भाई ने देखा बहन और उसके ब्फ का रोमॅन्स

मैने आप सभी की फीडबॅक और कॉमेंट्स पढ़े. कॉमेंट सेक्षन में आप सभी का प्यार देख के मुझे बहुत अछा लगा. आप लोगों की शिकायत है की पार्ट्स बहुत दिन बाद आ रहे है, और मैं भी आपके लिए जल्दी-जल्दी मेरी कहानी बताने की कोशिश करूँगा.

इस पार्ट को पढ़ने से पहले पिछले पार्ट्स ज़रूर पढ़े. वरना आपको मज़ा नही आएगा. इस कहानी में आयेज पढ़े:-

मनु दीदी ने मुझे गुस्से में बहुत ही ज़ोर से थप्पड़ मारा, और मैं एक-दूं से सुन्न रह गया. दीदी थप्पड़ मार कर बहुत तेज़ रोने लगी. वो अपने मूह पे हाथ रख के रोए जेया रही थी, ताकि मम्मी-पापा को रूणे की आवाज़ ना सुन जाए.

मुझे मेरी ग़लती का एहसास जल्दी ही हो गया, पर दीदी से किस मूह से माफी माँगता. तो मैं चुप-छाप दूसरी तरफ मूह करके लेट गया. दीदी भी बिना कुछ बोले लेट गयी. रात के 2 बाज चुके थे. ना मुझे नींद आ रही थी, ना ही दीदी को. हम दोनो जानते थे की हम दोनो जाग रहे थे.

अगले दिन मैं सुबह कॉलेज चला गया, पर दीदी नही गयी. ऐसे ही 3 दिन हो गये थे दीदी को कॉलेज गये. वो बस घर पे ही अपने कमरे में बैठी रहती, और मम्मी की थोड़ी बहुत हेल्प करा देती. इन 3 दीनो तक ना दीदी ने मुझसे बात की, ना मेरी तरफ देखा. मुझसे अब रहा नही गया और रात को मैने जब दीदी रूम में आई, तो उनसे माफी माँगी. पर उन्होने मुझे इग्नोर मार दिया.

अगले दिन वो खुद कॉलेज के लिए रेडी हो गयी. मैं खुश था की दीदी वापस पहले जैसे नॉर्मल हो गयी थी. उनके चेहरे के भाव भी हमेशा की तरह नॉर्मल थे. कॉलेज में एक हमेशा जैसे रेग्युलर दे चल रहा था. मेरा 3र्ड लेक्चर ख़तम हुआ ही था की अननोन नंबर से मेरे पास कॉल आया. मैने कॉल उठाया तो वो नंबर मनु दीदी की बेस्टफ्र्ीएंड प्रीत का था.

प्रीत: हेलो राहुल, कहा है तू? कॉलेज में है क्या?

मैं: हा प्रीत (दीदी की सभी फ्रेंड्स को मैं उनके नाम से ही बुलाता था) कॉलेज ही हू. कुछ काम था अचानक कॉल किया?

प्रीत: यार राहुल तू जल्दी से ना हमारे कॉमर्स ब्लॉक में आजा. मनु ने रो-रो के अपना बुरा हाल कर रखा है.

मैं: ओक मैं अभी आता हू.

कॉल रख के मैं जल्दी से कॉमर्स ब्लॉक में गया. अब मैं प्रीत से ये पूछना भूल गया की कॉमर्स ब्लॉक में कहा पे थी दीदी. तो मैं क्लासरूम्स में जाके ढूँढने लगा. रूम्स बिल्कुल खाली थे. बस एक दो क्लासस ही थी जहा टीचर थे, बाकी ब्लॉक खाली था.

खाली रूम्स में किसी में बाय्स ग्रूप बैठा था किसी में कपल्स बैठे थे. मैं 3र्ड फ्लोर पे गया. वाहा रूम चेक किए तो एक रूम में दीदी समर्थ (दीदी का बाय्फ्रेंड) के साथ लास्ट कॉर्नर वाले बेंच पे बैठी थी, और वो दोनो किस कर रहे थे. ये देख के मुझे एहसास हुआ की दीदी को कितना बुरा लगा होगा. उनको इस हालत में देख के मेरा दिल ही टूट गया.

मैं जैसे ही वापस जेया रहा था, तभी दीदी ने अपने ब्फ का हाथ अपने बूब्स में रखा, और खुद अपना हाथ उसके लंड पे रख के उसे पकड़ लिया. उसके बाद समर्थ जोश में आ गया, और ज़ोर-ज़ोर से दीदी के बूब्स त-शर्ट के अंदर से दबाने लगा.

ये सब देख के मुझे गुस्सा आने लगा, पर मैं खुद को कंट्रोल कर रहा था. तभी दीदी ने अपना हाथ उसकी जीन्स में डाल के उसके लंड को बाहर निकल लिया, और ज़ोर-ज़ोर से हिलने लगी. अब मैं और नही देख सकता था. मेरा गुस्सा बाहर आ गया. दीदी अपने ब्फ का लंड मूह में लेने ही वाली थी, की मैने दीदी को धक्का देके हटाया और वही दीदी के सामने उनके ब्फ धमकी दी की आज के बाद मेरी बेहन के आस-पास दिखे भी ना.

फिर दीदी का हाथ पकड़ के वाहा से ले गया. समर्थ को धमकी देते देख दीदी भी मुझसे दर्र गयी. मैने दीदी को अकेले में ले-जेया कर बहुत दांता, और ज़ोर-ज़ोर से दीदी पे चिल्लाने लगा.

मैं: आप ये कर क्या रही थी? कुछ शरम वग़ैरा है या सब निकाल दी?

मनु: हा निकाल दी सारी शरम. जब खुद का भाई ही अपनी बेहन के बारे में इतना ग़लत सोच सकता है, तो कैसी शरम करनी?

मैं: मैने क्या ग़लत सोचा आपके बारे में?

मनु: क्यूँ भूल गया उस दिन तूने खुद ही बोला था ना की मैं भी अपने ब्फ का लंड पकड़ती होंगी. तो जब आज पकड़ रही थी, तो तुझे क्या दिक्कत हो रही है?

मैं: अछा तो आप ये सब इसलिए कर रहे हो क्यूंकी मैने बोला? तो जाओ एक काम करो, सेक्स भी कर लो.

मनु: ठीक है, कर लूँगी. और कुछ जो करना है? एक काम कर रंडी बना दे अपनी बेहन को.

मैं: ये आप कैसी बातें कर रहे हो दीदी? मैं आपसे बहुत प्यार करता हू. और मैं आपके बारे में कभी ग़लत नही सोच सकता. और आज जो देखा वो तो मैं कभी नही देख पौगा.

मनु: अछा तू प्यार करता है, तो क्या मैं नही करती? जब तू मुझे नही देख पाया, और कैसे गुस्से से लाल हो गया, तो मैं कैसे तुझे टानू के साथ देख सकती हू? मुझे गुस्सा नही आएगा क्या?

मैं: ठीक है दीदी, ई’म सॉरी. आज से कभी कुछ ग़लत नही बोलूँगा, और आप उस समर्थ से डोर रहना.

ऐसे ही बात करते-करते हम घर आ गये. घर आके भी हमने बहुत बातें की. आज पहली बार दिल को एहसास हुआ की मैं अपनी बेहन से प्यार करने लगा था. प्यार, जो एक लड़का एक लड़की से करता है. जो पति अपनी पत्नी से करता है.

मैं आज बहुत खुश था. जो एहसास आज मुझे हो रहा था, मुझे लगा की शायद दीदी भी मुझसे प्यार करने लगी थी. जैसे दीदी मुझे और टानू को देख के गुस्सा हुई, उससे मुझे तो यही लगा. पर मैं ग़लत भी हो सकता था. अब मुझे यही जानना था की क्या दीदी भी मुझसे प्यार करती थी. कुछ दिन बाद 24 डिसेंबर को मेरा जनमदिन था और आज 21 डेक थी. मुझे लगा यही सही दिन रहेगा दीदी के दिल में क्या था जानने के लिए.

अगले पार्ट में पढ़िए क्या दीदी मुझसे प्यार करती थी या नही. इस कहानी को पढ़ के कॉमेंट सेक्षन में अपना फीडबॅक और कॉमेंट ज़रूर बताए. कहानी लंबी है पर आपको पसंद आएगी. बहुत कहानियाँ होती है जहा डाइरेक्ट सेक्स स्टार्ट हो जाता है, और कहानी शुरू होने से पहले ही ख़तम हो जाती है. ये कहानी आपको ज़रूर पसंद आएगी.

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