बूढ़ो मे भी दम है –1

कुच्छ घटनाएँ ऐसी होती हैं जिसमे आदमी खूदबखुद खींचता चला जाता है. चाहे वो चाहे चाहे ना चाहे. आदमी कितना भी समझदार हो लेकिन कभी कभी उसकी समझदारी उसे ले डूबती है. ऐसी ही एक घटना मेरे साथ हुई थी. जिसे आज तक मेरे अलावा कोई नही जानता है. आज मैं यही बात आपसे शेर करती हूँ.

मैं रोज़ी रोड्रिक्स, वाइफ ऑफ जोसेफ रोड्रिक्स, एज 32 वॉरली मे रहती हूँ. मेरे हज़्बेंड एक एलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी मे काम करते हैं. मैं भी एक छ्होटी सी सॉफ्टवेर कंपनी मे काम करती हूँ. ये बात काफ़ी साल पहले की है तब हम शहर से दूर मलाड के पास एक फ्लॅट मे रहते थे. हमारी शादी उसी फ्लॅट मे हुई थी. मीया बीवी अकेले ही उस फ्लॅट मे रहते थे. उस फ्लॅट मे हमसे ऊपर एक फॅमिली रहता था. उस फॅमिली मे एक जवान कपल थे नाम था सपना और दीपांकर. उनके कोई बच्चा नही था. साथ मे उनके ससुर जी भी रहते थे. उनकी उम्र कोई 60 साल के आस पास थी उनका नाम राज शर्मा था मैं सपना से बहुत जल्दी काफ़ी घुल मिल गयी. अक्सर वो हमारे घर आती या मैं उसके घर चली जाती थी. मैं अक्सर घर मे स्कर्ट और टी शर्ट मे रहती थी. मैं स्कर्ट के नीच छ्होटी सी एक पॅंटी पहनती थी. मगर टी शर्ट के नीचे कुच्छ नही पहनती थी. इससे मेरे बड़े बड़े बूब्स हल्की हरकत से भी उच्छल उच्छल जाते थे. मेरे निपल्स टी शर्ट के बाहर से ही सॉफ सॉफ नज़र आते थे.

सपना के ससुर का नाम मैं जानती थी. उन्हे बस शर्मा अंकल कहती थी थी. मैने महसूस किया शर्मा अंकल मुझमे कुच्छ ज़्यादा ही इंटेरेस्ट लेते थे. जब भी मैं उनके सामने होती उनकी नज़रें मेरे बदन पर फिरती रहती थी. मुझे उन पर बहुत गुस्सा आता था. मैं उनकी बहू की उम्र की थी मगर फिर भी वो मुझ पर गंदी नियत रखते थे. लेकिन उनका हँसमुख और लापरवाह स्वाभाव धीरे धीरे मुझ पर असर करने लगा. धीरे धीरे मैं उनकी नज़रों से वाकिफ़ होती गयी. अब उनका मेरे बदन को घूर्ना अच्च्छा लगने लगा. मैं उनकी नज़रों को अपनी चूचियो पर या अपने स्कर्ट के नीचे से झाँकती नग्न टाँगों पर पाकर मुस्कुरा देती थी

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सपना थोड़ी आलसी मक़ीला थी इसलिए कहीं से कुच्छ भी मंगवाना हो तो अक्सर अपने ससुर जी को ही भेजती थी. मेरे घर भी अक्सर उसके ससुर जी ही आते थे. वो हमेशा मेरे संग ज़्यादा से ज़्यादा वक़्त गुजारने की कोशिश मे रहते थे. उनकी नज़रे हमेशा मेरी टी शर्ट के गले से झाँकते बूब्स पर रहती थी. मैं पहनावे के मामले मे थोड़ा बेफ़िक्र ही रहती थी. अब जब जीसस ने इतना सेक्सी शरीर दिया है तो थोड़ा बहुत एक्सपोज़ करने मे क्या हर्ज़ है. वो मुझे अक्सर छुने की भी कोशिश करते थे लेकिन मैं उन्हे ज़्यादा लिफ्ट नही देती थी.

अब असल घटना पर आया जाय. अचानक खबर आई कि मम्मी की तबीयत खराब है. मैं अपने मैके ईन्दोर चली आई. उन दिनो मोबाइल नही था और टेलिफोन भी बहुत कम लोगों के पास होते थे. कुच्छ दिन रह कर मैं वापस मुंबई आ गयी. मैने जोसेफ को पहले से कोई सूचना नही दी थी क्योंकि हमारे घर मे टेलिफोन नही था. मैं शाम को अपने फ्लॅट मे पहुँची तो पाया की दरवाजे पर ताला लगा हुआ है. वहीं दरवाजे के बाहर समान रख कर जोसेफ का इंतेज़ार करने लगी. जोसेफ शाम 8.0 बजे तक घर आ जाता था. लेकिन जब 9.0 हो गये तो मुझे चिंता सताने लगी. फ्लॅट मे ज़्यादा किसी से जान पहचान नही थी. मैने सपना से पूच्छने का विचार किया. मैने उपर जा कर सपना के घर की कल्लबेल्ल बजाई. अंदर से टी.वी. चलने की आवाज़ आ रही थी. कुच्छ देर बाद दरवाजा खुला. मैने देखा सामने शर्मा जी खड़े हैं.

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” नमस्ते….वो.. सपना है क्या?” मैने पूछा.

” सपना तो दीपांकर के साथ हफ्ते भर के लिए गोआ गयी है घूमने. वैसे तुम कब आई?”

” जी अभी कुच्छ देर पहले. घर पर ताला लगा है जोसेफ…?”

” जोसेफ तो गुजरात गया है अफीशियल काम से कल तक आएगा.” उन्हों ने मुझे मुस्कुरा कर देखा ” तुम्हे बताया नही”

” नही अंकल उनसे मेरी कोई बात ही नही हुई. वैसे मेरी प्लॅनिंग कुच्छ दिनो बाद आने की थी.”

“तुम अंदर तो आओ” उन्हों ने कहा मैं असमंजस सी अपनी जगह पर खड़ी रही.

“सपना नही है तो क्या हुआ मैं तो हूँ. तुम अंदर तो आओ.” कहकर उन्हों ने मेरा हाथ पकड़ कर अंदर खींचा. मैं कमरे मे आ गयी. उन्हों ने आगे बढ़ कर दरवाजे को बंद करके कुण्डी लगा दी. मैने झिझकते हुए ड्रॉयिंग रूम मे कदम रखा. जैसे ही सेंटर टेबल पर नज़र पड़ी मैं थम गयी. सेंटर टेबल पर बियर की बॉटल्स रखी हुई थी. आस पास स्नॅक्स बिखरे पड़े थे. एक सिंगल सोफे पर कामदार अंकल बैठे हुए थे. उनके एक हाथ मे बियर का ग्लास था. जिसमे से वो हल्की हल्की चुस्कियाँ ले रहे थे. मैं उस महॉल को देख कर चौंक गयी. शर्मा अंकल ने मेरी झिझक को समझा और मेरे कंधे पर हाथ रखते हुए कहा,

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