छोटी बहन को चोदा

choti behen ko choda मैं हूँ मन्मथ मोहेर, आप की सेवा में. बात ये हुई के एक साल पहले मेरी

मौसी ने मुझे अपने गाँव बुलाया था. वहाँ मैं पंद्रह दिन रहा. दरमियाँ

मैने उन की बेटी माधवी को कस कर चोदा. मेरी ये पहली चुदाइ थी. हम दोनो ने

एक दूजे से वचन दिया था की चुदाइ का राज़ हम किसी से नहीं कहेंगे. लेकिन

माधवी ने अपना वचन तोड़ दिया. दो महीनो पर मेरी बहन रिया को मौसी के घर

जाना हुआ, माधवी ने कुछ व्रत रक्खा था. उस वक़्त माधवी ने रिया से बता

दिया की कैसे हम ने चुदाइ की थी. जब रिया वापस आई तब ख़ुद चुदवाने के लिए

बेताब हो चुकी थी. छोटी बहन को चोदा कहानी में आप ने पढ़ा की कैसे रिया

ने मुझ से चुदवाया. अब मैं मूल कहानी पर आता हूँ एक साल पहले गरमिकी

छुट्टियाँ के दौरान मौसी ने मुझे अपने गाँव बुला लिया. मैं वहाँ पहुँचा

तब पता चला की मौसा बिज़नेस वास्ते मुंबई गये थे और एक्जामिनेशन आती होने

से परेश दो हपते बाद आने वाला था. माधवी की एक्जामिनेशंस ख़त्म हो गयी थी

इसी लिए वो आ गयी थी. मैं थोड़ा नाराज़ हुआ लेकिन क्या कर सकता था ?

माधवी और मौसी मुझे मिल कर बहुत ख़ुश हुए. ये मेरे मौसा बिहारिलाल और

मौसी भानुमति कई बरसों पहले ईस्ट अफ़्रीका गये थे. वहाँ उन्हों ने बहुत

पैसे कमाए. परेश और माधवी वहाँ जन्मे और बड़े हुए. तीन साल पहले मौसा को

अचानक वापस इंडिया लौटना पड़ा. आते ही अपने गाँव में चार मज़ले का बड़ा

मकान बनवाया. मुंबई में रहते उन के एक दोस्त के साथ मिल कर उन्हों ने

काग़ज़ का हॉल सेल बिज़नेस खड़ा कर दिया. इन के अलावा गाँव में मौसा का

एक भतीजा था गंगाधर जिसे मैं जानता था. गंगाधर की पत्नी कैलाश भाभी को भी

मैं पहचानता था. वो दोनो भी मुझ से मिल कर ख़ुश हुए. पहले ही दिन शाम का

खाना खा लिया था की गंगाधर और कैलाश भाभी मुझ से मिल ने आए. हम चारों

दूसरे मज़ले पर दीवान खाने में बैठ इधर उधर की बातें कर ने लगे. कैलाश :

मन्मथ भैया, आप तो हमारे परेश भैया जैसे ही देवर हें, मुझे भाभी कहना.

मैं : ठीक है भाभी. कैलाश : आप डाक्टरी पढ़ते हें ना ? कितने ? पाँच साल

में डाक्टर बन जाएँगे ? मैं :हाँ, बीच में फैल ना हो जा उन तो. कैलाश :

मैं आप की पहली मरीज़ बनूँगी, मेरा इलाज करेंगे ना ? मैं : क्यूं नहीं ?

फ़िस लगेगी लेकिन. कैलाश : देवर हो कर भाभी से फ़िस लेंगे आप ? मैं तो आप

से फ़िस मागुंगी. मैं : ऐसी कौन सी बीमारी है जिस के इलाज में फ़िस लेने

के बजाय डाक्टर फ़िस देता है ? माधवी और गंगाधर मुस्कुराते रहे थे, माधवी

बोली : भाभी, तेरा इलाज के वास्ते मन्मथ भैया को पूरे क्वालीफ़ाइड डाक्टर

बनाने की ज़रूरत कहाँ है ? पूछ देख उन के पास ईन्जेक्शन है ? मैं :

ईन्जेक्शन देना मैं सिख गया हूँ दे सकूंगा. माधवी और कैलाश दोनो खिल खिल

हस पड़े, गंगाधर बोले : मज़ाक कर रही है ये दोनो, मन्मथ, उन की बातों में

मत आना. मैं : कोई बात नहीं, मेरी भाभी जो बनी है हाँ, अब बताइए आप को

क्या तकलीफ़ है कैलाश : साब, खाना खाने के बाद भूख नहीं लगती और दिन भर

नींद नहीं आती. माधवी लंबा मुँह किए बोली : हर रोज़ ईन्जेक्शन लेती है

फिर भी. और ईन्जेक्शन भी कैसा ? बड़ी लंबी मोटी सुई वाला. लगाने में आधा

घंटा लगता है मेरे दिमाग़ में अब बत्ती चमकी. मैने पूछा : सुई कैसी है ?

नोकदार या बुत्ठि ? माधवी : बुत्ठि. और दवाई ऐसे अंदर से नहीं निकलती.

सुई अंदर बाहर करनी पड़ती है मैने भी सीरीयस मुँह बना कर कहा : माधवी,

ईन्जेक्शन देनेवाला कोई, लेनेवाली भाभी, तुझे कैसे पता चला की सुई कैसी

है कितनी लंबी है कितनी मोटी है ? माधवी शरमा गयी कुछ बोली नहीं. कैलाश

ने कहा : माधवी ईन्जेक्शन ले चुकी है मैं : अच्छा ? किस ने लगाया ? सब

चुप हो गये थोड़ी देर बाद कैलाश ने कहा : माधवी ख़ुद आप को बताएगी, जब उस

का दिल करेगा तब. मैं : मैं समाज सकता हूँ शरमाने की अब मेरी बारी थी.

मैं कुछ बोला नहीं. कैलाश : हाए हाए, अभी आप कच्चे कंवारे हें. माधवी,

कौन स्वाद चखाएगी मन्मथ भैया को, मैं या तू ? गंगा : तुम दोनो छोड़ो उसे.

उसे तय करने दो ना. क्यूं मन्मथ ? कैलाश तेईस साल की है और माधवी उन्नीस

की. कौन पसंद है तुझे ? मैं : मुझे तो दोनो पसंद है गंगा : देख, तेरे पास

एक लंड है है ना ? वो एक समय एक चूत में जा सकता है दो में नहीं. तुझे तय

करना होगा की समझ गया ना ? इस वक़्त माधवी उठ कर चली गयी मैने कहा : रुठ

गयी क्या ? कैलाश : ना ना. अपने बड़े भैया के मुँह से लंड चूत ऐसा सुनना

नहीं चाहती. गंगा : अजीब लड़की है लंड ले सकती है लेकिन लंड की बातें सुन

नहीं सकती. कैलाश : इस में नयी बात क्या है ? लंड लेती है चूत, सुनता है

कान. ये ज़रूरी नहीं है की चूत को जो पसंद आए वो कान को भी पसंद आए.

रात के बारह बजाने को थे. माधवी आई नहीं. गंगाधर और कैलाश चले गये सोने
के लिए मुझे तीसरे मज़ले पर कमरा दिया था, जो मकान के पिछले भाग में था.
बाथरूम में जा का पहले मैने मुठ मार कर लंड का प्रेशर कम किया, फिर रूम
में आ कर सो गया. मेरे कमरे के पीछे गच्छी थी. मुझे नींद आने लगी थी की
मैने कुछ आवाज़ गच्छी से आती सुनी. मैं सोचने लगा कौन हो सकता है गच्छी
में इतनी रात ? उठ कर मैं बाहर निकला. गच्छी में कोई था नहीं. अब हुआ
क्या था की आवाज़ बगल वाले मकान से आ रही थी. ये मकान दो मज़ले का था उस
का छाता हमारी गच्छी के लेवेल में था. मैने देखा की छाते के थोड़े से
टाइल्स जो पुराने ढंग के थे वो हट गये थे. वहाँ से रोशनी आ रही थी और
आवाज़ भी. मैं दबे पाँव जाकर देखने लगा. बगल वाले मकान का बड़ा कमरा
दिखाई दिया. तीन औरतें और दो आदमी सोने की तैयारियाँ कर रहे थे. उन को
छोड़ मैं अपनी चारपाई में लेट कर सो गया. दूसरे दिन पता चला की बाजू वाले
मकान में जो फेमिली रहता था उस के मंज़ले लड़के की शादी थी. उसी दिन
दोपहर को बारात चली, दूसरे गाँव गयी और तीसरे दिन दुल्हन लिए वापस आई.
मुझे अकेला पा कर माधवी ने कहा : भैया, आज रात खेल पड़ेगा. देखना है ?
मैं : कौन सा खेल ? हसती हुई माधवी बोली : अब अनजाने मत बनी ये. आप को
पता तो है की गच्छी से बगलवाले मकान का कमरा देखा जा सकता है मैं : उस का
क्या ? माधवी : उस का ये की आज रात वहाँ सुहाग रात मनाई जाएगी. मांझाला
लड़का जो कल शादी कर के आया है वो उस कमरे में अपनी दुल्हन को ……. को
…….. वो करेगा. माधवी शर्म से लाल लाल हो गयी मैं : तुझे कैसे पता ?
माधवी : वो कमरे में सब से बड़ा भैया अपनी बहू के साथ सोता है वो उनका
बेडरूम है कई बार मैने और परेश ने देखा है उनको वो करते हुए. थोड़ा सोच
कर मैने कहा : मुझे दुसरी जगह देना सोने के लिए और तू जा कर उन की चुदाइ
देखना. माधवी : नहीं भैया, अकेले देखने में क्या मझा ? आप को इतराज़ ना
हो तो हम साथ में देखेंगे ? मैं : माधवी, ऐसा करना ख़तरे से ख़ाली नहीं
है मौसी को पता चल गया तो क्या होगा ? माधवी : उस की फिकर मत कीजिए.
मम्मी रात के नौ बजे सो जाती है जोड़ों में दर्द के कारण कभी सीढ़ी चढ़ती
नहीं है और सुहाग रात दस बारह बजे से पहले शुरू होने वाली नहीं है मैं भी
सो जा उंगी, लेकिन बारह बजे उठ जा उंगी. मैं : वो तो सही लेकिन उन को देख
तुझे दिल हो गया तो क्या करोगी ? मेरे गले में बाहें डाल आँखों में आँखें
डाल वो बोली : आप वहीं होंगे ना ? या ……. कैलाश भाभी मुझ से ज़्यादा
अच्छी लगती है ? अब बात ये थी की माधवी वैसे तो एक सामान्य लड़की थी. मैं
भी इतना ख़ूबसूरत नहीं हूँ वैसे भी लड़कियाँ मुझ पर दुसरी नज़र डालती
नहीं है मौक़ा मिला था चुदाइ का. क्यूं ना मैं लाभ उठा लूं ? बहन या ना
बहन, वो ख़ुद आ कर चुदवाना मांगती हो तो मना करने वाला मैं कौन भला ?
चुदाइ की सोचते ही मेरा लंड तन ने लगा. माधवी की कमर पकड़ कर मैने उसे
खींच लिया. वो मुझ से लिपट गयी उस की चुचियाँ मेरे सीने से दब गयी और
मेरा लंड हमारे पेट बीच फ़स गया. उस का कोमल बदन बाहों में लेना मुझे
बहुत मीठा लगा. लड़की इतनी मीठि हो सकती है वो मैने पहली बार जाना. ख़ैर,
उस रात मैं कई चिझें पहली बार जानने वाला था. मेरे होटों पर हलका सा
चुंबन कर के मेरी बाहों से छूट कर वो भाग गयी मैं सोचता रह गया की इतनी
थोड़ी सी छेड़ छाड़ इतनी मीठि लगी तो पूरी चुदाइ कितनी मझेदार होगी.
बाथरूम में जा कर मुझे मुठ मारनी पड़ी. बड़ी इंतेजारी से मैं रात की राह
देखने लगा. इतना इंतेज़ार तो वो दूल्हा दुल्हन भी नहीं करते होंगे. वैसे
भी मेरी भी ये पहली चुदाइ होने वाली थी ना ? माधवी मुझे चोदने दे तब ?
सारा दिन मेरी बेचैनी देख माधवी मुस्कुराती रही. एक दो बार उस ने अपनी
चुचिया दिखा दी. मेरा लंड बेचारा खड़ा हुआ सो गया,, खदा हुआ, सो गया, लार
टपकाता रहा. आख़िर हम ने शाम का खाना खा लिया. सब सो ने चले गये मेरी
आँखों में नींद कहाँ ? दो तीन बार जा कर देख आया की उस बेडरूम में क्या
हो रहा है दस बजे माधवी आई.

मैने उसे बाहों में लेना चाहा लेकिन वो बोली ; जल्द बाज़ी में मज़ा नहीं
आएगा. थोड़ा सब्र करो. मैं तुमारी ही हूँ आज की रात. मैं : मौसी को पता
चल जाएगा तो ? माधवी : तो कुछ नहीं. वो गाँव में ढिंढोरा नहीं पिटेगी.
मैं : एक किस तो दे. माधवी : किस अकेली ही. ज़्यादा कुछ करोगे तो मैं चली
जा उंगी. मैने माधवी के होठ मेरे होठ से छुए. हाय, कितने कोमल और मीठे थे
उस के होठ ? क्या करना वो मैं जानता नहीं था होठ छुए खड़ा रहा. माधवी को
लेकिन पता था. उस ने ज़ोर से होठ से होठ रगड दिए और अपना मुँह खोल मेरे
होठ मुँह में लिए चाटे और चुसे. मुझे गंदा लगा लेकिन मीठा भी लगा. छूट ने
का प्रयत्न किया मैने लेकिन माधवी ने मेरा सिर पकड़ रक्खा था. पूरी एक
मिनिट चुंबन कर वो छूटी और बोली : आहह्ह्ह, मझा आ गया. है ना ? पहली बार
किस किया ना तुमने ? बोले बिना मैने फिर से किस की. इस वक़्त माधवी ने
अपनी जीभ निकाल कर मेरे होठ पर घुमाई. ओह, ओह, क्या उस का असर ? मेरा लंड
ऐसा तन गया की मानो फट जाएगा. माधवी ने पाजामा के आरपार लंड पकड़ कर कहा
: भैया, तुमारा ये तो अब से तैयार हो गया है मुझ से बरदाश्त नहीं हुआ.
मैने उसे अलग किया और कहा : चली जा माधवी. मुझे यूँ तडपाना हो तो बहेतर
है की तू चली जा. उस ने मेरा चहेरा हाथों में लिया. कुछ कहे इस से पहले
मैने हाथ हटा दिए और फिर कहा : चली जा, चोदे बिना इतने साल गुज़ारे हें,
एक दो साल ओर सही. मर नहीं जा उंगा मैं चोदे बिना. मेरा हाथ पकड़ कर अपने
स्तन पर रखते हुए वो बोली : नाराज़ हो गये क्या ? चलो अब मैं नहीं उकसा
उंगी. माफ़ कर दो. अब सच कहो, तुम्हे चोदने का दिल हुआ है की नहीं ? मैं
: हुआ भी हो तो तुझे क्या ? इतने में गच्छी से लड़कियों की खिल खिल हस ने
की आवाज़ आई. माधवी ने कहा : चलो, अब खेल शुरू होने वाला है हम गच्छी में
गये वो आगे खड़ी रही और मैं पीछे. कमरे में दुल्हन पलंग पर बैठी थी और
दूल्हा उस के पीछे बैठा था. उस के हाथ दुल्हन के कंधों पर थे. उस ने
दुल्हन के कान में कुछ कहा. दुल्हन शरमाई लेकिन उस ने सिर हिला कर हा
कही. चहेरा घुमा कर दूल्हे ने दुल्हन के मुँह से मुँह चिपका दिया. किस
लंबी चली. दौरान कंधे पर से उतर कर दूल्हे के हाथ दुल्हन के स्तनों पर जा
बैठे. दुल्हन ने अपने हाथ उन के हाथ पर रख दिए चुंबन करते करते दूल्हा ने
चोली के बटन खोल दिया और खुली हुई चोली के अंदर हाथ डाल कर नंगे स्तन थाम
लिए दुल्हन दूल्हे के सीने पर ढल गयी मैं माधवी के पीछे खड़ा था. मेरे
हाथ भी उस के कंधों पर टीके थे. उधर दूल्हे ने स्तन पकड़े तो इधर मैने भी
माधवी के स्तन पकड़ लिया. माधवी ने मेरे हाथ हटाने की कोशिश की लेकिन मैं
माना नहीं. थोड़ी नू ना के बाद उस ने मुझे स्तन सहालाने दिए लेकिन जब
मैने नाइटी के हूक्स पर हाथ लगाया तब वो बोली : अभी नहीं, अंदर चलेंगे तब
खोलना.

इस बार मैने हार कबुल कर ली. वैसे भी नाइटी पतले कपड़े की बनी हुई थी और
मुझे यक़ीन था की माधवी ने उस वक़्त ब्रा पहनी नहीं थी, इसी लिए मेरी
उंगलियाँ माधवी की कड़ी नीपल मेहसूस कर सकती थी. दोनो हथेलिओं में स्तन
भर के मैने उठाए, हलके से दबाए और सीने पर घुमाए. माधवी के मुँह से आह
निकल पड़ी. उधर दूल्हा भी ऐसे ही स्तन सहला रहा था. माधवी अब थोड़ा पीछे
सरकी. उस की गांड मेरी जाँघ से लग गयी मेरा लंड उस की कमर से डब गया.
चहेरा घुमा कर किस करने लगी दूल्हा राजा ने अपनी रानी की चोली उतार फैंकी
थी और उसे चित लेटा दिया था. दुल्हन ने अपना चहेरा ढक रक्खा था. बगल में
बैठ दूल्हा उस के स्तन साथ खेल रहा था. नीचे झुक कर वो नीपल्स भी चुस ता
था. होले होले उस का हाथ दुल्हन के पेट पर आया और वहाँ से घाघरी की नाडी
पर पहुँचा. दुल्हन ने नाडी पकड़ ली. दूल्हा ने लाख समझाई , मानी नहीं.
आख़िर दूल्हा उठा और अलमारी से कुछ ले आया. दुल्हन बैठ गयी दूल्हा ने कुछ
नेकलेस जैसा दुल्हन को पहनाया. ख़ुश हो कर दुल्हन दूल्हा से लिपट गयी उसे
बाहों में भर कर दूल्हा अब पलंग पर लेट गया. मुँह पैर किस करते करते फिर
उस ने घाघरी की नाडी टटोली. इस बार दुल्नने घाघरी पकड़ ली सही लेकिन नाडी
खोलने दी और कुले उठा कर घाघरी निकाल देने में सहकार दिया. ताजुबी की बात
ये थी की दुल्हन ने पेंटी पहनी नहीं थी. घाघरी हटते ही उस की गोरी गोरी
चिकानी जांघें और काले झांट से ढकी हुई भोस खुली हो गयी इधर माधवी ने भी
पेंटी पहनी नहीं थी. मुझे कैसे मालूम ? जनाब, पहल माधवी ने की थी, अपना
हाथ पीछे डाल कर मेरा लंड पकड़ कर. अब आप ही बताइए, वो मेरा लंड थाम सके
तो मैने क्यूं ना उस की भोस की ख़बर ले सकूँ ? मेरी उंगलया भोस सहलाती थी
लेकिन मेरी कलाई पकड़े हुए माधवी मुझे दिखाती रही थी की कहाँ उसे सहलवाना
था. मैने कालेज में मुर्दा औरतों की भोस देखी थी, फाड़ चिर कर पढ़ा भी
था. लेकिन इस वक़्त तो मेरे हाथ में एक ज़िंदा जवान भोस थी. लड़की की भोस
इतनी मुलायम और कोमल होती है वो मैने सोचा तक नहीं था. मैं थियरी से
जानता था की क्लैटोरिस कहाँ होती है चूत कहाँ होती है वग़ैरह लेकिन उस
रात मेरी उंगलियाँ कुछ पहचान ना सकी. फक्त भोस के पानी से गीली गीली होती
रही. कमरे में अब दूल्हा ने भी अपने कपड़े उतार फैंके थे. चित लेटी हुई
दुल्हन पर वो औंधा ऐसे पड़ा था की जिस से वो फ़्रेंच किस कर सके, उस के
चूतड पलंग पर थे. एक हाथ से वो भोस सहला रहा था. दुल्हन के हाथ उस की पीठ
पर रेंगते थे. थोड़ी थोड़ी देर मे दुल्हन छटपटा जाती थी और भोस पर से उस
का हाथ हटाने का प्रयत्न करती थी. माधवी ने मेरे कान में कहा : दूल्हा
क्लैटोरिस को छूता है तब दुल्हन तड़प उठती है मैने सोचा, मैं भी ऐसा
करूँ. मैने सारी भोस टटोली लेकिन क्लैटोरिस मिली नहीं. उंगलियाँ इतनी
गीली हुई की ओढनी पर पोंछानी पड़ी. मेरी नाकामयाबी पर माधवी को हसी आ गयी
आख़िर उस ने मेरी एक उंगली पकड़ी और ठीक क्लैटोरिस पर रख दी और बोली :
इसे ढूंढते थे ना ? मेरी उंगली माधवी की क्लैटोरिस पर रेंगने लगी छोटे
बक्चे की कड़ी नुन्नी जैसी क्लैटोरिस थी और ठुमके लगा रही थी. मैने उंगली
थोड़ी सी पीछे सरकाई तब गरमा गरम चिकानी जगह पर जा पहुँची, मेरे ख़्याल
से वो चूत का मुँह था. मैने पूछा : माधो, ये चूत है ना ? सिर हिला कर
माधवी ने हा कही और मुट्ठि में पकड़ा लंड दबोच डाला. मैने दो उंगलियाँ
चूत में डाली, अंदर बाहर कर के चूत मार ने लगा. मेरा दूसरा हाथ स्तन पर
था और नीपल के साथ खेल रहा था. माधवी कुछ कम नहीं थी, उस ने मेरा लंड ऐसे
पकड़ा था जैसे डूबता हुआ इंसान लकड़ी को थाम लेता है मुझे पता नहीं चला
था कब उस ने मेरे पाजामा के बटन खोल कर लंड बाहर निकल दिया था. उधर पलंग
पर दुल्हन की चौड़ी जांघें बीच दूल्हा आ गया था. उस के कुले उपर नीचे हो
रहे थे. दुल्हन ने अपने पाँव दूल्हे की कमर से लिपटा ये थे. लगता था की
दूल्हे ने दुल्हन की झिल्ली तोड़ कर लंड चूत में डाल दिया था और होले
होले चोद रहा था. हाथों के बल दूल्हा उठा और दोनो के पेट बीच से भोस की
ओर देखने लगा. उस ने दुल्हन को कुछ कहा. दुल्हन ने भी सर उठा कर भोस की
ओर देखा. वो तुरंत शरमा गयी उस ने फिर अपना चहेरा हाथों से ढक लिया.
दूल्हे ने झुक कर नीपल्स चुसी. दुल्हन छटपटा गयी ज़ोरों के धक्के लगा कर
दूल्हा चोद ने लगा. हम दोनो काफ़ी उत्तेजित हो गये थे. भोस ने भर मार
पानी बहाया था और लंड फटा जा रहा था. अब हमें उन दोनो की चुदाइ देखने में
दिल चश्पी ना रही. पलट कर माधवी मेरे सामने हुई. गले में बाहें डाल मुँह
से मुँह चिपका दिया. बेरहमी से मेरे होठ चाट ने लगी मेरे मुँह में अपनी
ज़बान डाल कर चारों ओर घुमा ली. भोस पर से मेरा हाथ हटा कर स्तन पर जमा
दिया. लंबी किस के बाद वो बोली : आह ह ह ह ह भैया, चलो चलें कमरे में.
मुझ से खड़ा रहा नहीं जाता. चुदाइ का मुझे कोई अनुभव था नहीं इसी लिए
मैने डोर माधवी के हाथों में धर दी थी. वो जो करे जैसे करे वो सब में मैं
साथ देता चला था. उस को सहारा दे कर मैं उसे कमरे में ले आया.
kramashah…………….

यह कहानी भी पड़े  बेटे से चूत की गर्मी शांत करवाई

gataank se aage……………..
माधवी को सहारा दे कर मैं उसे कमरे में ले आया ,,,,,,,,,,, कमरे में आ ते
ही हम एक दूजे पर तूट पड़े. उस ने मेरा नाइट ड्रेस उतार दिया, मैने उस की
चोली उतार दी. मैने दोनो स्तन बेरहमी से मसल डाले और नीपल्स को चिपटि में
ले ली. मेरा सात इंच का कड़ा लंड देख वो बोली : हाए, क्या लंड है तुमारा
भैया. कच्चा कंवारा भी है है ना ? मैं : कंवारा ही है उस ने अभी तक चूत
देखी तक नहीं है लंड हाथ में लिए होले होले मुठ मार ते हुए वो मुझे धकेल
कर पलंग तक ले गयी और पलंग पर गिरा दिया. मैं कुछ कहूँ इस से पहले उस ने
लंड मुँह में ले लिया. मुझ से सहा नहीं गया. मैने कहा : माधवी, ऐसा करोगी
तो मैं तेरे मुँह में ही झर जा उंगा. उस ने उन उन आवाज़ की लेकिन लंड
छोड़ा नहीं. मेरे पास कोई चारा नहीं था. मैने फट से हाथ उस की भोस पैर रख
दिया और क्लैटोरिस चिपटि में पकड़ कर मसल डाली. छटपटा ने की अब उस की
बारी थी. आह भरने जैसे उस ने मुँह खोला वैसे मैने लंड निकाल लिया. लगता
था की उसे कुछ छीना झपटि पसंद थी. मैने उसे पलंग पर पटक दी और उपर चड़
बैठा. वो लंड पकड़ ने तुली थी, मैं उस के हाथ हटा देता था, आख़िर एक हाथ
में उस की दोनो कलाइयों पकड़ कर दूसरे हाथ से मैने स्तन पर चिकोटी काट
ली. उई मा कहते हुए वो तड़प उठी. मैं उस पर लेट गया. मेरे वज़न से उसका
बदन दब गया और वो हिल ना सकी. उस ने जांघें जकड़ रक्खी थी. मेरे घुटने उस
के पाँव बीच डाल कर ज़ोर लगा कर मैने उस की जांघें चौड़ी कर दी. जांघें
चौड़ी होते ही रेशमी घाघरी नितंब तक उपर चड़ गयी बाक़ी रही वो मैने हाथ
से हटा दी. अब लंड और भोस बीच कुछ ना रहा. खुली भोस से लंड टकराया. मेरे
दोनो हाथ स्तन पर जमे थे इसी लिए मैं लंड पकड़े बिना धना धन धक्के देने
लगा. मैने सोचा था की ऐसे वैसे लंड चूत में घुसेगा तो सही. लेकिन ये ना
हुआ. लंड का मत्था भोस पर इधर उधर टकराया, फिसल गया लेकिन उसे चूत का
मुँह मिला नहीं. आठ दस धक्के बेकार गये मेरी अधीराई बढ़ गयी क्यूं की मैं
झर ने से क़रीब आ चुक्का था. मेरी नाकामयाबी पर माधवी हस रही थी. हो सकता
है की माधवी जान बुझ कर अपने नितंब हिला कर निशाना चुकवा देती थी. मैने
कहा : देख, मैं तेरे पेट पर लंड रगड कर झर उंगा, तुझे चोदुन्गा नहीं.
मैने धक्के लगाने शुरू किए. लंड पेट पर घिस ने लगा. तब अचानक उस ने अपने
पाँव उठाए, ओर चौड़े कर दिए और एक हाथ में लंड पकड़ कर सही निशाने पर धर
दिया. एक ही धक्के से पूरा लंड चूत में घुस गया. लंड की टोपी उपर चड़ गयी
मोन्स से मोन्स टकराई. मुझे आगे सीखाने की ज़रूरत ना थी. दोस्तो, जब
भगवान लंड देता है तब ये भी सीखा देता है की चुदाइ के धक्के कैसे मारे
जाते हें. चूत में लंड घुसते ही मेरी कमर काम पर लग गयी मैं रुक ने के
मूड में नहीं था. मेरा दिमाग़ सिर से निकल कर लंड के मत्थे में जा बैठा
था और उस पर चुदाइ का भूत सवार हुआ था. वो कहाँ मेरी सुने ? घचा घच्छ घचा
घच्छ धक्के से मैं चोदने लगा. अपनी टाँगें मेरी कमर से लिपटा कर नितंब
हिला कर माधवी लंड लेने लगी उस के मुँह से आह्, ओहोह, सीसी, आवाज़ें
निकालने लगी ज़ोर ज़ोर से गहरे धक्के लगा कर मैने माधवी को कस कर चोदा.
ये चुदाइ लंबी ना चली. चार पाँच धक्के लिए की वो झर पड़ी. मैने छोड़ना
जारी रक्खा. दूसरे पाँच सात धक्के में मैं भी झर गया. लंड से वीर्य की
पाँच सात पिचकारियाँ छूटी. मैं होश गवा बैठा. इतना आनंद चुदाइ में होगा
ये मैने सोचा नहीं था. लोग इसे छोटी मौत कहते हें ये सच है हम दोनो थक
गये थे लेकिन ये थकान मीठि थकान थी. मैं माधवी के बदन पर ढल गया. थोड़ी
देर बाद होश आया की वो कोमल नाज़ुक लड़की मेरे बदन का भार नहीं झेल
सकेगी. मेरी कमर से उस की टाँगें छुड़ा कर मैं उतरने गया. उस ने टाँगें
ज़ोर से जकड़ कर मुझे रोक लिया. मेरी पीठ पर हाथ फिराते हुए बोली : सोते
रहिए ना, इतनी क्या जल्दी है ? मैं : मेरा भार लगेगा, तू दब जाएगी. माधवी
: तुम्हारा भार भी अच्छा लगता है मझा आया बहन को चोदने में ? मैं : बहुत
मझा आया. मुझे लगा की मैं मर जा उंगा. माधवी : मरे तुम्हारे दुश्मन. थक
गये हो क्या ? मैं : नहीं तो. क्यूं ? माधवी : तुम्हारा वो तो अभी भी
खड़ा है है ना ? उस की बात सच थी. वाकई लंड खड़ा ही था, मैने चूत में
दबाए रक्खा था. चूत में हलके हलके स्पंदन होते रहे थे जिस का जवाब लंड
ठुमका लगा कर दे रहा था. मैं : हाँ, ये बे शरम अभी झुका नहीं है तेरी चूत
भी फट फट करती है ओह, सारे लंड में मीठि मीठि गुदगुदी होती है और ऐसा
मेहसूस ऐसा होता है की सारे लंड से रस झर रहा है तुझे कैसा लगता है ?
माधवी : तुम्हारे मोटे लंड से मेरी चूत भरी भरी लगती है मुझे भी सारी भोस
में गुदगुदी होती है

बातें करते करते होले होले लंड फिर अंदर बाहर होने लगा. अब की बार जल्द
बाज़ी नहीं थी. आराम से मैं चोदने लगा. भोस का पानी, लंड की लार और ढेर
सारा वीर्य चूत में थे. पच्छ पच्छ आवाज़ से लंड आता जाता था. मैने सोचा
था की चुदाइ के वक़्त लंड की टोपी चड़ उतर करती होगी. लेकिन ऐसा नहीं
होता था. पहली बार लंड घुसा तब टोपी चड़ गयी थी सो चडी ही रही थी. नंगा
मत्था चूत की दीवारों से घिस पता था. मेरे हर धक्के के साथ माधवी अपना
नितंब उठा लेती थी. इस से भोस उपर उठ जाती थी और मूल तक का लंड चूत मे
घुस पाता था. लंड निकलते वक़्त वो नितंब गिरा देती थी जिस से क्लैटोरिस
लंड की दांडी से घिस पाती थी. कभी कभी चूत की गहराई में लंड दबाय के मैं
मोन्स से मोन्स रगड लेता था, उस वक़्त भी क्लैटोरिस रगडी जाती थी. दस
मिनिट की ऐसी मझेदार चुदाइ के बाद चूत में फटाके होने लगे और उस के कुले
इधर उधर डोलने लगे. मुझ से लिपट कर अपनी कमर के झटके लगा कर माधवी लंड को
घुमा ने लगी वो बोली : मुझे उपर आ जाने दो. उसे बाहों में भर कर मैने
पलटी खाई और नीचे आ गया. लंड चूत में फसा ही था. कुले उठा गिरा कर वो
चोदने लगी मैने दोनो स्तन थाम लिए और नीपल्स मसल डाली. तेज़ी से वो
ओर्गाझम की ओर जाने लगी उस ने एक बार पूरा लंड बाहर निकाल कर हाथ में
पकड़ कर अपनी भोस पर चारों ओर रगड लिया ख़ास तौर से क्लैटोरिस पर अचानक
उस ने लंड फिर चूत में ले लिया, मुझ पर ढल पड़ी और कमर के झटके लगाने लगी
योनी के फटके से मैं जान गया की उस का ओर्गाझम अब दूर नहीं है फिर पलट कर
मैं उपर आ गया. वो ठीक से बोल नहीं पाई लेकिन इतना कहा : चोद डालो मुझे
भैया, चोद डालो. फाड़ दो मेरी चूत को अपने मोटे लंड से, चोद ही डालो. मैं
धक्के की रफ़्तार बढ़ा दूं इस से पहले माधवी को ओर्गाझम हो गया. पानी
बिना की मछली की तरह वो छटपटाने लगी नाख़ून से उस ने मेरी पीठ खरॉंच डाली
योनी तेज़ी से फट फट करने लगी और रस का झरना बहाने लगी उस का सारा बदन
अकड गया रोएँ खड़े हो गये मेरे सीने में दाँत गाड़ा दिए मुझे पता ना था
की क्या करना इसी लिए ओर्गाझम दौरान मैं रुक गया. तीस सेकंड के बाद जब
तूफ़ान शांत पड़ा तब वो थक कर ढल पड़ी. ओर्गाझम की लहरें एक दो मिनिट
चली. ज़रा होश आया तब वो बोली : ओह भैया, क्या चोदा तुमने ? ऐसी चुदाइ
मैने कभी नहीं की थी अब तक मैने होले से लंड निकाला और चोदने लगा. फटी
आँखों से वो देखने लगी बोली : वाह, अभी तुम झरे नहीं हो ? मैं : ना.
लेडीज़ फ़र्स्ट. मुझे अब कोई जल्दी नहीं है अपने पाँव पसारे उस ने कहा :
चोदीये, आराम से चोदीये. मुझे भी क्या जल्दी है ? उस के बाद बीस मिनिट तक
मैने माधवी को चोदा. आख़िर मैं भी ज़ोरों से झरा. मेरे साथ माधवी को भी
एक ओर छोटा सा ओर्गाझम हुआ. नींद कब आई वो किसी को पता ना चला. लंड चूत
में ही था और हम दोनो सो गये जब मेरी आँखें खुली तब माधवी मेरे पहलू में
नहीं थी. कमरे में बत्ती जलती थी. मैं नंगा पलंग पर पड़ा था. वो चोली
घाघरी डाले बाथरूम से निकल आई . मुझे नंगा देख वो हस पड़ी. वो बोली :
सुबह के चार बजाने को है मैं चलती हूँ तुम सो जाओ. मैं : एक किस भी नहीं
करोगी ? किस करने जैसे वो पलंग पास आई मैने झपट से उसे खींच लिया. वो नू
ना करती रही लेकिन मैने उसे मेरी गोद में ले लिया. एक हाथ से मैने उस की
कलाई पकड़ रक्खी. दूसरे हाथ से घाघरी की नारी खोलने लगा. माधवी ने हलका
सा विरोध किया. बोली : जाने भी दो ना देर हो जाएगी. मैं : होने दो. अभी
तो मैने तुझे ठीक से देखा भी नहीं है माधवी : ओह, भैया, तुम्हारी नज़र
पड़ते ही मुजे वो करवाने का दिल हो जाता है मैं : हो जाने दो. मैं कहाँ
दूर हूँ ? आख़िर मैने नारी छोड़ कर घाघरी उतार फैंकी. अपनी नंगी भोस
हाथों से ढक कर वो पलट गयी उस वक़्त मैने उस के नंगे नितंब देखे. देखते
ही मेरा लोडा जाग ने लगा. गोल चिकाने और भारी नितंब बड़े लुभावने थे.
दोनो कुले पर मैने हाथ फ़िराया. गहरी दरार में उंगली फिराई. मैने खींच कर
माधवी को मेरे पहलू में ले लिया. मेरी ओर पीठ कर के वो मेरे सीने पर ढल
गयी मेरा लंड उस के कुले से दब गया. अब मेरे हाथों ने चोली के हूक खोल
दिए और नंगे स्तन थाम लिया. वो दोनो हाथ से भोस ढके हुई थी. मैने ज़ोर
लगा कर उस के हाथ हटाए आर कहा : अब तो लंड ले चुकी हो, अब पीकी ढकने से
क्या फ़ायदा ? माधवी : शर्म आती है मैं : अरे वाह, मेरा लंड पकड़ने में
शर्म ना आई और अब ? चल मैं देखूं तो सही की इतना आनंद जहाँ से मलता है वो
जगह कैसी है

यह कहानी भी पड़े  ससुर बहू की पेलमपेली

भोस पर से वो हाथ नहीं हटती थी. लेकिन मैने चोली खोल दी थी, उसे निकाने
ने के लिए उस ने हाथ उठाने पड़े. माधवी चोली उतार रही थी की मैने मेरा
हाथ भोस पर रख दिया. उस ने मेरी कलाई पकड़ी लेकिन विरोध किया नहीं. मेरा
दूसरा हाथ स्तन सहालाने लगा. लंड ने सिर उठाया और पानी बहाना शुरू कर
दिया. जवान लड़की के स्तन मैं पहली बार देख रहा था. माधवी के स्तन बहुत
सेक्सी लग रहे ते. सीने के उपरी हिस्से पर लगे उस के स्तन मध्यम क़द के
थे, संपूर्ण गोल थे. स्तन के मध्य में दो इंच की बादामी कलर की एरिओला
थी, एरिओला के बीच छोटी सी नाज़ुक नीपल थी. एरिओला और नीपल उस वक़्त उभर
आए थे. मैने हथेली में ले कर स्तन सहलाया और चिपटि में ले कर नीपल्स
मसली. माधवी ने अपना हाथ मेरे हाथ पर रख दया और स्तन के साथ दबा दिया.
मेरे लोडे ने पानी बहाया और ज़्यादा तन गया. मेरा दूसरा हाथ भोस सहालाने
लगा. भोस इतनी कोमल होती है ये मैने उस दिन ही जाना. ताजुबी की बात ये है
की कोमल होते ही भोस मार खा सकती है चुदाइ दौरान मोन्स से मोन्स टकराती
है तब दोनो को मझा आता है मेरी उंगलियाँ बड़े होटों पर आगे से पीछे और
पीछे से आगे ऐसे घूम चुकी. मैं अच्छी तरह भोस देखना चाहता था, इसी लिए
माधवी को लेटा कर मैं बैठ गया. थोड़ी नू ना के बाद माधवी ने जांघें उठाई
और चौड़ी कर रक्खी. उस की मस्तानी भोस मेरी नज़र सामने आई. यूँ तो माधवी
गोरी है लेकिन भोस का रंग थोड़ा सा सांवला था. बड़े सन्तरे के टुकड़े
जैसे बड़े होठ भरे हुए और मोटे थे. मोन्स उँची थी. मोन्स पर और बड़े होत
के बाहरी हिस्से पर काले घुंघराले झांट थे. होठ बीच की दरार तीन इंच लंबी
होगी जिस में जाँवली रंग के पतले नाज़ुक छोटे होठ थे. दरार के अगले कोने
में आधा इंच लंबी क्लैटोरिस थी. अभी अभी चुद गयी थी फिर भी क्लैटोरिस
कड़ी थी. छोटे बेर जैसा उस का मत्था भोस के पानी से गिला था और चमक रहा
था. दरार के पिछले कोने में चूत का मुँह था जो सिकुड़ा दिखाई दे रहा था.
इतनी छोटी सुराख में मोटा लंड कैसे जा पाया था वो मैं समझ ना सका. मेरी
उंगलियाँ जब भोस से खेल रही थी तब माधवी ने लंड पकड़ रक्खा था. मुझे क्या
सुझा पता नहीं, मैने भोस पर होठ चिपका कर किस किया. माधवी तड़प उठी और
बोली : चलो ना, कब तक देखा करोगे ? मैं अब उस की खुली जांघें बीच आ गया.
लंड पकड़ कर मैं चूत पर रखने जा रहा था की एक अजीब बात हुई. कौन जाने
क्यूं, लंड से हवा निकल गयी और नर्म हो गया. मैं गभरा गया, ये क्या हुआ ?
नज़र लग गयी किसी की मेरे प्यारे को ? मैने कहा : माधवी, ये, ये तो फुसस
हो गया. क्या करेंगे अब ? माधवी जिस का नाम, बोली : ओह, ये कोई नयी चीज़
नहीं है गंगा भैया ने और कैलाश भाभी ने मुझे बताया है की ऐसा कभी कभी
होता है डर ने जैसी बात नहीं है उन्हों ने मुझे इलाज भी सिखाया है लेट
जाओ तुम और मुझे मेरा काम करने दो. मुझे चित लेटा कर वो बैठ गयी नर्म
लोडा पकड़ कर उस ने टोपी चड़ा दी और मत्था नंगा किया. आगे झुक कर अपनी
जीभ निकली और मत्थे पर फिराई. होठों से मत्था चाटा. जब उस ने जीभ से
फ़्रेनम टटोला तब मेरे बदन में बिजली सी दौड़ गयी लोडे में जान आने लगी
मुँह खोल कर उस ने अकेला मत्था अंदर लिया और जीभ और ताल्लू के बीच दबा
दिया. लोडे की दांडी जो बाहर रही उसे मुट्ठि में पकड़ कर मुठ मारने लगी
जैसे लोडे ने हलके से ठुमके लगाना शुरू किया माधवी ने लोडा चूसना शुरू
किया. लोडे में अजब किसम की गुदगुदी होने लगी और वो कड़ा होने लगा. देखते
देखते में लंड पूरा तन गया. माधवी का मुँह लंड की बड़ी साइज़ से भर गया.
लंड काम रस बहाने लगा. माधवी जब लंड चुस रही थी तब मेरा हाथ उस की पीठ पर
फिसल रहा था. होले होले हाथ उस के नितंब पर पहुँचा. एक एक कर मैने माधवी
के दोनो कुले सहलाए. बाद में कुले की दरार मे घुस कर मेरी उंगलियाँ भोस
ढूँढने लगी मैने माधवी की गांड का बंद मुँह टटोला और भोस पर उंगलियाँ
फिराई. उस वक़्त माधवी की भोस अपना पानी से गीली गीली हो गयी थी. उधर
मेरा लंड कड़ा होता चला था. मैने माधवी के कुले मेरी ओर खींच कर एक जाँघ
उठाई और मेरे सिर की दुसरी ओर रख दी. अब मेरा सिर उस की जांघें बीच आ
गया. उस की भोस मेरे मुँह के पास आ गयी भोस से मस्त ख़ुश बू आ रही थी.
कुले पकड़ कर मैने माधवी को ऐसे खिसकाई की मेरा मुँह भोस पर लग गया. जीभ
निकाल कर मैने अच्छी तरह भोस चाटी. मोन्स से ले कर गांड के छिद्रा तक आगे
से पीछे और फिर पीछे से आगे ऐसे बड़े होठ चाटे . होठ चौड़े कर के दरार
में जीभ डाली. क्लैटोरिस कड़ी हो गयी थी, उसे होटों बीच आसानी से ले सका.
क्लैटोरिस चुस ते चुस ते दो उंगलियाँ चूत में भी डाली. उधर लंड तन कर
लोहे जैसा बन गया था, इधर भोस ने भर मार रस बहाया था. जब माधवी फ़्रेनम
पैर जीभ फिराती थी तब मेरे बदन में बिजली सी दौड़ जाती थी और मेरे कुले
हिल पड़ते थे. उस का बदला मैं क्लैटोरिस का छोटा मत्था चुस कर लेता था.
लंड से भरे मुँह से वो कुछ बोल नहीं सकती थी लेकिन उन उन आवाज़ करती थी.
उस के कुले भी डोलने लगे थे. लंड ने जब ठुमके लगाने शुरू किए तब मुँह से
निकाल कर माधवी पलटी और पलंग पर चित लेट गयी हाथ में पकड़े लंड से खींच
कर मुझे अपने बदन पर ले लिया और बोली : हो गया ना तैयार ? अब चोदे बिना
नहीं झुकेगा. लेकिन अब की बार धीरे धीरे चोदना..

उस ने अपनी जांघें चौड़ी कर दी. मुट्ठि में पकड़ा लंड उस ने सारी भोस पर
रगडा ख़ास तौर पैर क्लैटोरिस से. उसी वक़्त मैं नीपल्स चूसने लगा. माधवी
के मुँह से आह निकल पड़ी. मैने कहा : ज़्यादा देर लगाएगी तो मैं चोदे
बिना ही झर जा उंगा. बोले ब्ना उस ने लंड का मत्था चूत के मुँह पर धर
दिया. एक हाथ मेरे कुले पर धर कर मुझे अपनी ओर खींचा. मुझे आगे सिखाने की
ज़रूरत नहीं थी..हलका दबाव से होले होले मैं लंड चूत में डाल ने लगा:
थोड़ा अंदर थोड़ा बाहर, ज़्यादा अंदर थोड़ा बाहर ऐसे एक एक इंच सरिखा लंड
डालता चला. माधवी से लेकिन सहा नहीं गया. उस ने अपने नितंब का एक झटका
ऐसा लगाया की घच्छ से लंड पूरा चूत में घुस गया. मेरे कुले पर दोनो हाथ
रह कर दबा रक्खा. वो बोली : आआह, ऐसे पूरा क्यूं नहीं पेल देते ? कितना
मीठा लगता है ? चूत की सीकुडी दीवारों ने मेरा लंड कस कर थाम लिया. सारे
लंड से जैसे रस झरता हो ऐसा मज़ा आने लगा. पूरा लंड चूत में घुसेड कर मैं
थोड़ी देर रुक गया और चूत के कोमल स्पर्श का मझा लेते रहा. माधवी ने फिर
नितंब हिलाए और चूत सिकोड कर लंड दबोचा. अकेला मत्था चूत में रहे इतना
लंड मैने होले होले निकाला और फिर एक झटके से अंदर घुसेड दिया. ऐसे
ज़ोरों के धीरे धक्के से मैंने माधवी को दस मिनिट तक चोदा. मेरी उत्तेजना
बढ़ गयी थी, मैं झर ने से क़रीब पहुँच गया था. झर ने से बचने के लिए मुझे
बार बार पूरा लंड निकाल देना पड़ता था. माधवी भी कमर के झटके लगा कर लंड
ले रही थी. अब वो बोली : जलदी करो ना, क्या ये बुड्ढे की तरह चोद रहे हो
? फिर क्या कहना ? धना धन तेज़ रफ़्तार से मैने चोदना शुरू कर दिया. सात
आठ धक्के लगे होंगे की माधवी को ओर्गाझम हो गया. अपने हाथ पाँव से मुझे
उस ने जकड़ लिया लेकिन मैं रुका नहीं, चोदते चला. दूसरे दस बार धक्के के
बाद लंड ने वीर्य छोड़ दिया. मेरे साथ माधवी भी फिर झरी. माधवी को आगोश
में लिए सोते रहना बहुत दिल करता था. लेकिन सुबह होने को थी. मौसी जाग
जाय और हम रंगे हाथ पकड़े जाएँ इन से पहले फटा फट कपड़े पहन कर माधवी
जाने लगी जाते जाते उस ने किस कर के मुझ से कहा : वचन दो भैया, हमारी
चुदाइ का राज़ तुम किसी से नहीं कहोगे, मेरी आनेवाली भाभी से भी नहीं.
मैने वचन दिया और उन से भी लिया. दूसरे दिन गंगाधर और कैलाश भाभी ने हम
सब को शाम के खाने पर बुलाए. वहाँ क्या हुआ ये फिर कभी आप से बयान कर
उंगा. इतना बता दूं की भाभी ने एक किताब दी जिस में चुदाइ के अलग अलग
आसनों के फ़ोटू थे. फ़ोटू के मॉडेल ख़ूब सूरत थे. लड़की की भोस साफ़
चिक्नी थी, स्तन बड़े बड़े और उन्नत थे. लड़के का लंड आठ इंच लंबा होगा.
डांस करते हो वैसी लगान से वो चुदाइ में लगे हुए थे. गंगा भैया ने
कॉन्डोम के कुछ पेकेट दिए रोज़ रात माधवी मुझे चुदाइ के नये नये लेसंस
देती रही. कभी कभी गच्छी में जा कर वो नये कपल की चुदाइ देख लेते थे, कभी
मौक़ा मिले तब दिन दौरान क्विकी कर लेते थे. कभी कैलाश भाभी हमारे घर आती
थी, कभी हमें उन के घर बुला लेती थी. दस बारह दिन तक कम से कम दिन में एक
बार मेरे लंड ने वीर्य की पिचकारियाँ छोड़ कर मुझे बेहद आनंद करवाया.
अंतिम दिन जब मैं घर लौटने निकला तब माधवी मौजूद नहीं थी. अगली रात उस ने
कहा था की मेरे जाने पर वो शायद रो पड़ेगी. मैने तो वचन निभाया. कुछ दो
महीनों पहले रिया माधवी से मिली. ये सब कैसे हुआ ये माधवी आप को बताएगी
लेकिन एक बात पक्की हुई : उस ने रिया से हमारी छुड़ाई के बारे में कह
दिया. एक रीत से ये अच्छा ही हुआ. मैं वचन से मुक्त हुआ और आप को ये
कहानी सुना सका
samaapt

Dont Post any No. in Comments Section

Your email address will not be published.


error: Content is protected !!