भैया अब रूको नही दाल दो प्लीज़

हा तो दोस्तो शुरू करते है तो बात अब यहा तक बढ़ गयी थी के मई और बेहन एक दूसरे आँख नही मिला पा रहे थे. ना हम कोई बात कर रहे थे एक दूसरे से बस जितना एक दूसरे को अवाय्ड कर सकते थे हमने किया.

पर जब लंड और छूट को एक दूसरे से मिलना होता है तो मिल ही जाते है. हमे सेक्स किए हुए लग भाग 27 दिन हो गये थे. और उसके बाद जैसे की मैने बताया की हम एक दूसरे को अवाय्ड कर रहे थे.

लेकिन एक मुझे मम्मी और बेहन को रिश्तेदार के यान्हा लेकर जाना था. तो मैने अपनी बिके निकली और उनको गाड़ी पेर बैठने के लिए बोला. मम्मी ने बेहन को पहले बैठने को बोला तो वो दोनो तरफ पैर करके बैठ गयी.

उसके बाद जैसे ही मम्मी गाड़ी पेर बैठी मेरे बेहन के बूब्स मेरी पीठ पेर नरम तकिये की तरह छिपकने लग गये. जैसे ही बूब्स मेरी पीठ पेर चिपके मेरा लॅंड नाग की तरहा फेन उठाने लगा. और मुझे उस रात की याद आने लगी कैसे मैने अपनी बेहन को जमकर चूड़ा था. शयड मेरी बेहन भी ये सब ही फील कर रही होगी.

पेर मैने जैसे तैसे उन दोनो को रेलेटिवे के घर छोड़ा. और वापस घर आके बेहन के नाम पेर मूठ मार दी. फिर उसी दिन मम्मी का कॉल आया की तू बेहन को लेजा मई परसों अवँगी. तो मैने पूछा क्यों?

तो उन्होने बोला की मुझे आने नही दे रहे है तेरे मामा. तू बेहन को लेजा वो घर मे तुझे और पापा को खाना बना कर दे देगी. तो मैने ठीक है कह कर बेहन को लाने के लिए मामा के घर चला गया और बेहन को पिक कर लिया.

पर हमारी हिम्मत ही नही हो रही थी एक दूसरे से. बात करने की पर बेहन ने ही शुरुवत की के क्या हुआ आप मुझे अवाय्ड क्यों कर रहे हो, मुझसे बात नही करते, ऐसा क्यों? उसने मुझ से पूछा, मैने 2 सेकेंड रुक कर बोला की यार मुझे शर्म आ रही थी बात करने मई कैसे बात करू तुझ से.

तो बेहन ने बोला उस दिन रात को कहा गयी थी तेरी शर्म और स्माइल दी मुझे. मई भी शर्मा कर बोला की उस दिन तो आपके प्यार ने मुझे शर्म का मोका ही नही दिया था ना.

वो बोली अछा ये बात है सही है ये कुछ बातें ही हुई थी की मुझे प्यास लगने लगी. तो मैने बोला मुझे प्यास लगी है मई पानी लेलू दुकान से आप बैठो बिके पेर. तो बेहन ने बोला तो आज कल तुम अपनी प्यास पानी से बुझते हो.

मेरी हँसी छूट गयी और बोला की सब अपनी प्यास पानी से ही बुझते है. तो बोली शायद किसी ने कुछ दिन पहले किसी और चीज़ से अपनी पायस बुझाई थी. उसका मतलब था की उसके प्यारे से बूब्स बोहोट देर तक चूज़ थे मैने.

मैने भी मौके पे चक्का मार दिया हमारी ऐसे किस्मत कहा जो बार बार हमे गाढ़ा दूध पीकर प्यास बुझाने को मिले.

तो उसने बोला हा कभी कभी किस्मत डूबरा भी चान्स दे देती है. मई समझ गया की बेहन फुल मूड मे है. तो मैने झट से बोला तो फिर आज क्या पता मुझे गाढ़ी दूड पीने को मिल जाए.

बेहन ने बोला मिल सकता है पर उसके लिए शाम होने तक ही बिल्कुल प्यासा रहना पड़ेगा. मैने झट से हा कर दी और बेहन को गाड़ी पेर बैठा कर घर ले आया.

रात के खाने के बाद लगभग 11:40 के टाइम मई बेहन के रूम मई गया. पापा जब तक सू गये थे शायद. तो मई बेहन के रूम मे घुस गया पर वाहा पेर कोई भी नही थी. लेकिन 1 मिनिट के बाद किसी ने मुझे पीछे से ऐसे अपनी बाँहो मे जकड़ा. की मई वो पल आपसे बयान नही कर सकता.

बेहन ने बोला इत्टई देर कों लगता है भला. मैने बोला सबर का फल मीठा होता है ना इसलिए पूरी त्यारी करने मे बिज़ी था.

और ये बोल कर बेहन के बिल्कुल पतले पतले होंठों को काटने लगा. वो भी मेरा पूरा पूरा साथ दे रही थी. मैने किस करते करते पूछा तुम्हे मेरी याद नही आई?

तो बेहन ने बोला आप फटतू की तरह मुझ से बात ही नही कर रहे थे इसलिए नही बता पाई. और वैसे भी मौका कहा मिल रहा था.

ये बोल कर बेहन ने अपने सारे कपड़े निकल दिए. उस दिन उसने लाल रंग की पनटी और वाइट ब्रा पहन रखी थी. जो उसके सफेद रंग पर क़ायंत ढा रही थी.

मैने ब्रा के उपेर से ही बेहन के बूब्स दबाने लगा. वो सिसकारिया लेने लगी और थोड़ी देर बाद उसने मेरे कपड़े उतरे और मेरा लंड सहलाने लगी.

करीब 10 मिनिट के बाद उसने बोला भैया अब बर्दाश्त नही होता डाल दो ना. मैने बोला अभी इतनी जल्दी? तो उसने बोला की मुझ से वेट नही हो रहा है और मुझे ज़ूर ज़ूर से चाटने लगी.

मई भी अब बहुत गर्म हो गया था. मैने उसको बेड पेर लेता दिया और अपना लंबा लंड उसकी छूट पर रखा. तो वो बोली ठंडा करो इसे बहोट मॅन कर रहा है.

मैने झट से एक ही झटके मे अपना 7.3 इंच का लंड उसकी फूली हुई छूट मे डाल दिया. वो ज़ोर से चिल्लाई तो मैने उसके मूह पेर हाथ रख कर सॉरी कहा. पर उसने बोला कोई बात नही.

फिर मैने धीरे धीरे झटके देने शुरू कर दिए. वो मस्त हो चुकी थी और आआआहह अहह ओइईईई की आवाज़ें निकालने लगी.

करीब 10 मिनिट्स के बाद मैने उसकी छूट मे से लंड निकाला और उसको घोड़ी बना दिया दीवार को लगा कर. फिर उसकी छूट को छोड़ना शुरू कर दिया.

उसके कुछ देर बाद मई झड़ने वाला था तो मैने अपना लंड निकाला और सारी राबड़ी उसके पेट पेर गिरा दी और मई उसके उपेर ही लेट गया.

फिर थोड़ी देर बाद मेरा लंड फिर खड़ा हो गया. इस बार मैने उसको गांद मरवाने को बोला तो उसने माना भी नही क्या. मुझे लगा था वो माना करेगी पेर उसने नही क्या.

मैने धीरे से उसकी गांद पेर अपने लंड का टूपा लगाया और तोड़ा सा घुसा दिया. तो दर्द से रू पड़ी, उसने पहली बार गांद मे लंड लिया था.

तो मई रुक गया फिर 1 मिनिट के बाद मैने फिर एक छूटा सा झटके दिया. पेर इस बार वो करहाने लगी और बोला डियर से करो मई यही हू. फिर मैने धीरे धीरे झटके मार कर उसकी गांद को छोड़ना शुरू किया.

थोड़ी देर वो दर्द से कराह रही थी पर कुछ देर बाद वो भी मज़े लेने लगी. ऐसे ही मैने रात भर उसको छोड़ा. जब वो सुबह उठी तो मई उसके उपेर ही सोया था. उनसे मुझे उठाया और नहाने चली गयी. मई भी उसके पीछे गया और फिर हम दोनो ने साथ मिल कर नाहया. जब से लेकर आज तक हम दोनो चुदाई करते है.

सो दोस्तो बताना की बेहन भाई की ये स्टोरी आप को कैसी लगी. अगर आपको स्टोरी पसंद आई हो तो स्टोरी को शेर ज़रूर करना आपका प्यारा दोस्त अंसार.

अगर किसी अनसॅटिस्फाइड आंटी भाभी लड़की किसी को भी अपनी पायस बुझवनी हो तो मुझे मैल कर सकते है, मेरी मैल ईद नीचे मेन्षन है:

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