बस मे मिली एक अंजन लेडी

हेलो दोस्तो, मैं रमेश (नाम चेंज्ड) हूँ ये मेरी पहली कहानी है जिसने मेरी ज़िंदगी मे सेक्स की मनोकामना को जगाया है अगर कोई भूल हो तो मुझे माफ़ करना, ये कहानी दो महीने पुरानी है जब मैं अहमदाबाद से पटना जा रहा था इस सफ़र ने मेरी औरतो के प्रति सेक्स की इछा को जगाया है अब मैं हर औरत को सेक्सी नज़र से देख ने लगा हूँ, दोस्तो आपका ज़्यादा समय खराब ना करते हुए मैं अपनी कहानी पे आता हूँ, करीब 3:30 पीयेम पे मैं अहमदाबाद पल्ड़ी स्टेशन पे खड़ा था पटना जाने वाली बस को पिकप करने के लिए, करीब 10 से 15 मिनट वेट करने के बाद बस आई वो सूरत से पटना जा रही थी, बस मे काफ़ी भीड़ थी पर मैं जैसे-तैसे करके उसमे चढ़ गया बस मे भीड़ होने के कारण मुझे बैठने के लिए जगा नही मिली थी तो मैं कनडक्टर की सीट के सामने खड़ा हो गया और बस चलने लगी, तब मैने पूरी बस मे देखा की कही मुझे सीट मिल जाए तो मैं बैठ सकूँ लेकिन कोई सीट नही मिली.

लेकिन मैने महसूस किया की एक सेक्सी लेडी को देखा जो बार-बार मेरी तरफ देख रही थी, वो लगभग 24 साल की होगी बाद मे उसने अपना नाम सोनल बताया था (30,28,30) मैने पहले तो उस पर ध्यान नही दिया पर जब बस एक स्टॉप पर आके रुकी तो उसकी बगल वाली सीट खाली हो गयी और उसने मुझे वाहा आने का इशारा किया मैं झट से वाहा पे जाके बैठ गया और बस चलने लगी और मैने अपना सारा समान सेट किया और बैठ के सफ़ारी पढ़ने लगा ही था की वो सेक्सी लेडी थोड़ी हिलने लगी जैसे वो जता रही थी की उसको अनकमफर्टबल फील हो रहा है और वो मुझसे थोड़ी सॅट के बैठ गयी, जैसे की मैने बताया की मैं पहले ऐसे किसी लेडी से सॅट के नही बैठा था इस लिए ये मेरा पहला अनुभव था और मुझे कुछ अजीब सा लगा पर बाद मे मुझे अछा लगने लगा था की हमारी बस वाहा चात्राल चौकड़ी तक पहोच गयी थी, वाहा पे ब्रिड्ज बनने का काम चालू था तो वाहा रोड कच्चा था इस लिए हमारी बस उसपर चलने लगी तो उस लेडी के बूब्स को मेरे हाथ टच होने लगे.

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मुझे बहुत अछा लगा पर डर भी लग रहा था मैने ऐसे थोड़ी देर रखा फिर वो कच्चा रास्ता ख़तम हो गया तो डर की वजा से मैने अपना हाथ हटा लिया, पर ये क्या? उसने तो मेरे हाथ को टच करके अपनी और आने का इशारा किया तो मैं समझ गया की इसका तो अब ग्रीन सिग्नल मिल गया है, तो मैने भी उसके बूब्स को धीरे-धीरे अपनी कोहनी से दबाने लगा, क्या कयामत के बूब्स थे यारो एक दम मख्खन की तरहा मुलायम और रेशम की तरह सॉफ्ट थे, हम ज़्यादा कुछ नही कर सकते थे क्योकि बस मे और भी लोग थे, ये सील-सिला तब तक चला जब तक हम महेसना पोहोच गये, वाहा पे बहोत सारे लोग उतर गये तो मुझे मौका मिल गया और मैने उसके बूब्स को टच करने लगा उस समय मैं जन्नत की सैर कर रहा था, वा मज़ा आ गया मेरा लॅंड तो जब से वो मुझको सॅट के बैठी थी तब से खड़ा हो गया था, उसके बूब्स दबाते-दबाते उसका हाथ मेरे टैंट की तरह खड़े हुए लॅंड पर आया और मैने अपनी ज़िप खोल के उसको लॅंड पकड़ा दिया.

पर उसके पहले मैने सावधानी बरती और मेरा बैग अपने पास लाके ऐसे रख दिया की दूसरा कोई देख ना ले, मेरा लॅंड उसने अपने हाथ मे लेते हुए हिला ना शुरू कर दिया तो मुझे लगा की मैं किसी जन्नत की सैर कर रहा हूँ, ये सिलसिला 20 मिनट तक चलता रहा और उसके बाद कुछ और लोग बस से उतर गये जो मेरे बाजू वाली सीट के पीछे बैठे थे इस से मुझे आसान हुआ की कोई देख ना ले और बस चलने लगी, तो हमने अपना कार्यक्रम शरु कर दिया इस टाइम मैं भी उसके बूब्स को बहोत ज़ोर-ज़ोर से दबाने लगा वो बोली की थोड़ा धीरे करो ना दर्द हो रहा है और उसके बाद मैने वाहा पे उसके ब्लौस का एक बटन खोलने को कहा तो वो मना करने लगी, लेकिन मेरी काफ़ी रिक्वेस्ट करने के बाद उसने अपना बटन खोला और मैं उसके बूब्स को चूसने लगा और क्या मज़ा आ रहा था अहहहहाअ वो उफहहहा ह हम्म ऐसी आवाज़े निकल रही थी, फिर थोड़ी देर ऐसा चलता रहा और हमे टाइम का पता ही नही चला कहा निकल गया.

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और कंडक्टर ने बोला की स्टेशन आ गया है कोई उतर ने वाला है तो वो चौकी और क्यो की उसका स्टेशन उस स्टेशन से 2 किमी की दूरी पर ही था तो वो उतरने की तैयारी करने लगी तो मैने उसको बोला की तुम्हारा नंबर दो तो वो बोली की नही तुम मुझे अपना नंबर दो मैं तुम्हे फोन करूँगी, तो मैने झट से अपनी बॅग मे से पेपर-पेन निकाल के उसको अपना नंबर दे दिया और वो चलने लगी पर जाते-जाते उसने अपना नाम सोनल बताया था और वो बस से उतरने के बाद मुझे बाइ करने लगी अपना हाथ हिला कर और 30 मिनट बाद बस पटना पहोच गयी थी और मैं उतर कर अपने काम पर चला गया और उसकी कॉल का इंतेज़ार करने लगा, आज भी मैं उसकी कॉल का इंतेज़ार कर रहा हूँ पर उसकी कॉल अभी तक नही आई पर मेरी ज़िंदगी का वो पहला अनुभव था और वो मुझे पूरी ज़िंदगी याद रहेगा उसके बाद जब भी मैं बस मे जाता हूँ तो अपनी सीट ऐसे कोई लेडी के बाजू मे ही ढूढ़ता हूँ ताकि शायद कोई ऐसी और मिलजाए.

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