छन्नो चाची की चूट मारी

छन्नो चाची पडोसन हैं, उनके बदन का सबसे सुन्दर अंग है उनकी गांड। अक्सर मटकते हुए मोर की तरह जब वो चलती हैं, उनके सारे हसीं बदन की सुन्दरता उनके गांड के मतवाले पन में झलकती है। उनके बारे में एक कहानी प्रचलित है, कि मोहन डाकिये ने उनकी गांड मार ली थी। इतनी खूबसूरत गांड के लिए कौन क्या नहीं करता। तो कहानी कुछ यूं है जैसा कि मेरे दोस्तों ने मुझे सुनाया है। छन्नो चाची जब जवान हुआ करती थीं, पहले तो कमसिन कली की शादी कर दी जाती थी तब की बात है, उनके पति देव बोले तो जुम्मन चाचा मुम्बई जहाज पर काम करते थे और यहां छन्नो चाची,

अपनी जवानी को अकेले जिया करती थीं, और हर महीने मनी आर्डर भेजते थे। वो मनी आर्डर लेकर अक्सर डाकिए को आना होता था। पर जमाना देखो, कम पढी लिखीं छन्नो चाची को क्या पता कि जो पैसा डाकिया लेकर आता है वो उसके पति का होता है। हर महीने डाकिया पांच सौ रुपये लेकर आता और छन्नो चाची को थमा के उनको चोद के चला जाता। उस पैसे से खर्चे चलते उनके।

यह सिलसिला लगभग पांच साल तक चला जब कि उनके हसबैंड बोले तो जुम्मन चाचा पहली बार मुम्बइ से आए और पूछा कि डाकिया उनको पैसे तो देता था ना? तब उनको समझ आया कि वो हरामी पिल्ला उनको अपने पैसे नहीं बल्कि पति के पैसे देकर ही चोद के जाता था। खैर ये तो कहानी की भूमिका थी। चलिए चल्ते हैं पहली बार डाकिए द्वारा छन्नो की गांड की मस्ती छानने की कहानी पर। सच बताएं तो मेरे दोस्त की मोहन से बहुत ज्यादा पटती है और उसने सुनाई ये कहानी उसको चटखारे ले ले कर।

पहला मनीआर्डर दिसंबर की सर्दियों में आया, मोहन डाकिया एक गबरु जवान आदमी हुआ करता था। वह सुबह सुबह छन्नो के घर आया, ठंड के मारे सिकुड़ी हुई छन्नो ने अपने बदन को शाल में छुपा रखा था। और अंगीठी सेंक रही थी। मोहन भी जाकर बैठ गया, चूंकि छन्नो का घर गांव के किनारे है तो कोई भी आए जाए तो जल्दी दिखता नहीं है।

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मोहन अंदर गया और सिटकनी लगा दी। छन्नो चाची ने अपनी अंगीठी उठा के रख दिया और पानी लाने गयीं। मोहन ने देखा, उनकी सेक्सी गांड साड़ी के उपर से भी एक दम कयामत लग रही थी। ऐसी गांड पर कुर्बान जाएं लंड्। मोहन ने बस उस मनीआर्डर के पैसे से ही उनको चोदने के बारे में सोचने लगा। जैसे ही छन्नो आई, उसने पांच सौ का नोट जमीन पर गिरा दिया। उसे देखते ही छन्नो ने उठा के कहा कि इसे ले लिजिए, आपका है ना? मोहन ने कहा – अरे हां छन्नो, पर अगर तुझे जरुरत है तो रख लो।

छन्नो को जरुरत तो थी ही पैसो की, पर वो क्या जाने कि ये पैसा उसके ही पति का भेजा हुआ है। उसने आराम से वो पैसा अपनी कमर में बनाए थैले जिसे कि गांवों में अंटी कहते हैं, उसमें रखा और बोली, बदले में क्या लोगे मोहन? उसका इशारा साफ था। नैनों को मटका के उसने अपनी गांड तिरक्षी खड़ी कर के कहा। मोहन खड़ा हुआ और उसकी कमर पकड़ के मसलते हुए बोला। छन्नो बस एक बार दे दो, मैं तुम्हे हर महीने पैसे दिया करुंगा। छन्नो तो खुश हो गयी।
ठन्डी मे सिकुड़ी गांड और मोटा लन्ड

इतनी ठंड, पति इतना दूर और पैसे का अभाव। ऐस्से में एक गबरु जवान साथ दे और घर का हर खर्चा चलाए, क्या कहना। ये अच्छा आफर था। छन्नो ने वहीं अपना आंचल ढलका दिया। मस्त मस्त स्तन एक दम से किसी पहाड़ की तरह से खड़े थे। दोनों हाथों में भर कर के मोहन बोला “मेरी छन्नो, तुम बस मुझ पर ऐसे ही मेहरबानी करती रहो, मैं तुम्हें हर महीने पैसे पहुंचाता रहूंगा।” और मोहन ने उसकी साड़ी खोल दी। अब वह बस पेटीकोट और ब्लाउज में थी। आंगन में ही शुरु हो गये थे दोनों।

एक आम का पेड़ छोटा सा था आंगन में। वहीं उसके नीचे सारा खेल देसी स्टाइल में शुरु था। अपनी धोटी खोल कर मोहन डाकिये ने अपना मोटा गदह लंड निकाला और छन्नो को थमा दिया, छन्नो ने देखा, पति से दो गुना बड़ा हथियार उसके हाथ में था। चोली में पांच सौ का नोट और हाथ में आठ इंच का लन्ड्। क्या आफर था। उसने तुरत अपना पेटीकोट उठा कर अपनी गांड मोहन के आगे कर दी। मोहन ने आंगन में रखा जैतून का तेल उठाकर छन्नो की गोरी गांड के आबनूसी छेद पर मला और अपना खड़ा लन्ड अंदर पेल दिया।

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बहुत दर्द हो रहा था धन्नो को पर क्या करे, पैसे के लिए ये करना ही था। मोहन हरामखोर हराम के पैसो से गैर औरत की गांड मार रहा था। मोटा लंड गांड में जा ही नहीं रहा था, खड़े खड़े वो उसमें धांस रहा था, और छन्नो अपने दोनों हाथों से गांड को खोल कर चौड़ी करने का प्रयास भी कर रही थी। धीरे धीरे लन्ड ने गान्ड के रास्ते में अपनी जगह बनानी शुरु कर दी।

और छन्नो की मस्त सुगठित पिछवाडे के किले को खोलते हुए लन्ड गांड के साथ मेल कर रहा था। आधे घन्टे तक खड़े खड़े गांड मारने के बाद छ्न्नो को पेड़ पकड़ा कर वहीं आधी कुतिया स्टाइल में खड़ा करके पीछे से लन्ड चूत में टेलना शुरु कर दिया। हद्द से ज्यादा मजा अब छन्नो को अपनी सूखी पड़ी चूत में लंड के अकाल को खतम करके आ रहा था। पेलवाते हुए वो पेड के तने को पकड़ कर के कमर आगे पीछे हिलाती हुई लंड के उपर अपनी सख्त चूत के कड़े पकड को बनाए हुए थी। अरे भाई मोहन बताता है,

साली केला पेरने के मशीन की तरह से लंड का जूस निकाल देती है छन्नो। रुक रुक के स्पीड पकड़ते हुए मोहन ने उसकी चूत मारनी जारी रखी। उसने अपनी कुतिया स्टाइल का बेस्ट पर्फार्मेंस हमेशा दिया। आधे घन्टे तक वो अपनी चूत मरवाती रही और फिर जब वो झड़ने वाली थी, मोहन ने तेज झटकों से उसके चूत का फलूदा बना दिया। आखिर में गर्भवती होने से बचाने के लिए उसने अपना लन्ड निकाल के उसके गांड में डाल दिया और सारा लावा उगल दिया। तब से मोहन डाकिये द्वारा छन्नो की गांड मारने की कहानी ह्मारे गांव में प्रसिद्ध है।

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