भाई ने बहन को चोद कर उसकी चूत शांत की

ही फ्रेंड्स, मेरी पहले की कहानी आपने पढ़ी ही होगी. ये कहानी उससे थोड़ी अलग है. क्यूंकी इसमे मैं अपनी बड़ी बेहन को छोड़ता हू.

तो सब से पहले बता डू की मेरी फॅमिली में कों-कों है. मेरी फॅमिली में मैं, पापा, मेरी मा, मेरी बड़ी बेहन और एक छ्होटी बेहन भी है. ये कहानी मेरी बड़ी बेहन के साथ की है.

मेरी बड़ी बेहन का नामे “स्नेहा“ है. बाकी के लोगों का बाद में बतौँगा. अब सीधा कहानी पे आता हू.

ये कहानी आज से कुछ साल पहले की है. आप जानते ही है की हमे पैसों की कमी नही है. तो हमारे घर में मेरी बेहन पे ज़्यादा रोक-टोक नही थी. उपर से वो सब से बड़ी थी, और पापा की लाडली भी. तो कोई उसको कुछ नही बोलता था. वैसे भी हम गुजराती लोगों के घर में लड़की को इतनी रोक-टोक नही होती.

इन्ही सब की वजह से वो बिगड़ गयी थी. और वो थोड़ी ग़ुस्सेल भी थी. वो रात में देर तक बाहर रहती थी. काफ़ी पैसे खर्च करती और लड़कों के साथ घूमना फिरना करती थी.

उसको अपने कॉलेज टाइम से एक लड़के से प्यार था. उस लड़के का नामे रवि था, और वो दोनो गफ़-ब्फ थे. मैने दोनो की फोटो साथ में देखी थी. और वो घर पर भी आ चुका था. उसने घर पर ये बोला था की वो उसका फ्रेंड था. पर सब को पता था दोनो के बीच क्या था. जब वो एक बार घर आया था, तब उसने मेरे ही घर पे मेरी बेहन को छोड़ा भी था.

मैने वो नज़ारा अपनी आँखों से देखा था. वो मेरी बेहन को छोड़ रहा था, और वो साली भी छुड़वा रही थी, जैसे कोई रंडी हो. मैने तभी सोचा था की इस साली को कभी तो छोड़ूँगा मैं भी. क्यूंकी वो मुझसे सीधे मूह बात भी नही करती थी, और बड़े होने का नाजायज़ फ़ायदा उठती थी.

तो हुआ यू, की रवि ने मेरी बेहन को धोखा देके किसी और से शादी कर ली. इस बात की वजह से वो एक-दूं कबीर सिंग के जैसे रहनी लगी. ये देख के पापा को लगा की अब उसकी शादी करा देनी चाहिए. ये बात जब उसको पता चली, तो वो सब पे चिल्लाने लगी, और माना करने लगी की उसको शादी-वादी नही करनी. जब उसकी ये बात नही चली, तो वो घर से बाहर चली गयी.

जब वो रात को घर पर आई, तब बहुत लेट हो चुका था. वो थोड़े नशे में थी. मैं उसी के इंतेज़ार में था क्यूंकी पापा बाहर गये थे किसी काम से 2-3 दिन के लिए. और मुझे बोल के गये थे की “जब तक तेरी बेहन ना आए, तब तक सोना नही”.

मेरी छ्होटी बेहन उसके कमरे में सो गयी थी. और मा को मैने भेज दिया था सोने के लिए.

मे: आइए महारानी आइए.

स्नेहा: बेबी तुम महारानी नही महा रंडी कहो रंडी.

मे: रंडी? तुम क्या बोल रही हो बेहन?

स्नेहा: बहनचोड़, आज बेबी तुम बहनचोड़ बनॉगे? क्या बात है आज रॉल्प्ले करना है मेरा बच्चा?

मैं समझ गया था, की वो साली नशे में थी. तो मैं उसको पकड़ के उसके कमरे में ले जाने लगा, और उससे कहा-

मे: जब चढ़ जाती है तो इतनी पीटी क्यूँ हो की होश ना रहे? और पता नही गुजरात में कहा से तुझे ये दारू मिल गयी.

स्नेहा: पीनी तो नही थी इतनी मी डियर डॅडी. पर क्या करू, वो बुद्धा बोलता है की वो मेरी शादी करवा देगा किसी से.

मे: वो पापा है तेरे.

स्नेहा: है, पर आज रात तो तुम ही हो जो भी हो मी डॅडी. फक मे टुनाइट.

इतना बोल के वो मुझे किस करने लगी. मैं उससे डोर हटा, और उसको जल्दी से उसके कमरे तक पहुँचा के पलंग पे धक्का दे दिया.

स्नेहा: एस डॅडी, मी डियर, फक मे. प्लीज़ रवि डॉन’त गो.

मेरी बेहन इतने नशे में थी की उसको मैं रवि उसका बाय्फ्रेंड लग रहा था. वो मुझे जाने ही नही दे रही थी, और सेक्स करने की कोशिश कर रही थी. फिर मैने भी मौके का फ़ायदा ले लिया, और सोचा की आज बजा डालता हू इसका बाजा.

मे ( उसके पास जाते हुए ): स्नेहा, क्या इतना प्यार करती हो मुझे? तो अपने बाप को छ्चोढ़ क्यूँ नही देती?

स्नेहा: बेबी पैसा भी तो होना चाहिए ना. बाद में तुम तो जानते ही हो की मैं पैसों के बगैर नही रह सकती.

मे: रंडी है तू.

मैं उसको किस करने लगा. वो भी उत्तेजित होके मेरा साथ देने लगी. मुझे पागलों की तरह चूमने-चाटने लगी. उसने जोश-जोश में मेरी त-शर्ट फाड़ दी, और डोर फेंक दी. मैने भी वही किया. उसने जो शर्ट पहना था उसको मैने उसके दोनो चूचों वाले भाग से चूचों को ज़ोर से पकड़ा, और फाड़ डाला.

चूचों को मैने ज़्यादा ही ज़ोर से दबा दिया था, जिससे उसकी आ निकल गयी. मैने शर्ट अलग होते ही देखा की उसने ब्रा नही पहनी थी. मैं तो उसके चूचियाँ देखता रह गया. क्या बड़ी-बड़ी चूचियाँ थी भाई.

मैं अब उसकी चूचियों को चूसने लगा, उन्हे मसालने लगा. मैने चूचियाँ तो बहुत देखी थी, और चूसी भी थी, पर जो मज़ा आज आ रहा था, वो पहले नही मिला. बेहन की चूचियाँ चूसने में जो मज़ा मिलता है, वो मैं बता नही सकता आपको. मुझे परम सुख की प्राप्ति हुई थी उस दिन.

स्नेहा: लोड, पहली बार देखा था, तब भी ऐसे नही चूसा था तूने. आज क्या हुआ मदारचोड़? जो यू जानवर के जैसे चूज़ जेया रहा है.

मे: बस कर छिनाल, रंडी ( और उससे चूमता-चाट-ता और उसकी चूचियों को रगड़ता मसलता गया).

ऐसे ही थोड़ी देर चुम्मा-छाती और चूचों से खेलने के बाद मैं आपनी पंत उतारने लगा. उसने भी अपनी पंत उतार दी. अब हम दोनो सिर्फ़ चड्डी में थे.

वो नीचे बैठते हुए बोली: आज मैं मेरे छोड़ू की लुल्ली चूसूंगई. तुझे पसंद है ना ये?

कहते हुए मेरी चड्डी निकाल के मेरे लोड को चूसने लगी. वाह, क्या लोड्‍ा चूस रही थी साली रांड़, मज़ा ही आ गया. मेरे मूह से आ उहह की आवाज़े निकालने लगी. मेरे लंड को चूस्टे-चूस्टे वो बोली-

स्नेहा: मेरे राजा, आज तो तेरा लोड्‍ा पहले से ज़्यादा लंबा और मोटा लग रहा है.

मैने उसको खड़ा किया और बेड पे ले जाते हुए कहा: आज तुझे देख के अलग ही प्यार आ रहा है मेरी जान. इसलिए ये भी आज जोश में है.

स्नेहा ( वो मेरी इस बात पर हस्सी और बोली ): क्यूँ, अब मज़ा आ रहा है तो और चूस लेती हू.

मे: चुस्वा ही रहा हू मेरी जान. चल 69 में आजा. मैं भी तेरी चाट देता हू. तुझे भी तो मज़ा मिले.

स्नेहा: पर तुझे तो छूट चाटना पसंद नही है ना?

मे: आज तेरे लिए कुछ भी. आख़िर तेरे जैसी रांड़ छोड़ने में जो मज़ा मुझे मिल रहा है, वो मैं तुझे भी देना चाहता हू.

फिर हम 69 में आए. मैने उसकी पनटी को फाड़ के फेंका, और क्या बतौ मैं आपको. उसकी छूट एक-दूं सॉफ सूत्री थी. एक भी झाँत का बाल नही था छूट पे. मैं तो देखता ही रह गया. अब उसने मेरा लंड चूसना चालू कर दिया.

मैने भी उसकी छूट चाटना चालू किया. ऐसे हमने थोड़ी देर किया, तो हम दोनो ही झाड़ गये. मैने अपना पानी उसके मूह में निकाला जो उसको पीना नही था, लेकिन उसको मैने पीला दिया. मैने भी फिर उसका पानी पिया.

अब मैं उठा, और उसको डॉगी स्टाइल में सेट किया, और मैं बेड के किनारे खड़ा हो गया. मैं उसकी गांद पे एक हाथ फेर रहा था, और दूसरे हाथ से अपने लंड को तैयार कर रहा था. मैं कभी उसकी गांद तो कभी छूट में उंगली डाल रहा था. 5 मिनिट में मेरा फिरसे खड़ा हो गया, और मैने उससे पूछा.

मे: मेरी रंडी, छोड़ू ना तुझे?

स्नेहा: हा अब करो, डालो जल्दी डालो

मे: तो एलए.

इतना कह कर मैने एक ज़ोरदार धक्का मारा, और मेरा लंड एक ही बार में रंडी की छूट में घुस गया. मैं साथ में उसकी गांद पे थप्पड़ भी मारने लगा. बार-बार में उसको ज़ोर के धक्के देता, और उसकी गांद पे थप्पड़ लगा देता.

इस तरह के वार से वो चिल्ला उठी आहह आ. उसके चिल्लाने से मैं और खुश हो गया की मैं उसके जैसी रंडी की भी चीख निकाल सकता था. फिर मैने और ज़ोर से थप्पड़ मारे. अब मैं तेज़-तेज़ धक्के मारने लगा. वो भी दर्द से चिल्ला रही थी.

स्नेहा: आ.. आ.. आराम से करो, आराम से. प्लीज़ रवि डॉन’त, एस यॅ, फक, फक ऊ. मा चुड गयी रे, और नही, और ज़ोर से नही मेरी जान.

मे: मज़ा ले रंडी. आज तो तुझे जन्नत दिखता हू. बेहन की लोदी, तेरी मा भी कभी ऐसे नही चूड़ी होगी, जैसे आज मैं तुझे छोड़ूँगा.

स्नेहा: एस एस प्लीज़, चालू रख ऐसे ही. ऐसे ही छोड़. फाड़ दे मेरी छूट. आ आ उुउऊहह.

उसकी ऐसी मादक आवाज़े मुझे और भी मज़ा दे रही थी. फिर थोड़ी देर बाद मैं झाड़ गया. मैने अपना सारा माल उसकी छूट में छ्चोढ़ दिया. फिर मैने उसकी गांद मारी.

वो भी क्या खूब मज़ा आया. गांद मरवाते समय उसने अपने मूह से बहुत गालियाँ दी मुझे, और मेरे 7 इंच के लंड को भी. मैने उसको उस रात 3 बार छोड़ा. एक बार छूट, और दो बार लगातार उसकी गांद को.

उसकी गांद थोड़ी सूजा भी दी थी मैने चुदाई से. फिर मैं उससे उसके हाल पे छ्चोढ़ के अपने रूम में चला गया. लेकिन अब मेरी फटत रही थी, क्यूंकी मैने उसको छोड़ा था. अब पता नही वो कल मेरे साथ क्या करेगी जब उसको होश आएगा. ये सब सोचते-सोचते मैं सो गया मेरे रूम में जाके.

अगले दिन सुबा-सुबा वो मेरे कमरे में आई. मैं सो रहा था. वो मेरे रूम में घुसी, और डोर को लॉक करके मेरे पे छीलाने लगी.

स्नेहा: मदारचोड़ तूने कल मेरे साथ क्या किया?

मे ( भोला बनते हुए): मैने कुछ नही किया. तुमने ही मुझे उकसाया था.

स्नेहा: बेहन के टक्के, मैने उकसाया था? मुझे सब याद है कैसे तूने मेरी मारी है वो लोड.

मे: मैने कुछ नही किया, झूठा इल्ज़ाम मत लगाओ. कहा मारी है मैने दिखाओ?

स्नेहा गुस्से से बोली: पूरी रात मेरी बजाई, और अब बोल रहा है कहा मारी.

इतना कह कर उसने अपनी त-शर्ट उपर करके उसके चूचों को दिखाते हुए बोली-

स्नेहा: देख मदारचोड़, तेरी हरकत.

( उसके चूचों पे मेरे दांतो के निशान थे. मानो जैसे किसी कुत्ते ने काटा हो, वो भी बुरी तरह से. एक साइड की चूची से तो खून भी निकला हुआ था ज़रा सा )

मे ( मॅन में हेस्ट हुए ): तो मैं क्या करू, ये है ही इतनी प्यारी की बस खा जाने को मॅन करे.

( तो वो और भी गुस्से से बोली. )

स्नेहा: तेरी मा की छूट, नंगी रांड़ के लोड, ब.स.द.क. लोड. और ये भी खाने की चीज़ है? इसको भी देख के तेरा खाने का मॅन करता है क्या?

इतना कह कर उसने कमीज़ उतार के मेरी तरफ अपनी गांद कर दी. उसकी गांद पूरी लाल हो गयी थी और थोड़ी सूजी हुई भी थी. मैने सोचा अब बात कटम करनी चाहिए, वरना मुस्किल हो जाएगी.

मे: माफ़ कर्दे बेहन. मैं बहक गया था.

मैने काफ़ी पॉर्न देख लिए थे कल, और फिर तेरी बातों से मैं बहक गया था, माफ़ कर्दे.

मे: तेरा छ्होटा भाई हू. मुझसे भूल हो गयी. आयेज से तेरी तरफ आँख भी नही उतौँगा, बस एक बार जाने दे. प्लीज़ स्नेहा प्लीज़.

स्नेहा: तुझपे तो मैं पोलीस केस करूँगी.

मैने सोचा था ये मा को या फिर पापा को बोलने की धमकी देगी. लेकिन ये तो सीधा पोलीस तक पहुँच गयी.

मे: देख बेहन, इन सब में हमारी बदनामी होगी. कोई तुझसे शादी नही करेगा. कोई मुझे अपनी बेटी नही देगा. एक बार माफ़ कर्दे प्लीज़. तेरे पैरों में गिर के रहूँगा. बच्चा समझ के जाने दे.

मेरे काफ़ी लंबी बहस के बाद वो बिना कुछ बोले ही चली गयी मेरे रूम से, और फिर इस बारे में ना मैने ना उसने किसी से बात की. और उसने मुझसे बात करना भी छ्चोढ़ दिया था.

फिर पापा ने इसके 15 बाद उसकी शादी एक हमसे भी थोड़े अमीर लड़के से फिक्स कर दी.

मेरी बेहन ने भी ज़्यादा नखरे नही किए, क्यूंकी उसको अमीर बन के रहना, और पैसों से सबसे ज़्यादा प्यार था. और उसका वो बाय्फ्रेंड नही वापस आने वाला था. ना की उसके पास इतना पैसा था.

शादी के फिक्स होते ही अगले 21 दिन बाद बेहन की शादी थी. फिर मैने उसको फिरसे प्लान करके उसकी शादी वाले दिन छोड़ा.

कहानी कैसी लगी वो ज़रूर बताईएएगा. क्या अछा लगा, क्या नही लगा, वो भी.

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