भाई ने देखी बेहन की चुदाई

फिर दूसरे दिन को घर में मेहमान पहले से बढ़ गये, क्यूंकी अगले दिन भाई की बारात लेकर जाना था. शबनम के कॉलेज के फ्रेंड्स भी सब आए थे. उनमे लड़कियाँ और लड़के भी थे, जो आज कल कामन है. और भी दूसरे सब मेहमान थे, जिनमे गर्ल्स और लॅडीस थी, और मोस्ट्ली सभी सेक्सी माल थी.

यू तो देल्ही में रंडियों को छोड़ा था, पर पता नही अब उनमे कुछ मज़ा नही आ रहा था. और मेरा लंड अब नयी वाली छूट की फिराक़ में था. और नयी छूट मिलने को शादी से बढ़िया माहौल हो ही नही सकता.

शबनम अपने सभी फ्रेंड्स के साथ एंजाय कर रही थी. पर वो एक लड़के के साथ ज़्यादा ही चिपक रही थी. उसका नाम जोसेफ था. मुझे कुछ अजीब सा लगा, तो मैने उसे एक कोने में ले जेया कर सीधे पूछा-

मे: शबनम, मैने देखा की तू उस लड़के के साथ कुछ ज़्यादा ही चिपक रही है. तेरा कुछ सीन है क्या उसके साथ?

शबू: नही भाई, ऐसा कुछ नही है. वी’रे जस्ट फ्रेंड्स.

मे: देख अगर कुछ है तो तू मुझे बता सकती है.

शबू: ऐसा कुछ नही है भाई. ट्रस्ट मे.

मे: ई ट्रस्ट योउ. बुत रिमेंबर की वो लड़का हमारी बिरादरी का नही है. तो फिर, तू समझ गयी होगी.

शबू: जी भाई, इतनी तो समझ है मुझमे. पर आप चिंता मत कीजिए. रिलॅक्स, और आप शादी को एंजाय करो. यहा बहुत सी लड़कियाँ आई हुई है. मेरे लिए दूसरी भाभी का इंतेज़ां भी कर दो, तो दोनो की शादी साथ में हो जाए.

मे: तू भी ना, चल जेया. एंजाय कर, मुझे काम है.

फिर दोपहर होते हुए शबू के बाकी के फ्रेंड्स जेया चुके थे. बस वो लड़का जोसेफ रुका हुआ था. मैं उन पर डोर से नज़र रखे हुए था, जिससे शबू को कोई डाउट ना हो. फिर जब शाम के टाइम सब लोग मेरे घर में आने लगे, तब शबू को मैने बाहर जाते हुए देखा. वो मोबाइल पे बात कर रही थी, और उसकी नज़र यहा-वाहा लोगों से बचते हुए निकालने का रास्ता ढूँढ रही थी.

मैने भी उसको डोर से फॉलो किया. निकालने से पहले वो हमारी चाची जिनका घर मोहल्ले के लास्ट में है, उनके पास जेया कर उनसे बात करके उसने कुछ लिया, और बाहर निकल गयी. मैं उसको डोर से फॉलो कर रहा था. वो उस चाची के घर की और तेज़ कदमो से चल रही थी. फिर मैने उसको चाची के घर का लॉक खोल कर अंदर जाते हुए देखा.

मतलब की चाची से उसने उनकी घर की के कुछ बहाना करके ली होगी. वो सब शादी में हमारे घर पे थे, तो उनका घर खाली ही था. फिर कुछ देर बाद वो लड़का अंधेरे में च्छुपते हुए उसी घर में एंटर हुआ.

मैं समझ गया की क्या कांड होने वाला था. मैं भी दबे पावं वाहा पीछे की साइड में गया, और अंदर का सीन देखने का ट्राइ करने लगा. मेरा गुड लक की एक खिड़की में थोड़ी जगह थी, और अंदर का सीन मुझे दिखने लगा.

मैने अंदर झाँक के देखा तो अंदर वो उसी लड़के के साथ चुम्मा-छाती कर रही थी, और वो लड़का उसकी सलवार के अंदर हाथ डाल के उसके बूब्स भी दबा रहा था. और शबनम कोई अपोज़ नही कर रही थी.

पहले मॅन हुआ की गाते को नॉक करू, पर फिर सोचा की देखते है की मेरी छ्होटी बेहन ने किस हद तक उसको छ्छूट दे रखी थी. मतलब की उनका रिलेशन्षिप कों से लेवेल पे चल रहा था, वो मुझे देखना था.

फिर उस लड़के ने शबनम के कान में कुछ कहा, तो शबनम मुस्कुराते हुए उसके सामने घुटनो के बाल बैठ गयी. उस लड़के ने जब अपना लंड बाहर निकाला तो शबनम ने बिना कोई झीजक उसको अपने होंठो के बीच क़ैद कर लिया, और किसी रांड़ की तरह उसके लंड को चूसने लगी.

ये देख कर मेरा भी लंड खड़ा हो गया. मुझे और भी जानना था की अब आयेज क्या होगा? क्या शबनम ने उसको अपनी छूट दे रखी थी क्या? और वो जानने के लिए मुझे ज़्यादा इंतेज़ार नही करना पड़ा. उस लड़के ने फिरसे उसको कुछ कहा, तो फिरसे शबनम मुस्कुराने लगी, और स्माइल के साथ वो घोड़ी बन गयी.

उस लड़के ने अपनी जेब से कॉंडम निकाल कर अपने लंड पे चढ़ाया, और एक ही झटके में उसको शबनम की छूट में घुसा दिया. ये देख कर मुझे लगा की, भाई ये शबनम की पहली चुदाई नही थी. जिस आसानी से उसने अपनी छूट में लंड लिया था, ये लड़की बहुत बार चुड चुकी थी.

मुझे तोड़ा अछा फील हुआ की मैने उनको रोका नही, क्यूंकी अगर मैं उनको चुदाई से पहले रोकता, तो मैं जान ही नही पाता की शबनम ने उसके पहले भी लंड ले रखे थे (अब इसी लड़के का या किसी और का, वो तो बस वही जाने). अगर मैं उन्हे अभी रोकता तो उससे कुछ फराक पड़ने वाला तो था नही, क्यूंकी ये उसकी पहली चुदाई नही थी.

ये सोचते हुए, और वाहा शबनम को चूड़ते हुए देख, मेरा हाथ भी कब अपने लंड को हिलने लगा, मुझे पता ही नही चला. फिर थोड़ी देर मैं ही उनका प्रोग्राम ख़तम हो गया. अब उस लड़के का स्टॅमिना ही उतना था, या फिर किसी के घर में आने का दर्र, पर उस लड़के ने अपना लंड बाहर निकाल दिया था.

उन दोनो में कुछ बाहेस-बाज़ी होने लगी. वो शबू को कुछ कह रहा था, पर शबनम माना किए जेया रही थी. फिर उस लड़के ने उसको कुछ समझाया, तो फिरसे शबनम जैसे मान गयी, और वापस उसके सामने घुटनो के बाल बैठ गयी. मैं समझ गया की बाहेस-बाज़ी किसकी चल रही थी.

शबू ने घुटनो पे बैठ कर उसके लंड से कॉंडम को हटाया, और उस लड़के के सामने देखते हुए लंड को अपने मूह में लेकर चूसने लगी. उस लड़के की आँखें बाँध थी, वो शायद क्लाइमॅक्स पे था. वो अपने हाथो को उसके सिर के पीछे रख कर उसे अपने लंड के उपर दबा रहा था, और शबनम भी उसका साथ देते हुए लंड चूस रही थी.

कुछ देर बाद वो लड़का अकड़ने लगा. मुझे लगा की उसका पानी निकालने वाला था. उसने शबनम के फेस को अपने लंड पे दबा के रखा था. शबनम हाथ पैर मारने लगी, उसके मूह से गू-गू की आवाज़े आने लगी, पर उस लड़के ने तवज्जो नही दिया. इसलिए कोई ऑप्षन ना होने की वजह से शबनम वो सारा पानी निगल गयी.

वो उस लड़के को गुस्से की नज़र से देखने लगी, पर वो हरामी मुस्कुरा रहा था. इसके बाद भी वो अपने मुरझाए हुए लंड को शबनम के मूह में अंदर-बाहर करने लगा.

मुझे ताज्जुब इस बात का हो रहा था, की इस लड़के ने शबनम पे क्या जादू किया था, की वो उसकी हर एक बात मान रही थी. और शादी से पहले चुदाई से लेकर मूह में लंड लेकर पानी पीने तक का कार्यक्रम उसने कर रखा था. मुझे तो लगा की उसकी गांद भी अभी तक वर्जिन हो तो गनीमत. और आज के इस सीन के बाद शबनम को लेकर मेरी सोच बदल गयी. अब मेरी नज़रों में वो मेरी सिस्टर के बदले एक चुदसी लड़की बन के रह गयी.

वो दोनो अपने कपड़े वग़ैरह सब सही कर के वापस शादी में आ गये, और उनके पहले मैं वाहा से निकल गया. शादी के इन दो दिन में मैने उतने सर्प्राइज़ देखे जीतने मैने शायद ही अपनी पूरी लाइफ में देखे होंगे. पर मुझे क्या पता था की सबसे बड़ा सर्प्राइज़ तो अभी मेरा वेट कर रहा था.

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