भतीजे ने चाची को पटाया और चोदा

नमस्कार दोस्तो, मैं हाज़िर हू आप सभी के सामने एक स्टोरी लेके. ये स्टोरी मेरी और मेरी चाची के बीच हुई चुदाई की है. बहुत मशक्कत के बाद मैं उनकी चुदाई कर पाया.

मेरी चाची जिनका नाम प्रिया है, उमर 36 साल है, उनका साइज़ 38″ 30″ 40″ है. ये स्टोरी आज से 1 साल पहले की है. जब मैं उनके घर जाता था, वो मुझे अभी भी एक बच्चे की नज़रो से ही देखती थी.

जब मेरी उमर 12-13 साल थी, तो उनका किसी के साथ अफेर था. वो अक्सर उनसे फोन पर बात किया करती थी. मैं उनके घर कंप्यूटर में ग़मे खेलने जया करता था.

उनकी एक छ्होटी बेटी थी. और जब वो उनको दूध पिलाती थी, तो मैं अक्सर उनके बूब्स को घूरता था. काई बार वो मुझे बोल भी देती थी, की “क्या देख रहा है”.

और मैं उन्हे माना कर देता था ” कुछ नही” बोल कर. वो मुझे अपने बेटे की तरह मानती थी. काई बार मैने 12-13 की आगे में उनके बूब्स का दूध पिया था.

जब हमारे बीच सेक्स हुआ तो मेरी आगे 19 साल थी. वो अक्सर जब नहाने जाती थी, तो मैं उनको घूरता रहता था. वो मेरे फोन को चलती थी, और मैं उसमे बहुत सारी सेक्सी वीडियोस रखता था.

शुरुआत में मैने उन पर बहुत ट्राइ किया. मैने उनको मेसेज करके बोला, की मैं उनसे प्यार करता था. उन्होने हर बार मुझे माना किया.

उस समय मेरी गांद फटत जाती थी, की कही वो मम्मी को ना बता दे. एक बार तो मैने उनको रसोई में जाके पीछे से हग कर लिया था ‘ई लोवे योउ’ बोल कर.

उन्होने मुझसे बहुत जल्दी अपने आप को चुधवा लिया, और मुझे अपने आप से डोर कर दिया. फिर कुछ दिन वो मेरे से डोर रही. धीरे-धीरे उन्होने दोबारा बात करनी स्टार्ट कर दी. फिर वो अक्सर कहती थी, की उनकी कमर में दर्द रहता था.

वो मुझे उनकी कमर दबाने को बोलती थी. मैं उस टाइम उनकी गांद दबा देता था. बुत कुछ करने का सोच कर मेरी गांद फटत जाती थी. एक दिन की बात है. उनको कमर में ज़्यादा दर्द था.

मैने उनको लिटा कर उनकी कमर दबाती. बुत उनकी कमर टाइट हो रखी थी. फिर मैने उनको बोला-

मैं: तोड़ा कपड़ा उठाओ.

उन्होने उठाया, तो मैने उनके बूब्स पकड़ के साइड कर दिए, एक-दूं से हाथ मार के. इससे पहले वो बोल पाती, मैने उनके बूब्स साइड कर दिए. उनके मूह से एक आ निकल गयी.

उस समय और मैने उनकी कमर तो कुछ हद तक ठीक कर दिया था. फिर वो कुछ दिन बाद मुझे बोलने लगी-

चाची: मैं मोटी हो गयी हू. मुझे कुछ एक्सर्साइज़ बताओ करने के लिए.

फिर मैने उनको एक्सर्साइज़ बताई. बुत वो उनको आचे से नही करती थी, इसलिए उनकी सासू मा ने मुझे बोला, की एक-दो दिन मैं उनको एक्सर्साइज़ करवा डू. और उसके बाद वो अपने आप धीरे-धीरे एक्सर्साइज़ कर लेंगी.

फिर मैने उनको एक्सर्साइज़ करवानी स्टार्ट की धीरे-धीरे. अब मैं कभी उनके बूब्स को दबा देता, तो कभी चूतड़ को. वो मुझे सिर्फ़ बोलती “नही करो इससे ज़्यादा”.

कुछ नही, फिर मैने एक बात नोटीस की. वो डेली वही सलवार पहनती थी, जो नीचे से फाटती हुई थी. पहले दिन तो मुझे दिखाई नही दी. दूसरे दिन मैने देखी, और फिर मेरी हिम्मत नही हुई कुछ करने की.

4-5 दिन बाद जब मैं उनको सीट-उपस करवा रहा था. फिर जब वो उपर आई, तो उनका मूह मेरे लंड पे लग गया. ये ग़लती से हुआ था. बुत क्यूकी मैं बार-बार सोच रहा था, तो मेरा लंड खड़ा हो गया.

फिर मैं उनको एक्सर्साइज़ करवा रहा था. पता नही फिर मेरे में कहा से हिम्मत आ गयी. मैं उनको रिलॅक्स करवा रहा था. उनकी लेग्स उपर थी, और बटक स्ट्रेच्ड थे.

मेरा लंड खड़ा था, और उन्होने नीचे कुछ डाला नही था. तभी उनकी बालो वाली छूट मुझे दिखाई दी. मैने सोचा आज जो होगा देखा जाएगा. फिर मैने अपना लंड निकाला, उनका पैर उपर किया, और लंड अंदर डालने लगा.

लंड तो अंदर गया नही, क्यूकी मेरा फर्स्ट टाइम था, और मैने कभी किया नही था. लेकिन तोड़ा सा लंड का टोपा उनकी छूट में लगा, और फिसल कर साइड में चला गया. मेरी तो गांद फटत गयी. मुझे लगा, की अब तो मेरी बंद बजना पक्का था.

तभी उन्होने मुझे उपर से हटने को बोला. जब मैं हॅट रहा था, तब तक उन्हे मेरा 7 इंच का लंड महसूस हो चुका था. फिर उन्होने हाथ लगाया, और लंड पकड़ लिया.

मेरी तो गांद फटत गयी, की अब तो गया. बुत उन्होने बैठ के लंड देखा, और बोली-

चाची: बेटा ये आचे काम नही है. मैं तेरी चाची हू.

मुश्किल से मेरी जान मे जान आई. फिर मैं सॉरी बोलते हुए वाहा से निकल लिया. फिर शाम को उन्होने मुझे बुलाया, और कहा-

चाची: खेत तक छोढ़ के आजा मुझे.

मैं चला गया, और खेत की रोड पर वो मुझे बोली-

चाची: स्कूटी मैं चलती हू. तू पीछे बैठ.

उन्हे कम चलानी आती थी, लेकिन मैं बैठ गया उनसे चिपक के. मैने उनकी कमर पर हाथ रख लिया. अब मेरा लंड उनके पीछे घिस रहा था, और आयेज से जब वो ब्रेक लगती, तो मैं उनके बूब्स मसल देता.

वो भी उतरने का नाम नही ले रही थी. वो मुझे बोल रही थी-

चाची: थोड़ी देर और चलवा दे. यहा कोई नही देख रहा.

फिर मेरा लंड खड़ा हो गया. मैं हिम्मत करके अपना हाथ नीचे ले गया, और उनकी छूट को 1 बार च्छुआ और हटा लिया. जब मैने दूसरी बार च्छुआ उनकी छूट को, तो उन्होने बोल दिया-

चाची: तेरे हाथ कहा जेया रहे है? मुझे उपर से पकड़.

मेरी बहुत गांद फटत रही थी, की वो आज पक्का घर पे बोलेगी. मेरे फिर आयेज जाके थोड़ी डोर स्कूटी फिसल के गिर गयी. अब हम दोनो नीचे गिर गये थे. अब कभी मैं नीचे वो उपर थी, और कभी वो नीचे मैं उपर था.

फिर खड़े होते टाइम उन्होने मेरा लंड देख लिया. उसके बाद वो बोली-

चाचा: बोलो चोट तो नही लगी.

मैने उन्हे माना कर दिया, की नही लगी. फिर वो बोली-

चाची: पहले तू बैठ, फिर मैं बैठूँगी स्कूटी पे.

मैं स्कूटी पर बैठा. फिर उन्होने पीछे होने को बोला. मैं सिर्फ़ तोड़ा सा खिसका पीछे, और वो सीधी मेरी गोद में बैठ गयी. फिर वो स्कूटी चलाने लगी.

उसको पता चल गया था, की वो मेरे लंड पे बैठी थी. आयेज जाके उन्होने स्कूटी रोक दी खेत के पास. फिर हम दोनो उतार के जाने लगे. मैं एक जगह खड़ा होके पेशाब करने लगा. मेरा मक़सद उनको लंड दिखाने का था.

मैं 4-5 मिनिट ऐसे ही खड़ा था. पहले तो उसने देखा नही, फिर लगातार लंड को घूरे जेया रही थी. मैने भी उनको देख लिया. फिर मैं लंड अंदर करके उन्हे बोला-

मैं: मैं पड़ोस के खेत में दोस्त के पास जेया रहा हू.

फिर मैं पड़ोस के खेत मे गया, पर वाहा कोई नही था. वापस आके देखा, तो मैने देखा चाची सलवार उतार के छूट मे इन उंगली कर रही थी. फिर मैने 1 मिनिट तक देखा, और मेरा लंड खड़ा हो गया.

उसके बाद मैने जाके एक-दूं से उन्हे पकड़ लिया. वो दर्र गयी, और बेटा बेटा बोलने लगी. फिर मैं कहा मानने वाला था. उसको मैने बोला-

मैं: मैं तुझे कब से छोड़ना चाहता हू. आज फ़ससी हो चाची जाल में.

मैने उनके बूब्स दबाए. फिर उन्होने 5 मिनिट तक बोला-

चाची: बेटा मैं तेरे घर पे बोल दूँगी.

मैं कहा सुनने वाला था. फिर मैने उसके मूह में लंड डाल दिया. लेकिन वो लंड चूस नही रही थी. फिर मैने उसको लिटा कर छूट में ज़ोर से धक्का मारा. 2 इंचस लंड अंदर चला गया. वो एक-दूं से काँप गयी, और गरम होने के बाद साथ देने लगी.

मैने उसको 5 मिनिट तक छोड़ा. फिर उसके पेट पे सारा लावा डाल दिया. वो कपड़े पहनने लगी. मैने बोला-

मैं: मज़ा आया क्या चाची?

वो कुछ नही बोली. मैने सॉरी बोला. फिर 5 मिनिट बाद मेरा फिरसे मॅन हुआ, लेकिन उसने माना किया. मैने उसको नीचे लिटा दिया, और उसने सलवार उतारने से माना कर दिया.

फिर मैने थोड़ी नीचे से खींच के उसकी सलवार फाड़ दी, और उसके लंड डाल दिया. इस बार उसको मैने 15-17 मिनिट छोड़ा. वो बीच में 2 बार झाड़ गयी. इस बार चुदाई के बाद उसने मुझे गले लगा लिया, और बोला-

चाची: तुमने आज बहुत मज़ा दे दिया. पहली बार किया तब मज़ा नही आया. अभी बहुत आया.

मैने उसको बोला: मुझे गांद भी चाहिए, लेकिन उसने माना कर दिया, और बोला बाद में.

हम खेत में से वापस आ गये, और मैं अपने घर चला गया. नेक्स्ट दे जब मैं उनके घर गया, तो वो पोछा लगा रही थी. मैने उसको पीछे से जाके पकड़ लिया.

उसने बोला: तेरे चाचा यही है, मरवाएगा क्या?

उस दिन मेरी किस्मत अची थी. बच्चे स्कूल चले गये थे. फिर थोड़ी देर बाद उसका हज़्बेंड बाहर चला गया. और उसकी सास मंदिर गयी थी.

फिर मैने उसकी 1 बार छूट और 1 बार गांद मारी. उसकी गांद बहुत ज़्यादा टाइट थी छूट से, तो बहुत मज़ा आया. फिर जब मेरा होने वाला था उसकी गांद मार के, इतने में उसकी सास के आने की आवाज़ सुनाई दी.

मेरा निकालने वाला था. उसने झट से सलवार डाली, मैने लंड अंदर किया. और मेरे लंड ने पानी छोढ़ दिया. मेरा सारा अंडरवेर खराब हो गयी था.

भगवान ने बचा लिया. उसकी सास को पता नही चला. मैं अभी तक अपनी चाची को छोड़ता हू, जब भी मौका मिले. उस दिन के बाद उसने कभी मुझे गांद नही दी. एक टाइम तो बहुत मौज लग गयी थी, जब उसका हज़्बेंड बाहर गया था.

मैं उसको डेली छोड़ता था. सला अब घर आ गया लॉक्कडोवन् में, तो मौका कम मिलता है छोड़ने का. वो मेरे से पूरी तरह सॅटिस्फाइ है. बहुत अछी और छ्होटी सी सुंदर चूत है चाची की.

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