ससुर बहू का मिलन-1

दोस्तो आपके लिए एक और मस्त कहानी पेश है हो सकता है कुछ लोगो ने ये कहानी पढ़ी हो लेकिन फिर भी मैं ये कहानी पोस्ट कर रहा हूँ और उम्मीद करता हूँ ये कहानी आपको पसंद आएगी —
मनोरमा शिशोदिया अपने गाँव राम नगर की बहुत सब से हसीन लड़की थी. रंग गोरा शरीन ऐसा की देखने वाला बस देखता रह जाए. वह पढने लिखने में एकदम सामान्य से लड़की थी, लेकिन गाँव के सारे लड़के यही तमन्ना करते थे कि किसी तरह मनोरमा उन पर मेहरबान हो जाए. ऐसा सुनने में आया है की मनोरमा जब भी मेहरबान हुई उन्होंने जाति, धर्म, आयु, कुंवारा या शादीशुदा के बीच में कोई भेद नहीं किया. मतलब ये है कि उन्होंने राम नगर में युनुस से चुदवाया जो १८ साल का नौजवान था और उनकी नुक्कड़ पर पंचर की दूकान थी. मनोरमा ने विवेक से पहली बार गांड मराने का अनुभव प्राप्त किया जो कॉलेज का टोपर था. उन्होंने एक बार ६० बर्षीय बेंछु से भी चुदवाया क्योंकि बेंछु की बीवी कई साल पहले भगवान् को प्यारी हो चुकी थी. मनोरमा के मन में सब के लिए बड़ा प्यार था.

मनोरम के लिए जब फुर्सतगंज से ठाकुरों के खानदान से रिश्ता आया, राम नगर तो मानों एक “राश्ट्रीय शोक” में डूब गया. जो लोग मनोरमा को चोद रहे थे वो तो दुखी थे ही, पर उनसे ज्यादा वो लोग दुःख में थें जिन्हें ये उम्मीद थी की उन्हें कभी न कभी मनोरमा को भोगने का मौका मिलेगा.

मनोरमा के पिता श्रीराम सिंह ने मनोरमा की शादी बड़ी धूमधाम से की. मनोरमा की मा के मरने के बाद श्रीराम सिंह का जीवन काफी कठिन रहा था, और वो चाहते थे की वो मनोरम के विवाह के बाद वो अपने जीवन के बारे में फिर से सोचेंगे.

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शहनाइयों के बीच मनोरमा शिशोदिया से मनोरमा ठाकुर बनी और अपने पति रवि ठाकुर के साथ उनकी पुशतैनी हवेली आयीं. उनके ससुर शमशेर ठाकुर फुर्सतगंज के जाने माने ज़मीदार थे और हवेली के मालिक भी. ठाकुर परिवार में शमशेर और उनके थीं बेटे थे. रवि सबसे छोटा बेटे था. अनिल और राजेश रवि के दो बड़े भाई थे. ये बात सभी को अजीब लगी को शमशेर सबसे पहले अपने सबसे छोटे बेटे का विवाह क्यों कर रहे हैं. श्रीराम सिंह की तरह शमशेर की पत्नी कई वर्ष पहले इश्वर को प्यारी हो चुकी थी. अनिल एवं राजेश ने कुंवारा रहने का निर्णय लिया हुआ था. राजेश और अनिल खेतों का पूरा काम देखते थे. मनोरमा का पति रवि तो बाद खेतों पर पार्ट टाइम ही काम करता था. वो बगल के शहर सहारनपुर में एक टेक्सटाइल मिल में काम करता था. मनोरमा ने अपने विवाह के बाद अपना काम ठीक से संभाला. शीघ्र ही वो हवेली और खेतों की मालकिन बन गयी. खेतों के मामले में उसने सारे काम किये, पर परिवार के मामले में मनोरमा ने और भी ज्यादा काम किये. मनोरमा को पता था की पूरे ठाकुर खानदान में वह एक अकेली औरत है. उसे पता था कि उसके परिवार में चार मर्द हैं जिन्हे उसकी जरूरत है. मनोरमा के जीवन में ये नया चैप्टर था.

उस दिन शाम को, मनोरमा के पति रवि की रात की शिफ्ट थी. वो शाम को ६:०० बजे उसे उसके अधरों पर एक चुम्बन दे कर अपनी मोटरसाइकिल में सवार हो कर अपनी नौकरी को करने टेक्सटाइल मिल चला गया. मनोरमा ने शाम के सारे काम सामान्य तरीके से किये. उसने स्नान किया, टीवी देखा और गुलशन नंदा की नावेल पढने लगी.

शमशेर और उसके दोनों बेटों ने मिल कर बियर पी और टीवी देखा, और उन्होंने मनोरम के जिस्म को अपनी भूखी नज़रों से देखा.
मनोरमा को ये बिलकुल इल्म नहीं था की उसेक ससुर और दोनों देवर उसके बदन को वासना की नज़र से निहार रहे हैं. सारे उसे किसी तरह से शीशे में उतारने की मन ही मन योजना बना रहे थे.

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मनोरमा जो इन सब बातों से अनजान थी थोडा जल्दी ही अपने बिस्तर पर चली गयी. उसे पता ही नहीं चला की कब उनकी आँख लग गयी. जवानी न जाने कैसे कैसे स्वप्न दिखाती है…. मनोरमा को जैसे चुदाई का कोई स्वप्न आया.. स्वप्न में उसे उसके गर्म बदन में कोई मादक आनंद की लहरें लगा रहा था…मनोरमा को बड़ा ही आनंद आ रहा था …. उसे लग रहा था मानों कोई गरम और बड़ा सा लंड उसकी चूत में अन्दर बाहर हो रहा हो….

घने अँधेरे कमरे में मनोरमा की नींद टूट गयी. उसने तुरंत महसूस किया की कोई चीज उसके पैरों के बीच में थी जो उसकी चूत चूस रही थी. शीघ्र ही उसने महसूस किया किया की कोई उसे जीभ से चोद रहा है.

उसे लगा कि ये उसका पति रवि है. उसने गहरी साँसों में बीच गुहार लगाईं, “ओह राजा,चूसो मेरी चूत को”

मनोरमा ने अपनी गांड पूरी उठा ली ताकि वो अपनी चूत पूरी तरह से चुसाई के के लिए समर्पित कर सके. उसी समय उसने महसूस किया की चूत चूसने वाले ने अपने दोनों हाथ उसकी जाँघों पर रखे और अपने लंड को उसकी चूत के मुहाने पर रख दिया. उसकी साँसें भारी हो रही थीं. एक ही ठाप में पूरा का पूरा लंड मनोरमा की चूत के अन्दर हो गया.

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