बुआ ने दिया अपने बेटे और भतीजे को मज़ा

मेरी पिछली स्टोरी में आपने पढ़ा की कैसे बस से जाते हुए हम दोनो गरम हुए, और कैसे मेरे बेटे का लंड देख के मैं मस्त हो गयी थी. फिर उसने मेरी छूट के उपर अपना मूठ छ्चोढा और मेरी पनटी खुद पहन ली. अब हम मेरे माइके में पहुँच गये थे. अब आयेज-

मेरे माइके में राहुल के मामा-मामी के अलावा रमेश जिसके बारे में मैने आपको बताया था, और मेरी मा है. मेरे पापा की पिछले साल डेत हो गयी थी. मेरी दो बहने है, दोनो शादी-शुदा है. मैं आपको बता डू हमारे खेत है 3-4, तो मेरे भैया-भाभी ज़्यादा खेत पर ही रहते है और घर के सब लोग खेत पर ही नहाते है. क्यूंकी घर में बातरूम नही है.

मैं आई, तो सब कुश होके साथ बैठ के बातें कर रहे थे. रमेश भी वही बैठा मेरे बूब्स घूर रहा था. वो लंड पंत के उपर से मसल रहा था, जो मैं देख रही थी, और उसके लंड का साइज़ सोचने में लगी थी. ऐसे ही शाम को गयी. भैया मा के साथ मंदिर गये थे, और भाभी किचन में थी.

अब अंदर कमरे में रमेश और मेरा बेटा राहुल शायद मुझे ही छोड़ने की बातें कर रहे थे. मैने सोचा उनके मज़े लेने का, तो मैं राहुल से पनटी वापस लेने के बहाने अंदर गयी और बोला-

मे: राहुल क्या बातें कर रहे हो दोनो (तोड़ा गुस्से से)?

रमेश: कुछ नही बुआ, वो तो बस ऐसे ही. (फिर वो मेरे बूब्स घूरते हुए बोला) आज आप बहुत मस्त लग रही हो.

मैं अंदर से खुश हो रही थी, लेकिन उसके पास जेया कर एक छाँटा लगाया उसको.

मे: रमेश और राहुल दोनो बहुत बिगड़ गये हो. (तोढा गुस्से में बोली) राहुल मेरी पनटी वापस कर दे, और ये अंडरवेर पहन ले तेरी.

वो ज़ोर से ज़ोर से हासणे लगा और बोला-

रमेश: मज़े है तेरे राहुल.

राहुल: लेकिन मम्मी चेंज कहा करू? अंदर चला जाता हू.

मे: अंदर मामी काम कर रही है. तू यही कर ले, अपनी मा से क्या शरमाना?

राहुल: लेकिन मम्मी रमेश भी देखेगा.

मुझे रमेश का भी देखने का मॅन कर रहा था, तो मैं बोली-

मे: रमेश तू भी पंत चड्डी उतार ताकि उसे शरम ना आए.

वो तुरंत मान गया क्यूंकी उसको भी मुझे लोड्‍ा दिखना था. फिर वो दोनो नीचे से नंगे हो गये. दोनो के लंड डंडे से जैसे खधे हो कर ऐसे लग रहे थे, जैसे मुझे घूर रहे हो. मैं सोच रही थी ये दोनो ने अगर एक साथ मुझे छोड़ा तो मेरी जान ही निकाल देंगे. फिर राहुल ने मुझे मेरी पनटी वापस दी. अब मैं तोड़ा मूड में बोली-

मे: उतारी तूने थी तो पहना भी तू ही (मैं रमेश को तडपा रही थी).

उसने मेरे पैरों में पनटी डाली और सारी जाँघ तक उठा दी, जिससे मेरी जांघें दिख रही थी. अब मेरी मोटी गोरी-गोरी जांघें रमेश के सामने थी. वो आँखें फाड़ के मुझे देख रहा था. उसके सामने जन्नत आने वाली थी. उसने एक हाथ से अपना लोड्‍ा मज़बूती से पकड़ रखा था.

तभी राहुल ने पनटी जाँघ तक की, और सारी गांद से उठाने लगा. मैने राहुल को रोक दिया, और दूसरे रूम में जेया कर पनटी पहनी, जिससे रमेश मेरी छूट नही देख पाया, और मैं दोनो की बातें सुनने लगी.

रमेश: साली कामिनी औरत है तेरी मा. छूट तो दिखा देती, तडपा के चली गयी.

राहुल: कोई नही भाई, इसकी मोटी गांद पर लंड रगड़ना आप रात में.

रमेश: रोज़ ये मोटी गांद खोल के सोती है क्या?

राहुल: हा भैया, रोज़ निकालता हू मैं अपना माल इसकी छूट पे.

अब मैने रमेश के साथ भी बिस्तर गरम करने की सोच ली थी. लेकिन मैं उसे तड़पाना चाहती थी. रात में सब च्चत पे सोने गये. लेकिन मैं मच्छर काटने के बहाने से नीचे आ गयी, क्यूंकी मुझे उन दोनो को पटना था, और वो दोनो भी मुझे देख के नीचे आने लगे. मैं अपनी सारी ब्लाउस उतार कर सिर्फ़ पनटी में लेट गयी. फिर दोनो आए और राहुल बोला –

राहुल: आज तो सिर्फ़ चड्डी में सोई है मा. भैया प्लीज़ आवाज़ नही करना.

रमेश: क्या माल है यार तेरी मम्मी. इसके बड़े-बड़े माममे हाथ में भी नही आएँगे, और ये मोटी गांद फैला के सोई हुई है. अभी चड्डी हटता हू इसकी

राहुल की गांद फटत गयी.

राहुल: नही भैया, जो करना है ऐसे ही कर लो. उठ गयी तो लंड भी नही रगड़ने मिलेगा, और बहुत मारेगी.

मैं चुप-छाप सुन रही थी लेते हुए.

रमेश: अर्रे ये रंडी चूड़ने के लिए ऐसे लेती है, तुझे नही पता. आज इसकी छूट का भोंसड़ा बना दूँगा.

ये बोलते हुए उसने अपनी और मेरे बेटे की पंत उतरवा दी, और चड्डी भी. दोनो पुर नंगे हो गये थे.

रमेश: अब देख इसकी चड्डी उतारूँगा. फिर खुद मेरा लंड चूसने लगेगी उठ के.

राहुल: भैया प्लीज़, मैने बहुत मार खाई है, अब नही.

रमेश: तू फालतू दर्र रहा है.

ये बोल कर उसने बहुत ज़ोर से छाँटा मारा मेरी पनटी के उपर से मेरी गांद पे, जिससे मुझे गुस्सा आ गया. मुझे गाली सुन के भी गुस्सा आ रहा था.

अब मैं उठी, और दोनो को गुस्से से देख रही थी, और सारी बदन पे डाल के बती. इतने में वो कपड़े पहनने लगे तो मैने माना किया. फिर उनको बाहर चलने का इशारा किया. हमारे घर के पीछे हमारा खेत है. रात में वाहा कोई नही रहता. अब मैं हम तीनो नंगे वाहा पहुँचे. तब मैं बोली-

मे: दोनो कुत्ते वाले पोज़ में आ जाओ.

रमेश तो खुश था की वो मेरे साथ नंगा था, और मेरे लटके हुए बूब्स देख रहा था.

रमेश: ये कैसे होता है आप बन के बता दो.

मुझे तोड़ा अजीब लगा, लेकिन फिर सोचा बन जाती हू. फिर मैं दोनो के सामने कुटिया बनी वही खेत में ज़मीन पे. रमेश ने लाइट मारी मेरी गांद पर फोकस करके. फिर मैने भी दोनो को मज़ा देने के लिए पनटी नीचे की गांद से, और 5 मिनिट तक वैसे ही गांद मटकाय, जैसे वो पीछे से छोड़ रहे हो. दोनो लंड मसल रहे थे. तब मैं खड़ी हुई, पनटी उपर की, और बोली-

मे: देख लिया कैसे बनना है? अब दोनो बन जाओ कुत्ते.

रमेश: अर्रे बुआ, आप ही बनो, ज़्यादा मज़ा आएगा (वो बोला मेरे पास आ कर, मेरी छूट में उंगली डालने की कोशिश करते हुए. लेकिन पनटी के कारण अंदर नही गयी).

मैने गुस्से से उसके लंड पे मारी, जिससे वो ज़मीन पे गिर गया दर्द से. फिर मैने पास में पड़ा एक डंडा उठाया, और उसकी गांद और कमर पे मारे. 3-4 डंडे मारे मैने, और अब वो देख के राहुल खुद ही कुत्ते जैसा बन गया.

मैने दोनो को बहुत मारा. बीच में दोनो के लंड भी हिला देती हाथ से और झड़ने के पहले रुक जाती. फिर मैं बोली-

मे: तुम दोनो को सबक मिल गया. चलो अब कपड़े पहनो, कब से नंगे हो दोनो.

इतने में रमेश बोला-

रमेश: बुआ आप भी कब से नंगी खड़ी हो. अब इतना मारा है तो नंगे बदन से चिपका के एक किस ही करने दो.

मैं तुरंत अमन गयी. मुझे भी मस्ती करनी थी.

मे: मैं लेटुंगी खतिए पे. दोनो एक-एक करके मेरे उपर लेटना और मुझे किस करना लिप्स पे, जितनी देर तुम करना चाहो.

अब मैं लेती खटिया पे, और राहुल आया मेरे उपर. दोनो के अंग से सारे अंग मिले. बस के बाद ऐसा होने से अलग मज़ा आ रहा था. उसकी छाती में मेरे मोटे माममे फ़ससे हुए थे, और छूट में उसका गरम लंड धंसा हुआ था, जिससे एक-दूं सेक्सी माहौल हो गया. लेकिन वो दर्रा हुआ था.

उसने 15 मिनिट तक किस की मुझे और मेरे दर्र के कारण उसने कही हाथ नही लगाया. लेकिन अब बारी रमेश की थी, और वो मुझसे बदला लेना चाहता था. क्यूंकी मैने बहुत मारा था उसको. वो पूरा लाल हो रहा था.

अब उसने मेरी छूट के उपर लंड रखा सबसे पहले, और 30 सेकेंड वैसे ही रहा. मेरी तो आँखें ही बंद हो गयी थी. मैं मदहोशी में चली गयी उसके लंड के स्पर्श से. फिर लगभग 2 मिनिट बिल्कुल वैसे ही रहा वो, और मैं पूरी मदहोशी में ह उम्म्म उफफफ्फ़ कर रही थी.

अब खेत की ठंडी हवा नंगे बदन से टकरा कर मेरी मदहोशी और बढ़ा रही थी. फिर उसने धीरे से लंड सेट कर दिया मेरी छूट पे, और एक बहुत ज़ोर से झटका मारा, जिससे उसके मोटे लंड का टोपा पूरा उतार गया अंदर, और मेरी चीख निकल गयी.

अचानक हुए इस हमले से

मुझे समझ नही आ रहा था, की क्या करू. इतने में वो उसका पूरा बदन चिपका कर हल्के-हल्के हिलता मेरे उपर, जिससे मुझे फिरसे मदहोशी होने लगी. मैं लगातार आ अहह करके उसका साथ दे रही थी. अब मैने अपने आप को उससे चूड़ने के लिए छ्चोढ़ दिया, और उसके आयेज पीछे होने लगी. तभी मेरा बेटा पास में आया और मुझसे पूछता है-

राहुल: मम्मी आप ठीक हो?

उसने मेरी छूट वाले हिस्से पे लाइट मारी और अंदर उसका लंड चमक रहा था. मैं होश में आई और मैने रमेश को धक्का दे दिया, जिससे वो ज़मीन पे गिर गया. फिर मैं बोली-

मे: कमीने, इतनी मार खाने के बाद भी तुझे शरम नही आई?

मैने उसको एक-दो पैर मारे, और बोली सिसकते हुए-

मे: इतना मारा तो सोचा तोड़ा प्यार कर डू. इसलिए ये किस करने को बोली थी मैं. और तू शुरू हो गया.

उसको सिर्फ़ अभी फिरसे मुझसे शरीर मिलना था, क्यूंकी उसको हवस चढ़ि थी. उसको बस मेरे नंगे माममे चूसने काटने के लिए और गांद मारने के लिए दिख रही थी. मेरी मार का असर नही हो रहा था उसपे अब.

वो मेरे पास बैठा, और मुझे फिरसे लिटने की कोशिश करने लगा बिना कुछ बोले. लेकिन मैं अपने बेटे के सामने उससे ऐसे नही चूड़ना चाहती थी. मैं उसको रोकते हुए बोली-

मे: देख मैने तुझे बहुत मारा उसके लिए सॉरी. लेकिन अब किस रहने दे रमेश प्लीज़. फिर कभी कर लेना.

रमेश: प्लीज़ बुआ, एक बार करने दो 2 मिनिट. बाकी कल जब आपका मॅन करे तब करूँगा.

मे: ठीक है, लेकिन अब कोई हरकत नही, सिर्फ़ किस. और 2 मिनिट में खुद उठ जाना मेरे उपर से. नही तो मैं तुझे फिर गिरा दूँगी (मैं हेस्ट हुए बोली).

अब वो मेरे उपर लेता. उसके लंड पे मेरी छूट का पानी लगा हुआ था. फिर हमारी किस को कब 30 मिनिट हो गये पता ही नही चला. इसी बीच काई बार मैं उसके उपर आई, और वो मेरे नीचे. लेकिन वो फिर पलट देता.

अब उसने किस तोड़ी, और मेरे उपर से उठ कर बोला-

रमेश: बुआ आपके होंठ बहुत मुलायम है. कल फिर अवँगा बाकी की किस करने और बूब्स पर किस करने.

मे ( थोड़ी नॉटी होके): सच में होंठ की ही बात कर है ना?

और तीनो हस्स कर गले लगे. अब तीनो नंगे ही फिरसे खेत के रास्ते के बीच नंगे ही चल रहे थे. उन दोनो के लोड उछाल रहे थे. मैं भी चलते हुए गांद मटका रही थी, और हाथ से पनटी भी उपर-नीचे करती हुई चल रही थी. राहुल ने लाइट का फोकस भी मेरी गांद पे किया था और इधर मेरी छूट भी पानी छ्चोढ़ रही थी. मैं पहले ही 2-3 बार झाड़ चुकी थी. अब हम घर पहुँचे, और कपड़े पहन के अपनी-अपनी जगह सो गये

इसके आयेज क्या हुआ इसके बारे में अगले पार्ट में बात करेंगे. तब तक अपनी फीडबॅक एमाइल करके ज़रूर बताए अरेथेन593@गमाल.कॉम पर.

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