बुरा न मानो होली है 2

बुरा न मानो होली है मैने कहा, “बाबुजी अब आप चिंता मत किजिये , “साली खूद् साफ नही करेगी तो मै ही झांट साफ कर दुंगा. “
मां किचन गयी और वहा से अपना साया और ब्लाउज लेकर आयी.
साया पहनते हुये मां ने कहाँ , “पुछो अपने बेटे से कि उसे मां के साथ होली खेलने में मजा आया कि नही.”
“बहुत मजा आया मां. सिर्फ पिचकारी से रंग डालना बाकी रह गया वो बाद मे डाल लूंगा.”

मां ने साया और ब्लाउज पहन लिया था लेकिन वैसा नही जैसा पहले पहना था. मै कुछ बोलता, उस से पहले बाबुजी ने वो बात कह दी जो मै कहना चाहता था… ”रानी, ऐसे क्या पहन रही हो.? आज होली है, ऐसा पहनो की हुम लोगों को कुछ ना कुछ माल दिखता रहे…”

“बोलो तो , नंगी ही रहूं. “ कह कर मां ने साया खोल दिया और नंगी हो गई. बूर को उचकाते हुये कहा, “अब ठीक है ना…बाबुजी (दादाजी) को भी बहू का बूर देखना अछ्छा लगेगा..”

“क्या मां, तुम भी….” कहते हुये मै मां के पास गया और साया उठाकर इस तरह बांधा कि साया के उपर से काली काली झांटे दिखाई देने लगी. साया ठीक करने के बाद मैने ब्लाउज का उपर क बटन तोड दिया और कपर्डेल को थोडा फैला दिया. अब मां की चुची उपडी हिस्सा और दोनो चुची का मिलन स्थल पुरा दीख रहा था.

“बेटा , मुझे इस तरह देख कर तेरे दादाजी आज हत्तू मारेंगे और अपनी बहु कि चूत का सपना देखेंगे…” मां ये कहते हुये अपने कमरे मे चली गयी.
मां के वंहा से हटते ही बाबुजी ने कहा, “ बेटा , लगता है तु मां को चोदना चाहता है..”

“हां बाबुजी , पिछले 6 साल से मां को चोदने का मन है , लेकिन आप से डर लगता है..”

आज अछ्छा मौका था , बाबुजी के सामने मां को नंगा कर पूरा मजा लिया और उस से पहले मा ने चूत को भर-पूर चोदने दिया. बस अब बाबुजी को मनाना था कि मै जब चाहू मां को चोद सकुं. हिम्मत करके मैने कहा,
“बाबुजी , अब अगर मां की बूर मे लौडा नही पेल पाउंगा तो मै पागल हो जाउंगा…मां के चूत के चक्कर मे ही मै रंडीओ के पास जाने लगा ..जब भी मै किसी भी रंडी को चोदता हूं तो यही सोच सोच कर चुदाई करता हूं कि मै किसी रंडी को नहीं अपनी मां की चूत मे लौडा पेल रहा हूं.. ”

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मैने अन्धेरे मे एक तीर फेंका, “ बाबुजी मै आज वादा करता हूं कि जब मेरी शादी होगी तो आपको अपनी बीबी चोदने को दुंगा ..बस बाबुजी आप मा को बोलीये कि मुझसे चुदवाये , जब भी मै चाहु…”
मै डर् रहा था कि बाबुजी क्य बोलेंगे , डांटेगे लेकिन नही, बाबुजी को शायद अपनी अनदेखी बहु कि चूत का ख्याल आ गया और बाबुजी खडे हो गये और प्यार से मुझे गाल पर एक चपत मारी और कहा, “अब से तेरा जब मन करें , मां को चोद, मेरे सामने भी और मेरे पीछे भी, मै उसको बोल दुंगा , तुझे खुब मजा दे…लेकिन बस , इतना ध्यान रखना कि किसी को कुछ पता ना चले…
मैने मन ही मन कहा, “ मां आज दादाजी और मुझसे चुद्वायी तो आपको पता चला क्या..”
जो भी हो, मै बहुत खुश था कि मै अपनी सबसे प्यारी माल को जब चाहूं चोद सकता था.
तभी बाहर दरवाजे पर दस्तक हुई.

दादाजी अन्दर आये और मां अन्दर से बाहर आई. हम सबने मां की झांटे और चुची देखी. दादाजी के आंखो मे चमक आ गयी और मां ने दादाजी को आंख मारी और किचन चली गयी.

अन्दर जाते जाते उसने कहा, “आप लोग सब स्नान कर लिजीये..फिर खाना खायेंगे.”

हम लोग एक दुसरे को नहाने के लिये बोल रहे थे .मै चाहिये रहा था कि बाबूजी और दादा पहले नहाने जायें तो मै मां के साथ एक चुदाई और कर लुं. यही इछ्छा दादा की भी रही होगी तभी दादा भी बाद मे नहाने की बात कर रहे थे. तभी बाहर दरवाजे पर फिर दस्तक हुई. मां किचन से बाहर आयी और हमरे पास आकर कहा कि हम सभी कमरे के अन्दर ही रहें और जब तक मां ना बोले, कोई कमरे से बाहर ना आये. मालती वापस घूमी तो मेरा कलेजा और कलेजा के साथ लौडा खुश हो गया. पीछे से मां कि चुत्तरो का उपरी मिलन स्थल दीख रहा था. हुम मांसल चुतारो को देखते रहे और वो गान्ड हिलाती हुयी चली गयी दरवाजा खोलने. दर्वाजे पर दुबारा दस्तक हुई . मां ने कुन्डी खोला और तीन लडके अन्दर आये. मां ने दरवाजा बन्द किया और उन तीनो में जो बडा लडका था उसे गले लगाकर बांहो मे दबाया. उस लडके ने मां की गालो को चूमा और फिर वो तीन लडके को लेकर मां बरामदे पर आयी. तब मै और बाबुजी ने उस बडे लडके को पहचाना. वो बल्लु था जो चार साल पहले तक हमारे यहां पुराने मकान मे काम करता था. ज़ब मैने उसे आखरी बार देखा था वो 12-13 का दूबला पतला लडका था . हुमने जब मकान बदला तो उसने यह कहकर काम करना बन्द कर दिया था कि हमारा घर उसके घर से बहुत दूर है और आज वही साला मां से होली खेलने के लिये इतनी दूर आया. अब बल्लु 16-17 का साल का जवान हो गया था. दीखने मे हट्टा कठ्ठा था और करीब 5’7” लम्बा था. उसके साथ जो 2 लडके थे वे बल्लु से छोटे थे करीब 14-15 साल के , उनकी दाढी मुंछ भी ठीक से नही नीकली थी. हम सब ने देखा कि बल्लु बार बार मालती को चूम रहा है और साथ ही कभी चुची पे तो कभी साया के उपर से चूत को सहला रहा है.
मां तीनो को लेकर बिलकुल हमारे नजदीक बरामदे पर आ गयी. अब हमें उनकी आवाज भी साफ साफ सुनाई देने लगी थी.. मां – “ये दोनो कौन है..”
बल्लु- मेरे दोस्त है, मै इन्हे दूनिया की सबसे मस्त माल दिखाने लाया हुं.” मां – धत्त ..बोल क्या खायेगा…
बल्लु.. “जो खिलाओगी खाउंगा लेकिन पहले थोडा रंग तो खेल ले..” बल्लु आगे बढा.
मां थोडा पीछे हट् गयी और कहाँ , “ मै तुमसे नाराज हु, तु पीछ्ली होली मे रंग खेलने क्यो नही आया…मै दिन भर तेरा इंतजार करती रही… आज तुझे दो साल के बाद देखा है… लगता है कोई दुसरी मुझसे अछ्छी माल मिल गयी है.. ”

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