो इतना मस्त लंड चूस्टी हो.

हेलपर: हा भैया, सही कहा आपने. मस्त रॅंड है साली.

मों तीनो की बातें सुन के और खुश हो जाती है, और ज़ोर-ज़ोर से लोड को अंदर लेके अपनी अदाए दिखाने लगती है. अब इकबाल मों के बाल पकड़ के मूह को ज़ोर-ज़ोर से छोड़ने लगता है.

मों: उघह अनह आज तक ऐसा मस्त लंड नही मिला मुझे. उंह क्या मस्त हो तुम तीनो.

इकबाल अब मों को खड़ा कर देता है, और किस करते हुए मों को घुमा लेता है, और चूचियों को हाथो में ले लेता है. मेरी मा के 40ड्ड की मोटी चूचियाँ अब इकबाल के काले हाथो की क़ैद में थी. वो एक दूध वाले की तरह मा की चूचियाँ मसालने लगा.

इकबाल: साली दुधारू रॅंड, क्या चूची है तेरी. मदारचोड़ कितना दूध है इसमे लगता है. पुर मोहल्ले के लोगों को पिलाने से भी ख़तम नही होगा.

ड्राइवर इतने में मों के पास आता है, और बालों को पकड़ के मा के होंठो पर अपने होंठ रख देता है. मा समझ जाती है, और ड्राइवर का लोड्‍ा सहलाते हुए उसको मस्त फ्रेंच किस करने लगती है.

ड्राइवर: उंह मेरी जान शीला, रंडी, मदारचोड़, तेरे रसीले होंठो का नशा ही अलग है मेरी जान अनह.

अब इकबाल बैठ जाता है एक चेर बस में से फोल्डाब्ले वाली निकाल के, और मों को इशारे से पास बुलाता है. फिर वो मा को उसके टवर जैसे खड़े काले लंड पर बैठने को बोलता है.

मेरी रंडी मा उसके इशारे समझ जाती है, और उसके लोड को हाथ में पकड़ के छूट में सेट करके उसकी गोदी में बैठ जाती है. फिर मा आँखें बंद करके मज़ा लेने लगती है.

मा: अनह इकबाल, तुम्हारा मोटा लोड्‍ा तो मेरी छूट चियर के रख देगा आज.

इकबाल: मदारचोड़ रॅंड, बस में बहुत उछाल रही थी ना, अब मेरे लोड पे उछाल साली अनह, छीनाल, कुटिया.

मा जब उछाल रही होती है इकबाल के लोड पे, तो उसकी चूचियाँ उछालने लगती है. ये सब देख कर ड्राइवर और हेलपर मा के पास आते है, और दोनो एक-एक चूची मूह में लेके चूसने लगते है. मा भी मस्त रंडी की तरह उनके सर पकड़ के चूचियों में दबोच के उन्हे डूडू पिलाने लगती है.

मा: अँह इकबाल, क्या मस्त छोड़ रहे हो तुम. टुमारा लोड्‍ा मेरी बच्चेड़नी तक जेया रहा है अनह. ड्राइवर जी, हेलपर जी, मेरे डूडू पी कर कैसा लग रहा है आपको?

ड्राइवर: शीला मेरी रानी, तेरे जैसी चूचियाँ मैने कभी नही चूसी है. साली तू क्या मस्त मुलायम माल है.

हेलपर: मॅन तो करता है इनको खा जौ मेरी रंडी जान शीला.

इकबाल: मदारचोड़, क्या छूट है तेरी. मेरे लोड को जाकड़ के मस्त मज़ा दे रही है जानू अनह.

मा: अनह एस, ऐसे ही मुझे छोड़ो तुम तीनो. क्या मस्त मज़ा आ रहा है मुझे. तुम तीनो की रंडी हू मैं अनह फक अनह.

अब इकबाल वाहा से उठ जाता है, और नीचे लेट जाता है. वो मों को अपने उपर आने को बोलता है, और ड्राइवर मों के पीछे आता है. फिर इकबाल मों की छूट में लंड डालता है, और ड्राइवर गांद में, और हेलपर मों के मूह के सामने लोड्‍ा पकड़े खड़ा हो जाता है.

मेरी कामुक मों अभी दो मर्दों के बीच सॅंडविच बनी रहती है, और उसके सामने हेलपर का लोड्‍ा होता है. इधर इकबाल और ड्राइवर के झटको से वो आयेज होती है, और उसका मूह सीधे हेलपर के लोड को लपक के अंदर लेता है.

दोस्तों क्या मस्त नज़ारा था वो. तीनो मिल कर क्या मस्त छोड़ रहे थे मेरी रंडी मा शीला को. मैं इधर अपना लंड हिला रहा था ये सब सीन देख कर.

ऐसे कुछ टाइम छोड़ने के बाद उन्होने मों को घोड़ी बना दिया, और हेलपर मों को छोड़ने लगा छूट में लोड्‍ा डाल के. ड्राइवर अब मूह में लोड्‍ा पेल रहा था, और इकबाल नीचे लेट के मों की चूचियों को चूस रहा था.

मों: आहह, हाए मॅर गयी. तुम तीनो जानवर आज मेरी जवानी आचे से निचोढ़ के मुझे लूट लोगे लगता है.

इकबाल: मेरी रॅंड, अभी तो और चुदाई बाकी है. आयेज देख होता है क्या.

ऐसे कुछ टाइम छोड़ने के बाद इकबाल मों को हवा में उठा लेता है बाहों में भर के, आंड ड्राइवर आके पीछे लंड डाल देता है. फिर वो दोनो मों को उछाल-उछाल के छोड़ने लगते है मस्ती से.

मेरी रंडी मा की चीख पुर जंगल में सुनाई दे रही होती है. जंगल में आज मंगल हो रहा था. मेरी मा की जवानी जंगल में लूट रही थी मेरे ही सामने, वो भी 3 अंजान मर्दों के लोडो से.

अब बहुत घमासान चुदाई चल रही थी. सभी लोग पसीने से नहा चुके थे, और बहुत समय से चूड़ने के कारण अब सब झड़ने वाले थे. और मैं भी झड़ने वाला था. मेरे से रहा नही गया, तो मैं बाहर चला गया जहा चुदाई चल रही थी.

मुझे देख के सब दर्र गये तोड़ा, और हॅट गये. पर इकबाल छोड़ने में लगा था, और मा भी उसके लोड पर उछाल रही थी.

मे: अर्रे रुक क्यूँ गये, चलो-चलो आचे से छोड़ो.

मा: उठ गया बेटा? देख आज मेरी कैसे चुदाई कर रहे है ये तीनो. ज़ालिमो, अर्रे दररो मत, मेरा बेटा भी मेरी लेता है.

इकबाल: साली तू तो बहुत बड़ी छीनाल निकली मदारचोड़. अपने ही बेटे से चुड़वति है. उपर से उसके सामने हम से चुड रही है.

और तेरा बेटा भी बड़ा मदारचोड़ है.

मे: अर्रे इकबाल अंकल, अब मा ऐसी हो तो बेटा क्या करे?

इकबाल: हा बेटा, सही कहा. आज तू भी अपनी मलाई मार ले इस्पे, वैसे भी हम सब झड़ने वाले है.

ड्राइवर: आओ बेटा, तुम्हारी ही रंडी है साली.

हेलपर: हा भाई, आजा.

मैं चला गया, और फिर हम सब ने मा को घेर लिया. फिर हम अपने-अपने लोड हिलने लगे. मा मेरे लोड को मूह में लेके चूसने लगी, और बाकियों का बारी-बारी हाथ में लेके हिला रही थी.

मैं मज़े ले रहा था मस्त, और मेरा निकालने वाला था. अभी मों ज़ुबान निकाल के बैठ गयी, और फिर भूखी कुटिया की तरह हम सब को भीख माँगने लगी मलाई के लिए. फिर हम चार मर्दों ने उसको मलाई से भिगो दिया, नहला दिया उसको.

फिर मेरी रॅंड मा एक अची छीनाल की तरह सारी मलाई गतक गयी, और सब के लोड को सॉफ कर दिया चाट-चाट के. उसके बाद हम सब ने खुद को सॉफ किया, और बस में जाने लगे. और मा ने अपनी सारी वग़ैरा पहन ली.

अब हम सब बस में बौत गये. इकबाल आया, और मा के पास बैठा, ड्राइवर ने गाड़ी स्टार्ट की, और हम जंगल से निकल गये.

हेलपर: थॅंक्स सिर जी, और शीला जान बहुत मज़ा आया तुम्हारे साथ. आज के बाद हमारी बस में तुम्हारा जाना-आना सब फ्री. डार्लिंग कब लौउटोगी वाहा से बताना हमे.

मा: अर्रे शुक्रिया जी, मुझे बहुत-बहुत मज़ा आया.

अब हमने नंबर शेर किए हेलपर के साथ. बस टाइमिंग सब पता करेंगे, और फिर आएँगे वाहा से बोला उनको.

इकबाल मों को चूमते हुए पूछता है: जान शीला कहा जेया रही है वैसे तू?

मा बोलती है-

मा: वो इधर एक गाओं है. वाहा मेरे एक रिस्त्ेदार की बेटी की शादी है. वाहा जेया रहे है.

इकबाल: कही वो पांडे ही की बेटी तो नही है ना?

मा: अर्रे हा, तुम्हे कैसे पता?

इकबाल: अर्रे मैं भी वाहा पे जेया रहा हू. मुझे बुलाया है. मैं कसाई हू ना, तो वाहा की पार्टी में लगने वाला सारा मटन मुझे ही काटना है.

मा: अर्रे वाह, ऐसा है क्या?

इकबाल: ये तो मस्त हो गया साली. वाहा शादी में भी छोड़ूँगा तुझे मेरी डार्लिंग.

मे: वाह इकबाल अंकल, वाहा तो मेरी मौसी भी आएगी. आपको तो दोनो माल मिलेंगी. मज़े होने वाले हैं आपके.

मा: हा सही कहा बेटा, सीमा भी तो आएगी वाहा. मैं तो भूल ही गयी थी. उसको भी बड़ा अछा लगेगा. काई दीनो से हम दोनो बहने साथ नही चूड़ी है.

इकबाल: वाह रे मदारचोड़ रंडी. तेरी बेहन भी एक छीनाल रॅंड है क्या साली? रंडी-खाना ही खोल लो तुम दोनो.

मा: अर्रे ऐसे धनदा नही करते हम. बस तगड़े मर्दों से चुड्ती है, वो भी मज़े के लिए.

इकबाल: अर्रे हा मेरी जान, गुस्सा मत हो. तेरे साथ तेरी बेहन का स्वाद भी ले लेंगे शादी में.

फिर हम वो शादी वाले गाओं में पहुँच जाते है, और आयेज कैसे मेरी मा और मौसी को इकबाल छोड़ता है, ये जानने के लिए आपको मेरी अगली स्टोरी की वेट करनी पड़ेगी. तब तक लिए बाइ

आशा करता हू, की मेरी खानी आपके लंड को आचे से मज़ा दे पाई होगी. अगर कोई मुझे कहानी की फीडबॅक या कैसी लगी बताना चाहता है. या फिर सीमा और शीला की बातें करना चाहता है. या मुझे अपनी मा की बारे में बताना चाहता है. तो मुझे मेरी मैल में एमाइल करे.

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