भैया के सामने भाभी के साथ रोमॅन्स की कहानी

ही, मेरा नाम हर्ष है, और उमीद करता हू की आप सब ने मेरी पहली कहानी पढ़ी होगी. इस कहानी को आयेज बढ़ते है.

तो ज़्यादा देर ना करते हुए मैं कहानी की तरफ बदता हू. जैसा की आप सब जानते है मेरा डिन्नर पूजा भाभी के घर पे था, और उनके पति यानी विवेक भैया( मैं उन्हे भैया बुलाता हू) अभी तक आए नही थे. उस बीच मैने और भाभी ने एक दूं-दार चुदाई की. अब आयेज-

तो भैया घर पर आ गये थे, और उन्होने मुझे फोन करके बुलाया डिन्नर के लिए. मैं भी तोड़ा फ्रेश होकर चला गया. फिर हमने मिल कर आचे से डिन्नर किया. डिन्नर होते ही मैं जाने लगा, तो भैया ने मुझे रोका और कहा,

भैया: हर्ष, आज इधर ही रुक जेया.

मे: नही भैया, मैं घर पर ही जाता हू.

भैया: अर्रे, रुक जेया, अपन हूका पार्टी करते है.

मे: रुक तो जाता, पर मुझे ऑक्वर्ड लगेगा. ऐसे आप दोनो के बीच की प्राइवसी खराब हो जाएगी.

भैया: क्या तू भी, फॉरमॅलिटी वाली बातें करता है. रुक जेया, कुछ प्राइवसी वग़ैरा नही है.

ऐसा बोलते ही भैया अंदर किचन में चले गये, और भाभी मेरे बाजू में आ कर बैठी और बोली-

भाभी: क्यूँ इतने नखरे कर रहे थे? तुम्हे मेरे साथ चुदाई नही करनी क्या? मेरी छूट और गांद दोनो तड़प रही है तुम्हारे इस बड़े लंड से चूड़ने के लिए.

मे: भाभी ऐसा बोलना पड़ता है. भैया को तो नही पता ना अपने बीच में क्या-क्या हुआ.

भाभी: हा वो तो है, पर तुम्हे मज़ा आया या नही?

मे: मज़ा? अर्रे पूछो मत भाभी कितना मज़ा आया है. सबसे ज़्यादा तो जब आपने मेरी गांद छाती थी तब मज़ा आया था. ये तो मैने सिर्फ़ वीडियोस में देखा था. आपने तो रियल लाइफ एक्सपीरियेन्स दिया है, थॅंक योउ! जान.

भाभी: इसमे, थॅंक योउ कैसा? तुम्हारे लंड के लिए तो मैं कुछ भी कर सकती हू, गांद चाटना तो बहुत छ्होटी सी चीज़ है. आज रात को मैं तुम्हे, और तुम्हारे लंड को बहुत मज़े दूँगी, बस तुम देखते जाना.

मे: अछा भाभी, ऐसा है? तो आज रात का मुझे इंतेज़ार रहेगा.

फिर भाभी ने मेरे होंठ चूमे, और शॉर्ट्स के उपर से ही लंड सहलाने लगी. 2-3 मिनिट बाद होंठ अलग करते हुए बोली-

भाभी: अभी के लिए इतना ही, रात के लिए बचा के रखते है थोड़ी मस्ती.

इतना बोलते हुए भाभी किचन में चली गयी, और अपने काम में व्यस्त हो गयी. थोड़ी देर बाद विवेक भैया और भाभी दोनो किचन से आए और हूका लगा कर हम बैठ गये. करीब 12 बजे तक हमने हूका लिया और हम सोने चले गये.

भैया बीच में सोए थे, एक तरफ मैं था, और एक तरफ भाभी. मुझे तो बिल्कुल नींद नही आ रही थी, और मुझे पता है भाभी का भी यही हाल होगा. पर मैं सोने का नाटक कर रहा था.

मुझे देखना था भाभी कैसे पहल करती है, और मुझसे चूड़ने के लिए किस हड्द तक जेया सकती है. कुछ 10-15 मिनिट बाद भाभी उठी, और मेरे पास आई, और बोली-

भाभी ( धीरे से): जान उठो ना. अब रहा नही जेया रहा है. तुम्हे सोच कर छूट गीली हो चुकी है.

मैं तो नाटक कर रहा था, इसलिए मैने कुछ जवाब नही दिया. पर भाभी अब भी मुझे जगाने की कोशिश कर रही थी. मैं टॅस से मास नही हुआ, तो भाभी ने मेरे बाल पे हाथ फेरते हुए कहा-

भाभी: मुझे तुम्हारा हथियार चाहिए जान. अब मत तड़पाव मुझे, आ तुम्हारे लंड की दीवानी हो गयी हू. उठो ना अब, ऐसे मत करो, मुझे पता है तुम नही सोए हो. सिर्फ़ नाटक कर रहे हो. मेरी छूट में लगी आग को शांत करो, आओ ना जान, आ, आ.

मैं फिर भी नही उठा, तो भाभी गुस्सा हो गयी और बोली-

भाभी: ठीक है, तुम ऐसे नही मानोगे, रूको.

फिर भाभी ने मेरे हाथ की उंगली अपने मूह में डाली और उसको चूसने लगी, और सिसकियाँ लेने लगी.

भाभी: आ, काश उंगली की जगह तुम्हारा लंड होता, आ कितना मज़ा आता.

फिर मैने हार मानी और मैं उठ गया, तो भाभी खुश हो गयी. हम दोनो एक-दूसरे की आँखों में एक-दूं प्यार से देख रहे थे. मैं बेड पे लेता हुआ था, और भाभी मेरे बगल में नीचे घुटनो के बाल बैठी हुई थी.

मैने उनका मूह पकड़ा और मेरे मूह के करीब लाया, हमे एक-दूसरे की साँसे अब महसूस हो रही थी. फिर मैने भाभी को और कस्स के पकड़ा, और उनके होंठ के उपर मैने अपने होंठ रख दिए, और उन्हे चूमने लगा.

हम एक-दूसरे को बहुत ही ज़्यादा पॅशनेट्ली किस कर रहे थे, एक-दूसरे के होंठ चबा रहे थे. फिर मैने अपनी जीभ बाहर निकली, और भाभी के मूह के अंदर डालने लगा, और भाभी भी मेरे साथ वैसे ही कर रही थी.

हम दोनो बारी-बारी एक-दूसरे के मूह में जीभ डाल के उसको चाट रहे थे. फिर मैने भाभी को मेरे उपर लिया और उनको मेरे मूह पे थूकने बोला, और उससे चाटने बोला. भाभी ने पहले माना किया और बोली-

भाभी: नही जान, मैं तुम्हारे मूह पे नही थूक सकती, मुझे अछा नही लगेगा.

मे: भाभी, आप मेरी खुशी के लिए गांद चाट सकते हो, तो मूह पे थूक लगा कर क्यूँ नही चाट सकते हो? मेरे लिए करो प्लीज़.

भाभी ने फिर 2-3 बार मेरे मूह पर थूका और उसको चाटने लगी. फिर मैने भाभी का मूह खोला, और मेरा थूक अंदर डाला, और जीभ से चाटने लगा. ये सब भाभी को और भी गरम करने लगा.

भाभी ने बोला: अब और ना तड़पाव, मेरा पानी निकालो, बहुत गीली है छूट मेरी.

मे: सबर तो करो भाभी, आज पूरी रात आपको सोने नही दूँगा.

भाभी: अछा, तो फिर शुरू करे?

और फिरसे हम दोनो चूमने लगे. भाभी खड़ी हुई और उन्होने मेरे कपड़े उतारे, और मुझे नंगा कर दिया, और वो खुद भी नंगी हो गयी. फिर मैं बेड से उठा, और भाभी को पकड़ कर फिरसे चूमने लगा. मैने अपने होंठ अलग करते हुए कहा-

मे: भाभी, लेट जाओ बेड पे.

भाभी बेड पे लेट गयी. मैं उनके उपर चढ़ गया, और उनके माममे से खेलने लगा. मैं एक बूब चाट रहा था और दूसरा दबा रहा था. बीच-बीच में मैने उनके निपल भी बहुत ज़ोर से काटे, जिससे उनकी आवाज़े निकालने लगी. तो मैने अपना एक हाथ उनके मूह पर रख दिया.

भाभी इतनी उत्तेजित हो चुकी थी, की उन्होने मेरी उंगली चाटनी शुरू कर दी. करीब 10-12 मिनिट उनके बूब्स चूसने के बाद मैने भाभी के हाथ में अपना हाथ फसाया और कहा-

मे: पहले आपने मेरी बगल छाती थी, अब मैं चाटूंगा इन्हे.

और फिर मैने भाभी के बगल बारी-बारी से चाटना शुरू किया. भाभी के बगल पे एक भी बाल नही था, और उनका लगाया हुआ पर्फ्यूम मुझे बहुत मदहोश कर रहा था. मेरा लंड भाभी की छूट पे बार-बार लग रहा था, जिससे मुझे उनके गीले-पन्न का एहसास हो रहा था.

बगल चाटने के बाद मैं नीचे आया और अपनी जीभ भाभी की नाभि पे रख कर उसको चाटने लगा, और साथ ही उनकी छूट में उंगली करने लगा.

भाभी भी धीरे-धीरे सिसकियाँ ले रही थी, और उहह आ की आवाज़े निकाल रही थी. फिर मैं और नीचे गया, और भाभी की टांगे फैला दी, और उनके छूट में मैने एक उंगली डाली. अब अपनी जीभ से मैं उनकी छूट के बाहरी हिस्से को चाटने लगा.

फिर मैने अपनी जीभ और उंगली दोनो भाभी की छूट में डाली और उनकी छूट मारने लगा. भाभी भी बहुत मज़े ले रही थी और उन्होने मेरा पूरा मूह अपने हाथ से अपनी टाँगो के बीच में दबा दिया और मेरे बाल सहलने लगी. मैने भी उनकी छूट बहुत आचे से छाती. फिर मैने दो उंगली डाल कर उनकी छूट मारनी शुरू करी. 2 मिनिट बाद भाभी बोली-

भाभी: जान, आ, मेरा निकालने वाला है. आ करते रहो आ, बहुत मज़ा आ रहा है.

और इतना बोलते ही भाभी झाड़ गयी और मुझे उपर आने को कहा और मुझे चूमने लगी. अब मैं भाभी के उपर था तो मेरा लंड उनकी छूट को बार- बार चू रहा था, तो मैने एक धक्का मारा, और तोड़ा सा लंड अंदर चला गया, भाभी ने कहा-

भाभी: अभी नही, मुझे तुम्हारा लंड चूसना है, और उसके बाद अपनी छूट और गांद में डलवाना है.

मैने भी भाभी की बात मान ली और खड़ा हो गया. भाभी उठी और मेरा लंड अपने हाथ में लेकर उसको हिलने लगी. 2-3 मिनिट लंड हिलने के बाद मेरे नाभि पे अपनी जीभ लगा कर चाटने लगी, और साथ ही साथ मेरा लंड भी हिलाए जेया रही थी.

फिर मैने भाभी का मूह उपर किया और उस पर थूका, और फिर अपने लंड से उनके मूह पे लगे थूक को सॉफ करने लगा. इसमे हम दोनो को मज़ा आ रहा था. फिर भाभी ने मेरे लंड को उनके माथे पे रखा और मेरे टटटे चाटने लगी.

टटटे चाटते हुए भाभी मेरे लंड को हिलाए जेया रही थी. फिर भाभी घुटने पे बैठी, और मेरे लंड को अपने माममे के बीच में रख कर मेरा लंड आयेज-पीछे करने लगी. मुझे उनके माममे छोड़ते हुए बहुत ही मज़ा आ रहा था, और वो भी मज़े-मज़े में सिसकियाँ ले रही थी.

10 मिनिट बूब्स चुदाई के बाद मैने भाभी को कहा: अब तो मूह में लेलो. कब से तड़प रहा है ये बेचारा.

फिर भाभी नीचे आई और कुटिया बन के मेरे लंड को चूसने लगी. पहले उन्होने मेरा सूपड़ा चूसा, और उसको पूरा गीला कर दिया. फिर वो मेरे लंड को अंदर-बाहर करने लगी, और उसपे थूकने लगी. इस बार वो खुद ही मेरा लंड पूरा अंदर ले रही थी, और उसको मज़े से चूस रही थी. मैने भी भाभी का पूरा साथ दिया. फिर भाभी ने कहा-

भाभी: जैसे मेरी छूट को छोड़ा था वैसे ही मेरा मूह भी छोड़ो जान.

मैने बिना कुछ सोचे समझे उनके मूह में एक ज़ोरदार धक्का मारा, और मेरा पूरा लंड अंदर चला गया. और फिर मैने उनके गाल पे 1-2 थप्पड़ मारे, और मेरा लंड बाहर निकाला. मैने ऐसे ही 2-3 धक्के लगातार मारे, और उनके मूह की चुदाई करता रहा. फिर मैने कहा-

मे: बहुत हो गयी मूह की चुदाई. अब असली चुदाई करते है.

भाभी: तुम्हे जिसकी चुदाई करनी है करो. अब मैं तुम्हे नही रोकने वाली हू. मैं तुम्हारी सेवक बन कर तुम्हारे लंड का मज़ा लेना चाहती हू.

इसके आयेज की कहानी अगले पार्ट में. कहानी का मज़ा आया हो, तो फीडबॅक ज़रूर दे.

यह कहानी भी पड़े  मेट्रो में मिली सेक्सी भाभी की चुदाई की कहानी


error: Content is protected !!