छोटी गलती के बाद की और बड़ी गलती

दोस्तो, मेरा नाम परमजीत कौर है और मैं पटियाला, पंजाब में रहती हूँ।
मैंने पहले अपनी कहानी
एक छोटी सी गलती
लिखवा कर आप सब की राय लेने के लिए भेजी थी, ताकि आपकी राय जान कर मैं कोई सही फैसला ले सकूँ कि मैंने अपने पड़ोस में रहने वाले एक लड़के से सम्बन्ध बनाए थे। मैंने उससे सेक्स तो नहीं किया था, मगर हाँ उसने मेरे सारे बदन को छू कर देखा था और मैंने उसका लंड चूसा और जब वो झड़ा तो मैंने अपनी पुरानी आदत अनुसार उसका माल भी पी लिया।
मगर मैं चाहती थी कि जो गलती मैंने यहाँ तक करी, वो यहीं रुक जाए और मैं आगे कोई और गलती न कर दूँ; उस लड़के से मेरे सम्बन्ध और आगे न बढ़ें।

इसी लिए मैंने ये कहानी लिखवाई और अन्तर्वासना डॉट कॉम पर छापने के लिए भिजवाई ताकि मुझे और भी अन्तर्वासना डॉट कॉम पर कहानियाँ पढ़ने वाली औरतें और लड़कियां या पुरुष भी अपनी सही राय दें, और कोई और मेरे जैसी जो औरतें हैं, वो इस कहानी को पढ़ कर वो गलती न करें, जो मैंने की।

तो लोगों ने मेरी कहानी पढ़ कर क्या क्या विचार व्यक्त करे, वो भी सुनिए और मुझे क्या क्या राय दी गई, उनका ज़िक्र भी मैं अपनी इस कहानी में करूंगी।

मेरा नाम परमजीत कौर है और मैं इस वक़्त 45 साल की हूँ। मेरे दो बच्चे हैं, एक लड़का और एक लड़की। शादी के करीब 15 साल बाद जब मैं करीब 35 साल की थी, तब मेरे पति की ज़्यादा शराब पीने से मौत हो गई। और पति के मरने के बाद मैं अपने ही पड़ोस में रहने वाले लड़के के साथ जो कुछ कर बैठी, वो तो आप पढ़ ही चुके हैं। अब आगे सुनिए।

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मेरी कहानी पर एक भी महिला का कमेन्ट नहीं आया, शायद किसी औरत ने मेरी कहानी पढ़ी ही नहीं। मगर मर्दों और लड़कों के बहुत से ई मेल्ज़ आए, किसी ने कहा मत करो, किसी ने कहा छुप छुपा का कर लो। कुछ ने तो ये भी कहा कि उसको छोड़ो मुझसे कर लो।
मर्दों के क्या कमेंट्स हो सकते थे, वो तो मुझे पहले ही पता था।
एक पुरुष ने कहा कि अगर वो लड़का मेरे साथ सिरियस है, तो मुझे उसके साथ शादी कर लेनी चाहिए।
एक और श्रीमान ने कहा- अरे उस लौंडे में क्या दम होगा, तू मेरे पास आ, मैं चोद चोद कर तेरी प्यासी चूत का भोंसड़ा बना दूँगा।

ऐसे कमेंट तो खैर बहुत से पुरुषों ने दिये, क्योंकि हिंदुस्तान के मर्द सेक्स के भूखे हैं, अपनी पत्नी की चाहे संतुष्ट न कर पाते हों, फिर भी दूसरी औरत को पूर्ण संतुष्टि का वादा कर देते हैं।

मगर इसी दौरान उस लड़के ने मेरे साथ नज़दीकियाँ बढ़ानी शुरू कर दी। वो कभी कभी हमारे घर भी आ जाता, और मौका देख कर मेरे बदन को छेड़ता। मेरे मम्मे दबा देता, मुझे चूम लेता, मेरी गांड, मेरी फुद्दी को सहला देता।

एक बार तो जब मेरी बेटी बाथरूम में थी और मैं किचन में, तो उसने अपना लंड निकाल मुझे चूसने के लिए कहा, मैं डर रही थी कि कहीं बेटी बाहर न आ जाए, मैंने उसे मिन्नत की, मगर वो नहीं माना तो मुझे उसका लंड चूसना पड़ा। थोड़ा सा चूस कर मैंने उसे बस कह दिया, और वो अपने घर चला गया।

मगर इस तरह की चोरी से सेक्स की छोटी बड़ी हरकतों ने मेरे अंदर सेक्स की आग और भड़का दी। अक्सर वो मेरे घर आ जाता था, और आता भी तब था, जब मेरे बच्चे स्कूल होते थे, काम वाली बाई काम करके जा चुकी होती थी, मतलब करीब 11-12 बजे। जब भी वो मेरे घर आता, मुझसे बहुत छेड़छाड़ करता, मेरे जिस्म पर यहा वहाँ छूता, कभी चूतड़ दबा दिया, कभी मम्मा दबा दिया।

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मैं उसकी हरकतों का बुरा नहीं मानती थी, क्योंकि मुझे ये सब करना बहुत अच्छा लगता था।

फिर उसने एक और पैंतरा आज़माया। जब वो मुझे चाय के लिए कहता और मैं किचन में चाय बना रही होती तो वो बिल्कुल नंगा होकर किचन में आता और मेरे सामने ही किचन की शेल्फ पर बैठ कर मुझे देख कर और मुझे दिखा दिखा कर अपना लंड हिलाता। कई बार कहता- अरे यार स्वीटी, मान जा न मेरी बात, बना प्रोग्राम, चलते हैं न, और ये देख ये लंड तुम्हें दूँगा, जहां कहोगी, वहाँ डालूँगा, तेरी चूत में, तेरी गांड में, या तेरे मुँह में। पर बस चल यार, मुझे भी मज़ा दे, और खुद भी मज़ा ले। जिस दिन बूढ़ी हो गई और ये जिस्म ढलक गया, फिर क्या फायदा, जवानी में ही जिस्म के मज़े ले ले। बाद में कोई नहीं पूछने वाला, मैं भी नहीं!

मैं उसकी बातें सुनती, मगर मैं उसे हमेशा अनदेखा कर देती। वो मेरे घर में कई बार नंगा घूमा, मुझे देख कर मेरे सामने खड़ा हो कर मुट्ठ मारता और अपना पानी वहीं फर्श पर गिरा देता। जब वो चला जाता तो मैं फर्श पर गिरा उसका माल साफ करती, एक दो बार तो मैंने उसका गिरा हुआ माल अपने हाथ में लेकर चाटा भी।

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