बुआ के बेटे ने चोद दिया

नमस्कार, मेरा नाम नेहा है. मैं अन्तर्वासना की बहुत बड़ी प्रशंसक और नियमित पाठक हूँ. मुझे अन्तर्वासना की सारी कहानियां पढ़ने में बहुत अच्छी लगती हैं.
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प्रकाशित हो चुकी हैं, यह मेरी तीसरी कहानी है.

मैं पढ़ाई पूरी करने के बाद हमेशा घर में रहती हूँ. मैं कभी कभी घर का भी काम कर लेती हूँ, या मैं जब फ्री रहती हूँ तो अपनी सहेलियों के साथ घूमने चली जाती हूँ.

मेरे घर से थोड़ी दूर ही मेरे रिश्तेदार लोग भी रहते हैं. मेरी बुआ का भी घर थोड़ी दूर पर ही है. मेरी बुआ की शादी नजदीक ही हुई है. मेरी बुआ का हमारे घर आना जाना लगा रहता है और वो जब भी मेरे घर आती हैं, तो मुझे भी अपने साथ अपने घर लेकर जाती हैं.

मैं जब बोलती हूँ कि बुआ मैं आपके घर नहीं जाऊँगी, तो वो बोलती हैं कि मैं तेरे घर आती हूँ तो तू मेरे घर क्यों नहीं जाएगी.. इसलिए मुझे भी अपने बुआ के घर जाना पड़ता है.

बुआ का एक लड़का है और वो मेरे उम्र का ही है. वैसे तो शारीरिक रूप से बहुत बलवान दिखता है क्योंकि बुआ उसको खूब खिलाती पिलाती रहती हैं.. और वो कसरत भी करता है.

मैं जब भी बुआ के घर जाती हूँ तो वे मुझे भी खाने के लिए बहुत ज्यादा खाना दे देती हैं. जब मुझसे खाया नहीं जाता है तो बोलती हैं कि मेरा बेटा तो इससे भी ज्यादा खाता है और देख तू इसीलिए पतली है, उसे देख.. वो कितना मोटा है.

मैं बुआ को बोलती हूँ कि लड़के लोग मोटे ही अच्छे लगते हैं.

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अब चूंकि बुआ का लड़का जिम भी जाता है, जिस वजह से उसकी बॉडी अच्छी बन गई है. मैं पतली भले ही हूँ लेकिन मेरी चूची और गांड बहुत बड़ी बड़ी हैं. मेरे पतलेपन को मेरी चूची और गांड मिलाकर मुझे सेक्सी बना देती हैं. मेरी चूची का उभार मेरी बुआ का बेटा खूब देखता है.

मेरे बुआ के दो बेटे हैं. एक बेटा तो शरीफ लगता है लेकिन जिसकी बॉडी भरी हुई है, वो मुझे थोड़ा बेशर्म लगता है. जब भी मैं बुआ के घर उसके सामने पड़ जाती हूँ, वो मेरी चूची के उभार को घूर कर देखता है और मेरी उठी हुई गांड भी देखता है.

एक दिन मेरी मम्मी और बुआ दोनों लोग रिश्तेदारी में गई थीं और वो लोग मुझसे बोलकर गई थीं कि वो लोग जल्दी आ जाएंगी.
मम्मी मुझसे बोलीं कि बुआ के बेटे को खाना बनाकर खिला देना.

बुआ अपने छोटे वाले बेटे को अपने साथ लेकर मम्मी के साथ रिश्तेदार की शादी में गई थीं. मुझे लगा कि वो लोग शाम तक आ जाएंगी, इसलिए मैं बुआ के लड़के को खाना बना कर बुआ के घर चली गई.

वो घर में अकेला था, मैंने उसको खाना खिलाया और उसके खाना खाने तक मैं वहीं बैठ गई. जब मैं जाने लगी तो उसने मुझे अपने घर ही रोक लिया. मैं भी ये ठीक समझी क्योंकि बुआ और मम्मी तो शाम को आने वाली थीं, तो मैं भी अपने घर में अकेले अकेले बोर हो जाती.

मेरी सहेलियां भी जॉब पर गई थीं, तो मेरी कोई सहेली भी उस वक्त अपने घर पर नहीं थी.. इसलिए भी मैं अपने बुआ के घर रुक गई. मैं और बुआ का लड़का हम दोनों लोग इधर उधर की बातें करने लगे और ऐसे ही शाम हो गई थी.

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मैंने अपने लिए और अपने बुआ के बेटे के लिए चाय बनाई और अपने बुआ के बेटे से पूछने लगी कि मम्मी और बुआ कब तक आएंगी, कुछ मालूम है?
बुआ का बेटा बोला कि वो लोग तो देर रात तक ही आएंगी.

अब मुझे बहुत बेचैनी हो रही थी क्योंकि ज्यादा शाम हो गई थी और बुआ और मम्मी के आने का अब तक कोई फोन भी नहीं आया था. मुझे डर भी लग रहा था क्योंकि मैं कभी अकेले अपनी बुआ के लड़के के साथ नहीं रही थी. वो मुझे बेशर्म लगता था, लेकिन क्या करूँ बुआ का लड़का था तो मैं उससे बातें कर लेती थी लेकिन मैं उसके साथ अकेले घर में नहीं रहना चाहती थी.
मैं सोच रही थी कि अगर मम्मी और बुआ नहीं आएंगी तो मैं इधर कैसे रहूंगी.

मैंने मम्मी को फ़ोन किया तो वो बोलीं कि उन लोगों को आने में रात हो जाएगी इसलिए वो लोग कल सुबह आएंगी.
मैंने मम्मी को कहा कि आप लोग तो मुझसे बोली थीं कि आप लोग शाम को आ जाओगी?
तो मम्मी बोली कि क्या करूँ बेटा शादी का घर है न.. यहाँ लोग हमें रोक रहे हैं और हम लोगों को आने में ज्यादा रात हो जाएगी.. इसलिए हम लोग सुबह ही आ पाएंगे. तब तक तुम एक रात बुआ के बेटे के साथ रह लेना. तुम उसको भी खाना बनाकर खिला देना और अपने भी खाना बनाकर खा लेना.

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