बुड्ढे सिर से मा चुदवाने के प्लान की कहानी

ही गेज़, मैं आज एक न्यू स्टोरी के साथ हाज़िर हुआ हू. इसमे आपको बतौँगा कैसे मैने एक बुड्ढे की मदद की अपनी मम्मी को छुड़वाने में.

मेरी मम्मी का नामे रज़िया है, और मम्मी की आगे 38 यियर्ज़ है.

मम्मी का क़द 5’8″ है. उनका रंग दूध की तरह वाइट है. मम्मी का फिगर 36-30-36 है. हमारे मोहल्ले का हर आदमी मम्मी को पटना चाहता था. लेकिन मम्मी किसी के हाथ नही आती थी.

घर पर मैं और मम्मी ही रहते है. पापा आर्मी ऑफीसर है, इसलिए वो 6 मंत्स के बाद आते है. मैं शुरू से ही पढ़ाई में आवरेज था. एक दिन कॉलेज में अपने दोस्त के मोबाइल पर गंदी वीडियो दाख रहा था, की मुझे मेरे टीचर ने पकड़ लिया.

टीचर का नामे उद्धी सिर था. उद्धी सिर हमारे घर के पास ही रहते थे. सिर की आगे 50 यियर्ज़ थी. उद्धी सिर का क़द छ्होटा था तकरीबन 5’5″. काफ़ी मोटे थे, और रंग एक-दूं काला. सिर से गंजे थे.

उद्धी सिर की शादी हुई थी, लेकिन उनकी बदसुरती की वजह से 1 साल बाद ही डाइवोर्स हो गया था. उसके बाद से वो अकेले रहते थे. उद्धी सिर मुझसे बोले-

उद्धी सिर: ये क्या काम कर रहा है? बतौ तेरी मम्मी को?

मैं: सिर प्लीज़ नही. मम्मी को नही बताना.

उद्धी सिर: अपनी आगे देख, और अपने काम. तेरी मम्मी को बताना पड़ेगा.

मैं: सिर प्लीज़ एक मौका दो, जो आप बोलेंगे मैं करूँगा, पर मम्मी को ना बताना.

उद्धी सिर: फिर एक मेरा काम कर दे. अब तुझसे क्या शरमाना.

मैं: जी सिर बोलिए.

उद्धी सिर: अपनी मम्मी को मुझसे छुड़वा दे. तुझको क्लास में फर्स्ट पोज़िशन दिलवा दूँगा.

मैं: सिर आप क्या बोल रहे है?

उद्धी सिर: सोच ले, मेरा काम कर दे. वरना तेरी मम्मी को सब बता दूँगा.

मैं: सिर प्लीज़, मैं कुछ करता हू. आप किसी को ना बताना.

मेरी बात सुन कर उद्धी सिर खुशी से चले गये, और मैं सोचने लग गया की क्या करू. ये बुद्धा तो मेरी मम्मी को बड़ी बुरी तरह से छोड़ेगा.

शाम में मम्मी ने मुझको क्रिकेट खेलने की वजह से काफ़ी मारा, जिसकी वजह से मुझको बड़ा गुस्सा आया. फिर मैने सोचा मम्मी को अब उद्धी सिर से छुड़वा कर ही अपना बदला लूँगा.

हर थर्स्डे मैं स्विम्मिंग सीखने स्विम्मिंग क्लब जाता था. कभी-कभी मम्मी भी मेरे साथ जाती थी. उधर स्टूडेंट्स के लिए अलग पूल था, और बडो के लिए अलग. मैने मम्मी को ज़िद करके अपने साथ पूल जाने पर माना लिया. जब मम्मी मान गयी तो मैने उद्धी सिर को कॉल मिलाई, और उनको सब बताया की थर्स्डे को किस तरह हम स्विम्मिंग पूल जाएँगे.

थर्स्डे को मैं कॉलेज से आने के बाद मम्मी के साथ स्विम्मिंग क्लब चल दिया. जब हम स्विम्मिंग क्लब पहुँचे, तो मैने चेंजिंग रूम से अपनी ड्रेस चेंज की. मम्मी भी उधर अक्सर जाती रहती थी, तो मम्मी ने भी चेंजिंग रूम में जेया कर एक शॉर्ट लेगैंग्स और एक शर्ट पहन ली.

मम्मी वैसे ये ड्रेस कभी नही पहनती थी. लेकिन मम्मी को पता था की उधर क्लब में कोई जाने वाला नही होता, इसलिए मम्मी ये ड्रेस पहन लेती थी.

जब मम्मी वो ड्रेस पहन कर बाहर आई, तो वो काफ़ी हॉट लग रही थी. शॉर्ट लेगैंग्स सिर्फ़ मम्मी की आधी टाँगो तक थी, और शर्ट भी काफ़ी टाइट थी. उसके नीचे मम्मी ने रेड ब्रा पहनी हुई थी. वो अभी से नज़र आ रही थी.

मम्मी अपने बालों को पीछे बाँधते हुए पूल पर पहुँची. इस वक़्त पूल में कोई नही था, सिर्फ़ उद्धी सिर थे, जो एक कोने में पानी में खड़े थे. मम्मी पूल के पास आई, और पानी में कूद गयी. फिर जब मम्मी ने अपना मूह पानी से बाहर निकाला, तो मम्मी पूरी पानी में भीगी हुई थी.

मम्मी की रेड ब्रा अब सॉफ दिख रही थी. उद्धी सिर ने जब मम्मी को इस तरह देखा, तो उनका तो लोड्‍ा खड़ा हो गया. वो मम्मी के पास गये और बोले-

उद्धी सिर: रज़िया तुम तो बड़ी अची स्विम्मिंग कर लेती हो.

मम्मी उनको देख कर एक-दूं शॉक सी हो गयी, क्यूंकी वो उस टाइम इतनी बोल्ड ड्रेस में थी. उद्धी सिर की नज़र मम्मी की रेड ब्रा पर थी. मम्मी ने अपने हाथो से अपने बूब्स को कवर किया और बोली-

मम्मी: मैं कॉलेज में स्विम्मिंग की चॅंपियन थी, इसलिए इतनी अची स्विम्मिंग करती हू.

उद्धी सिर: चॅंपियन तो हम भी थे, अपने ज़माने में.

मम्मी: अछा, लेकिन इतना मोटा जिस्म लेकर आप चॅंपियन कैसे बन गये?

उद्धी सिर: आप मेरे मोटे होने का मज़ाक उड़ा रही है? आपको तो मैं अपने मोटे जिस्म से अभी भी हरा डू.

अब मम्मी काफ़ी कंफर्टबल हो गयी थी, इसलिए उद्धी सिर का मज़ाक उड़ा रही थी.

मम्मी: चलो देख लेते है कों जीत-ता है.

उद्धी सिर: ऐसे नही, कोई बेट लगा कर रेस लगाएँगे.

मम्मी: बिल्कुल बेट तो होनी चाहिए.

उद्धी सिर: बोलो फिर किया बेट लगाए?

मम्मी: जो जीटा हारने वाला उसको आज का डिन्नर करवाएगा.

उद्धी सिर: ठीक है, फिर तो ऐसी रेस रोज़ होनी चाहिए.

मम्मी: आज तो आप जीतीए, फिर रोज़ ही रख लेंगे.

फिर मम्मी और अंकल दोनो पूल से बाहर आए. मम्मी की टाइट गांद उस लेगैंग्स में बहुत हॉट लग रही थी.

उद्धी सिर और मम्मी दोनो ने रेस लगाई. मम्मी जवान भी थी, और फिट भी, इसलिए मम्मी उद्धी सिर से रेस जीत गयी. रेस जीत कर मम्मी बहुत कुश थी. वो बोली-

मम्मी: कहा था ना आपसे, मैं चॅंपियन हू.

उद्धी सिर: बिल्कुल तुम तो चॅंपियन हो.

मम्मी: अब बताओ कब कारवाओगे डिन्नर?

उद्धी सिर: जब तुम बोलॉगी.

मम्मी: आज रात को ही कारवओ फिर.

उद्धी सिर: चलो मैं आज 8 बजे तुमको तुम्हारे घर से पिक कर लूँगा.

मम्मी: ओक.

फिर दोनो 30 मिनिट्स तक एक-दूसरे से काफ़ी बातें करते रहे. उसके बाद मैं और मम्मी वापस आ गये. घर आ कर मम्मी बोली-

मम्मी: आज शाम को तैयार हो जाना. उद्धी सिर ने डिन्नर करना है.

मैं: क्यूँ मम्मी?

मम्मी: मैं उनसे बेट जीती हू.

मैं: अछा आप और उद्धी सिर दोनो दोस्त भी बन गये?

मम्मी: तुझको किसने बोला, हम दोस्त है?

मैं: दोस्तों में ही बेट के मुक़ाबले होते है.

मम्मी: दोस्त नही हू, बस वैसे ही लगा ली.

मैं: तो आप बन जाओ उनकी दोस्त. वैसे भी उनका कोई दोस्त नही है, और आपका भी.

मम्मी: तुझको बड़ी फिकर है मेरे दोस्तों की?

मैं: आप और उद्धी सिर दोस्त बन जाओगे, तो मुझको कॉलेज में फ़ायदा हो जाएगा.

मम्मी: अछा जी.

फिर 8 बजे मम्मी डिन्नर करने के लिए तैयार हो गयी. मम्मी ने एक जीन्स और ब्लॅक कमीज़ पहनी थी, और मम्मी काफ़ी खूबसूरत लग रही थी.

उद्धी सिर आए तो मैने बहाना बना दिया पेट में दर्द का. इस वजह से मम्मी और उद्धी सिर दोनो डिन्नर पर चले गये.

उद्धी सिर ने मम्मी को काफ़ी अची जगह से डिन्नर करवाया. मम्मी भी उद्धी सिर से काफ़ी इंप्रेस होई. रात में मम्मी ने मुझसे बोला-

मम्मी: बेचारे दिखने में सिर्फ़ बदसूरत है. लेकिन दिल के बहुत आचे है.

मैं: बिल्कुल मम्मी, तभी तो मैं आपको उनका दोस्त बना रहा हू.

मम्मी: बन जौंगी उनकी दोस्त, तू बस अपना काम कर.

फिर मैं सो गया. इससे आयेज क्या हुआ, वो आपको अगले पार्ट में पता चलेगा. आपको मेरी स्टोरी कैसी लगी मुझको एमाइल लाज़मी करना.

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